UP Board Class 10 Geography Chapter 6. विनिर्माण उद्योग Hindi Medium Notes - PDF
अध्याय 6: विनिर्माण उद्योग (Manufacturing Industries)
विनिर्माण उद्योग वे उद्योग हैं जो कच्चे माल को तैयार माल में बदलते हैं। ये अर्थव्यवस्था के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये:
- कृषि पर निर्भरता कम करते हैं।
- रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।
- आय में समानता लाने में मदद करते हैं।
- निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा अर्जित करते हैं।
उद्योगों का वर्गीकरण
उद्योगों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. कच्चे माल के स्रोत के आधार पर
- कृषि आधारित: कपास, ऊन, जूट, रबड़, चीनी आदि।
- खनिज आधारित: लोहा-इस्पात, सीमेंट, मशीनें, पेट्रो-रसायन आदि।
2. उनकी भूमिका के आधार पर
- आधारभूत उद्योग: ये अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल supplied करते हैं (जैसे: लोहा-इस्पात, पेट्रो-रसायन)।
- उपभोक्ता उद्योग: ये सीधे उपभोक्ताओं के लिए सामान तैयार करते हैं (जैसे: चीनी, कागज, इलेक्ट्रॉनिक्स)।
3. पूंजी निवेश के आधार पर
- छोटे पैमाने के उद्योग: जहाँ पूंजी निवेश 1 करोड़ रुपये तक हो।
- बड़े पैमाने के उद्योग: जहाँ पूंजी निवेश 1 करोड़ रुपये से अधिक हो।
4. स्वामित्व के आधार पर
- सार्वजनिक क्षेत्र: सरकार के स्वामित्व वाले (जैसे: BHEL, SAIL)।
- निजी क्षेत्र: व्यक्तियों या कंपनियों के स्वामित्व वाले।
- संयुक्त क्षेत्र: सरकार और निजी क्षेत्र का साझा उद्यम।
- सहकारी क्षेत्र: उत्पादकों/कर्मचारियों के स्वामित्व वाले (जैसे: अमूल)।
प्रमुख उद्योग
1. लौह-इस्पात उद्योग
- यह एक आधारभूत उद्योग है क्योंकि अन्य सभी भारी उद्योग इस पर निर्भर हैं।
- कच्चा माल: लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर, मैंगनीज।
- इस्पात संयंत्र चुंबकीय लौह अयस्क (जिसमें लोहा अधिक मात्रा में हो) के पास स्थित होते हैं।
- प्रमुख संयंत्र:
- झारखंड: जमशेदपुर (TISCO - निजी, IISCO - सार्वजनिक)
- पश्चिम बंगाल: दुर्गापुर, बर्नपुर
- ओडिशा: राउरकेला
- छत्तीसगढ़: भिलाई
- तेलंगाना: विशाखापत्तनम
- कर्नाटक: भद्रावती
- भारत विश्व में बड़ा इस्पात उत्पादक है, फिर भी हमें high-grade steel का आयात करना पड़ता है।
2. एल्युमिनियम प्रगलन (Aluminium Smelting)
- एल्युमिनियम हल्का, संक्षारण-रोधी, विद्युत का good conductor और सुंदर मिश्रधातु बनाने योग्य होता है।
- कच्चा माल: बॉक्साइट (Bauxite), जिससे अल्यूमिना (Alumina) निकाली जाती है।
- बॉक्साइट के भंडार ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र में हैं।
- प्रमुख संयंत्र: ओडिशा (नालको), पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में।
3. रसायन उद्योग
- तेजी से बढ़ने वाला और विविधतापूर्ण उद्योग।
- दो मुख्य वर्ग:
- कार्बनिक रसायन: पेट्रो-रसायन (प्लास्टिक, रसायनिक उर्वरक, सिंथेटिक रबर आदि)।
- अकार्बनिक रसायन: सल्फ्यूरिक अम्ल, नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश आदि।
- भारत एशिया में रसायन का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
4. उर्वरक उद्योग
- हरित क्रांति के बाद इसका तेजी से विकास हुआ।
- नाइट्रोजनी, फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक बनते हैं।
- संयंत्र: गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान आदि में फैले हैं।
5. सीमेंट उद्योग
- निर्माण उद्योग के लिए आवश्यक (इमारतें, सड़कें, बांध, पुल आदि)।
- कच्चा माल: चूना पत्थर, सिलिका, एल्युमिना, जिप्सम।
- कोयला और बिजली की आवश्यकता होती है।
- प्रमुख राज्य: आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश।
- भारत सीमेंट का एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है।
6. वाहन उद्योग
- दोपहिया, तिपहिया, कार, ट्रक, बस, ट्रैक्टर आदि का निर्माण।
- दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर जैसे शहरों में केंद्रित।
- यह उद्योग लौह-इस्पात, मशीन, ग्लास, रबर, प्लास्टिक जैसे उद्योगों को बढ़ावा देता है।
7. सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग
- बंगलुरु (सिलिकॉन वैली), मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोच्चि, कोलकाता आदि में केंद्रित।
- 18 Software Technology Parks (STPs) स्थापित किए गए हैं।
- भारत software development और दूरसंचार में विश्व में अग्रणी है।
8. कपड़ा उद्योग
- भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका विशेष स्थान है (सबसे पुराना उद्योग, सबसे अधिक रोजगार देने वाला)।
- कपास सूती वस्त्र, ऊनी, रेशमी, जूट और सिंथेटिक कपड़ा मिलें शामिल हैं।
- सूती वस्त्र उद्योग:
- महाराष्ट्र (मुंबई, सोलापुर, कोल्हापुर), गुजरात (अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा), तमिलनाडु (कोयंबटूर, मदुरै), उत्तर प्रदेश (कानपुर), पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में केंद्रित।
- जूट उद्योग:
- पश्चिम बंगाल (हुगली नदी के किनारे), ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में।
- भारत जूट का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
- चीनी उद्योग:
- भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
- उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात में केंद्रित।
उद्योगों का अवस्थान (Location of Industries)
उद्योग स्थापित करने के लिए स्थान का चुनाव कई कारकों पर निर्भर करता है:
- कच्चे माल की उपलब्धता
- शक्ति (बिजली, कोयला, पेट्रोल) के स्रोत
- श्रम की उपलब्धता
- पूंजी
- परिवहन की सुविधा
- बाजार की निकटता
- सरकारी नीतियाँ
उद्योगों द्वारा पर्यावरण प्रदूषण (Industrial Pollution)
उद्योग चार प्रकार का प्रदूषण फैलाते हैं:
- वायु प्रदूषण: धुआँ, हानिकारक गैसें (कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड) छोड़ना।
- जल प्रदूषण: कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट (waste) और रसायन नदियों में मिलना।
- थल प्रदूषण: कचरा, राख, गंदगी का जमीन पर जमा होना।
- ध्वनि प्रदूषण: मशीनों, जेनरेटरों आदि से होने वाला शोर।
प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
- जल का पुन:चक्रण (Recycling) और पुन:उपयोग।
- जल का उपचार (Treatment) करके ही नदियों में छोड़ना।
- धुआँ रहित ईंधन (smokeless fuels) का उपयोग।
- चिमनियों में फिल्टर (Filters) लगाना।
- मशीनों में शोर कम करने वाले उपकरण लगाना।
- अधिक से अधिक पेड़ लगाना (वनीकरण)।
सतत् विकास (Sustainable Development)
उद्योगों को इस तरह से विकसित करना कि वे वर्तमान की जरूरतों को पूरा करें, बिना भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता किए। इसके लिए पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) तकनीकों को अपनाना जरूरी है।