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UP Board Class 11 History (1. समय की शुरुआत से) solution PDF

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UP Board Class 11 History (1. समय की शुरुआत से) solution

UP Board Class 11 History 1. समय की शुरुआत से Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 11 History

विश्व इतिहास के कुछ विषय

पाठ - 1: समय की शुरुआत से

प्रश्न 1. नीचे दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था को दर्शाने वाले आरेख को देखिए। क्या आप उन निवेशों की सूची दे सकते हैं, जो औज़ारों के निर्माण में सहायक हुए? औज़ारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला?

उत्तर: सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था में, किसी बॉक्स की ओर इंगित तीर उन प्रभावों को बताते हैं जिनसे कोई विशेषता विकसित हुई, जबकि बॉक्स से बाहर की ओर तीर यह दर्शाते हैं कि उस विकास ने अन्य प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावित किया। प्रारंभिक मानव की विशेषताएँ, जैसे खोपड़ी का आकार और जबड़े की बनावट, इसी व्यवस्था के तहत विकसित हुई होंगी।

औज़ारों के निर्माण में सहायक हुए प्रमुख निवेश (कारक) निम्नलिखित थे:

  • मस्तिष्क के आकार और क्षमता में वृद्धि।
  • आँखों से निगरानी करना तथा भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक भ्रमण करना।
  • औज़ारों के इस्तेमाल के लिए हाथों का स्वतंत्र (मुक्त) होना।
  • सीधे खड़े होकर चलना (द्विपाद गति)।

औज़ारों के निर्माण से निम्नलिखित प्रक्रियाओं को बल मिला:

  • आदिमानव भयानक जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो सका।
  • खेती करना और शिकार करना आसान हो गया, जिससे भोजन की उपलब्धता बढ़ी।
  • पहनावे में सुधार हुआ; जानवरों की खाल को सिलने के लिए सुई जैसे औज़ारों का विकास हुआ।
  • मजबूत निवास स्थल बनाने में मदद मिली।
  • मिट्टी के बर्तन बनाना संभव हुआ, जिससे भोजन संग्रहण और पकाने में सुविधा हुई।

इस प्रकार, औज़ारों के निर्माण ने मानव के रहन-सहन और खान-पान के स्तर को पूरी तरह बदल दिया। पत्थर के औज़ार बनाने और प्रयोग करने के प्राचीनतम साक्ष्य इथियोपिया और केन्या से मिले हैं। ऐसा माना जाता है कि इनका प्रयोग सबसे पहले आस्ट्रेलोपिथिकस मानव ने किया होगा।

प्रश्न 2. मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पायी जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ।
(क) व्यवहार और (ख) शरीर रचना शीर्षकों के अंतर्गत दो अलग-अलग स्तम्भ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अंतरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्त्वपूर्ण समझते हैं?

उत्तर: मानव और वानर (एप) दोनों ही प्राइमेट समूह के सदस्य हैं, जिससे उनमें कई समानताएँ पाई जाती हैं। यही कारण है कि यह माना जाता है कि मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ है।

मानव और वानरों में समानताएँ एवं अंतर
(क) शारीरिक रचना / शरीर विज्ञान (ख) व्यवहार
समानताएँ:
  • दोनों के शरीर पर बाल होते हैं।
  • बच्चे जन्म से पहले लंबे समय तक माता के गर्भ में पलते हैं।
  • मादाओं में बच्चे को दूध पिलाने के लिए स्तन ग्रंथियाँ होती हैं।
  • दोनों ही अपने पिछले पैरों (पैरों) पर कुछ देर के लिए खड़े हो सकते हैं।
  • दोनों के हाथों में अंगूठा अन्य उंगलियों के विपरीत दिशा में होता है, जिससे वस्तुओं को पकड़ना आसान होता है।
समानताएँ:
  • दोनों अपने बच्चों को गोद में उठाकर चलते हैं और लंबे समय तक उनकी देखभाल करते हैं।
  • अन्य जीवों की तुलना में समझने और सीखने की क्षमता अधिक होती है।
  • परिस्थिति के अनुसार अपने व्यवहार को ढालने में सक्षम होते हैं।
  • सामाजिक प्राणी हैं और समूहों में रहते हैं।

महत्वपूर्ण अंतर:

  • चलने का तरीका: मानव सीधे खड़े होकर दो पैरों पर चलता है (द्विपाद गति), जबकि वानर अधिकतर चार पैरों के बल चलते हैं (चतुष्पाद गति)।
  • मस्तिष्क का आकार और बुद्धि: मानव का मस्तिष्क आकार में बड़ा और अधिक विकसित है, जिसके कारण उसमें तार्किक चिंतन, भाषा और जटिल उपकरण बनाने की क्षमता है। वानरों का मस्तिष्क अपेक्षाकृत छोटा होता है।
  • जबड़े और दाँत: वानरों का जबड़ा मजबूत और लंबा होता है, जबकि मानव का जबड़ा छोटा और कम शक्तिशाली होता है।
  • भाषा: मानव विकसित मौखिक और लिखित भाषा का प्रयोग करता है, जबकि वानर सीमित ध्वनियों और इशारों से ही संवाद कर पाते हैं।

प्रश्न 3. मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए तर्कों पर चर्चा कीजिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है?

उत्तर: आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) की उत्पत्ति कहाँ हुई, इस प्रश्न पर मुख्य रूप से दो सिद्धांत हैं:

  1. क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (मल्टी-रीजनल मॉडल)
  2. प्रतिस्थापन मॉडल (आउट ऑफ़ अफ्रीका मॉडल)

क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के अनुसार, मानव की उत्पत्ति विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से हुई। अफ्रीका, एशिया और यूरोप में रहने वाले पुराने होमिनिड (जैसे होमो एरेक्टस) धीरे-धीरे और अलग-अलग गति से विकसित होकर अपने-अपने क्षेत्रों में आधुनिक मानव बन गए। इस मॉडल के पक्ष में दिए जाने वाले तर्क हैं:

  • विभिन्न महाद्वीपों के आधुनिक मानवों में शारीरिक विविधताएँ (जैसे त्वचा का रंग, चेहरे की बनावट) इसलिए हैं क्योंकि उनके पूर्वज अलग-अलग क्षेत्रों में लंबे समय से रह रहे थे और उनका विकास स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हुआ।
  • यह मॉडल प्रत्येक क्षेत्र में पाए जाने वाले पुराने और नए जीवाश्मों के बीच की शारीरिक समानताओं को स्पष्ट करता है।

हालाँकि, अधिकांश आधुनिक पुरातात्विक और आनुवंशिक साक्ष्य प्रतिस्थापन मॉडल का समर्थन करते हैं, जिसके अनुसार आधुनिक मानव की उत्पत्ति लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका में हुई और वहाँ से वे पूरी दुनिया में फैले, जहाँ उन्होंने पहले से मौजूद अन्य होमिनिड प्रजातियों (जैसे निएंडरथल) का स्थान ले लिया। इसलिए, यद्यपि क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल एक दिलचस्प विचार है, लेकिन यह पुरातात्विक साक्ष्य का पूरी तरह से युक्तिसंगत स्पष्टीकरण नहीं देता।

प्रश्न 4. इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्त्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं- (क) संग्रहण, (ख) औज़ार बनाना, (ग) आग का प्रयोग।

उत्तर: इन तीनों क्रियाओं में से औज़ार बनाने (Tool Making) के साक्ष्य पुरातात्विक अभिलेख में सबसे अधिक और स्पष्ट रूप से मिलते हैं।

इसके कारण हैं:

  • पत्थर के औज़ार टिकाऊ होते हैं और हज़ारों-लाखों वर्षों तक जमीन में सुरक्षित रह सकते हैं।
  • औज़ारों के निर्माण की विभिन्न तकनीकों (जैसे कोर-उपकरण, फ्लेक-उपकरण, पंच-ब्लेड तकनीक) के आधार पर पुरातत्ववेत्ता प्रागैतिहासिक काल को अलग-अलग युगों में बाँट सकते हैं, जैसे:
    1. पुरापाषाण काल: भद्दे और बिना घिसे हुए पत्थर के औज़ार (कुठार, रुखानी)।
    2. मध्य पाषाण काल: छोटे और बारीक पत्थर के औज़ार (माइक्रोलिथ), भाले, तीर-कमान।
    3. नव पाषाण काल: घिसे हुए, चिकने और नक्काशीदार पत्थर के औज़ार (हँसिया)।
  • औज़ार बनाने के स्थल (वर्कशॉप) और बनाने के दौरान निकले अपशिष्ट (चिप्स) भी मिलते हैं, जो इस क्रिया के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

संग्रहण और आग के प्रयोग के साक्ष्य अपेक्षाकृत कम मिलते हैं क्योंकि वनस्पति, लकड़ी या राख जैसी चीजें जल्दी नष्ट हो जाती हैं। हाँ, कुछ स्थलों पर जले हुए कोयले और हड्डियों के अवशेष आग के प्रयोग के संकेत देते हैं, लेकिन ये साक्ष्य औज़ारों जितने प्रचुर और स्पष्ट नहीं हैं।

प्रश्न 5. भाषा के प्रयोग से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी? इस पर चर्चा कीजिए। इन क्रियाकलापों के लिए विचार-सम्प्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था?

उत्तर: भाषा के विकास ने मानव सभ्यता की प्रगति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(क) शिकार करने में भाषा की मदद:

  • योजना बनाना: शिकार के लिए रणनीति बनाने, जानवरों के झुंड को घेरने या जाल बिछाने की योजना बनाने के लिए भाषा अनिवार्य थी।
  • समन्वय: शिकार के दौरान एक-दूसरे को चेतावनी देना, दिशा-निर्देश देना या मदद के लिए पुकारना भाषा के माध्यम से ही संभव था।
  • ज्ञान का हस्तांतरण: अनुभवी शिकारी नई पीढ़ी को खतरनाक जानवरों, उनके व्यवहार और शिकार के गुर सिखा सकते थे।

(ख) आश्रय (घर) बनाने में भाषा की मदद:

  • डिजाइन पर चर्चा: किस प्रकार का आश्रय बनाना है, उसके लिए कौन-सी सामग्री चाहिए, इन सब पर चर्चा करने के लिए भाषा जरूरी थी।
  • कार्य का बँटवारा: लकड़ी काटने, बुनने या मिट्टी लाने जैसे अलग-अलग कामों के लिए लोगों को निर्देश देने में भाषा सहायक थी।
  • तकनीकी ज्ञान: मजबूत ढाँचा बनाने की तकनीक को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भाषा ही थी।

विचार-संप्रेषण के अन्य तरीके: भाषा के विकसित होने से पहले या उसके साथ-साथ, मनुष्य ने संप्रेषण के निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल किया होगा:

  • हाव-भाव और इशारे (अंगविक्षेप): हाथों या शरीर के मूवमेंट से संकेत देना।
  • चित्रकारी: गुफाओं की दीवारों पर बने शिकार के दृश्य (जैसे लैसकॉक्स और आल्टामीरा की गुफाओं में) संभवतः शिकार की योजना बनाने या जादू-टोने के लिए बनाए गए थे। ये चित्र जानकारी देने का एक शक्तिशाली माध्यम थे।
  • विशिष्ट ध्वनियाँ: खतरे की चेतावनी देने, बुलाने या साधारण भाव व्यक्त करने के लिए विशेष प्रकार की आवाजें निकालना।

प्रश्न 6. अध्याय के अंत में दिए गए कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइए कि इसका क्या महत्त्व है?

उत्तर: कालानुक्रम में दी गई दो महत्वपूर्ण घटनाएँ और उनका महत्व:

1. आस्ट्रेलोपिथिकस (लगभग 56 लाख वर्ष पूर्व):

  • महत्व: आस्ट्रेलोपिथिकस को मानव विकास क्रम की पहली महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। ये वानर और आधुनिक मानव के बीच की कड़ी थे। इनकी सबसे बड़ी विशेषता थी दो पैरों पर सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता (द्विपाद गति)। हालाँकि इनका मस्तिष्क आधुनिक मानव से छोटा था और ये पेड़ों पर भी समय बिताते थे, लेकिन सीधे चलने ने उनके हाथों को मुक्त कर दिया, जो भविष्य में औज़ार बनाने की नींव बना।

2. दफ़नाने की प्रथा का प्रथम साक्ष्य (लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व):

  • महत्व: निएंडरथल मानव द्वारा मृतकों को दफ़नाने की यह प्रथा एक सांस्कृतिक और बौद्धिक क्रांति का संकेत है। इससे पता चलता है कि:
    1. उनमें भावनात्मक लगाव और सामाजिक संबंधों की समझ थी।
    2. वे जीवन और मृत्यु के रहस्य के बारे में सोचते थे, जो एक प्रकार की धार्मिक या आध्यात्मिक चेतना का प्रमाण है।
    3. कब्रों में रखे गए फूलों या औज़ारों के साक्ष्य यह भी दर्शाते हैं कि वे मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास रखते होंगे।

इस प्रकार, यह घटना मानव के सांस्कृतिक और अमूर्त चिंतन के विकास का एक मील का पत्थर है।

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Other Chapters of Class 11 History
1. समय की शुरुआत से
2. लेखन कला और शहरी जीवन
3. तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य
4. इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 - 1200 ई.
5. यायावर साम्राज्य
6. तीन वर्ग
7. बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ
8. संस्कृतियों का टकराव
9. औद्योगिक क्रांति
10. मूल निवासियों का विस्थापन
11. आधुनिकीकरण के रास्ते
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