UP Board class 11 History 5. यायावर साम्राज्य is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: स्टेपी क्षेत्रों में संसाधनों की कमी के कारण मंगोलों और मध्य-एशियाई यायावरों को व्यापार और वस्तु-विनिमय के लिए अपने पड़ोसी चीनवासियों के पास जाना पड़ता था। यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी थी। यायावर कबीलेवासी खेती से प्राप्त उत्पादों और लोहे के उपकरणों को चीन से लाते थे और फर, घोड़े व स्टेपी में पकड़े गए शिकार का विनिमय करते थे। उन्हें वाणिज्यिक क्रियाकलापों में काफी तनाव का सामना करना पड़ता था क्योंकि दोनों पक्ष अधिकाधिक लाभ कमाना चाहते थे। जलवायु के अत्यधिक ठंडा या गरम होने के कारण स्टेपी प्रदेशों में खेती करना केवल कुछ ही ऋतुओं में संभव था। मंगोलों ने पश्चिम के तुर्कों के विपरीत कृषि कार्य नहीं किया, इसलिए खाद्य उत्पादों तथा लोहे के उपकरणों के लिए उन्हें चीन पर निर्भर रहना पड़ता था। इस प्रकार, एक पशुपालक और आखेटक समाज का जीवन व्यापार के अभाव में असंभव था।
उत्तर: मंगोलों और अन्य घुमक्कड़ समाजों में प्रत्येक जवान सदस्य हथियारबंद होता था और आवश्यकता पड़ने पर सशस्त्र सेना के रूप में संगठित हो जाता था। विभिन्न मंगोल जनजातियों के एकीकरण और विभिन्न लोगों के खिलाफ अभियानों से चंगेज़ खान की सेना में नए सदस्य शामिल हुए। इस प्रकार उसकी अपेक्षाकृत छोटी सेना एक विशाल विषमजातीय संगठन में बदल गई। चंगेज़ खान उन विभिन्न जनजातीय समूहों की पुरानी पहचान को मिटाना चाहता था जो उसके महासंघ का हिस्सा थे। उसने सेना को स्टेपी की पुरानी दशमलव प्रणाली (दस, सौ, हज़ार, दस हज़ार) के अनुसार गठित किया। पुरानी प्रणाली में कुल, कबीले और सैनिक इकाइयाँ एक साथ कायम थीं। चंगेज़ खान ने इस प्रथा को समाप्त कर प्राचीन जनजातीय समूहों को तोड़कर उनके सदस्यों को नई सैनिक इकाइयों में बाँट दिया। सबसे बड़ी इकाई 'तुमन' (लगभग दस हज़ार सैनिक) होती थी, जिसमें विभिन्न कबीलों के सदस्य शामिल होते थे। इसका मुख्य कारण यह था कि चंगेज़ खान को यह संदेह था कि कहीं ये लोग संगठित होकर उसकी सत्ता न पलट दें। इसलिए उसने मंगोल कबीलों को नई सामाजिक व सैनिक इकाइयों में विभक्त कर दिया।
उत्तर: चंगेज़ खान के बाद के मंगोल शासकों ने 'यास' (चंगेज़ खान की विधि-संहिता) को तो स्वीकार कर लिया, लेकिन उनके मन में चंगेज़ खान की स्मृति के साथ भारी तनाव था। स्थानबद्ध होने के दबाव और नए क्षेत्रों में बसने के कारण, तेरहवीं सदी के मध्य तक भाइयों के बीच पिता के अर्जित धन को बाँटने के बजाय व्यक्तिगत राजवंश बनाने की भावना उभरने लगी। हर कोई अपने 'उलुस' (अधिकृत क्षेत्र) का स्वामी बनकर नया राज्य स्थापित करना चाहता था, जिससे आपसी संघर्ष हुए। चंगेज़ खान के वंशज अच्छी तरह जानते थे कि 1221 में चंगेज़ खान ने अपने यास में बुखारा के लोगों को पापी कहा था और उनसे छिपा धन माँगा था। यह यास उसके उत्तराधिकारियों के लिए कठिनाई का कारण बना, क्योंकि अब वे स्वयं सभ्य हो चुके थे और विभिन्न सभ्य जातियों पर शासन कर रहे थे। वे चंगेज़ खान के कठोर नियमों को अपनी प्रजा पर लागू नहीं कर सकते थे, न ही वीरता की वह तस्वीर पेश कर सकते थे जैसी चंगेज़ खान ने की थी। इस प्रकार यास परवर्ती मंगोलों के लिए चंगेज़ खान की स्मृति से जुड़े तनाव का प्रतीक बन गया।
उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। इतिहास लिखित साक्ष्यों पर निर्भर करता है। यदि केवल नगरीय साहित्यकारों के विवरणों से इतिहास रचा गया हो, तो यायावर समाजों के प्रति प्रतिकूल विचार ही बनेंगे, क्योंकि ये लेखक अक्सर यायावरों को बर्बर और आक्रामक के रूप में चित्रित करते थे। फ़ारसी इतिवृत्तकारों ने मंगोल अभियानों में मारे गए लोगों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं: पहला, मंगोलों के प्रति डर और विद्वेष के कारण उनकी क्रूरता को अतिरंजित करके दिखाना। दूसरा, अपने शासकों के प्रति लोगों की वफादारी बनाए रखना, ताकि वे मंगोलों को कमजोर न समझें। तीसरा, इल-खानी दरबार में इतिहासकारों को मंगोल संरक्षण प्राप्त नहीं था, इसलिए वे पूर्वाग्रह से मुक्त नहीं थे। उदाहरण के लिए, एक चश्मदीद गवाह के अनुसार बुखारा के किले की रक्षा में केवल 400 सैनिक थे, जबकि एक इल-खानी विवरण में 3000 सैनिकों के हताहत होने का उल्लेख है। यह अतिशयोक्ति स्पष्ट है।
उत्तर: मंगोल और अरब के बेदोइन दोनों यायावर समाज थे, लेकिन उनके ऐतिहासिक अनुभव भिन्न थे। मंगोल मध्य एशिया के स्टेपी क्षेत्र (आधुनिक मंगोलिया) के निवासी थे। उनकी अर्थव्यवस्था पशुपालन और शिकार पर आधारित थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें चीन के साथ व्यापार करना पड़ता था। चंगेज़ खान ने उन्हें एक विशाल सैन्य शक्ति में संगठित किया और चीन, ईरान, रूस जैसे विशाल स्थायी साम्राज्यों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने जटिल कृषि अर्थव्यवस्थाओं और नगरीय समाजों का प्रशासन भी सफलतापूर्वक चलाया। बेदोइन अरब के रेगिस्तान में रहने वाले यायावर थे। उनकी अर्थव्यवस्था ऊँट पालन और व्यापार मार्गों पर नियंत्रण पर केंद्रित थी। सातवीं सदी में इस्लाम के उदय के बाद उन्होंने एक विशाल धार्मिक साम्राज्य की स्थापना की, जिसका केन्द्र नगरीय संस्कृति (दमिश्क, बगदाद) बना। भिन्नता के कारण: मुख्य भिन्नता भौगोलिक परिस्थितियों (ठंडे स्टेपी बनाम गर्म रेगिस्तान), आर्थिक आधार और साम्राज्य निर्माण के स्वरूप में है। मंगोलों का साम्राज्य मुख्यतः सैन्य विजय और प्रशासनिक नियंत्रण पर टिका था, जबकि बेदोइनों का साम्राज्य धर्म (इस्लाम) और व्यापारिक नेटवर्क को केन्द्र में रखकर विकसित हुआ।
उत्तर: दिए गए विवरण से 'पैक्स मंगोलिका' (मंगोल शांति) के निम्नलिखित चरित्र उजागर होते हैं:
1. कूटनीतिक संबंध: फ्रांस के राजा लुई IX द्वारा विलियम को महान खान मोंके के दरबार में भेजना यह दर्शाता है कि मंगोल शासक यूरोप सहित दूर-दूर के देशों के साथ राजनयिक संपर्क रखते थे।
2. अंतरराष्ट्रीयता एवं समृद्धि: दरबार में हंगरी की महिला पकेट और पेरिस के रहने वाले के भाई, एक फ़ारसी जौहरी का मिलना इस बात का प्रमाण है कि मंगोल दरबार विभिन्न देशों के कारीगरों, विद्वानों और सेवकों को आकर्षित करता था। यह एक समृद्ध और बहुसांस्कृतिक केन्द्र था।
3. धार्मिक सहिष्णुता: दरबारी उत्सवों में नेस्टोरियन ईसाई, मुसलमान, बौद्ध और ताओ पुजारियों को समान रूप से आमंत्रित करना और आशीर्वाद लेना यह स्पष्ट करता है कि मंगोल शासक सभी धर्मों के प्रति सहिष्णु और उदार थे। उनका शासन बहुधार्मिक था।
4. शानो-शौकत: सेवकों और कारीगरों को दूर-दूर से बुलाना और विलासितापूर्ण जीवन शैली मंगोल शासकों की समृद्धि और शान को दर्शाता है।
इस प्रकार, 'पैक्स मंगोलिका' का चरित्र अंतरराष्ट्रीय शांति, व्यापारिक सुरक्षा, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाला था।
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