UP Board class 8 Science (18. वायु तथा जल का प्रदूषण) solution PDF
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UP Board class 8 Science 18. वायु तथा जल का प्रदूषण Hindi Medium Solutions - PDF
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वायु तथा जल का प्रदूषण
प्रश्न: वायु गैसों का मिश्रण है, जिसमें 78% नाइट्रोजन, लगभग 21% ऑक्सीजन, तथा शेष में कार्बन डाइऑक्साइड, ऑर्गन, मीथैन, तथा जलवाष्प अल्प मात्रा में उपस्थित हैं | वायु प्रदुषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं | जैसे- दमा, खाँसी, ब्रोंकाइटिस इत्यादि | वाहन अधिक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा धुआँ उत्पन्न करते हैं | पेट्रोल तथा डीजल जैसे ईंधनों के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है। यह एक विषैली गैस है। यह रुधिर में ऑक्सीजन- वाहक क्षमता को घटा देती है। वायु प्रदुषण का कारण : (0) फैक्ट्री से निकला धुआँ (॥) जीवाश्मी ईंधन जैसे डीजल, पेट्रोल एवं कोयला इत्यादि का दहन इत्यादि (॥) स्वचालित वाहनों से निकला धुआँ | सर्दियों में वायुमंडल में दिखने वाली कोहरे जैसी मोटी परत जो धुएँ तथा कोहरे से बनता है | धूम-कोहरा कहलाता है | कोहरा होता है जो धुएँ तथा कोहरे से बनता है। धुएँ में नाइट्रोजन के ऑक्साइड उपस्थित हो सकते हैं जो अन्य वायु प्रदूषकों तथा कोहरे के संयोग से धूम कोहरा बनाते हैं। पेट्रोलियम परिष्करणशालाएँ सल््फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे गैसीय प्रदूषकों की प्रमुख स्रोत हैं। विद्युत संयंत्रों में कोयला जैसे ईंधन के दहन से सलल्फर डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है। यह फेफड़ों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त करने के साथ-साथ श्वसन समस्याएँ भी उत्पन्न कर सकती है। अन्य प्रकार के प्रदूषक क्लोरोफ्रलोरों कार्बन (८7८) हैं जिनका उपयोग रेफ्रीजेरेटरों एयर कण्डीशनरों तथा ऐरोसॉल फुहारा में होता है।
उत्तर: उपरोक्त प्रश्न वायु प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करता है। इसके आधार पर हम निम्नलिखित बिंदुओं को समझ सकते हैं:
- वायु का संघटन: वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है। इसमें लगभग 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन, 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड तथा अत्यल्प मात्रा में ऑर्गन, मीथेन, जलवाष्प आदि गैसें होती हैं।
- वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव: प्रदूषित वायु में साँस लेने से श्वसन तंत्र संबंधी रोग जैसे दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण और स्थायी क्षति हो सकती है।
- वाहनों का योगदान: वाहन पेट्रोल व डीजल के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी विषैली गैस छोड़ते हैं। यह गैस रक्त में हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
- वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत:
- कारखानों और ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाला धुआँ।
- जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल, डीजल) का दहन।
- स्वचालित वाहनों का धुआँ।
- पेट्रोलियम रिफाइनरियों से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) का उत्सर्जन।
- धूम-कोहरा (Smog): यह सर्दियों में दिखने वाला एक मोटा, धूसर रंग का कोहरा है जो धुएँ (Smoke) और कोहरे (Fog) के मिश्रण से बनता है। इसमें नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और दृश्यता को कम करते हैं।
- क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs): ये प्रदूषक रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एरोसॉल स्प्रे में प्रयोग होते हैं। ये वायुमंडल की ओजोन परत को नुकसान पहुँचाते हैं, जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है।
प्रश्न: * (८7४८) के द्वारा वायुमंडल की ओजोन परत क्षतिग्रस्त हो जाती है। e ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकर पराबैंगनी किरणों से हमें बचाती FI ० डीजल तथा पेट्रोल के दहन से चलने वाले स्वचालित वाहनों द्वारा अत्यन्त छोटे कण भी उत्पन्न होते हैं जो अत्यधिक समय तक वायु में निलंबित रहते हैं तथा ये दृश्यता (visibility) @Y ger ea Fl
उत्तर: इस प्रश्न में दो मुख्य बातें कही गई हैं:
- ओजोन परत का क्षरण: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) नामक रसायन वायुमंडल में पहुँचकर ओजोन (O₃) अणुओं को तोड़ देते हैं। इससे ओजोन परत पतली हो जाती है, जिसे 'ओजोन छिद्र' कहते हैं। यह परत एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को रोककर हमें त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से बचाती है।
- सूक्ष्म कण प्रदूषण: डीजल और पेट्रोल वाहनों के दहन से निकलने वाले धुएँ में बहुत ही बारीक कण (जैसे काजल के कण) होते हैं। ये कण इतने हल्के होते हैं कि लंबे समय तक हवा में तैरते रहते हैं। ये कण न केवल साँस के साथ फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि हवा में धुंधलापन पैदा करके दृश्यता (देखने की क्षमता) को भी कम कर देते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
प्रश्न: वायु प्रदूषण द्वारा केवल सजीव ही प्रभावित नहीं होते किन्तु भवन, स्मारक तथा प्रतिमाएँ जैसी निर्जीव वस्तुएँ भी प्रभावित होती हैं। जैसे- आगरा का ताजमहल इसका उदाहरण है | *» सलल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक गैसें वायुमंडल में ० उपस्थित जलवाष्प से अभिक्रिया करके सल्फ्रयूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं। ये वर्षा को अम्लीय बनाकर वर्षा के साथ पृथ्वी पर बरस जाते हैं। इसे अम्ल वर्षा कहते हैं। अम्ल वर्षा के कारण स्मारक के संगमरमर का संक्षारण होता है। इस परिघटना को संगमरमर कैंसर भी कहते हैं। मथुरा तेल परिष्करणी से उत्सर्जित काजल कण जैसे निलंबित कणों का संगमरमर को पीला करने में योगदान है।
उत्तर: हाँ, यह बिल्कुल सही है कि वायु प्रदूषण का प्रभाव केवल जीव-जंतुओं और पौधों तक ही सीमित नहीं है। यह हमारी ऐतिहासिक धरोहरों और इमारतों को भी गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है।
- अम्ल वर्षा (Acid Rain): कारखानों और वाहनों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) गैसें वायुमंडल में जलवाष्प (H₂O) के साथ मिलकर रासायनिक अभिक्रिया करती हैं। इससे सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनते हैं। ये अम्ल बारिश की बूंदों में घुलकर पृथ्वी पर गिरते हैं, इसे ही अम्ल वर्षा कहते हैं।
- ताजमहल पर प्रभाव: आगरा स्थित ताजमहल जो शुद्ध सफेद संगमरमर से बना है, अम्ल वर्षा और वायु प्रदूषण से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
- संगमरमर कैंसर (Marble Cancer): अम्ल वर्षा में मौजूद अम्ल संगमरमर के मुख्य घटक कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम सल्फेट आदि बनाते हैं। इससे संगमरमर धीरे-धीरे खुरदरा, कमजोर और उसका रंग फीका पड़ जाता है। इस घटना को ही संगमरमर कैंसर कहा जाता है।
- पीला पड़ना: मथुरा रिफाइनरी और आसपास के उद्योगों से निकलने वाले धुएँ में मौजूद काजल (सूट) के सूक्ष्म कण हवा में तैरते हुए ताजमहल की सतह पर जम जाते हैं, जिससे उसका सफेद रंग पीला दिखने लगता है।
प्रश्न: (7८ का पूरा नाम क्लोरोफ्लुरो कार्बन है | (४० का पूरा नाम कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (संपीडित प्राकृतिक गैस ) है | 1.76 का पूरा नाम लिक्विड पेट्रोलियम गैस (द्रवित पेट्रोलियम गैस है |
उत्तर: यहाँ विभिन्न संक्षिप्त नामों के पूरे नाम दिए गए हैं:
| संक्षिप्त रूप | पूरा नाम (हिंदी) | पूरा नाम (अंग्रेजी) |
|---|---|---|
| CFC | क्लोरोफ्लोरो कार्बन | ChloroFluoroCarbon |
| CNG | संपीडित प्राकृतिक गैस | Compressed Natural Gas |
| LPG | द्रवित पेट्रोलियम गैस | Liquefied Petroleum Gas |
महत्वपूर्ण तथ्य:
- CFC एक प्रमुख वायु प्रदूषक है जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाता है।
- CNG और LPG जीवाश्म ईंधन के साफ़ विकल्प हैं। ये पेट्रोल-डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए इनके उपयोग को वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
प्रश्न: सूर्य की किरणें वायुमंडल से गुजरने के पश्चात् पृथ्वी की सतह को गरम करती हैं। पृथ्वी पर पड़ने वाले सूर्य के विकिरणों का कुछ भाग पृथ्वी अवशोषित कर लिया जाता है और कुछ भाग परावर्तित होकर वापस अंतरिक्ष में लौट जाता है परन्तु उसका कुछ भाग वायुमंडल में भीतर ही रुक जाता है | यही रुका हुआ विकिरण पृथ्वी को गरम करता रहता है | जब सूर्य की ऊष्मा पौध-घर में प्रवेश तो करती है तो ऊष्मा इससे बाहर नहीं निकल पाती। यही रुकी हुई ऊष्मा पौँधा-घर को गरम करती है। पृथ्वी के वायुमंडल्र द्वारा रोके गए विकिरण यही कार्य करते हैं। यही कारण है कि उसे ale-ae waa (Green House effect) Hed #1 CO,, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड आदि को 721०2 हाउस गैस कहा जाता है | क्योंकि इन्ही गैसों के कारण विश्व उष्मन (ग्लोबल वार्मिंग) तेजी से बढ़ रहा है | इन गैसों का गुण है कि ये ऊष्मा को अवशोषित कर लेती हैं | वायुमंडल में ०0, की मात्रा तेजी से बढ़ रही है |
उत्तर: यह प्रश्न पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने वाली एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया – ग्रीनहाउस प्रभाव – के बारे में बता रहा है।
- ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है? जिस प्रकार एक ग्रीनहाउस (पौध-घर) में काँच की दीवारें सूरज की गर्मी को अंदर आने देती हैं लेकिन बाहर नहीं जाने देतीं, उसी प्रकार पृथ्वी के वायुमंडल में कुछ गैसें एक प्राकृतिक 'कंबल' का काम करती हैं। ये गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा (छोटी तरंगदैर्ध्य) को पृथ्वी तक आने देती हैं। पृथ्वी इस ऊष्मा को सोखकर फिर से विकिरण (लंबी तरंगदैर्ध्य) के रूप में छोड़ती है। वायुमंडल में मौजूद ये विशेष गैसें इस वापस जाने वाली ऊष्मा के एक हिस्से को रोक लेती हैं और उसे वापस पृथ्वी की ओर भेज देती हैं। इससे पृथ्वी का औसत तापमान जीवन के अनुकूल (लगभग 15°C) बना रहता है। बिना इस प्रभाव के पृथ्वी बहुत ठंडी (-18°C) हो जाएगी।
- ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases - GHGs): वे गैसें जो ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार हैं, ग्रीनहाउस गैसें कहलाती हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
- मीथेन (CH₄)
- कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
- नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)
- क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)
- बढ़ता प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग: मानवीय गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना, वनों की कटाई, औद्योगीकरण आदि के कारण वायुमंडल में CO₂ और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। इससे ग्रीनहाउस प्रभाव की प्राकृतिक प्रक्रिया असंतुलित हो गई है और अधिक ऊष्मा वायुमंडल में फंस रही है। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसे वैश्विक उष्णन या ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों का पिघलना, समुद्र के स्तर में वृद्धि और मौसम चक्र में गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
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