UP Board Class 10 Geography 2. वन एवं वन्य जीव संसाधन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) कृषि प्रसार
(ख) वृहत स्तरीय विकास परियोजनाएं
(ग) पशु चारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना
(घ) तीव्र औद्योगीकरण और शहरीकरण
उत्तर: (ग) पशु चारण और इंधन लकड़ी एकत्रित करना
व्याख्या: जबकि अत्यधिक पशुचारण और अंधाधुंध लकड़ी एकत्रित करना वन ह्रास के कारण हैं, ये परंपरागत और नियंत्रित तरीके से होने पर प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रख सकते हैं। प्राकृतिक वनस्पति और जीवों के ह्रास के प्रमुख कारण कृषि का अंधाधुंध विस्तार, बड़ी विकास परियोजनाएं (जैसे बांध), तीव्र औद्योगीकरण और अनियोजित शहरीकरण हैं, जो आवासों को स्थायी रूप से नष्ट कर देते हैं।
(क) संयुक्त वन प्रबंधन
(ख) चिपको आंदोलन
(ग) बीज बचाओ आंदोलन
(घ) वन्यजीव पशु विहार का परिसीमन
उत्तर: (घ) वन्यजीव पशु विहार का परिसीमन
व्याख्या: वन्यजीव पशु विहार (अभयारण्य) का परिसीमन एक शीर्ष-से-नीचे (Top-down) का दृष्टिकोण है, जिसे सरकारी अधिकारी और वन विभाग कानूनी रूप से सीमाएं तय करके करते हैं। इसमें स्थानीय समुदायों की सीधी भागीदारी या निर्णय लेने की भूमिका शामिल नहीं होती। इसके विपरीत, संयुक्त वन प्रबंधन, चिपको आंदोलन और बीज बचाओ आंदोलन सीधे तौर पर समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित हैं।
| जानवर/पौधे | अस्तित्व वर्ग |
|---|---|
| काला हिरण | लुप्त |
| एशियाई हाथी | सुभेद्य |
| अंडमान जंगली सुअर | स्थानिक |
| हिमालयन भूरा भालू | दुर्लभ |
| गुलाबी सिरवाली बत्तख | संकटग्रस्त |
स्पष्टीकरण: यह मिलान अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की श्रेणियों के आधार पर किया गया है। काला हिरण भारत में लुप्त माना जाता है, एशियाई हाथी सुभेद्य (Vulnerable) श्रेणी में है, अंडमान जंगली सुअर केवल अंडमान द्वीप समूह में पाया जाता है इसलिए वह स्थानिक (Endemic) है, हिमालयन भूरा भालू दुर्लभ (Rare) प्रजाति है, और गुलाबी सिरवाली बत्तख संकटग्रस्त (Endangered) है।
| श्रेणी | परिभाषा/विशेषता |
|---|---|
| आरक्षित वन | वन और वन्य जीव संसाधन संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान वन |
| रक्षित वन | वन भूमि जो और अधिक क्षरण से बचाई जाती है |
| अवर्गीकृत वन | सरकार, व्यक्तियों के निजी और समुदायों के अधीन अन्य वन और बंजर भूमि |
विस्तृत व्याख्या:
आरक्षित वन: ये सबसे संरक्षित श्रेणी के वन हैं। इनमें सभी प्रकार के शोषण पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, सिवाय सरकार की अनुमति से किए गए प्रबंधन कार्यों के।
रक्षित वन: इन वनों का संरक्षण आरक्षित वनों से कम सख्त होता है। इनमें स्थानीय लोगों को कुछ अधिकार दिए जा सकते हैं, लेकिन मुख्य उद्देश्य इन्हें और अधिक क्षरण से बचाना है।
अवर्गीकृत वन: ये वे वन और बंजर भूमियाँ हैं जो आरक्षित या रक्षित श्रेणी में नहीं आतीं। इन पर सरकारी, निजी या सामुदायिक स्वामित्व हो सकता है और इनका संरक्षण स्तर सबसे कम होता है।
उत्तर: जैव विविधता किसी विशेष क्षेत्र या पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाने वाले सजीवों (पौधों, जानवरों, सूक्ष्मजीवों) की विविधता और भिन्नता को कहते हैं। यह मानव जीवन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें भोजन, दवाएं, कच्चा माल, स्वच्छ वायु, जलशोधन और पारिस्थितिकी संतुलन जैसी आवश्यक पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करती है। प्रत्येक प्रजाति पारिस्थितिकी तंत्र के सुचारू संचालन में एक विशेष भूमिका निभाती है।
उत्तर: मानवीय गतिविधियाँ जैसे कि वनों की कटाई (कृषि, बस्तियों और उद्योगों के लिए), बड़ी विकास परियोजनाएं (बांध, सड़क), अवैध शिकार और तस्करी, प्रदूषण फैलाना तथा विदेशी प्रजातियों का प्रवेश, प्राकृतिक आवासों को नष्ट या खंडित कर देती हैं। इससे वनस्पतियों और जीवों की प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाती हैं या उनकी संख्या में भारी कमी आ जाती है।
उत्तर: भारत में सदियों से विभिन्न स्थानीय और आदिवासी समुदायों ने वनों और वन्यजीवों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। इन समुदायों का प्रकृति के साथ एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। उदाहरण के लिए, राजस्थान के बिश्नोई समुदाय ने जीव हत्या के विरोध और खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दी है। उत्तराखंड के चिपको आंदोलन में ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने वृक्षों से चिपककर वनों की कटाई रोकी। झारखंड और ओडिशा के आदिवासी समुदाय (जैसे मुंडा, संथाल) पवित्र उपवन (Sacred Groves) को संरक्षित करते हैं और महुआ, आम जैसे पेड़ों की पूजा करते हैं। सरिस्का अभयारण्य के आसपास के ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों का विरोध किया। राजस्थान के अलवर जिले के गाँवों ने मिलकर भेरवदेवी डाकव 'सोनचुरी' नामक 1200 हेक्टेयर के क्षेत्र में स्वयं शिकार और वन कटाई पर प्रतिबंध लगाया, जिससे एक संपन्न वन क्षेत्र पुनर्जीवित हुआ। ये सभी उदाहरण दर्शाते हैं कि समुदाय आधारित संरक्षण सबसे प्रभावी और टिकाऊ तरीका है।
उत्तर: वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों का लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। ये रीति-रिवाज सामुदायिक सहयोग, सांस्कृतिक मूल्यों और स्थानीय ज्ञान पर आधारित हैं।
1. पवित्र उपवन (Sacred Groves): यह सबसे प्राचीन प्रथा है, जहाँ समुदाय के देवता या पूर्वजों से जुड़े वन के टुकड़ों को पवित्र मानकर उनकी रक्षा की जाती है। इनमें किसी भी प्रकार की कटाई या शिकार वर्जित होता है। केरल, महाराष्ट्र, मेघालय आदि राज्यों में यह प्रथा आज भी जीवित है और इन उपवनों में जैव विविधता का भंडार सुरक्षित है।
2. संयुक्त वन प्रबंधन (JFM): यह एक आधुनिक सहयोगी प्रथा है, जिसमें वन विभाग और स्थानीय वन समितियाँ मिलकर वनों के संरक्षण और प्रबंधन का कार्य करती हैं। समुदाय को वन उपज में हिस्सेदारी दी जाती है, जिससे उनकी भागीदारी सुनिश्चित होती है।
3. सामुदायिक भंडारण एवं बीज बचाओ आंदोलन: ग्रामीण महिलाओं द्वारा चलाए गए बीज बचाओ आंदोलन जैसे प्रयासों ने देशी बीजों की किस्मों और पारंपरिक कृषि ज्ञान को सामुदायिक सहयोग से संरक्षित किया है, जो अप्रत्यक्ष रूप से वनस्पति विविधता के संरक्षण में मदद करता है।
4. सामुदायिक अभयारण्य: कई गाँवों ने स्वेच्छा से अपने आसपास के वन क्षेत्रों को सामुदायिक अभयारण्य घोषित कर दिया है, जहाँ वे स्वयं नियम बनाते और उनका पालन कराते हैं, जैसे हिमाचल प्रदेश के कुछ गाँवों में।
निष्कर्षतः, ये सहयोगी रीति-रिवाज इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि जो संसाधन सबका है, उसकी देखभाल का दायित्व भी सबका है। UP Board के पाठ्यक्रम में इन प्रथाओं का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि छात्र स्थायी विकास के इन पारंपरिक मॉडलों को समझ सकें और भविष्य में इन्हें बढ़ावा दे सकें।
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| Other Chapters of Class 10 Geography | |
| 1. संसाधन एवं विकास | |
| 2. वन एवं वन्य जीव संसाधन | |
| 3. जल संसाधन | |
| 4. कृषि | |
| 5. खनिज तथा ऊर्जा संसाधन | |
| 6. विनिर्माण उद्योग | |
| 7. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ |