UP Board Class 11 Biology (17. श्वसन और गैसों का विनिमय) solution PDF
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UP Board Class 11 Biology 17. श्वसन और गैसों का विनिमय Hindi Medium Solutions - PDF
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अध्याय 17: श्वसन और गैसों का विनिमय
प्रश्न 1. जैव क्षमता की परिभाषा दीजिए और इसका महत्त्व बताइए।
उत्तर: जैव क्षमता (Vital Capacity) वायु की वह अधिकतम मात्रा है जिसे एक व्यक्ति पूरी चेष्टा (बलपूर्वक) से अंतःश्वास लेने के बाद पूरी चेष्टा से निःश्वास द्वारा बाहर निकाल सकता है। इसमें अंतःश्वास आरक्षित आयतन (IRV), ज्वारीय आयतन (TV) और निःश्वास आरक्षित आयतन (ERV) का योग शामिल होता है।
गणना: IRV (3000 मिली) + TV (500 मिली) + ERV (1100 मिली) = 4600 मिली (लगभग)।
महत्त्व: जैव क्षमता जितनी अधिक होगी, शरीर की कार्यक्षमता और ऊर्जा प्राप्ति उतनी ही बेहतर होगी। खिलाड़ियों, तैराकों, पर्वतारोहियों की जैव क्षमता सामान्य व्यक्ति से अधिक होती है। सामान्यतः पुरुषों की जैव क्षमता महिलाओं से अधिक और युवाओं की वृद्धों से अधिक होती है।
प्रश्न 2. सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में शेष वायु के आयतन को बताएँ।
उत्तर: सामान्य निःश्वसन (उच्छ्वास) के बाद फेफड़ों में जो वायु शेष रहती है, उसे कार्यात्मक अवशिष्ट धारिता (Functional Residual Capacity, FRC) कहते हैं। यह निःश्वास आरक्षित आयतन (ERV) और अवशिष्ट आयतन (RV) के योग के बराबर होती है।
गणना: FRC = ERV (1100 मिली) + RV (1200 मिली) = 2300 मिली (लगभग)।
प्रश्न 3. गैसों का विसरण केवल कूपिकीय क्षेत्र में होता है, श्वसन तन्त्र के किसी अन्य भाग में नहीं, क्यों?
उत्तर: गैसों का विनिमय (O₂ और CO₂ का आदान-प्रदान) केवल फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में ही हो पाता है, क्योंकि:
- कूपिकाओं की भित्ति बहुत पतली होती है और उन पर रक्त केशिकाओं (Capillaries) का सघन जाल फैला होता है। यही संरचना श्वसन झिल्ली (Respiratory Membrane) बनाती है, जो विसरण के लिए आदर्श है।
- श्वसन तंत्र के अन्य भाग जैसे श्वासनली, श्वसनिकाएँ आदि की भित्ति मोटी होती है और उन पर रक्त केशिकाओं का जाल नहीं होता, इसलिए वहाँ गैसीय विनिमय संभव नहीं है।
- विसरण सिद्धांत के अनुसार, गैसें उच्च आंशिक दबाव वाले क्षेत्र से निम्न आंशिक दबाव वाले क्षेत्र की ओर गति करती हैं। कूपिकाओं में O₂ का आंशिक दबाव (104 mm Hg) रक्त केशिकाओं में O₂ के दबाव (40 mm Hg) से अधिक होता है, इसलिए O₂ रक्त में विसरित हो जाती है। इसी प्रकार, CO₂ का आंशिक दबाव रक्त में (45 mm Hg) कूपिकाओं (40 mm Hg) से अधिक होता है, इसलिए CO₂ कूपिकाओं में विसरित हो जाती है।
चित्र: कूपिका में गैसीय विनिमय
प्रश्न 4. CO₂ के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: ऊतकों में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का रक्त द्वारा फेफड़ों तक परिवहन मुख्यतः तीन रूपों में होता है:
- प्लाज्मा में घुलकर (7%): CO₂ प्लाज्मा में घुलकर कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाती है।
- बाइकार्बोनेट आयनों के रूप में (70%): यह सबसे प्रमुख विधि है। CO₂ लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) में प्रवेश करती है, जहाँ कार्बोनिक एनहाइड्रेज एंजाइम की उपस्थिति में यह पानी के साथ क्रिया कर कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो तुरंत H⁺ और HCO₃⁻ (बाइकार्बोनेट आयन) में विघटित हो जाता है।
अभिक्रिया: CO₂ + H₂O ⇌ H₂CO₃ ⇌ H⁺ + HCO₃⁻
बाइकार्बोनेट आयन प्लाज्मा में आकर सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) बनाते हैं। इस दौरान, विद्युत उदासीनता बनाए रखने के लिए प्लाज्मा से क्लोराइड आयन (Cl⁻) RBCs में प्रवेश करते हैं। इसे क्लोराइड शिफ्ट या हैम्बर्गर परिघटना कहते हैं। - कार्बोएमिनो यौगिकों के रूप में (23%): CO₂ का एक भाग सीधे हीमोग्लोबिन के अमीनो समूह से जुड़कर कार्बोएमिनोहीमोग्लोबिन (HbCO₂) बनाता है।
अभिक्रिया: Hb + CO₂ ⇌ HbCO₂
प्रश्न 5. कूपिका वायु की तुलना में वायुमण्डलीय वायु में pO₂ तथा pCO₂ कितनी होगी? मिलान करें।
(i) pO₂ उच्च, pCO₂ निम्न
(ii) pO₂ निम्न, pCO₂ उच्च
(iii) pO₂ उच्च, pCO₂ उच्च
(iv) pO₂ निम्न, pCO₂ निम्न
उत्तर: (i) pO₂ उच्च, pCO₂ निम्न
व्याख्या: वायुमंडलीय वायु में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव (pO₂) लगभग 159 mm Hg और कार्बन डाइऑक्साइड का दबाव (pCO₂) लगभग 0.3 mm Hg होता है। जबकि कूपिका वायु में, श्वसन के कारण pO₂ घटकर लगभग 104 mm Hg और pCO₂ बढ़कर लगभग 40 mm Hg हो जाता है।
प्रश्न 6. सामान्य स्थिति में अन्तःश्वसन प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: सामान्य अंतःश्वसन (प्रश्वसन) एक सक्रिय प्रक्रिया है जिसमें मुख्यतः डायाफ्राम और पसलियों की पेशियाँ काम करती हैं।
- डायाफ्राम की भूमिका (75%): डायाफ्राम की पेशियाँ सिकुड़ती हैं, जिससे यह गुंबदनुमा आकृति से चपटा हो जाता है। इससे वक्ष गुहा का ऊर्ध्वाधर आयतन बढ़ जाता है।
- बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों की भूमिका (25%): इन पेशियों के सिकुड़ने से पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर खिंचती हैं तथा उरोस्थि (स्टर्नम) आगे की ओर उठती है। इससे वक्ष गुहा का अग्र-पश्च और पार्श्व आयतन बढ़ जाता है।
चित्र: श्वासोच्छ्वास की क्रियाविधि
प्रश्न 7. श्वसन का नियमन कैसे होता है?
उत्तर: श्वसन क्रिया का नियमन मुख्यतः तंत्रिका तंत्र और रासायनिक कारकों द्वारा होता है:
- श्वसन केंद्र: मस्तिष्क के मेड्यूला ऑब्लांगेटा और पॉन्स वेरोलाई में स्थित श्वसन केंद्र श्वसन की दर और गहराई को नियंत्रित करते हैं। ये केंद्र डायाफ्राम और पसलियों की पेशियों को संकेत भेजते हैं।
- रासायनिक नियंत्रण:
- CO₂ सांद्रता: रक्त में CO₂ की सांद्रता बढ़ने (या pH कम होने) पर मेड्यूला के श्वसन केंद्र सीधे उद्दीपित होते हैं, जिससे श्वसन दर बढ़ जाती है और अधिक CO₂ बाहर निकलती है।
- O₂ सांद्रता: रक्त में O₂ का स्तर बहुत अधिक गिर जाने पर कैरोटिड और एओर्टिक बॉडीज (रासायनिक संवेदांग) सक्रिय होते हैं और श्वसन केंद्र को संकेत भेजकर श्वसन दर बढ़ा देते हैं।
- प्रतिवर्ती नियंत्रण: फेफड़ों में 'स्ट्रेच रिसेप्टर्स' होते हैं। जब फेफड़े अत्यधिक फूल जाते हैं, तो ये रिसेप्टर्स हेरिंग-ब्र्यूअर प्रतिवर्त चाप के माध्यम से श्वसन केंद्र को संकेत देकर अंतःश्वसन को रोक देते हैं और निःश्वसन शुरू करवाते हैं।
प्रश्न 8. pCO₂ का ऑक्सीजन के परिवहन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: pCO₂ (CO₂ का आंशिक दबाव) ऑक्सीजन के परिवहन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, जिसे बोहर प्रभाव (Bohr Effect) कहते हैं।
- ऊतकों में: ऊतकों में उपापचय के कारण pCO₂ उच्च, तापमान अधिक और pH निम्न (अम्लीय) होता है। इन स्थितियों में हीमोग्लोबिन की O₂ के प्रति आकर्षण शक्ति (बंधुता) कम हो जाती है। इससे ऑक्सीहीमोग्लोबिन आसानी से विघटित होकर ऊतकों को O₂ मुक्त कर देता है।
- फेफड़ों में: फेफड़ों में pCO₂ निम्न, तापमान कम और pH उच्च (क्षारीय) होता है। इन स्थितियों में हीमोग्लोबिन की O₂ के प्रति आकर्षण शक्ति बढ़ जाती है, जिससे वह आसानी से O₂ से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बना लेता है।
प्रश्न 9. पहाड़ पर चढ़ने वाले व्यक्ति की श्वसन प्रक्रिया में क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडलीय दबाव और वायु में ऑक्सीजन का आंशिक दबाव (pO₂) कम हो जाता है। इसके निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:
- हाइपोक्सिया: रक्त में घुली O₂ की मात्रा कम हो जाती है, जिससे शरीर के ऊतकों को पर्याप्त O₂ नहीं मिल पाती। इससे सिरदर्द, चक्कर, मतली, थकान और श्वास लेने में कठिनाई जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। इसे पर्वतीय रोग (Mountain Sickness) कहते हैं।
- श्वसन दर में वृद्धि: शरीर O₂ की कमी को पूरा करने के लिए स्वतः ही श्वसन दर और गहराई बढ़ा देता है।
- दीर्घकालिक अनुकूलन: कुछ दिनों तक ऊँचाई पर रहने से शरीर अनुकूलित हो जाता है। गुर्दे से एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जिससे अस्थि मज्जा में लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) और हीमोग्लोबिन का उत्पादन बढ़ जाता है। इससे रक्त की O₂ वहन क्षमता बढ़ जाती है और श्वसन सामान्य होने लगता है।
प्रश्न 10. कीटों में श्वास क्रियाविधि कैसे होती है?
उत्तर: कीटों में श्वसन के लिए एक विशेष वायु नलिका तंत्र, ट्रैकिया तंत्र (Tracheal System), पाया जाता है।
- इनके शरीर के पार्श्व भागों में छोटे-छोटे रंध्र होते हैं, जिन्हें श्वासरंध्र (Spiracles) कहते हैं।
- ये रंध्र शाखित, पारदर्शी ट्रैकिया नलिकाओं से जुड़े होते हैं, जो पूरे शरीर में फैली रहती हैं।
- ट्रैकिया आगे चलकर सूक्ष्मतम नलिकाओं, ट्रैकिओल्स (Tracheoles), में विभाजित हो जाती हैं, जो सीधे कोशिकाओं तक पहुँचती हैं।
- गैसों का विनिमय (O₂ और CO₂ का आदान-प्रदान) विसरण द्वारा सीधे ट्रैकिओल्स और कोशिकाओं के बीच होता है। रक्त परिसंचरण तंत्र इसमें शामिल नहीं होता।
- यह अत्यंत कुशल प्रणाली है, जो कीटों को उनकी तीव्र गतिविधियों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की त्वरित आपूर्ति करती है।
चित्र: कीट में ट्रैकिया तंत्र
प्रश्न 11. ऑक्सीजन वियोजन वक्र की परिभाषा दीजिए। क्या आप इसकी सिग्माभ आकृति का कोई कारण बता सकते हैं?
उत्तर: ऑक्सीजन वियोजन वक्र (Oxygen Dissociation Curve) वह वक्र है जो विभिन्न ऑक्सीजन आंशिक दबाव (pO₂) पर हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन से संतृप्ति के प्रतिशत को दर्शाता है।
- यह वक्र सिग्मॉइड (S-shaped) होता है।
- कारण: हीमोग्लोबिन चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं से बना है, जिनमें से प्रत्येक एक हीम समूह (लौह युक्त) धारण करती है। जब पहली श्रृंखला का हीम O₂ से बंधता है, तो हीमोग्लोबिन की संरचना में परिवर्तन (सहकारिता) होता है, जिससे शेष तीन हीम समूहों की O₂ के प्रति आकर्षण शक्ति बहुत तेजी से बढ़ जाती है। यही कारण है कि वक्र की शुरुआत धीमी (O₂ बंधन में कठिनाई) और बीच में तेज हो जाती है, जिससे उसकी आकृति S-आकार की बन जाती है।
- प्रभावित करने वाले कारक: तापमान, pCO₂, pH और 2,3-डाइफॉस्फोग्लिसरेट (2,3-DPG) जैसे कारक इस वक्र की स्थिति को प्रभावित करते हैं। उच्च ताप, उच्च pCO₂, निम्न pH (बोहर प्रभाव) या उच्च 2,3-DPG वक्र को दाईं ओर खिसका देते हैं, जिसका अर्थ है कि हीमोग्लोबिन O₂ को आसानी से मुक्त कर देगा (ऊतकों के लिए लाभदायक)। विपरीत स्थितियाँ वक्र को बाईं ओर खिसकाती हैं।
चित्र: ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन वियोजन वक्र
प्रश्न 12. क्या आपने अव-ऑक्सीयता (हाइपोक्सिया) (न्यून ऑक्सीजन) के बारे में सुना है? इस सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कीजिए।
उत्तर: हाइपोक्सिया (Hypoxia) शरीर के ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने की स्थिति है। यह कई कारणों से हो सकता है:
- अल्पताजन्य हाइपोक्सिया (Hypoxic Hypoxia): वायुमंडल में O₂ का कम दबाव होने के कारण, जैसे - अधिक ऊँचाई पर।
- रक्ताल्पता हाइपोक्सिया (Anaemic Hypoxia): रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी (एनीमिया) के कारण O₂ वहन क्षमता कम हो जाती है।
- अवरोधी हाइपोक्सिया (Stagnant Hypoxia): रक्त प्रवाह धीमा होने के कारण, जैसे - हृदय गति रुकना या गंभीर रक्तस्राव।
- ऊतकीय हाइपोक्सिया (Histotoxic Hypoxia): ऊतक कोशिकाएँ O₂ का उपयोग करने में असमर्थ होती हैं, जैसे - साइनाइड जैसे विष के कारण।
प्रश्न 13. निम्न के बीच अन्तर करें:
(क) IRV, ERV
(ख) अन्तः श्वसन क्षमता और निःश्वसन क्षमता
(ग) जैव क्षमता तथा फेफड़ों की कुल धारिता
उत्तर:
| शब्द | परिभाषा / विशेषता | अनुमानित आयतन |
|---|---|---|
| IRV (अंतःश्वास आरक्षित आयतन) | सामान्य अंतःश्वास के बाद बलपूर्वक अंदर ली जा सकने वाली अतिरिक्त वायु की मात्रा। | 2500 - 3000 मिली |
| ERV (निःश्वास आरक्षित आयतन) | सामान्य निःश्वास के बाद बलपूर्वक बाहर निकाली जा सकने वाली अतिरिक्त वायु की मात्रा। | 1000 - 1100 मिली |
| अंतःश्वसन क्षमता (IC) | सामान्य निःश्वास के बाद अंदर ली जा सकने वाली वायु की कुल मात्रा। (TV + IRV) | 3000 - 3500 मिली |
| निःश्वसन क्षमता (EC) | सामान्य अंतःश्वास के बाद बाहर निकाली जा सकने वाली वायु की कुल मात्रा। (TV + ERV) | 1500 - 1600 मिली |
| जैव क्षमता (VC) | पूरी चेष्टा से अंतःश्वास के बाद पूरी चेष्टा से निकाली जा सकने वाली वायु की अधिकतम मात्रा। (IRV + TV + ERV) | लगभग 4600 मिली |
| फेफड़ों की कुल धारिता (TLC) | बलपूर्वक निःश्वास के बाद फेफड़ों में उपस्थित वायु की कुल मात्रा। (VC + RV) | लगभग 5800 मिली |
प्रश्न 14. ज्वारीय आयतन क्या है? एक स्वस्थ मनुष्य के लिए एक घण्टे के ज्वारीय आयतन (लगभग मात्रा) को आकलित करें।
उत्तर:
- ज्वारीय आयतन (Tidal Volume, TV): सामान्य सांस लेने और छोड़ने के दौरान प्रति श्वसन चक्र में अंदर ली या बाहर निकाली जाने वाली वायु की मात्रा। एक स्वस्थ वयस्क का ज्वारीय आयतन लगभग 500 मिली होता है।
- एक घंटे का आकलन:
- सामान्य श्वसन दर: लगभग 12-
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