UP Board Class 11 Biology (8. कोशिका जीवन की इकाई) solution PDF
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UP Board Class 11 Biology 8. कोशिका जीवन की इकाई Hindi Medium Solutions - PDF
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अध्याय 8: कोशिका - जीवन की इकाई
Cell: The Unit of Life
अभ्यास के अन्तर्गत दिए गए प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. इनमें से कौन-सा सही नहीं है?
(अ) कोशिका की खोज राबर्ट ब्राउन ने की थी।
(ब) श्लीडेन व श्वान ने कोशिका सिद्धान्त प्रतिपादित किया था।
(स) विरचोव के अनुसार कोशिका पूर्व स्थित कोशिका से बनती है।
(द) एककोशिकीय जीव अपने जीवन के कार्य एक कोशिका के भीतर करते हैं।
उत्तर: (अ) कोशिका की खोज रॉबर्ट ब्राउन ने की थी। (यह कथन गलत है। कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने 1665 में की थी। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में केन्द्रक की खोज की थी।)
प्रश्न 2. नई कोशिका का निर्माण होता है--
(अ) जीवाणु-किण्वन से
(ब) पुरानी कोशिकाओं के पुनरुत्पादन से
(स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से
(द) अजैविक पदार्थों से
उत्तर: (स) पूर्व स्थित कोशिकाओं से। (विरचोव के सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक कोशिका पहले से विद्यमान कोशिका से ही बनती है।)
प्रश्न 3. निम्न के सही जोड़े बनाइए--
(अ) क्रिस्टी - (i) प्रोटीन में चपटी कलानुमा थैली
(ब) कुंडिका - (ii) सूत्रकणिका में अन्तर्वलन
(स) थाइलेकॉइड - (iii) गॉल्जी उपकरण से बिंब आकार की थैली
उत्तर: (अ) - (ii), (ब) - (iii), (स) - (i)
प्रश्न 4. इनमें से कौन-सा सही है?
(अ) सभी जीव कोशिकाओं में केन्द्रक मिलता है।
(ब) दोनों जन्तु व पादप कोशिकाओं में स्पष्ट कोशिका भित्ति होती है।
(स) प्रोकैरियोटिक कोशिका में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
(द) कोशिका का निर्माण अजैविक पदार्थों से नए सिरे से होता है।
उत्तर: (स) प्रोकैरियोटिक कोशिका में आवरित अंगक नहीं मिलते हैं।
प्रश्न 5. प्रोकेरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करो।
उत्तर: प्रोकैरियोटिक कोशिका (जैसे जीवाणु) में, प्लाज्मा झिल्ली के अन्तर्वलन से बनी एक विशिष्ट झिल्लीयुक्त संरचना होती है, जिसे मीसोसोम कहते हैं। यह संरचना कोशिका की सतह क्षेत्र को बढ़ाती है।
मुख्य कार्य:
- श्वसन (Respiration) जैसी क्रियाओं में सहायता करना।
- कोशिका विभाजन के समय नई कोशिका भित्ति के निर्माण में भूमिका निभाना।
- कुछ जीवाणुओं में डीएनए के जुड़ाव का स्थान प्रदान करना।
प्रश्न 6. कैसे उदासीन बिलेय जीवद्रव्य झिल्ली से होकर गति करते हैं? क्या ध्रुवीय अणु उसी प्रकार से होकर गति करते हैं? यदि नहीं, तो इनका जीवद्रव्य झिल्ली से होकर परिवहन कैसे होता है?
उत्तर: जीवद्रव्य झिल्ली एक चयनात्मक पारगम्य झिल्ली है।
- उदासीन बिलेय अणु (जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड): ये साधारण विसरण द्वारा झिल्ली से आते-जाते रहते हैं। यह एक निष्क्रिय परिवहन है जिसमें अणु उच्च सान्द्रता वाले क्षेत्र से निम्न सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर बिना ऊर्जा खर्च किए गति करते हैं।
- ध्रुवीय अणु या आयन (जैसे ग्लूकोज, Na+, K+): ये साधारण विसरण द्वारा झिल्ली की लिपिड द्वि-परत से आसानी से नहीं गुजर सकते। इनके परिवहन के लिए झिल्ली में स्थित वाहक प्रोटीन या आयन वाहक की आवश्यकता होती है।
- सुवाहित विसरण: वाहक प्रोटीन की सहायता से निम्न सान्द्रता से उच्च सान्द्रता की ओर, बिना ऊर्जा के परिवहन।
- सक्रिय परिवहन: वाहक प्रोटीन (जैसे सोडियम-पोटैशियम पम्प) की सहायता से और ATP की ऊर्जा का उपयोग करके अणुओं/आयनों का निम्न सान्द्रता से उच्च सान्द्रता की ओर परिवहन।
प्रश्न 7. दो कोशिकीय अंगकों के नाम बताइए जो द्विककला से घिरे होते हैं। इन दो अंगकों की विशेषताएँ व कार्य लिखिए।
उत्तर: द्विकला से घिरे दो प्रमुख अंगक हैं: माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट)।
| अंगक | विशेषताएँ | कार्य |
|---|---|---|
| माइटोकॉन्ड्रिया |
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| हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) |
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प्रश्न 8. प्रोकेरियोटिक कोशिका की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (जैसे जीवाणु, नील-हरित शैवाल) की प्रमुख विशेषताएँ:
- सत्य केन्द्रक का अभाव: इनमें केन्द्रक कला से घिरा हुआ स्पष्ट केन्द्रक नहीं होता। आनुवंशिक पदार्थ (DNA) कोशिकाद्रव्य में एक क्षेत्र (न्यूक्लियॉइड) में स्वतंत्र रूप से पड़ा रहता है।
- अंगकों का अभाव: इनमें झिल्ली-बद्ध अंगक जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण, अन्तःप्रद्रव्यी जालिका, लवक आदि नहीं पाए जाते।
- राइबोसोम: केवल 70S प्रकार के छोटे राइबोसोम पाए जाते हैं।
- कोशिका भित्ति: अधिकांश में कोशिका भित्ति पाई जाती है (पेप्टिडोग्लाइकन से बनी)।
- आकार: आकार में सामान्यतः छोटी (1-10 माइक्रोमीटर) होती हैं।
- विभाजन: कोशिका विभाजन द्विखण्डन द्वारा होता है, सूत्री विभाजन नहीं।
प्रश्न 9. बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: बहुकोशिकीय जीवों में, विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ विशिष्ट कार्य करने के लिए विशेषीकृत हो जाती हैं। इसी को श्रम विभाजन कहते हैं।
- लाभ: यह दक्षता बढ़ाता है। एक ही कोशिका को सभी कार्य न करके, अलग-अलग कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य (जैसे पाचन, संवहन, गति, उत्सर्जन) विशेष रूप से करती हैं।
- संरचनात्मक भिन्नता: कार्यिकीय विशेषीकरण के साथ ही कोशिकाओं की आकृति, आकार व आन्तरिक संरचना में भी भिन्नता आ जाती है (संरचनात्मक भिन्नन)। उदाहरण: तंत्रिका कोशिका संदेशवाहन के लिए लम्बी होती है, मांसपेशी कोशिका संकुचन के लिए लम्बी व तंतुमय होती है।
- संगठन: समान कार्य करने वाली विशिष्ट कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं, विभिन्न ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं और अंग मिलकर अंग तंत्र का निर्माण करते हैं।
प्रश्न 10. "कोशिका जीवन की मूल इकाई है।" संक्षिप्त में वर्णन करें।
उत्तर: कोशिका को जीवन की मूल इकाई इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
- संरचनात्मक इकाई: सभी सजीवों का शरीर एक या अधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।
- कार्यिकीय इकाई: जीवन की सभी आवश्यक क्रियाएँ (श्वसन, पोषण, उत्सर्जन, जनन आदि) कोशिका के भीतर या कोशिकाओं के समन्वय से ही सम्पन्न होती हैं।
- वंशानुगत इकाई: कोशिका में आनुवंशिक पदार्थ (DNA) होता है जो लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।
- वृद्धि की इकाई: जीवों की वृद्धि कोशिका विभाजन व कोशिका वृद्धि के कारण होती है।
- स्वायत्तता: एक कोशिका (एककोशिकीय जीव) स्वतंत्र रूप से सभी जीवन क्रियाएँ कर सकती है।
- टोटीपोटेंसी: कई पादप कोशिकाओं में पूर्ण जीव बनाने की क्षमता होती है, जो कोशिका की मौलिकता को दर्शाती है।
प्रश्न 11. केन्द्रक छिद्र क्या है? इनके कार्य बताइए।
उत्तर: केन्द्रक कला (दोहरी झिल्ली) में पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों को केन्द्रक छिद्र कहते हैं। ये प्रोटीन से बनी जटिल संरचनाओं से बंद होते हैं।
कार्य:
- ये केन्द्रक व कोशिकाद्रव्य के बीच परिवहन मार्ग का काम करते हैं।
- केन्द्रक में संश्लेषित mRNA, tRNA, राइबोसोमल उपइकाइयाँ इन्हीं छिद्रों से होकर कोशिकाद्रव्य में आती हैं।
- कोशिकाद्रव्य में बने प्रोटीन, एन्जाइम, न्यूक्लियोटाइड आदि केन्द्रक में इन्हीं के द्वारा प्रवेश करते हैं।
- ये आवागमन का नियंत्रित चयन करते हैं, जिससे केन्द्रक की अखंडता बनी रहती है।
प्रश्न 12. लयनकाय तथा रसधानी दोनों अन्त: झिल्लीमय संरचनाएँ हैं परन्तु कार्य की दृष्टि से ये अलग होते हैं। इस पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
| लक्षण | लयनकाय (Lysosome) | रसधानी (Vacuole) |
|---|---|---|
| संरचना | एकल झिल्ली से घिरी थैली, जिसमें पाचक (हाइड्रोलाइटिक) एन्जाइम भरे होते हैं। | एकल झिल्ली (टोनोप्लास्ट) से घिरी बड़ी थैली, जिसमें कोशिका रस भरा होता है। |
| मुख्य कार्य |
|
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प्रश्न 13. (अ) केन्द्रक की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर: केन्द्रक (Nucleus) कोशिका का नियंत्रण कक्ष है।
- केन्द्रक कला: इसे घेरे हुए दोहरी झिल्ली होती है, जिसमें केन्द्रक छिद्र होते हैं। बाहरी झिल्ली अक्सर अन्तःप्रद्रव्यी जालिका से जुड़ी होती है।
- केन्द्रकद्रव्य: केन्द्रक कला के भीतर का जैलीनुमा पदार्थ, जिसमें न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन व एन्जाइम होते हैं।
- क्रोमैटिन जाल: केन्द्रकद्रव्य में DNA और हिस्टोन प्रोटीन के मिलने से बने लम्बे, पतले धागे फैले रहते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये सघन होकर गुणसूत्र बनाते हैं।
- केन्द्रिक: एक या अधिक गोल, सघन संरचनाएँ जहाँ राइबोसोमल RNA (rRNA) का संश्लेषण होता है।
(ब) तारककाय (सेन्ट्रोसोम) की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर: तारककाय (Centrosome) प्रायः जन्तु कोशिकाओं में केन्द्रक के पास पाया जाता है।
- इसमें दो बेलनाकार संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें सेन्ट्रिओल कहते हैं। दोनों सेन्ट्रिओल एक-दूसरे से समकोण पर व्यवस्थित रहते हैं।
- प्रत्येक सेन्ट्रिओल नौ समूहों में व्यवस्थित त्रिक तंतुओं (तीन-तीन सूक्ष्मनलिकाओं के समूह) से बना होता है।
- सेन्ट्रिओल के चारों ओर के स्वच्छ कोशिकाद्रव्य के क्षेत्र को सेन्ट्रोस्फीयर कहते हैं।
प्रश्न 14. गुणसूत्र बिन्दु क्या है? गुणसूत्र बिन्दु की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र का वर्गीकरण किस रूप में होता है? विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों के चित्र बनाइए।
उत्तर: गुणसूत्र पर वह स्थान जहाँ दोनों क्रोमेटिड आपस में जुड़े होते हैं तथा जहाँ से तर्कु तंतु जुड़ते हैं, उसे गुणसूत्र बिन्दु या सेन्ट्रोमीयर कहते हैं।
सेन्ट्रोमीयर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्रों के प्रकार:
| प्रकार | विवरण | आकृति (सांकेतिक) |
|---|---|---|
| 1. अन्तकेन्द्री (Telocentric) | गुणसूत्र बिन्दु एकदम सिरे पर स्थित होता है। (मनुष्यों में नहीं पाए जाते) | I |
| 2. अग्रकेन्द्री (Acrocentric) | गुणसूत्र बिन्दु एक सिरे के बहुत पास होता है, जिससे एक भुजा बहुत छोटी और दूसरी बहुत लम्बी होती है। | > |
| 3. उपमध्य केन्द्री (Sub-metacentric) | गुणसूत्र बिन्दु मध्य के निकट होता है, जिससे दोनों भुजाएँ असमान लम्बाई की होती हैं। | L |
| 4. मध्य केन्द्री (Metacentric) | गुणसूत्र बिन्दु बिल्कुल मध्य में होता है, जिससे दोनों भुजाएँ लगभग बराबर लम्बाई की होती हैं। | V |
नोट: जब गुणसूत्र बिन्दु नहीं होता तो असेन्ट्रिक, और जब दो होते हैं तो द्विकेन्द्री गुणसूत्र कहलाते हैं।
--- अध्याय समाप्त ---
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