UP Board Class 11 Chemistry 4. रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: समान या भिन्न तत्वों के परमाणु आपस में संयोग करके रासायनिक आबंध बनाते हैं। आबंध बनने का मुख्य उद्देश्य परमाणुओं का स्थायित्व प्राप्त करना है। यह स्थायित्व दो प्रमुख तरीकों से प्राप्त होता है:
उत्तर:
| तत्त्व | इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (संयोजकता कोश) | लूइस बिंदु प्रतीक |
|---|---|---|
| Mg (Z=12) | 3s² | Mg: |
| Na (Z=11) | 3s¹ | Na· |
| B (Z=5) | 2s²2p¹ | ·B· |
| O (Z=8) | 2s²2p⁴ | :Ö: |
| N (Z=7) | 2s²2p³ | :Ñ· |
| Br (Z=35) | 4s²4p⁵ | :Br: |
उत्तर:
उत्तर:
| अणु/आयन | लूइस संरचना (सरलीकृत रूप) |
|---|---|
| H₂S | H : S : H (S पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म) |
| SiCl₄ | Cl : Si : Cl :Cl: :Cl: (Si पर कोई एकाकी युग्म नहीं) |
| BeF₂ | :F — Be — F: (रैखिक, Be अपूर्ण अष्टक) |
| CO₃²⁻ (कार्बोनेट आयन) | [ :O : C : O : ]²⁻ | :O: (तीन समतुल्य अनुनाद संरचनाएँ) |
| HCOOH (फॉर्मिक अम्ल) | H : O : | H — C : O : H (C=O द्विआबंध तथा C-O एकल आबंध) |
उत्तर:
परिभाषा: अष्टक नियम के अनुसार, रासायनिक आबंध बनाते समय परमाणु इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण या साझाकरण द्वारा अपने संयोजकता कोश में आठ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, जिससे वे निकटतम निष्क्रिय गैस का स्थायी विन्यास प्राप्त कर लेते हैं।
महत्त्व:
उत्तर: आयनिक आबंध के निर्माण के लिए निम्नलिखित कारक अनुकूल हैं:
उत्तर: VSEPR (वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन पेयर रिपल्शन) सिद्धांत के अनुसार, संयोजकता कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉन युग्म (आबंधी एवं एकाकी) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और अधिकतम दूरी पर व्यवस्थित होकर अणु की आकृति निर्धारित करते हैं।
| अणु | केंद्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म | आकृति | बंध कोण |
|---|---|---|---|
| BeCl₂ | 2 आबंधी युग्म, 0 एकाकी युग्म | रैखिक | 180° |
| BCl₃ | 3 आबंधी युग्म, 0 एकाकी युग्म | त्रिकोणीय समतलीय | 120° |
| SiCl₄ | 4 आबंधी युग्म, 0 एकाकी युग्म | चतुष्फलकीय | 109.5° |
| AsF₅ | 5 आबंधी युग्म, 0 एकाकी युग्म | त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी | 90° & 120° |
| H₂S | 2 आबंधी युग्म, 2 एकाकी युग्म | बंकित (कोणीय) | ≈92° |
| PH₃ | 3 आबंधी युग्म, 1 एकाकी युग्म | त्रिकोणीय पिरैमिडी | ≈93° |
उत्तर: NH₃ और H₂O दोनों में केंद्रीय परमाणु (N और O) sp³ संकरित है, जिससे चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
उत्तर: आबंध प्रबलता, आबंध कोटि के अनुक्रमानुपाती होती है। आबंध कोटि जितनी अधिक होगी, आबंध उतना ही अधिक प्रबल और छोटा होगा।
आबंध कोटि = (आबंधित कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या - प्रतिआबंधित कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या) / 2
उदाहरण:
उत्तर: दो आबंधित परमाणुओं के नाभिकों के बीच की साम्यावस्था दूरी को आबंध लंबाई कहते हैं। इसे सामान्यतः पिकोमीटर (pm) या ऐंग्स्ट्रॉम (Å) में मापा जाता है।
प्रभावित करने वाले कारक:
उत्तर: कार्बोनेट (CO₃²⁻) आयन में कार्बन परमाणु केंद्र में होता है और तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से जुड़ा होता है। इसकी वास्तविक संरचना तीन समतुल्य अनुनाद संरचनाओं के संकर के रूप में होती है, जहाँ सभी C-O आबंध समान लंबाई के होते हैं।
उत्तर: नहीं, संरचना (i) और (ii) H₃PO₃ की अनुनाद संरचनाएँ नहीं हैं।
कारण: अनुनाद तभी संभव है जब अणु या आयन में इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन होता है लेकिन परमाणुओं की स्थिति नहीं बदलती। दी गई संरचनाओं में हाइड्रोजन परमाणु का स्थान बदल गया है (एक H सीधे P से जुड़ा है, दूसरे में O से)। ये वास्तव में सामावयवी (Tautomeric) रूप हो सकते हैं, न कि अनुनादी रूप।
उत्तर:
| अणु/आयन | अनुनाद संरचनाएँ |
|---|---|
| सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) |
O=S-O O-S=O (दो अनुनाद संरचनाएँ, S=O द्विआबंध की स्थिति बदलती है) |
| नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) |
O=N-O O-N=O (दो अनुनाद संरचनाएँ, अणु वक्राकार है) |
| नाइट्रेट आयन (NO₃⁻) |
[O-N(=O)-O]⁻ [O=N(+)-O]⁻ [O-N-O(=O)]⁻ (तीन समतुल्य अनुनाद संरचनाएँ, आयन समतलीय है) |
उत्तर:
उत्तर:
उत्तर: द्विध्रुव आघूर्ण (μ) के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:
उत्तर:
विद्युत ऋणात्मकता: किसी सहसंयोजक आबंध में, एक परमाणु द्वारा आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को उस परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं। यह एक सापेक्षिक मान है (पॉलिंग पैमाना) और यह एक अणु में परमाणु का गुण है।
इलेक्ट्रॉन बंधुता: गैसीय अवस्था में एक उदासीन परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा को उसकी इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं। यह एक निरपेक्ष मान (kJ/mol में) है और यह एक पृथक परमाणु का गुण है।
मुख्य अंतर: विद्युत ऋणात्मकता एक अणु में परमाणु की इलेक्ट्रॉन खींचने की प्रवृत्ति का माप है, जबकि इलेक्ट्रॉन बंधुता एक पृथक परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की ऊर्जा का माप है।
उत्तर: जब एक सहसंयोजक आबंध दो भिन्न परमाणुओं के बीच बनता है और उनकी विद्युत ऋणात्मकता में पर्याप्त अंतर (लेकिन आयनिक आबंध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं)
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