UP Board Class 11 Political Science 6. न्यायपालिका is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह ली जाती है।
(ख) न्यायाधीशों को अमूमन अवकाश प्राप्ति की आयु से पहले नहीं हटाया जाता।
(ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता।
(घ) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल नहीं है।
उत्तर: (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता। (यह कथन गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का तबादला किया जा सकता है।)
उत्तर: न्यायपालिका की स्वतंत्रता का यह अर्थ कदापि नहीं है कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। न्यायपालिका भी संविधान का ही एक भाग है और संविधान के ऊपर नहीं है। इसका अर्थ है कि न्यायपालिका को भी संविधान के अनुसार ही कार्य करना होता है। न्यायपालिका का मुख्य उद्देश्य संविधान और लोकतंत्र के लक्ष्यों की पूर्ति करना है। अतः न्यायपालिका की स्वतंत्रता का तात्पर्य यह है कि उसके निर्णयों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाए, उसकी नियुक्ति, सेवाकाल और सेवा शर्तों के लिए वह कार्यपालिका या विधायिका पर निर्भर न हो, तथा न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया पक्षपातरहित हो। भारत में न्यायपालिका को यह स्वतंत्रता एवं सम्मानजनक स्थान प्राप्त है।
उत्तर: न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए भारतीय संविधान में निम्नलिखित प्रावधान हैं:
(क) मामला किस बारे में है?
उत्तर: यह मामला दहानू (मुम्बई) क्षेत्र के चीकू पैदा करने वाले उन किसानों को मुआवजा देने के बारे में है, जिनका थर्मल पावर प्लांट के नुकसानदायक रिसाव के कारण भारी नुकसान हुआ है।
(ख) इस मामले में लाभार्थी कौन है?
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से दहानू क्षेत्र के चीकू पैदा करने वाले किसानों को लाभ हुआ।
(ग) इस मामले में फरियादी (वादी) कौन है?
उत्तर: इस केस में दहानू क्षेत्र के चीकू पैदा करने वाले किसान वादी हैं।
(घ) सोच कर बताएँ कि कंपनी की तरफ से कौन-कौन से तर्क दिए जा सकते हैं?
उत्तर: रिलायंस कंपनी ने न्यायालय में यह दलील दी कि थर्मल पावर प्लांट के नुकसानदायक रिसाव को नियंत्रित करने के लिए एक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए।
(क) सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका की निशानदेही करें।
(ख) कार्यपालिका और न्यायपालिका के कामकाज की कौन-सी बातें आप इसमें पहचान सकते हैं?
(ग) इस प्रकरण से संबंधित नीतिगत मुद्दे, कानून बनाने से संबंधित बातें, क्रियान्वयन तथा कानून की व्याख्या से जुड़ी बातों की पहचान करें।
उत्तर:
(1) इस केस में केन्द्रीय सरकार व दिल्ली सरकार शामिल है।
(2) यातायात के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निश्चित मापदंड के आधार पर इस केस को तय करने में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
(3) कार्यपालिका प्रदूषण नियंत्रण की नीति तय करेगी तथा न्यायपालिका यह तय करेगी कि कार्यपालिका द्वारा नियमों का कितना उल्लंघन हुआ है।
(4) इस प्रकरण में नीतिगत निर्णय दिल्ली सरकार का यह है कि दिल्ली में सी.एन.जी. के प्रयोग वाली बसें चलेंगी। इस नीति के अनुसार दिल्ली सरकार कानून बनाएगी। नीति व कानून की व्याख्या के संबंध में यह निर्णय लिया गया कि ऐसा करते समय प्रदूषण से सुरक्षा को मुख्य रूप से ध्यान में रखा जाए।
सामान्य कानूनों की कोई संहिता अथवा पहले सुनाया गया कोई न्यायिक फैसला मौजूद होता तो पत्रकार के अधिकारों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती थी। दुर्भाग्य से इक्वाडोर की अदालत इस रीति से काम नहीं करती। पिछले मामलों में उच्चतर अदालत के न्यायाधीशों ने जो फैसले दिए हैं उन्हें कोई न्यायाधीश उदाहरण के रूप में मानने के लिए बाध्य नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका के विपरीत इक्वाडोर या दक्षिण अमेरिका में किसी और देश में जिस न्यायाधीश के सामने अपील की गई है उसे अपना फैसला और उसका कानूनी आधार लिखित रूप में नहीं देना होता। कोई न्यायाधीश आज एक मामले में कोई फैसला सुनाकर कल उसी मामले में दूसरा फैसला दे सकता है और इसमें उसे यह बताने की ज़रूरत नहीं कि वह ऐसा क्यों कर रहा है।
उत्तर: भारतीय न्याय प्रणाली में किसी विषय पर उच्च न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्णय आगे आने वाले निर्णयों के लिए मार्गदर्शक होते हैं और बाध्यकारी भी होते हैं। यह स्थिति इक्वाडोर के उदाहरण से भिन्न है, क्योंकि वहाँ न्यायाधीश पहले दिए गए निर्णय को मानने के लिए बाध्य नहीं होता। भारतीय न्याय व्यवस्था व इक्वाडोर की न्याय व्यवस्था में एक समानता यह है कि दोनों ही देशों में न्यायाधीश नई परिस्थितियों में किसी विषय पर अपना पहला निर्णय बदल सकते हैं।
(क) सरकार जानना चाहती थी कि क्या वह पाकिस्तान-अधिग्रहीत जम्मू-कश्मीर के निवासियों की नागरिकता के संबंध में कानून पारित कर सकती है।
उत्तर: परामर्श संबंधी (सलाहकारी) क्षेत्राधिकार
(ख) कावेरी नदी के जल विवाद के समाधान के लिए तमिलनाडु सरकार अदालत की शरण लेना चाहती है।
उत्तर: प्रारम्भिक (मूल) क्षेत्राधिकार
(ग) बाँध स्थल से हटाए जाने के विरुद्ध लोगों द्वारा की गई अपील को अदालत ने स्वीकार किया।
उत्तर: अपीलीय क्षेत्राधिकार
उत्तर: न्याय वितरण की प्रक्रिया में जनहित याचिका (PIL) की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण कदम है। इन याचिकाओं के माध्यम से उन व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सकता है जो स्वयं अपने हित की रक्षा अज्ञानता या आर्थिक संसाधनों के अभाव के कारण करने में असमर्थ हैं। ऐसे व्यक्तियों के हितों के लिए कुछ दयालु व्यक्ति या संस्थाएँ याचिका दायर करती हैं तथा आवश्यक प्रमाण व तथ्य प्रदान करके जनहित को प्राप्त करने का प्रयास करती हैं। सबसे पहले इस दिशा में न्यायाधीश पी. एन. भगवती ने 1984 में 'बंधुआ मुक्ति मोर्चा बनाम भारत सरकार' केस में इस प्रकार की याचिका स्वीकार करके पहल की, जिससे अनेक मज़दूरों को न्याय मिला। इस प्रकार जनहित याचिकाओं ने गरीब व असहाय लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उत्तर: हाँ, न्यायिक सक्रियता से न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच विरोध पनप सकता है। भारतीय न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है, जिसके आधार पर वह विधायिका द्वारा पारित कानूनों तथा कार्यपालिका द्वारा जारी आदेशों की संवैधानिक वैधता की जाँच कर सकती है। यदि ये संविधान के विपरीत पाए जाते हैं, तो न्यायपालिका उन्हें अवैध घोषित कर सकती है। जब न्यायपालिका न्यायिक सक्रियता के तहत कार्यपालिका के कार्यक्षेत्र में दखल देती है या उसके नीतिगत निर्णयों को चुनौती देती है, तो कार्यपालिका इसे अपने अधिकारों में हस्तक्षेप मान सकती है, जिससे तनाव उत्पन्न हो सकता है। हालाँकि, न्यायपालिका की यह शक्ति सीमित है और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उत्तर: न्यायिक सक्रियता मौलिक अधिकारों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। न्यायपालिका ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए अनेक ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया है जहाँ नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है, चाहे वह राज्य की ओर से हो या निजी पक्षों द्वारा। जनहित याचिकाओं के माध्यम से न्यायपालिका ने समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा की है। हाँ, न्यायिक सक्रियता ने मौलिक अधिकारों के विषय-क्षेत्र को निश्चित रूप से बढ़ाने में मदद की है। न्यायालयों ने मौलिक अधिकारों की व्याख्या को विस्तार देकर उनमें जीवन के अधिकार को गरिमामय जीवन जीने के अधिकार के रूप में, तथा पर्यावरण के अधिकार, सूचना का अधिकार जैसे नए आयाम जोड़े हैं, जिससे इन अधिकारों का दायरा व्यापक हुआ है।
उत्तर: प्रत्येक समाज में व्यक्तियों के बीच, समूहों के बीच और व्यक्ति या समूह तथा सरकार के बीच विवाद उठते हैं। इन सभी विवादों को 'कानून के शासन' के सिद्धांत के आधार पर एक स्वतंत्र संस्था द्वारा हल किया जाना चाहिए। 'कानून के शासन' का भाव यह है कि धनी और गरीब, स्त्री और पुरुष तथा अगड़े और पिछड़े सभी लोगों पर एक समान कानून लागू हो। न्यायपालिका की प्रमुख भूमिका यह है कि वह 'कानून के शासन' की रक्षा और कानून की सर्वोच्चता को सुनिश्चित करे। न्यायपालिका व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करती है, विवादों को कानून के अनुसार हल करती है और यह सुनिश्चित करती है कि लोकतंत्र की जगह किसी एक व्यक्ति या समूह की तानाशाही न ले ले। इसके लिए ज़रूरी है कि न्यायपालिका किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त हो।
उत्तर: स्वतंत्र न्यायपालिका का अर्थ है कि:
उत्तर: न्यायपालिका की स्वतंत्रता: भारतीय संविधान ने अनेक उपायों के द्वारा न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित की है। न्यायाधीशों की नियुक्तियों के मामले में विधायिका को सम्मिलित नहीं किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि इन नियुक्तियों में दलगत राजनीति की कोई भूमिका न रहे। न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए किसी व्यक्ति को वकालत का अनुभव या कानून का विशेषज्ञ होना चाहिए। उसके राजनीतिक विचार या निष्ठाएँ उसकी नियुक्ति का आधार नहीं बननी चाहिए।
न्यायपालिका की सुरक्षाएँ: न्यायाधीशों का कार्यकाल निश्चित होता है। वे सेवानिवृत्त होने तक पद पर बने रहते हैं। केवल अपवाद स्वरूप विशेष परिस्थितियों में ही न्यायाधीशों को हटाया जा सकता है। इसके अलावा, उनके कार्यकाल को कम नहीं किया जा सकता। कार्यकाल की सुरक्षा के कारण न्यायाधीश बिना भय या भेदभाव के अपना काम कर पाते हैं। संविधान में न्यायाधीशों को हटाने के लिए बहुत कठिन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। संविधान निर्माताओं का मानना था कि हटाने की प्रक्रिया कठिन हो, तो न्यायपालिका के सदस्यों का पद सुरक्षित रहेगा।
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से करता है। 1982 से 1998 के बीच यह विषय बार-बार सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया। शुरू में न्यायालय का विचार था कि मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पूरी तरह से सलाहकार की है। लेकिन बाद में न्यायालय ने माना कि मुख्य न्यायाधीश की सलाह राष्ट्रपति को ज़रूर माननी चाहिए। आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय ने एक नई व्यवस्था की। इसके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश अन्य चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की सलाह से कुछ नाम प्रस्तावित करेगा और इसी में से राष्ट्रपति नियुक्तियाँ करेगा। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्तियों की सिफारिश के संबंध में सामूहिकता का सिद्धांत स्थापित किया। इस तरह न्यायपालिका की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय और मंत्रिपरिषद् महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
UP Board Class 11 Political Science 6. न्यायपालिका Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 11 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 11 Political Science 6. न्यायपालिका textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 11 Political Science 6. न्यायपालिका :
There are various features of UP Board Class 11 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.