UP Board Class 11 Political Science (3. चुनाव और प्रतिनिधित्व) solution PDF
UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व Hindi Medium Solutions - PDF
Click Here to
UP Board Solutions - कक्षा 11 राजनीति विज्ञान
अध्याय 3: चुनाव और प्रतिनिधित्व
मुख्य बिंदु
- 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 543 में से 415 सीटें जीतीं, जो कुल 80 प्रतिशत से भी अधिक है।
- पूरे देश को 543 निर्वाचन क्षेत्रों में बाँट दिया गया है। प्रत्येक क्षेत्र से एक प्रतिनिधि चुना जाता है और जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।
- लोकसभा की 543 निर्वाचित सीटों में से 79 सीटें अनुसूचित जाति और 41 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
- 1989 तक, 21 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को वयस्क माना जाता था। 1989 के संविधान संशोधन द्वारा मतदान की आयु सीमा घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
- लोकसभा या विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की आयु कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए।
- यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दो या दो से अधिक वर्षों की जेल हुई हो, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग को देता है।
- 1993 में दो निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति हुई और तब से निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था बन गया है।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक सुरक्षित होता है।
- निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए प्रत्येक राज्य में एक मुख्य निर्वाचन अधिकारी होता है।
अभ्यास प्रश्नावली
प्रश्न 1. निम्नलिखित में कौन प्रत्यक्ष लोकतंत्र के सबसे नजदीक बैठता है?
(क) परिवार की बैठक में होने वाली चर्चा
(ख) कक्षा-संचालक (क्लास-मॉनीटर) का चुनाव
(ग) किसी राजनीतिक दल द्वारा अपने उम्मीदवार का चयन
(घ) मीडिया द्वारा करवाये गये जनमत-संग्रह
उत्तर: (घ) मीडिया द्वारा करवाये गये जनमत-संग्रह
प्रश्न 2. इनमें कौन-सा कार्य चुनाव आयोग नहीं करता?
(क) मतदाता-सूची तैयार करना
(ख) उम्मीदवारों का नामांकन
(ग) मतदान-केन्द्रों की स्थापना
(घ) आचार-संहिता लागू करना
(ङ) पंचायत के चुनावों का पर्यवेक्षण
उत्तर: (ख) उम्मीदवारों का नामांकन (नामांकन उम्मीदवार स्वयं भरते हैं, आयोग केवल प्रक्रिया की निगरानी करता है।)
प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन-सी बात राज्य सभा और लोक सभा के सदस्यों के चुनाव की प्रणाली में समान है?
(क) 18 वर्ष से ज्यादा की उम्र का हर नागरिक मतदान करने के योग्य है।
(ख) विभिन्न प्रत्याशियों के बारे में मतदाता अपनी पसंद को वरीयता क्रम में रख सकता है।
(ग) प्रत्येक मत का समान मूल्य होता है
(घ) विजयी उम्मीदवार को अधिक से अधिक मत प्राप्त होने चाहिए।
उत्तर: (ग) प्रत्येक मत का समान मूल्य होता है।
प्रश्न 4. फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली में वही प्रत्याशी विजेता घोषित किया जाता है जो -
(क) सर्वाधिक संख्या में मत अर्जित करता है
(ख) देश में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले दल का सदस्य हो।
(ग) चुनाव-क्षेत्र के अन्य उम्मीदवारों से ज्यादा मत हासिल करता है।
(घ) 50 प्रतिशत से अधिक मत हासिल करके प्रथम स्थान पर आता है।
उत्तर: (ग) चुनाव-क्षेत्र के अन्य उम्मीदवारों से ज्यादा मत हासिल करता है।
प्रश्न 5. पृथक निर्वाचन-मंडल और आरक्षित चुनाव-क्षेत्र के बीच क्या अंतर है? संविधान निर्माताओं ने पृथक निर्वाचन-मंडल को क्यों स्वीकार नहीं किया?
उत्तर:
अंतर:
- पृथक निर्वाचन-मंडल: इसमें किसी विशेष समुदाय का प्रतिनिधि चुनने के लिए केवल उसी समुदाय के लोग वोट डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, केवल मुस्लिम मतदाता ही मुस्लिम उम्मीदवार को चुन सकते थे।
- आरक्षित चुनाव-क्षेत्र: इसमें चुनाव क्षेत्र की सीट किसी विशेष समुदाय (जैसे अनुसूचित जाति/जनजाति) के लिए आरक्षित होती है, लेकिन उस क्षेत्र के सभी मतदाता (चाहे किसी भी जाति/समुदाय के हों) वोट डाल सकते हैं। हालाँकि, चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार उसी आरक्षित समुदाय का होना चाहिए।
पृथक निर्वाचन-मंडल को अस्वीकार करने के कारण: संविधान निर्माताओं का मानना था कि पृथक निर्वाचन-मंडल की व्यवस्था समाज में फूट और अलगाव को बढ़ावा देगी। यह राष्ट्रीय एकता के विचार के विपरीत था। उन्होंने आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को इसलिए चुना क्योंकि यह कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का एक बेहतर तरीका था, जो सभी मतदाताओं को एक साथ लाता था और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देता था।
प्रश्न 6. निम्नलिखित में कौन-सा कथन गलत है? इसकी पहचान करें और किसी एक शब्द अथवा पद को बदलकर, जोड़कर अथवा नये क्रम में सजाकर इसे सही करें।
(क) एक फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली (जो सबसे आगे वही जीते प्रणाली”) का पालन भारत के हर चुनाव में होता है।
सुधार: यह कथन गलत है। फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली का पालन भारत के अधिकांश चुनावों में होता है, लेकिन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।
(ख) चुनाव आयोग पंचायत और नगरपालिका के चुनावों का पर्यवेक्षण नहीं करता।
सुधार: यह कथन गलत है। संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के बाद, चुनाव आयोग पंचायत और नगरपालिका के चुनावों के पर्यवेक्षण का कार्य राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपता है, लेकिन यह एक समान पर्यवेक्षण तंत्र का ही हिस्सा है।
(ग) भारत का राष्ट्रपति किसी चुनाव आयुक्त को नहीं हटा सकता।
सुधार: यह कथन गलत है। राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया के समान एक विशेष बहुमत से हटाने की सिफारिश पर ही हटा सकता है। अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की सिफारिश मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सलाह पर राष्ट्रपति कर सकता है।
(घ) चुनाव आयोग में एक से ज्यादा चुनाव आयुक्त की नियुक्ति अनिवार्य है।
सुधार: यह कथन गलत है। चुनाव आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त होना अनिवार्य है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। हालाँकि, 1993 के बाद से इसे बहु-सदस्यीय बनाये रखने की प्रथा है।
प्रश्न 7. भारत की चुनाव-प्रणाली का लक्ष्य समाज के कमजोर तबके की नुमाइंदगी को सुनिश्चित करना है। लेकिन अभी तक हमारी विधायिका में महिला सदस्यों की संख्या 10 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंचती। इस स्थिति में सुधार के लिए आप क्या उपाय सुझायेंगे?
उत्तर: महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए जा सकते हैं:
- आरक्षण का प्रावधान: लोकसभा और विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएँ। महिला आरक्षण विधेयक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- राजनीतिक दलों की भूमिका: राजनीतिक दलों को अपने टिकटों का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 33%) महिला उम्मीदवारों को देना चाहिए।
- जागरूकता और शिक्षा: समाज में लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है।
- सुरक्षित वातावरण: चुनावी प्रक्रिया में महिला उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित और उत्पीड़न-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना।
- वित्तीय सहायता: महिला उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए विशेष रूप से वित्तीय सहायता या सब्सिडी प्रदान की जा सकती है।
प्रश्न 8. एक नये देश के संविधान के बारे में आयोजित किसी संगोष्ठी में वक्ताओं ने निम्नलिखित आशाएँ जतायीं। प्रत्येक कथन के बारे में बतायें कि उनके लिए फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणाली) उचित होगी या समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली प्रणाली?
(क) लोगों को इस बात की साफ़ - साफ़ जानकारी होनी चाहिए कि उनका प्रतिनिधि कौन है ताकि वे उसे निजी तौर पर जिम्मेदार ठहरा सके।
उत्तर: फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली। इस प्रणाली में एक स्पष्ट निर्वाचन क्षेत्र होता है और मतदाता सीधे एक विशेष प्रतिनिधि को चुनते हैं, जिससे जवाबदेही स्थापित करना आसान होता है।
(ख) हमारे देश में भाषाई रूप से अल्पसंख्यक छोटे-छोटे समुदाय हैं और देश भर में फैले हैं, हमें इनकी ठीक-ठीक नुमाइंदगी को सुनिश्चित करना चाहिए।
उत्तर: समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली। यह प्रणाली छोटे और बिखरे हुए अल्पसंख्यक समुदायों को उनके वोट शेयर के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने में अधिक प्रभावी है।
(ग) विभिन्न दलों के बीच सीट और वोट को लेकर कोई विसंगति नहीं रखनी चाहिए।
उत्तर: समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली। यह प्रणाली इस बात को सुनिश्चित करती है कि किसी दल को मिलने वाली सीटों का प्रतिशत, उसे मिले वोटों के प्रतिशत के लगभग बराबर हो।
(घ) लोग किसी अच्छे प्रत्याशी को चुनने में समर्थ होने चाहिए भले ही वे उसके राजनीतिक दल को पसंद न करते हों।
उत्तर: फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली। इस प्रणाली में मतदाता व्यक्तिगत उम्मीदवार के गुणों के आधार पर मतदान कर सकते हैं, न कि केवल दल के आधार पर।
प्रश्न 9. एक भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक राजनीतिक दल का सदस्य बनकर चुनाव लड़ा। इस मसले पर कई विचार सामने आये... आप इसमें किस पक्ष से सहमत हैं और क्यों?
उत्तर: मैं इस पक्ष से सहमत हूँ कि भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- निष्पक्षता पर प्रश्न: यदि सेवानिवृत्त आयुक्त किसी दल से जुड़कर चुनाव लड़ते हैं, तो यह संदेह पैदा कर सकता है कि कहीं उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ही उस दल के पक्ष में कोई पक्षपातपूर्ण निर्णय तो नहीं लिए।
- संस्था की गरिमा: निर्वाचन आयोग एक उच्च संवैधानिक पद है जिसकी निष्पक्षता और नैतिकता पर सभी का विश्वास होना चाहिए। ऐसे पद पर रह चुके व्यक्ति का सीधे राजनीति में आना आयोग की छवि को धूमिल कर सकता है।
- 'कूलिंग-ऑफ' अवधि: सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित 'कूलिंग-ऑफ' अवधि (जैसे 2-4 वर्ष) का प्रावधान होना चाहिए, जिसके बाद ही वे सक्रिय राजनीति में भाग ले सकें। इससे संदेह दूर होते हैं।
प्रश्न 10. "भारत का लोकतंत्र अब अनगढ़ 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' प्रणाली को छोड़कर समानुपातिक प्रतिनिध्यात्मक प्रणाली को अपनाने के लिए तैयार हो चुका है।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं? तर्क दें।
उत्तर: मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत नहीं हूँ। दोनों प्रणालियों के अपने गुण-दोष हैं और भारत के संदर्भ में FPTP प्रणाली के कुछ स्पष्ट लाभ हैं:
FPTP प्रणाली के पक्ष में तर्क (इसे बनाए रखने के कारण):
- स्थिर सरकार: FPTP प्रणाली आमतौर पर बहुमत वाली, स्थिर सरकार देती है, जो भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए शासन चलाने में महत्वपूर्ण है।
- प्रतिनिधि-मतदाता संबंध: यह एक स्पष्ट निर्वाचन क्षेत्र और प्रत्यक्ष जवाबदेही स्थापित करती है। मतदाता जानते हैं कि उनकी समस्याओं के लिए किसे दोषी ठहराना है।
- सादगी: यह प्रणाली समझने और मतदान करने में सरल है, जो भारत जैसे देश में निरक्षरता को देखते हुए एक बड़ा लाभ है।
- क्षेत्रीय दलों का उदय: FPTP ने क्षेत्रीय दलों को भी मजबूत बनाया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों को उठाते हैं।
PR प्रणाली के पक्ष में तर्क (बदलाव के कारण):
- अधिक न्यायसंगत प्रतिनिधित्व: PR प्रणाली वोटों और सीटों के बीच बेहतर अनुपात सुनिश्चित करती है और छोटे दलों व विचारधाराओं को भी प्रतिनिधित्व देती है।
- राष्ट्रीय मुद्दे: यह राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनावी बहस को बढ़ावा दे सकती है, न कि केवल स्थानीय मुद्दों पर।
निष्कर्ष: भारत के लिए एकदम PR प्रणाली पर स्विच करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे सरकारों की अस्थिरता बढ़ सकती है। हालाँकि, एक मिश्रित प्रणाली (जैसे कुछ सीटें FPTP और कुछ PR के आधार पर) पर विचार किया जा सकता है ताकि दोनों प्रणालियों के लाभ मिल सकें। फिलहाल, भारत की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में FPTP प्रणाली ही अधिक उपयुक्त प्रतीत होती है।
अतिरिक्त प्रश्नावली
प्रश्न 1. फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम क्या है?
उत्तर: यह एक चुनावी प्रणाली है जिसमें देश को कई निर्वाचन क्षेत्रों में बाँट दिया जाता है। प्रत्येक क्षेत्र से केवल एक प्रतिनिधि चुना जाता है। जिस उम्मीदवार को अन्य सभी उम्मीदवारों से अधिक वोट मिलते हैं (चाहे वह कुल वोटों का 50% न भी हो), उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। इसे 'सबसे आगे, वही जीते' या बहुलता प्रणाली भी कहते हैं।
प्रश्न 2. समानुपातिक प्रतिनिधित्व से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी राजनीतिक दल को विधानमंडल में मिलने वाली सीटों का प्रतिशत, उसे चुनाव में मिले वोटों के प्रतिशत के अनुपात में हो। मतदाता सीधे उम्मीदवार को नहीं, बल्कि राजनीतिक दल को वोट देते हैं। दल पहले से ही प्राथमिकता क्रम में उम्मीदवारों की सूची जारी कर देते हैं। वोटों के प्रतिशत के आधार पर दलों को सीटें आवंटित की जाती हैं और सूची से उतने उम्मीदवार चुन लिए जाते हैं। इज़राइल और नीदरलैंड इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 3. "सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत" और "समानुपातिक प्रतिनिधित्व" चुनाव व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर:
| आधार | फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) | समानुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) |
|---|---|---|
| निर्वाचन क्षेत्र | छोटे, एकल-सदस्यीय क्षेत्र। | बड़े, बहु-सदस्यीय क्षेत्र या पूरा देश एक क्षेत्र। |
| मतदान का आधार | मतदाता उम्मीदवार को वोट देता है। | मतदाता राजनीतिक दल को वोट देता है। |
| प्रतिनिधित्व का सिद्धांत | विजेता को सभी का प्रतिनिधि माना जाता है (बहुलता)। | सभी दलों को वोट शेयर के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलता है। |
Get UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व Solution in Hindi MediumUP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व Solution is available at our platform https://upboardbook.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 11 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board. Importance of UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व Text SolutionsIt is essential to know the importance of UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 11 Political Science 3. चुनाव और प्रतिनिधित्व :
Features of UP Board Class 11 textSolutionsThere are various features of UP Board Class 11 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.
Disclaimer: UPBoardBook is an independent educational website. We are not affiliated with, endorsed by, or the official website of the Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP / UP Board). Official notices, results, and circulars are published only at upmsp.edu.in. |