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UP Board Class 7 Social Studies (1. समानता) solution PDF

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UP Board Class 7 Social Studies (1. समानता) solution

UP Board Class 7 Social Studies 1. समानता Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 7 Social Science (सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन 1)

Chapter 1: समानता

01. लोकतंत्र में सार्वभीमिक वयस्क मताधिकार क्‍यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र की नींव है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  1. यह सुनिश्चित करता है कि देश का प्रत्येक वयस्क नागरिक, चाहे वह अमीर हो या गरीब, पढ़ा-लिखा हो या नहीं, सरकार चुनने में बराबर की भागीदारी रखता है।
  2. यह राजनीतिक समानता लाता है। एक मजदूर के वोट का मूल्य एक मंत्री या एक उद्योगपति के वोट के बराबर होता है।
  3. यह सरकार को यह एहसास दिलाता है कि उसे सभी लोगों के प्रति जवाबदेह होना है, क्योंकि अगली बार हर कोई उसे वोट दे सकता है या नहीं भी दे सकता है।
  4. इससे समाज में फैली जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्तर की असमानताओं को दूर करने में मदद मिलती है, क्योंकि वोट डालते समय सभी एक समान होते हैं।

(2. बॉक्स में दिए गए संविधान के अनुच्छेद 15 के अंश को पुनः पढ़िए और दो ऐसे तरीके बताइए, जिनसे यह अनुच्छेद असमानता को दूर करता है?

उत्तर: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 असमानता दूर करने में एक मजबूत हथियार है। यह दो प्रमुख तरीकों से काम करता है:

  1. भेदभाव पर रोक: यह अनुच्छेद राज्य (सरकार) को किसी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश (नस्ल), जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है। इसका मतलब है कि सरकारी स्कूल, अस्पताल, पार्क, बस आदि सभी के लिए समान रूप से खुले हैं।
  2. विशेष प्रावधान की अनुमति: यह अनुच्छेद राज्य को महिलाओं, बच्चों, और सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (विशेषकर अनुसूचित जाति व जनजाति) के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है। इससे पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है और वास्तविक समानता स्थापित होती है।

3. ओमप्रकाश वाल्मीकि का अनुभव, अंसारी दंपति के अनुभव से किस प्रकार मिलता था?

उत्तर: ओमप्रकाश वाल्मीकि और अंसारी दंपति के अनुभव निम्नलिखित बातों में मिलते-जुलते थे:

  1. गरिमा पर चोट: दोनों ही मामलों में व्यक्तियों की गरिमा और आत्म-सम्मान को गहरी चोट पहुँचाई गई। ओमप्रकाश को सिर्फ उनकी जाति के कारण स्कूल में झाड़ू लगाने को मजबूर किया गया, जबकि अंसारी दंपति को उनके धर्म के कारण मकान किराए पर देने से मना कर दिया गया।
  2. पूर्वाग्रह का शिकार: दोनों ही पीड़ित समाज में मौजूद गहरे पूर्वाग्रहों और रूढ़िवादी सोच के शिकार बने। उनके साथ उनकी योग्यता, चरित्र या आवश्यकता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी जाति और धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया।
  3. सार्वजनिक जीवन में असमानता: दोनों घटनाएँ दर्शाती हैं कि समानता का संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद, स्कूल और आवास जैसे सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में असमानता की घटनाएँ घटित होती रहती हैं।

004. "कानून के सामने सब व्यक्ति बराबर हैं" -इस कथन से आप क्‍या समझते हैं? आपके विचार से यह लोकतंत्र में महत्त्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर: "कानून के सामने सब व्यक्ति बराबर हैं" इस कथन का अर्थ है:

  1. देश का एक ही कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वह व्यक्ति राष्ट्रपति हो या एक साधारण किसान। किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाता।
  2. कानून किसी के साथ उसकी जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करता। एक ही अपराध के लिए सभी के लिए दंड का प्रावधान समान होता है।
  3. कानून सभी को समान संरक्षण प्रदान करता है। यदि किसी के अधिकारों का हनन होता है, तो कानूनी सहायता पाने का अवसर सबको बराबर मिलता है।

लोकतंत्र में इसका महत्व: लोकतंत्र में यह सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • यह सुनिश्चित करता है कि सत्ता में बैठे लोग मनमानी न कर सकें और वे भी कानून के अधीन रहें।
  • यह नागरिकों के बीच न्याय और विश्वास की भावना पैदा करता है। लोगों को लगता है कि उनके साथ न्याय होगा।
  • यह सामाजिक न्याय की स्थापना का आधार है। बिना इसके, शक्तिशाली लोग कमजोरों का शोषण करते रहेंगे और लोकतंत्र सही अर्थों में काम नहीं कर पाएगा।

प्रश्न - गरिमा शब्द का अर्थ बताइए |

उत्तर: गरिमा का अर्थ है आत्म-सम्मान और मानवीय मूल्य। यह वह भावना है जो हर इंसान को यह एहसास दिलाती है कि वह सम्मान के योग्य है और उसके साथ भी सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। जब किसी के साथ भेदभाव किया जाता है या उसे नीचा दिखाया जाता है, तो उसकी गरिमा को ठेस पहुँचती है।


प्रश्न - संविधान क्‍या है ?

उत्तर: संविधान किसी देश का सर्वोच्च कानूनी दस्तावेज है। इसे देश का "आधारभूत कानून" या "संविधान पुस्तक" भी कहा जाता है। इसमें वे मौलिक नियम और सिद्धांत लिखे होते हैं जिनके आधार पर देश का शासन चलता है। यह सरकार की संरचना, उसकी शक्तियाँ, कर्तव्य और नागरिकों के मौलिक अधिकार व कर्तव्य निर्धारित करता है। भारत का संविधान देश को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाता है।


प्रश्न - नागरिक अधिकार आन्दोलन क्‍या है ?

उत्तर: नागरिक अधिकार आंदोलन संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में 1950 और 1960 के दशक में चला एक ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण संघर्ष था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों (ब्लैक लोगों) के खिलाफ होने वाले नस्लीय भेदभाव और अलगाव (रंगभेद) की नीतियों को समाप्त करना था। इस आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर थे। इस आंदोलन के कारण ही अमेरिका में कानून बने जिन्होंने सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और रोजगार में नस्ल के आधार पर भेदभाव को गैर-कानूनी घोषित कर दिया।


प्रश्न - भारत सरकार ने विकलांगता अधिनियम कब स्वीकृत किया ? यह अधिनियम विकलांग व्यक्तियों को कौन-कौन से अधिकार देता है ?

उत्तर: भारत सरकार ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए 1995 में विकलांगता अधिनियम (Persons with Disabilities Act) पारित किया था।

यह अधिनियम विकलांग व्यक्तियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण अधिकार देता है:

  1. समानता और भागीदारी का अधिकार: विकलांग व्यक्तियों को भी समाज में पूर्ण और समान भागीदारी का अधिकार है।
  2. शिक्षा का अधिकार: सरकार का दायित्व है कि वह विकलांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करे और उन्हें सामान्य स्कूलों की "मुख्यधारा" में शामिल करे (समावेशी शिक्षा)।
  3. पहुँच का अधिकार: सभी सार्वजनिक भवनों, स्कूलों, अस्पतालों, परिवहन और सड़कों को विकलांग-अनुकूल बनाना अनिवार्य है, जैसे कि रैंप (ढलान) बनवाना, शौचालयों में विशेष सुविधाएँ देना आदि, ताकि उनकी वहाँ पहुँच आसान हो।
  4. रोजगार में आरक्षण: सरकारी नौकरियों में विकलांग व्यक्तियों के लिए कुछ सीटें आरक्षित की गई हैं।

(नोट: बाद में, इस अधिनियम को और अधिक व्यापक बनाते हुए 2016 में 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम' लागू किया गया।)


प्रश्न - सभी लोकतांत्रिक देशो के लिए कौन -सा तत्व अप्रिहार्य है ?

उत्तर: सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार एक अनिवार्य और अत्यावश्यक तत्व है। बिना इसके लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती।


प्रश्न - सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार किस विचार पर आधारित है ?

उत्तर: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार समानता के मौलिक सिद्धांत पर आधारित है। यह विचार मानता है कि राज्य के सभी वयस्क नागरिक, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, अपनी सरकार चुनने के निर्णय में बराबर की हिस्सेदारी रखने के हकदार हैं।


प्रश्न - मध्याहन भोजन कार्यक्रम क्‍या है ? इसके तीन लाभों का वर्णन कीजिए |

उत्तर: मध्याहन भोजन कार्यक्रम (MDM) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत देश के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निःशुल्क और पौष्टिक दोपहर का भोजन प्रदान किया जाता है।

इस कार्यक्रम के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना: इससे गरीब परिवारों के बच्चे नियमित रूप से स्कूल आने लगे क्योंकि उन्हें एक पौष्टिक भोजन मिलने लगा। इससे ड्रॉप-आउट (स्कूल छोड़ने) की दर में कमी आई।
  2. कुपोषण दूर करना और स्वास्थ्य सुधार: यह योजना बच्चों को आवश्यक पोषण प्रदान करके उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में सहायक बनी, खासकर गरीब क्षेत्रों में।
  3. सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना: एक साथ बैठकर भोजन करने से विभिन्न जाति, धर्म और आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों के बीच की दूरियाँ कम हुईं और समानता की भावना मजबूत हुई।
  4. शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना: भूखे पेट बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते। पेट भरा होने से उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता में सुधार हुआ।

प्रश्न - सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्‍या है ?

उत्तर: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लोकतंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि देश का प्रत्येक नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, उसे अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान (वोट) देने का अधिकार है। यह अधिकार बिना किसी भेदभाव के दिया जाता है, अर्थात वोट देने का अधिकार धर्म, जाति, लिंग, शिक्षा या आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं करता।


प्रश्न - भारत में असमानता का एक सामान्य रूप कौन-सा है?

उत्तर: भारत में असमानता का एक सबसे सामान्य और प्राचीन रूप जाति व्यवस्था (Caste System) है। इस व्यवस्था के कारण लोगों को जन्म के आधार पर उच्च और निम्न जातियों में बाँट दिया गया था, जिसमें निचली जातियों के लोगों के साथ सदियों से भेदभाव, छुआछूत और शोषण किया जाता रहा है।


प्रश्न - 'जूठन' क्या है ?

उत्तर: 'जूठन' प्रसिद्ध दलित लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा (जीवनी) है। इस पुस्तक में उन्होंने एक दलित के रूप में भारतीय समाज में सामना की गई यातना, अपमान, भेदभाव और संघर्ष की मार्मिक कहानी लिखी है। यह पुस्तक भारत में जातिगत असमानता की क्रूर वास्तविकता को उजागर करती है।


प्रश्न - किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को किस प्रकार ठेस पहुचाई जाती है ? अंसारी दंपति ने प्रोपर्टी डीलर के नाम बदल लेने की सलहा को क्‍यों टुकरा दिया ?

उत्तर:

(क) आत्मसम्मान को ठेस कैसे पहुँचती है? किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को तब ठेस पहुँचती है जब उसके साथ उसकी व्यक्तिगत पहचान (जैसे जाति, धर्म, लिंग) या मानवीय गरिमा के आधार पर भेदभावपूर्ण या अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। उदाहरण के लिए, किसी को उसकी जाति के कारण सार्वजनिक कुएं से पानी भरने से रोकना, या किसी महिला को उसके लिंग के कारण शिक्षा से वंचित रखना उसके आत्मसम्मान पर प्रहार है।

(ख) अंसारी दंपति ने सलाह क्यों ठुकरा दी? अंसारी दंपति ने प्रॉपर्टी डीलर द्वारा अपना नाम बदलने (शायद हिंदू नाम रखने) की सलाह इसलिए ठुकरा दी क्योंकि:

  1. यह सलाह उनके धार्मिक पहचान को छिपाने के लिए दी गई थी, जो उनके लिए एक मौलिक अधिकार और गर्व का विषय था। अपना नाम बदलना उनकी पहचान से समझौता करना होता।
  2. इससे उनकी गरिमा और आत्म-सम्मान को गहरी चोट पहुँचती। वे नहीं चाहते थे कि भेदभाव के डर से उन्हें अपना असली स्वरूप छिपाना पड़े। उन्होंने असमानता के सामने झुकने के बजाय, अपने सम्मान के साथ खड़े रहना चुना।
  3. वे चाहते थे कि समाज उन्हें उनके धर्म के कारण नहीं, बल्कि एक अच्छे इंसान और भरोसेमंद किरायेदार के रूप में स्वीकार करे।

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2. स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका
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4. लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना
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10. समानता के लिए संघष्
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