Understanding Media (संचार माध्यमों को समझना)
पाठगत प्रश्न
1. अपने परिवार के बड़े लोगों से पूछिए कि जब टी.वी. नहीं था, तब वे रेडियो पर क्या सुनते थे? उनसे पूछिए कि आपके क्षेत्र में पहले-पहल टी.वी. कब आया था? केबल टी.वी. कब शुरू हुआ? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-71)
उत्तर : परिवार के बड़े सदस्यों से बात करने पर पता चला कि टीवी के आने से पहले वे रेडियो पर समाचार बुलेटिन, संगीत कार्यक्रम, नाटक, धारावाहिक और क्रिकेट जैसे खेलों के कमेंट्री सुनते थे। हमारे इलाके में पहला टीवी लगभग सन् 1985 के आसपास आया था। केबल टीवी की शुरुआत 1990 के दशक के मध्य में हुई, जिससे देश-विदेश के कई चैनल देखना संभव हो गया।
2. आपके पड़ोस में कितने लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं? (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, -71)
उत्तर : हमारे पड़ोस में इंटरनेट का प्रयोग अब तेजी से बढ़ रहा है। लगभग 60-70% परिवारों में स्मार्टफोन या कंप्यूटर के माध्यम से इंटरनेट का उपयोग होता है, खासकर युवा पीढ़ी और स्कूल जाने वाले बच्चे इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
3. ऐसी तीन चीज़ों की सूची बनाइए, जो संसार के किन्हीं अन्य भागों से संबंधित हैं और जिनके बारे में आपने टेलीविजन देखकर जाना है। | (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-71)
उत्तर : टेलीविजन देखकर दुनिया के अन्य भागों के बारे में जो जानकारी मिली, उनमें से तीन हैं:
- अमेज़न वर्षावन (दक्षिण अमेरिका) - यह दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन है और वन्यजीवों से भरपूर है।
- उत्तरी ध्रुव पर ऑरोरा (Aurora) या उत्तरी रोशनी - यह आकाश में दिखने वाला एक अद्भुत प्राकृतिक प्रकाश शो है।
- जापान की बुलेट ट्रेन (शिंकनसेन) - यह दुनिया की सबसे तेज और सुरक्षित रेलगाड़ियों में से एक है।
4. अपने प्रिय टी.वी. कार्यक्रम के दौरान विज्ञापित होने वाली तीन चीज़ों की सूची बनाइए। (एन०्सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-72)
उत्तर : मेरे पसंदीदा टीवी कार्यक्रम के दौरान आमतौर पर निम्नलिखित चीजों के विज्ञापन दिखाए जाते हैं:
- विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स और वेबसाइट्स।
- नए स्मार्टफोन और डेटा प्लान।
- स्वादिष्ट नमकीन और पेय पदार्थ (जैसे चिप्स और कोल्ड ड्रिंक)।
5. एक समाचार-पत्र लीजिए और उसमें दिए गए विज्ञापनों की संख्या गिनिए। कुछ लोग कहते हैं कि | समाचार-पत्रों में बहुत अधिक विज्ञापन होते हैं। क्या आप सोचते हैं कि यह बात सही है? यदि हो, तो क्यों? (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-72)
उत्तर : हाँ, यह बात बिल्कुल सही है कि समाचार पत्रों में बहुत अधिक विज्ञापन होते हैं। एक सामान्य अखबार के एक संस्करण में 50 से 200 या उससे भी अधिक विज्ञापन हो सकते हैं। इसके मुख्य कारण हैं:
- आय का मुख्य स्रोत: अखबार की बिक्री से मिलने वाली रकम बहुत कम होती है। विज्ञापनों से मिलने वाली आय ही अखबार के छपाई, कागज, पत्रकारों के वेतन आदि का खर्च चलाती है।
- पाठकों की विविध जरूरतों को पूरा करना: विज्ञापन सिर्फ सामान बेचने के लिए ही नहीं, बल्कि नौकरियों, शैक्षणिक कोर्सेज, सरकारी सूचनाओं, संपत्ति खरीद-बिक्री आदि के बारे में जानकारी देते हैं, जो पाठकों के लिए उपयोगी होते हैं।
- अखबार को सस्ता रखना: विज्ञापनों की आय के कारण ही अखबार की कीमत कम रखी जा सकती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे खरीद सकें।
6. क्या आप ऐसा सोचते हैं कि किसी विषय के दोनों पक्षों को जानना महत्त्वपूर्ण है? क्यों? (एन०सी०ई०आरगण्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-75)
उत्तर : हाँ, किसी भी विषय या मुद्दे के दोनों पक्षों (पक्ष और विपक्ष) को जानना बेहद जरूरी है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- संतुलित और निष्पक्ष राय बनाने में मदद: सिर्फ एक तरफ की जानकारी से हमारी राय अधूरी और पक्षपातपूर्ण हो सकती है। दोनों पक्ष सुनने के बाद हम तथ्यों का बेहतर विश्लेषण कर सकते हैं।
- प्रजातंत्र की मजबूती: एक स्वस्थ लोकतंत्र में हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सरकारी नीतियों के फायदे और नुकसान दोनों को समझे, तभी वह सही मतदान कर सकता है।
- निर्णय लेने की क्षमता का विकास: दोनों पक्षों की जानकारी हमें समस्या के हर कोण से देखना सिखाती है, जिससे हमारी निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।
7. संचार माध्यमों के द्वारा एजेंडा तय करते हुए झोपड़पट्टियों के स्थान पर फैशन वीक की खबर देने से क्या नतीजा निकलता है? (एन०्सी०ई०आरग्टी० पाव्यपुस्तक, पेज-77)
उत्तर : संचार माध्यमों द्वारा झोपड़पट्टियों की समस्याओं (जैसे पानी, स्वच्छता, शिक्षा) की जगह फैशन वीक जैसी खबरों को प्राथमिकता देने से निम्नलिखित परिणाम निकलते हैं:
- महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी: समाज के एक बड़े और गरीब वर्ग की वास्तविक समस्याएं सार्वजनिक चर्चा और सरकार का ध्यान नहीं खींच पातीं, जिससे उनका समाधान नहीं हो पाता।
- गलत प्राथमिकताएं: आम जनता, खासकर युवा, का ध्यान समाज की जरूरी चिंताओं से हटकर भौतिकवाद और फैशन जैसे विषयों पर केंद्रित हो जाता है।
- व्यावसायिक हितों की पूर्ति: फैशन वीक की खबरें विज्ञापनदाताओं और अमीर उपभोक्ताओं को लुभाती हैं, जिससे मीडिया को ज्यादा आय होती है। इस प्रकार मीडिया जनहित के बजाय व्यावसायिक हितों से प्रेरित हो जाता है।
प्रश्न-अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)
1. प्रजातंत्र में संचार माध्यम किस प्रकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
उत्तर : प्रजातंत्र (लोकतंत्र) में संचार माध्यमों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- सूचना का पुल: मीडिया सरकार और जनता के बीच एक पुल का काम करता है। यह नागरिकों को बताता है कि सरकार क्या नीतियाँ बना रही है और उनका क्रियान्वयन कैसे हो रहा है।
- जनता की आवाज: यह आम लोगों की समस्याओं, शिकायतों और मांगों को उठाकर सरकार तक पहुँचाता है, जिससे सरकार जनता की भावनाओं से अवगत रहती है।
- निगरानी करना: मीडिया सरकार और शक्तिशाली लोगों के कामकाज पर नजर रखता है। भ्रष्टाचार, गलत काम या शक्ति के दुरुपयोग को उजागर करके यह सरकार को जवाबदेह बनाता है। इसलिए इसे लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाता है।
- जनमत निर्माण: किसी मुद्दे पर विभिन्न विचारों को प्रस्तुत करके मीडिया लोगों में चर्चा और बहस को बढ़ावा देता है, जिससे एक सूचित और सक्रिय जनमत तैयार होता है।
2. क्या आप इस रेखाचित्र को एक शीर्षक दे सकते हैं? इस रेखाचित्र से आप संचार माध्यम और बड़े व्यापार के परस्पर संबंध के बारे में क्या समझ पा रहे हैं?
उत्तर :
- शीर्षक: “विज्ञापन: व्यापार और मीडिया का गठजोड़”
- संबंध की समझ: इस रेखाचित्र से हमें संचार माध्यम और बड़े व्यापार के बीच के गहरे संबंध के बारे में पता चलता है:
- बड़े व्यवसाय अपने उत्पादों को बेचने के लिए मीडिया पर भारी मात्रा में विज्ञापन देते हैं।
- इन विज्ञापनों से मीडिया कंपनियों (टीवी चैनल, अखबार) को बहुत अधिक आय प्राप्त होती है, जिससे वे चलते हैं।
- कई बार मीडिया अपने बड़े विज्ञापनदाताओं के हित में खबरें छापता या दिखाता है या उनके खिलाफ खबरें नहीं दिखाता। इससे मीडिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
- इस प्रकार, यह संबंध एक चक्र बनाता है जहाँ व्यापार को बाजार मिलता है और मीडिया को पैसा, लेकिन कई बार यह जनहित से ज्यादा व्यावसायिक हितों को बढ़ावा देने लगता है।
3. आप पढ़ चुके हैं कि संचार माध्यम किस प्रकार एजेंडा बनाते हैं। इनका प्रजातंत्र में क्या प्रभाव पड़ता है? अपने विचारों के पक्ष में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर : मीडिया द्वारा एजेंडा बनाने का लोकतंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है।
- प्रभाव: मीडिया यह तय करता है कि कौन-सा मुद्दा जनता की चर्चा और सरकार की प्राथमिकता में शामिल होगा। इससे लोगों का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर जा सकता है या फिर गैर-जरूरी मुद्दों में उलझ भी सकता है।
उदाहरण:
- सकारात्मक उदाहरण: स्वच्छ भारत अभियान को शुरू में मीडिया ने बहुत प्रमुखता से कवर किया। समाचार, बहस और विज्ञापनों के माध्यम से स्वच्छता के महत्व को लोगों के एजेंडे में लाया गया, जिससे जनता में जागरूकता बढ़ी और लोग इस अभियान से जुड़े।
- नकारात्मक उदाहरण: कई बार मीडिया किसी सेलिब्रिटी के निजी जीवन या फिल्मों की चर्चा को इतना ज्यादा प्रमुखता दे देता है कि उसी समय हो रही किसी महत्वपूर्ण किसान आंदोलन या शिक्षा नीति पर बहस जनता का ध्यान नहीं खींच पाती। इससे लोकतांत्रिक चर्चा का एजेंडा गलत दिशा में चला जाता है।
4. कक्षा परियोजना के रूप में समाचारों में से कोई एक शीर्षक चुनकर उस पर ध्यान केंद्रित कीजिए। और अन्य समाचार-पत्रों में से उससे संबंधित विवरण छाटिए। दूरदर्शन समाचार पर भी इस विषय पर प्रसारित सामग्री देखिए। दो समाचार-पत्रों के विवरण की तुलना करके उनमें समानता और भिन्नता की रिपोर्ट लिखिए। निम्नलिखित प्रश्न पूछना सहायक हो सकता है
(क) इस लेख में क्या जानकारी दी जा रही है?
(ख) कौन-सी जानकारी इसमें छोड़ दी गई है?
(ग) यह लेख किसके दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर लिखा गया है?
(घ) किसके दृष्टिकोण को छोड़ दिया गया है और क्यों?
उत्तर : परियोजना रिपोर्ट: ‘शहर में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर चिंता’
तुलना: ‘राष्ट्रीय दैनिक’ और ‘नगर टाइम्स’ अखबार
(क) इस लेख में क्या जानकारी दी जा रही है?
- राष्ट्रीय दैनिक: इसने वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े, प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव (दमा, फेफड़ों के रोग) और पर्यावरण विशेषज्ञों के सुझाव (वाहनों पर पाबंदी, पौधारोपण) पर जोर दिया।
- नगर टाइम्स: इसने प्रदूषण के कारण हो रही तात्कालिक परेशानियों जैसे धुंध, सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि, स्कूल बंद होने और आम लोगों (रिक्शा चालक, सड़क पर काम करने वाले) की प्रतिक्रियाओं को प्रमुखता से दिखाया।
(ख) कौन-सी जानकारी इसमें छोड़ दी गई है?
- राष्ट्रीय दैनिक: इसने प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले गरीब मजदूर वर्ग की रोजमर्रा की दिक्कतों और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से नहीं लिखा।
- नगर टाइम्स: इसने प्रदूषण के लिए जिम्मेदार उद्योगों या निर्माण कंपनियों के नाम या सरकार द्वारा उन पर की गई कार्रवाई के बारे में गहराई से जानकारी नहीं दी।
(ग) यह लेख किसके दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर लिखा गया है?
- राष्ट्रीय दैनिक: यह लेख शहरी मध्यम वर्ग, शिक्षित पाठकों और नीति निर्माताओं के दृष्टिकोण से लिखा गया प्रतीत होता है, जो आंकड़ों और विशेषज्ञ राय में दिलचस्पी रखते हैं।
- नगर टाइम्स: यह लेख स्थानीय निवासियों और आम आदमी के दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जो प्रदूषण से अपनी दैनिक जिंदगी में होने वाली परेशानियों से जूझ रहे हैं।
(घ) किसके दृष्टिकोण को छोड़ दिया गया है और क्यों?
- राष्ट्रीय दैनिक ने छोटे व्यवसायियों और उद्योग मालिकों के दृष्टिकोण को कम स्थान दिया, जो प्रदूषण नियंत्रण के नए नियमों से अपने कारोबार पर पड़ने वाले आर्थिक असर को लेकर चिंतित हो सकते हैं। संभवतः इसका कारण अखबार का पाठक वर्ग है जो सामान्यतः इन मुद्दों से सीधे जुड़ा नहीं है।
- नगर टाइम्स ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के दृष्टिकोण को विस्तार से नहीं दिखाया, क्योंकि वह अपनी रिपोर्टिंग को स्थानीय, मानवीय और भावनात्मक पहलू पर केंद्रित रखना चाहता था।
निष्कर्ष: दोनों अखबारों ने एक ही मुद्दे को अलग-अलग कोण से देखा। यह तुलना हमें सिखाती है कि किसी भी खबर को पूरी तरह समझने के लिए एक से अधिक स्रोत पढ़ना जरूरी है, ताकि हमें मुद्दे के हर पहलू की जानकारी मिल सके।