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UP Board Class 7 Social Studies (2. स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका) solution PDF

UP Board Class 7 Social Studies 2. स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 7 Social Studies (2. स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका) solution

UP Board Class 7 Social Studies 2. स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 7 Social Science (सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन 2)

प्रश्न - क्या आप इन स्तंभों को कोई शीर्षक दे सकते है ?

उत्तर: हाँ, दिए गए स्तंभों को निम्नलिखित शीर्षक दिए जा सकते हैं:

शीर्षक
बाएँ हाथ का स्तंभ: भारत में स्वास्थ्य सेवा तंत्र का विकास
दायें हाथ का स्तंभ: भारत में स्वास्थ्य सेवा तंत्र की समस्याएँ

प्रश्न - भारत में प्राय: कहा जाता है कि हम सबको स्वास्थ्य सेवाए प्रदान करने में असमर्थ है , क्योंकि सरकार पास इसके लिए पर्याप्त धन और सुविधाए नही है | ऊपर दिए गए स्तंभ को पढ़ने बाद क्या आप इसे सही मानते है ?

उत्तर: ऊपर दिए गए स्तंभों को पढ़ने के बाद, यह कहना आंशिक रूप से सही है कि सरकार के पास पर्याप्त धन और सुविधाएँ नहीं हैं, लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं अधिक जटिल है। निम्नलिखित बिंदु इस विषय को स्पष्ट करते हैं:

  1. प्रगति और कमी: स्वतंत्रता के बाद भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जैसे मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि। हालाँकि, 1950 के दशक में ये सुविधाएँ तब की जनसंख्या के लिए भी अपर्याप्त थीं।
  2. बढ़ती माँग: आज भी, ढाँचागत विकास के बावजूद, तेजी से बढ़ती जनसंख्या की स्वास्थ्य सेवा संबंधी माँग को पूरा करने में हम पूरी तरह सक्षम नहीं हैं।
  3. ग्रामीण-शहरी असमानता: समस्या विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर है। डॉक्टरों और अस्पतालों की भारी कमी के कारण ग्रामीण लोगों की स्वास्थ्य संबंधी माँग पूरी नहीं हो पाती।
  4. सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दबाव: देश भर में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। शहरों में भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें इसी दबाव को दर्शाती हैं।
  5. निजी क्षेत्र की महँगी सेवाएँ: गरीब लोग निजी अस्पतालों के भारी खर्च को वहन नहीं कर सकते, जिससे उनके पास विकल्प सीमित हो जाते हैं।
  6. कम बजट आवंटन: एक मुख्य कारण यह है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दक्षिण एशियाई देशों के औसत निवेश से भी कम निवेश किया जाता है। धन की कमी सुविधाओं के विस्तार और रखरखाव में बाधा बनती है।

इस प्रकार, केवल धन की कमी ही एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि संसाधनों का असमान वितरण, बढ़ती जनसंख्या और नीतिगत प्राथमिकताएँ भी महत्वपूर्ण कारक हैं।

प्रश्न - आपके विचार में हॉस्पिटल कैसे बेहतर ढंग से काम कर सकता है ?

उत्तर: मेरे विचार में, अस्पतालों को बेहतर ढंग से चलाने और सेवाएँ सुधारने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना: रजिस्ट्रेशन काउंटर, फार्मेसी और वार्डों में कर्मचारियों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी चाहिए ताकि मरीजों की लंबी प्रतीक्षा अवधि कम हो सके।
  2. सफाई और रखरखाव: अस्पताल परिसर, शौचालय और वार्डों की नियमित और कठोर सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यह संक्रमण को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  3. नैदानिक सेवाओं का कुशल प्रबंधन: रक्त जाँच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी नैदानिक सुविधाओं का प्रबंधन बेहतर करने के लिए उन्हें विश्वसनीय निजी एजेंसियों को सौंपा जा सकता है या उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है, ताकि रिपोर्ट्स तेजी से मिल सकें।
  4. दवाइयों की उपलब्धता: अस्पताल की फार्मेसी में आवश्यक और जीवनरक्षक दवाइयों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि मरीजों को बाहर से महँगी दवाएँ न खरीदनी पड़ें।
  5. डिजिटल सिस्टम लागू करना: मरीजों के रिकॉर्ड, अपॉइंटमेंट और दवा वितरण को डिजिटल सिस्टम से जोड़कर काम को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया जा सकता है।

प्रश्न - निजी चिकित्सालयों में हमें किन समस्याओं सामना करना पड़ता है ?

उत्तर: निजी चिकित्सालयों में हमें निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

  1. उच्च लागत: निजी चिकित्सालयों में परामर्श शुल्क, जाँच, दवाइयाँ और बिस्तर का खर्च बहुत अधिक होता है। हर छोटी-बड़ी सुविधा के लिए एक मोटी राशि चुकानी पड़ती है, जो आम आदमी के लिए भारी पड़ सकती है।
  2. अनावश्यक जाँच और उपचार: कई बार डॉक्टर लाभ कमाने के लिए ऐसी महँगी जाँचें और प्रक्रियाएँ लिख देते हैं जिनकी वास्तव में कोई आवश्यकता नहीं होती। इससे मरीज का अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
  3. महँगी दवाएँ: निजी डॉक्टर अक्सर महँगे ब्रांडेड दवाओं के नुस्खे लिखते हैं, जबकि समान गुणवत्ता की सस्ती जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध हो सकती हैं। गरीब व्यक्ति इन महँगी दवाओं का खर्च वहन नहीं कर पाता।
  4. पारदर्शिता की कमी: खर्चों का पूर्व अनुमान नहीं दिया जाता और बिल में कई तरह के अतिरिक्त शुल्क शामिल हो सकते हैं। कई बार मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रखकर अधिक पैसे वसूले जाते हैं।

प्रश्न - सबके लिए स्वस्थ्य की सुविधाये उपलब्ध कराने के लिए सरकार कौन - कौन से कदम उठा सकती है ?

उत्तर: सभी नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठा सकती है:

  1. स्वास्थ्य बजट बढ़ाना: सरकार को रक्षा जैसे अन्य मदों में कटौती करके या समग्र बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाना चाहिए। इस धन का उपयोग नए अस्पताल बनाने, पुराने का उन्नयन करने और उपकरण खरीदने में किया जा सकता है।
  2. ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचा मजबूत करना: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को डॉक्टरों, दवाइयों और आधुनिक उपकरणों से लैस करना चाहिए। आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को और मजबूत करना चाहिए।
  3. स्थानीय निकायों को अधिकार देना: स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन और निगरानी स्थानीय सरकारों (पंचायतों और नगर निगमों) को सौंपी जा सकती है। उन्हें बजट का एक बड़ा हिस्सा (जैसे 30-40%) दिया जा सकता है ताकि वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम कर सकें।
  4. निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर: केवल इलाज पर ही नहीं, बीमारी रोकने पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई (स्वच्छता अभियान), पोषण कार्यक्रम (जैसे मध्याह्न भोजन) और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी।
  5. स्वास्थ्य शिक्षा: लोगों को स्वस्थ रहने के तरीकों, संक्रामक बीमारियों से बचाव, संतुलित आहार और टीकाकरण के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

अतिरिक्त एवं उपयोगी प्रश्नोत्तर

प्रश्न - सार्वजनिक शब्द का क्या अर्थ है ?

उत्तर: 'सार्वजनिक' शब्द का अर्थ है वह सेवा या कार्य जो देश के सभी नागरिकों के लिए होता है और जिसे मुख्य रूप से सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। इन सेवाओं का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनकल्याण करना होता है। उदाहरण के लिए, सरकारी स्कूल, सार्वजनिक अस्पताल, सड़कें, पुलिस सेवा आदि। चूंकि ये सेवाएँ जनता के पैसे (टैक्स) से चलती हैं, इसलिए लोग इनकी माँग कर सकते हैं और यदि ये ठीक से काम नहीं करतीं तो इन पर सवाल भी उठा सकते हैं।

प्रश्न - निजी सेवाएँ क्या हैं ?

उत्तर: निजी सेवाएँ वे कार्य या सेवाएँ हैं जो किसी व्यक्ति, समूह या कंपनी द्वारा अपना लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। इन सेवाओं की कीमत बाजार के नियमों (माँग और आपूर्ति) पर निर्भर करती है और ये सभी के लिए सुलभ नहीं होतीं। उदाहरण: निजी स्कूल, निजी अस्पताल, निजी बस सेवा, निजी दुकानें आदि।

प्रश्न - चिकित्सा पर्यटक क्या होते हैं ?

उत्तर: चिकित्सा पर्यटक वे विदेशी नागरिक होते हैं जो मुख्य रूप से अपना इलाज कराने के उद्देश्य से भारत आते हैं। वे भारत के उन अस्पतालों में आकर्षित होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करते हैं, लेकिन उनकी लागत अमेरिका या यूरोप जैसे देशों की तुलना में काफी कम होती है। इससे भारत को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलता है।

प्रश्न - संचारणीय बीमारियाँ किसे कहते है ?

उत्तर: संचारणीय बीमारियाँ वे रोग हैं जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में आसानी से फैल सकते हैं। इनके फैलने के मुख्य माध्यम दूषित पानी, वायु, भोजन, कीटों के काटने या शारीरिक संपर्क हैं। उदाहरण: हैजा, मलेरिया, टीबी, इन्फ्लुएंजा (फ्लू), चिकनपॉक्स आदि। इन्हें रोकने के लिए स्वच्छता, टीकाकरण और जागरूकता जरूरी है।

प्रश्न - ओ पी डी किसे कहते हैं ?

उत्तर: ओ.पी.डी. "आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट" या "बाह्य रोगी विभाग" का संक्षिप्त रूप है। यह अस्पताल का वह विभाग है जहाँ वे मरीज आते हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने (अंदर रहने) की आवश्यकता नहीं होती। यहाँ डॉक्टर मरीज की जाँच करते हैं, दवा का नुस्खा लिखते हैं और सलाह देते हैं, जिसके बाद मरीज घर चला जाता है। यह सेवा अस्पताल में भर्ती होने से पहले की पहली कड़ी है।

प्रश्न - "स्वास्थ्य" से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर: "स्वास्थ्य" का तात्पर्य केवल बीमार न होने से अधिक व्यापक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वास्थ्य का अर्थ है शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होने की अवस्था। यह केवल बीमारियों या दुर्बलता से मुक्ति ही नहीं, बल्कि पूर्ण कल्याण की स्थिति है।

प्रश्न - दुनिया में सर्वाधिक मेडिकल कॉलेज किस देश में है ?

उत्तर: दुनिया में सर्वाधिक मेडिकल कॉलेज भारत में हैं। यहाँ हर साल हजारों नए डॉक्टर तैयार होते हैं, जो देश और विदेश दोनों में सेवा देते हैं।

प्रश्न - सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था क्या है ?

उत्तर: सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से तात्पर्य उस समग्र तंत्र से है जिसे सरकार देश के सभी नागरिकों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए चलाती है। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और राज्य/केंद्रीय स्तर के अस्पताल शामिल हैं। इसका वित्तपोषण जनता द्वारा दिए गए करों से होता है।

प्रश्न - हमारे संविधान में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अधिकार की सुरक्षा का कर्त्तव्य किसके लिए निर्धारित किया गया है ?

उत्तर: हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को जीवन का अधिकार प्रदान किया गया है। इस अधिकार की रक्षा और इसे सुनिश्चित करने का कर्तव्य सरकार पर निर्धारित किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा है कि 'जीवन के अधिकार' में स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है, इसलिए सरकार का यह दायित्व है कि वह लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराए।

प्रश्न - हमारे जीवन से संबंधित कुछ उन पहलुओ के बारे में बताइए जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते है |

उत्तर: हमारा स्वास्थ्य केवल शारीरिक बीमारियों से ही प्रभावित नहीं होता। जीवन के निम्नलिखित पहलू भी इसे गहराई से प्रभावित करते हैं:

  1. मानसिक तनाव: लंबे समय तक तनाव, चिंता या डर में रहने से शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे रक्तचाप बढ़ना, नींद न आना, पाचन संबंधी समस्याएँ आदि।
  2. सामाजिक और पारिवारिक दबाव: पारिवारिक समस्याएँ, आर्थिक तंगी, काम का अत्यधिक बोझ या सामाजिक तनाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर सकते हैं, जो अंततः शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
  3. आर्थिक स्थिति: गरीबी व्यक्ति को पौष्टिक भोजन, अच्छे आवास और समय पर इलाज जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित कर देती है।
  4. वातावरण: प्रदूषित हवा और पानी, अस्वच्छ परिवेश और शोरगुल वाला माहौल भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं।

प्रश्न - सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के क्या कार्य है ?

उत्तर: सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के दो प्रमुख कार्य हैं:

  1. उपचारात्मक कार्य (Curative Function): यह तंत्र देश की विशाल आबादी (ग्रामीण और शहरी दोनों) की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की देखभाल करता है। इसके अंतर्गत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बीमार लोगों का इलाज करना, दवाइयाँ देना और आपातकालीन सेवाएँ प्रदान करना शामिल है।
  2. निवारक कार्य (Preventive Function): यह इस तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। इसमें बीमारियों को फैलने से रोकना शामिल है। यह कार्य टीकाकरण अभियान चलाकर, स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाकर, और संक्रामक रोगों की रोकथाम के उपाय करके पूरा किया जाता है। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य सुधरता है बल्कि स्वास्थ्य पर होने वाला सरकारी खर्च भी कम होता है।

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Other Chapters of Class 7 Social Studies
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