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UP Board Class 8 Social Studies (4. कानूनों की समझ) solution PDF

UP Board Class 8 Social Studies 4. कानूनों की समझ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 8 Social Studies (4. कानूनों की समझ) solution

UP Board Class 8 Social Studies 4. कानूनों की समझ Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 8 Social Studies (सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन) - कानूनों की समझ

पाठगत प्रश्न प्रश्न 1.

इस स्थिति को पढ़े और उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें एक सरकारी अधिकारी के बेटे को जिला अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई है। इस वजह से वह सरकारी अधिकारी अपने बेटे को भाग निकालने में मदद करता है। क्या आपको लगता है कि उस सरकारी अधिकारी ने सही काम किया? क्या उसके बेटे को केवल इसलिए कानून से माफी मिल जानी चाहिए कि उसका बाप आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत ताकतवर है? [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-43]

उत्तर:

  1. सरकारी अधिकारी ने बिल्कुल गलत काम किया। उसने अपने पद और शक्ति का दुरुपयोग करके कानून के शासन को कमजोर करने का प्रयास किया। कानून के सामने सभी नागरिक बराबर होते हैं और किसी को भी सजा से बचाने के लिए इस तरह की गलत हरकत नहीं करनी चाहिए।
  2. नहीं, अधिकारी के बेटे को केवल उसके पिता की ताकत के आधार पर किसी भी प्रकार की माफी नहीं मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह कानून के शासन के मूल सिद्धांत – "कानून की नजर में सब बराबर" – का सीधा उल्लंघन होगा। इससे समाज में अमीर और ताकतवर लोगों के लिए अलग कानून बन जाएंगे, जो लोकतंत्र और न्याय के विचार के खिलाफ है।

प्रश्न 2.

इस किताब में मनमाना शब्द का इस्तेमाल पीछे भी आ चुका है। अध्याय 1 के शब्द संकलन में आप इसका मतलब पढ़ चुके हैं। अब एक कारण बताइए कि आप 1870 के राजद्रोह कानून को मनमाना क्‍यों मानते हैं? 1870 का राजद्रोह कानून किस प्रकार कानून के शासन का उल्लंघन करता है? [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-45)

उत्तर:

  • राजद्रोह कानून 1870 मनमाना क्यों था? यह कानून मनमाना इसलिए था क्योंकि इसे ब्रिटिश सरकार ने केवल भारतीयों को दबाने और अपनी आलोचना रोकने के लिए बनाया था। इसके तहत किसी भी भारतीय को बिना उचित मुकदमा चलाए, सिर्फ शक के आधार पर गिरफ्तार किया जा सकता था। यह गिरफ्तारी व्यक्ति की इच्छा या न्यायिक प्रक्रिया के बिना होती थी, इसलिए यह मनमानी थी।
  • कानून के शासन का उल्लंघन: कानून के शासन का मतलब है कि कानून सभी पर समान रूप से लागू हो और सरकार भी कानून से ऊपर न हो। परंतु यह कानून केवल भारतीयों पर लागू होता था, ब्रिटिश अधिकारियों पर नहीं। इस प्रकार यह कानून भेदभावपूर्ण था और कानून के शासन के सिद्धांत का पालन नहीं करता था।

चित्र आधारित प्रश्न प्रश्न 1.

“घरेलू हिंसा' से आप क्‍या समझते हैं? हिंसा की शिकार महिलाओं को नए कानून से कौन से दो मुख्य अधिकार प्राप्त हुए हैं? [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-48]

उत्तर:

  • घरेलू हिंसा: घरेलू हिंसा का अर्थ है परिवार के भीतर किसी सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य के प्रति की गई हिंसा। आमतौर पर, यह पति या परिवार के किसी पुरुष सदस्य द्वारा महिला (पत्नी, बहू, बेटी आदि) के साथ की जाती है। इसमें मारपीट, भावनात्मक शोषण, मौखिक गाली-गलौज, यौन उत्पीड़न या आर्थिक रूप से नियंत्रित करना शामिल हो सकता है।
  • नए कानून से प्राप्त दो मुख्य अधिकार:
    1. साझे घर में रहने का अधिकार: इस कानून के तहत पीड़ित महिला को यह अधिकार मिला कि वह उसी घर में रह सकती है जहाँ हिंसा हुई है। उसे घर से निकाला नहीं जा सकता।
    2. सुरक्षा आदेश प्राप्त करने का अधिकार: महिला अदालत से एक सुरक्षा आदेश (प्रोटेक्शन ऑर्डर) प्राप्त कर सकती है, जिसके तहत हिंसा करने वाले व्यक्ति को उसके पास आने, बात करने या परेशान करने से रोका जा सकता है।

प्रश्न 2.

क्या आप एक ऐसी प्रक्रिया बता सकते हैं जिसका इस्तेमाल इस कानून की जरूरत के बारे में लोगों को अवगत कराने के लिए किया गया हो? [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-48]

उत्तर:
इस कानून की जरूरत के बारे में लोगों को अवगत कराने और उनका समर्थन जुटाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी "जन सुनवाई" (पब्लिक हियरिंग) आयोजित करना। इन सुनवाइयों में घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं, कार्यकर्ताओं, वकीलों और आम नागरिकों को अपने अनुभव और विचार साझा करने का मौका मिला। इससे समाज में इस समस्या की गंभीरता को समझने और एक मजबूत कानून की मांग के लिए जनमत तैयार करने में मदद मिली।

प्रश्न 3.

उपरोक्त चित्रकथा-पट्ट को पढ़कर बताइए कि लोगों ने कौन से दो तरीकों से संसद पर दबाव बनाया? | [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-48]

उत्तर:
लोगों और संगठनों ने संसद पर दबाव बनाने के लिए निम्नलिखित दो प्रमुख तरीके अपनाए:

  1. वैकल्पिक कानून का मसौदा तैयार करना: वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह 'लॉयर्स कलेक्टिव' ने राष्ट्रव्यापी चर्चा के बाद घरेलू हिंसा विधेयक का अपना एक मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया और सरकार के सामने रखा। इससे यह दिखाया कि एक बेहतर कानून कैसा हो सकता है।
  2. संसदीय समिति को सुझाव देना: विभिन्न महिला संगठनों और राष्ट्रीय महिला आयोग ने संसद की स्थायी समिति के सामने अपने सुझाव और आपत्तियाँ रखीं। उन्होंने सरकार द्वारा पेश किए गए पहले विधेयक में कमियाँ बताईं और उसमें सुधार के लिए जोर दिया।

पोस्टर अध्ययन प्रश्न प्रश्न 1.

बगल में दिए गए पोस्टर के “बराबरी के रिश्ते हिंसा से मुक्त” वाक्य खंड से आप क्या समझते हैं? [UP Board पाठ्यपुस्तक पेज-48]

उत्तर:
"बराबरी के रिश्ते हिंसा से मुक्त" इस वाक्यांश का अर्थ है:

  1. परिवार और समाज में स्त्री और पुरुष के बीच का रिश्ता समानता और सम्मान पर आधारित होना चाहिए, न कि ताकत या नियंत्रण पर। लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  2. इसका मतलब यह भी है कि रिश्तों में किसी भी प्रकार की हिंसा – चाहे शारीरिक हो, भावनात्मक हो या आर्थिक – के लिए कोई स्थान नहीं है। एक स्वस्थ रिश्ता डर, धमकी या दबाव से मुक्त होता है।

प्रश्न-अभ्यास ( पाठ्यपुस्तक से) प्रश्न 1.

“कानून का शासन' पद से आप क्‍या समझते हैं? अपने शब्दों में लिखिए। अपना जवाब देते हुए कानून के उल्लंघन का कोई वास्तविक या काल्पनिक उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

  • कानून का शासन: इसका अर्थ है कि देश में सर्वोच्च सत्ता किसी व्यक्ति या समूह की नहीं, बल्कि कानून की होती है। इसके तहत तीन बातें महत्वपूर्ण हैं:
    1. कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वह आम आदमी हो या उच्च पद पर बैठा अधिकारी।
    2. कानून किसी के धर्म, जाति, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं करता।
    3. किसी भी अपराध के लिए कानून में पहले से ही एक निश्चित सजा का प्रावधान होता है, जो सभी के लिए एक जैसा होता है।
  • कानून उल्लंघन का उदाहरण: यदि एक व्यक्ति बिना हेलमेट पहने बाइक चलाता है और ट्रैफिक पुलिसवाला उसे चालान काटने के बजाय रिश्वत लेकर छोड़ देता है, तो यह दोहरा कानून उल्लंघन है। पहला, बाइक चालक ने यातायात नियम तोड़ा और दूसरा, पुलिस अधिकारी ने रिश्वत लेकर कानून का पालन न करने दिया।

प्रश्न 2.

इतिहासकार इस दावे को गलत ठहराते हैं कि भारत में कानून का शासन अंग्रेजों ने शुरू किया था। इसके कारणों में से दो कारण बताइए।

उत्तर:
इतिहासकार इस दावे को गलत ठहराते हैं, इसके दो कारण हैं:

  1. अंग्रेजों ने भारत में मनमाने और भेदभावपूर्ण कानून लागू किए थे, जैसे 1870 का राजद्रोह कानून। ये कानून भारतीयों को दबाने और ब्रिटिश हितों की रक्षा के लिए बनाए गए थे, न कि सभी के लिए समान न्याय स्थापित करने के लिए। यह कानून के शासन के सिद्धांत के विपरीत था।
  2. भारतीय राष्ट्रवादियों और समाज सुधारकों ने लंबे संघर्ष के बाद समानता और न्याय पर आधारित कानूनों की मांग की और उन्हें लागू करवाया। इसलिए, आधुनिक भारत में कानून के शासन की नींव में भारतीयों के संघर्ष का योगदान अंग्रेजों के योगदान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 3.

घरेलू हिंसा पर नया कानून किस तरह बना, महिला संगठनों ने इस प्रक्रिया में अलग-अलग तरीके से क्या भूमिका निभाई, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:
घरेलू हिंसा पर नया कानून बनाने में महिला संगठनों की भूमिका बहुत ही सक्रिय और निर्णायक रही। उन्होंने निम्नलिखित तरीकों से योगदान दिया:

  1. जमीनी स्तर पर काम करना: उन्होंने पीड़ित महिलाओं की कहानियाँ सुनीं, उनके मामलों को दर्ज किया और यह साबित किया कि यह एक गंभीर और व्यापक समस्या है जिसके लिए विशेष कानून की जरूरत है।
  2. जन जागरूकता और दबाव बनाना: उन्होंने जन सुनवाइयाँ, रैलियाँ और प्रदर्शन आयोजित करके इस मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाया और सरकार पर एक प्रभावी कानून बनाने का दबाव बनाया।
  3. कानूनी मसौदे में सुधार करवाना: जब सरकार ने 2002 में एक कमजोर विधेयक पेश किया, तो महिला संगठनों ने उसकी कमियाँ उजागर कीं और उसे खारिज करवाया। उन्होंने संसदीय समिति के सामने अपने सुझाव रखे।
  4. बेहतर कानून के लिए लड़ाई: उनके लगातार प्रयासों के कारण ही 2005 में एक बेहतर और व्यापक विधेयक पेश किया गया, जो अंततः 2006 में 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम' के रूप में कानून बना।

प्रश्न 4.

अपने शब्दों में लिखिए कि इस अध्याय में आए निम्नलिखित वाक्य (पृष्ठ 44-45 ) से आप क्या समझते हैं :
अपनी बातों को मनवाने के लिए उन्होंने संघर्ष करना शुरू कर दिया। यह समानता का संघर्ष था। उनके लिए कानून का मतलब ऐसे नियम नहीं थे जिनका पालन करना उनकी मज़बूरी हो। वे कानून को उससे अलग ऐसी व्यवस्था के रूप में देखना चाहते थे जो न्याय के विचार पर आधारित हों।

उत्तर:
इस वाक्य से हमें भारतीय राष्ट्रवादियों के संघर्ष का सार समझ में आता है:

  1. ब्रिटिश शासन के दौरान कानून भारतीयों के खिलाफ भेदभाव करते थे। राष्ट्रवादियों ने इन असमान कानूनों के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। यह संघर्ष केवल आजादी पाने के लिए नहीं, बल्कि कानून की नजर में भारतीयों और अंग्रेजों के बीच समानता स्थापित करने के लिए भी था।
  2. राष्ट्रवादी कानून को केवल एक डराने वाला नियम नहीं मानते थे जिसका पालन मजबूरी में करना पड़े। वे चाहते थे कि कानून एक ऐसी न्यायपूर्ण व्यवस्था हो जो सभी के अधिकारों की रक्षा करे और जिस पर लोगों का विश्वास हो।
  3. दूसरे शब्दों में, वे "कानून के शासन" को "कानून के द्वारा शासन" से बदलना चाहते थे। उनका लक्ष्य ऐसा कानूनी ढाँचा बनाना था जो न्याय, समानता और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर टिका हो।

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Other Chapters of Class 8 Social Studies
1. भारतीय संविधान
2. धर्मनिरपेक्षता की समझ
3. हमें संसद क्यों चाहिए ?
4. कानूनों की समझ
5. न्यायपालिका
6. हमारी अपराधिक न्याय प्रणाली
7. हाशियाकरण की समझ
8. हाशियाकरण से निपटना
9. जनसुविधाएँ
10. कानून और सामाजिक न्याय
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