UP Board Solutions for Class 8 Social Studies (सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन 1)
प्रश्न - भारतीय राज्य की तीन अंग कौन कौन से है ?
उत्तर: भारतीय राज्य के तीन प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
- विधायिका (Legislature): यह कानून बनाने वाली संस्था है। संसद (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्य विधानसभाएँ इसके अंतर्गत आती हैं।
- कार्यपालिका (Executive): यह कानूनों को लागू करने और देश का प्रशासन चलाने वाली संस्था है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और सभी सरकारी अधिकारी इसके भाग हैं।
- न्यायपालिका (Judiciary): यह कानून की व्याख्या करने और न्याय दिलाने वाली संस्था है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अन्य न्यायालय इसी के अंग हैं।
प्रश्न - संधवाद से क्या समझते है ?
उत्तर: संघवाद या संघीय व्यवस्था एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें एक ही देश में शासन की शक्ति विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच बाँटी जाती है। भारत में मुख्य रूप से दो स्तर हैं: केंद्र सरकार (पूरे देश के लिए) और राज्य सरकारें (अलग-अलग राज्यों के लिए)। पंचायतों और नगर निगमों के रूप में स्थानीय सरकारें तीसरा स्तर हैं। संविधान में प्रत्येक सरकार के अधिकार क्षेत्र और शक्तियाँ स्पष्ट रूप से बताई गई हैं ताकि वे एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप न करें और सामंजस्य से काम करें।
प्रश्ष - भारत के संविधान से संबंधित मुख्य तीन बातें लिखें।
उत्तर: भारत के संविधान से संबंधित तीन मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- भारत का संविधान सिर्फ बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा का भी प्रावधान करता है।
- यह संघीय ढाँचा स्थापित करता है, जिसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को संविधान में दिए गए अलग-अलग विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है।
- संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख (मुखिया) होता है, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख के रूप में केंद्र सरकार का नेतृत्व करता है।
प्रश्न - संविधान लिखें जाने उत्तर - (1) साम्प्रदायिक दंगे और उग्रवादी आन्दोलनों पर । ( 2) अस्पृश्य समझे जाने वाले जाति समुहों एवं लोगों की भागीदारी बढाना ।
उत्तर: संविधान सभा के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ थीं:
- साम्प्रदायिक दंगे और उग्रवादी आन्दोलनों पर नियंत्रण: देश बँटवारे की त्रासदी और साम्प्रदायिक हिंसा से गुजर रहा था। संविधान निर्माताओं को ऐसा संविधान बनाना था जो सभी धर्मों और समुदायों के बीच शांति, सद्भाव और एकता स्थापित करे।
- समाज के पिछड़े और 'अस्पृश्य' माने जाने वाले वर्गों की भागीदारी बढ़ाना: सदियों से चली आ रही छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना एक बड़ी चुनौती थी। संविधान में समानता के अधिकार और छुआछूत के उन्मूलन जैसे प्रावधानों के जरिए इन वर्गों को मुख्यधारा में लाने और उनकी राजनीतिक व सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
प्रश्ष - किसी भी देश के लिए संविधान की क्यों आवश्यकता है ?
उत्तर: किसी भी देश, विशेषकर लोकतांत्रिक देश के लिए संविधान की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
- शासन के मूल नियम तय करने के लिए: यह सरकार के गठन, उसकी शक्तियों, कार्यों और संरचना के बुनियादी नियम निर्धारित करता है।
- सरकार पर नियंत्रण रखने के लिए: संविधान सरकार की शक्तियों की सीमा तय करता है ताकि वह मनमानी न कर सके और जनता के प्रति जवाबदेह रहे।
- नागरिकों के अधिकारों की गारंटी के लिए: यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करता है और सरकार को उनका उल्लंघन करने से रोकता है।
- सामाजिक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए: संविधान देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक लक्ष्यों को परिभाषित करता है, जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।
प्रश्न - संविधान से क्या अभिप्रायः हैं ?
उत्तर: संविधान किसी देश का सर्वोच्च कानूनी दस्तावेज है। यह नियमों का वह समूह है जो यह बताता है कि देश का शासन कैसे चलेगा। इसमें सरकार के विभिन्न अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की संरचना, शक्तियाँ और आपसी संबंध स्पष्ट किए जाते हैं। साथ ही, यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को भी परिभाषित करता है। संविधान उन आदर्शों और मूल्यों को भी दर्शाता है, जिन पर देश की नींव रखी गई है और जिनके आधार पर सरकार को काम करना होता है।
प्रक्ष - भारतीय संविधान के मुख्य मुल्य कौन कौन से है ?
उत्तर: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित मुख्य मूल्य निम्नलिखित हैं:
- समाजवाद (Socialism): समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण और आर्थिक असमानता को कम करने का लक्ष्य।
- धर्मनिरपेक्षता (Secularism): राज्य का कोई अपना धर्म नहीं होगा और सभी धर्मों को समान सम्मान व संरक्षण मिलेगा।
- लोकतंत्र (Democracy): देश में शासन की सत्ता जनता के हाथ में होगी और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शासन चलाएँगे।
- गणतंत्र (Republic): देश का प्रमुख (राष्ट्रपति) वंशानुगत नहीं, बल्कि जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाएगा।
- न्याय (Justice): सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सभी नागरिकों को उपलब्ध कराना।
- स्वतंत्रता (Liberty): विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता देना।
- समता (Equality): कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं और धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
- बंधुत्व (Fraternity): देश के सभी नागरिकों में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित करना।
प्रश्ष - भारत के संविधान में नागरिकों को दिए गए मॉलिक अधिकार कोन कौन से है ?
उत्तर: भारत के संविधान के भाग-3 में नागरिकों को छः मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:
- समता का अधिकार (Right to Equality): कानून के सामने समानता और भेदभाव का निषेध।
- स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom): बोलने, शांतिपूर्वक एकत्र होने, संगठन बनाने, आवाजाही, निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता।
- शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation): बेगारी, बालश्रम और मानव तस्करी पर प्रतिबंध।
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion): किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- शिक्षा और संस्कृति का अधिकार (Cultural and Educational Rights): अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को बचाने तथा शिक्षण संस्थान स्थापित करने का अधिकार।
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies): यह सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है जो नागरिकों को अन्य मौलिक अधिकारों के उल्लंघन होने पर न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
प्रश्ष - मौलिक अधिकारों से आप क्या समझते है ?
उत्तर: मौलिक अधिकार वे बुनियादी और आवश्यक अधिकार हैं जो संविधान द्वारा देश के प्रत्येक नागरिक को प्रदान किए जाते हैं। ये अधिकार इतने महत्वपूर्ण हैं कि इन्हें संविधान में ही सुरक्षित स्थान दिया गया है। सरकार इन अधिकारों को साधारण कानून बनाकर नहीं छीन सकती। यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो नागरिक सीधे न्यायालय की शरण ले सकता है। इनका उद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक स्वतंत्रता और सम्मान सुनिश्चित करना है।
प्रश्न - मौलिक अधिकारों का लाभ या विशेषताएँ लिखों
उत्तर: मौलिक अधिकारों के लाभ या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- ये सामाजिक बुराइयों जैसे छुआछूत, जातिगत भेदभाव और अन्य कुरीतियों पर रोक लगाते हैं।
- ये धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं देते।
- ये शोषण, विशेषकर बाल श्रम और बेगारी जैसी प्रथाओं को रोकते हैं, जिससे कमजोर वर्गों का शोषण न हो सके।
- ये नागरिकों को निर्भीक होकर जीने, अपने विचार व्यक्त करने और अपनी पसंद के धर्म को मानने का अधिकार देते हैं।
- ये अधिकार न्यायपालिका द्वारा संरक्षित हैं, अर्थात इनके उल्लंघन पर न्यायालय में मुकदमा किया जा सकता है।
प्रश्न - अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से आप क्या समझते है ?
उत्तर: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों में दी गई 'स्वतंत्रता के अधिकार' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक नागरिक को बिना डरे अपने विचारों और मतों को व्यक्त करने का अधिकार है। यह अभिव्यक्ति भाषण, लेखन, छपाई, चित्रकारी, फिल्म निर्माण या इंटरनेट जैसे किसी भी माध्यम से हो सकती है। हालाँकि, यह स्वतंत्रता असीमित नहीं है। इसकी कुछ सीमाएँ हैं, जैसे कि कोई भी अभिव्यक्ति देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या दूसरों की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुँचा सकती। किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना या हिंसा भड़काना इस स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता।
प्रश्ष - शोषण क्या है? शोषण के विरूद्ध अधिकार के दो प्रावधान बताइए।
उत्तर:
- शोषण: शोषण का अर्थ है किसी व्यक्ति की कमजोर आर्थिक या सामाजिक स्थिति का अनुचित लाभ उठाकर उससे बहुत कम मजदूरी पर काम लेना, उसे बंधुआ बनाना, उसकी मर्जी के खिलाफ काम करवाना या उसके मौलिक अधिकारों का हनन करना।
शोषण के विरुद्ध अधिकार के दो प्रमुख प्रावधान हैं:
- मानव तस्करी और बेगारी पर प्रतिबंध: संविधान किसी भी व्यक्ति को खरीदने-बेचने (मानव तस्करी) और बिना मजदूरी के जबरन काम लेने (बेगारी) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
- बाल श्रम पर प्रतिबंध: 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे से कारखानों, खानों या किसी अन्य खतरनाक काम में मजदूरी नहीं करवाई जा सकती।
प्रश्न - शोषण के विरूद्ध अधिकार में कौन कौन से अधिकार शामिल हैं ?
उत्तर: शोषण के विरुद्ध अधिकार में निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं:
- किसी भी प्रकार की मानव तस्करी (इंसानों की खरीद-बिक्री) पर पूर्ण प्रतिबंध।
- बेगारी (बिना मजदूरी का जबरन काम) और बंधुआ मजदूरी पर रोक।
- किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध खतरनाक काम करने के लिए मजबूर करने पर प्रतिबंध।
- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी कारखाने, खान या अन्य जोखिम भरे काम में नियोजित करने पर प्रतिबंध।
प्रश्न - शोषण के विरूद्ध अधिकार को मौलिक अधिकारों में क्यों शामिल किया गया है ?
उत्तर: शोषण के विरुद्ध अधिकार को मौलिक अधिकारों में निम्नलिखित कारणों से शामिल किया गया है:
- समाज के कमजोर और गरीब वर्गों, जैसे गरीब मजदूर, बच्चे और महिलाएँ, को शोषण से बचाने के लिए। यह उनकी गरिमा और सम्मान की रक्षा करता है।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी व्यक्ति की मजबूरी या गरीबी का फायदा उठाकर उससे अनुचित शर्तों पर काम न लिया जाए।
- बाल श्रम पर रोक लगाकर बच्चों के शिक्षा और स्वस्थ विकास के अधिकार को सुरक्षित करना।
- यह अधिकार सभी नागरिकों को मानवीय परिस्थितियों में काम करने और जीवन यापन करने का आधार प्रदान करता है।
प्रश्ष - अल्पसंख्यक से क्या अभिप्रायः है ?
उत्तर: अल्पसंख्यक से अभिप्राय उस समुदाय या वर्ग के लोगों से है जिनकी जनसंख्या किसी विशेष क्षेत्र, राज्य या देश में बहुसंख्यक समुदाय की तुलना में कम होती है। यह अल्पसंख्यक स्थिति धर्म (जैसे मुस्लिम, सिख, ईसाई), भाषा (जैसे तमिल भाषी लोग दिल्ली में) या संस्कृति के आधार पर हो सकती है। भारतीय संविधान अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान, संस्कृति और शिक्षा संस्थाओं को बचाए रखने के विशेष अधिकार प्रदान करता है ताकि बहुमत के शासन में उनके हितों की उपेक्षा न हो।
प्रश्न - मौलिक अधिकारों की सूरक्षा के लिए नागरिकों को कौन से अधिकार दिए गए हैं ।
उत्तर: मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए नागरिकों को संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies - अनुच्छेद 32) दिया गया है। यह अधिकार स्वयं एक मौलिक अधिकार है और इसे 'मौलिक अधिकारों की रक्षक' या संविधान का 'हृदय और आत्मा' कहा जाता है। यदि किसी नागरिक के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है। न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध जैसे रिट (Writs) जारी करके उल्लंघन रोक सकता है और नागरिक के अधिकार की रक्षा कर सकता है।
प्रश्न - मौलिक कर्तव्य कया है ? किन्ही चार मौलिक कर्तव्यों का वर्णन करों |
उत्तर:
- मौलिक कर्तव्य: मौलिक कर्तव्य नागरिकों के वे बुनियादी दायित्व हैं जो संविधान (42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए) में सूचीबद्ध हैं। ये कर्तव्य नागरिकों को याद दिलाते हैं कि अधिकारों के साथ-साथ देश और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ भी हैं।
चार मौलिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं:
- संविधान का पालन करना: प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत के संविधान का पालन करे, उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
- देश की रक्षा करना: देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना तथा आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र की सेवा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
- सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा: सड़क, पार्क, सरकारी भवन जैसी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए और उसकी सुरक्षा करनी चाहिए।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना: वैज्ञानिक सोच, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करना नागरिक का कर्तव्य है।