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UP Board Class 8 Social Studies (9. जनसुविधाएँ) solution PDF

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UP Board Class 8 Social Studies (9. जनसुविधाएँ) solution

UP Board Class 8 Social Studies 9. जनसुविधाएँ Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 8 Social Science
सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन - 9. जनसुविधाएँ

प्रश्न 1.

आपने ऊपर उल्लिखित चार स्थितियों को देखा है। अब बताइए कि चेनई में पानी की स्थिति कैसी [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

चेन्नई में पानी की स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहाँ पानी का वितरण असमान है। अन्नानगर जैसे कुछ इलाकों में पानी नियमित रूप से आता है, जबकि मैलापुर, मडीपाक्कम और सैदापेट जैसे क्षेत्रों में पानी की गंभीर कमी देखी जाती है। इससे स्पष्ट है कि शहर के सभी निवासियों को बराबर मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।


प्रश्न 2.

उपरोक्त वर्णन में से घरेलू इस्तेमाल के विभिन्‍न जल स्रोतों को चुनें। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

चेन्नई में लोग अपनी घरेलू जरूरतों के लिए निम्नलिखित विभिन्न जल स्रोतों का उपयोग करते हैं:

  1. नगरपालिका द्वारा पाइपलाइन से आने वाला पानी।
  2. पानी के टैंकर (जो पानी बेचते हैं या सप्लाई करते हैं)।
  3. बाजार से खरीदी गई पानी की बोतलें (पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर)।
  4. बोरवेल या हैंडपंप से निकाला गया भूमिगत पानी।

प्रश्न 3.

आपकी राय में सुब्रमण्यन और पद्मा के अनुभवों में क्या समानता है और क्या अलग है। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

समानताएँ:

  1. सुब्रमण्यन और पद्मा दोनों ही पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। दोनों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता।
  2. दोनों ही बोरवेल के पानी पर किसी-न-किसी रूप में निर्भर हैं।

असमानताएँ (भिन्नताएँ):

  1. पानी की उपलब्धता: सुब्रमण्यन के अपार्टमेंट में नगरपालिका का पानी हर दो दिन में एक बार आता है, जबकि पद्मा की झुग्गी बस्ती के सार्वजनिक नल में रोज केवल 20 मिनट के लिए ही पानी आता है।
  2. पानी के उपयोग का तरीका: सुब्रमण्यन के यहाँ बोरवेल का पानी खारा है, इसलिए वे इसे केवल शौचालय साफ करने और सफाई जैसे कामों में ही प्रयोग करते हैं। वहीं, पद्मा और उसके इलाके के लोगों के पास विकल्प न होने के कारण बोरवेल के पानी का इस्तेमाल नहाने, कपड़े धोने और कभी-कभी पीने तक के लिए भी करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

प्रश्न 4.

अपने इलाके में जलपूर्ति की स्थिति का वर्णन करते हुए एक अनुच्छेद लिखें। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति के आधार पर स्वयं यह अनुच्छेद लिखना चाहिए। इसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें: पानी किस स्रोत से आता है (नगरपालिका, हैंडपंप, टैंकर), पानी की नियमितता कैसी है, गर्मियों में क्या समस्या होती है, पानी की गुणवत्ता कैसी है, और सभी लोगों को बराबर पानी मिलता है या नहीं।


प्रश्न 5.

देश के ज्यादातर स्थानों पर गर्मियों में पानी बूंद-बूंद क्यों आने लगता है? पता लगाइए। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

गर्मियों में देश के अधिकांश भागों में पानी की कमी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. जल स्रोतों का सूखना: गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने से नदियों, तालाबों और झीलों का पानी सूखने लगता है या उनका जल स्तर काफी नीचे चला जाता है, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है।
  2. मांग में वृद्धि: गर्मी में पानी की खपत बढ़ जाती है (जैसे नहाना, पीना, पौधों में पानी देना), जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ जाता है और नगरपालिका की सप्लाई कम पड़ने लगती है।
  3. भूजल स्तर का गिरना: पानी की कमी को पूरा करने के लिए लोग बोरवेल और हैंडपंप का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे भूमिगत पानी का स्तर तेजी से नीचे गिर जाता है और कई बोरवेल सूख जाते हैं।

प्रश्न 6.

क्या चेनई में सभी के लिए पानी का संकट है? क्या आप बता सकते हैं कि अलग-अलग लोगों को अलग-अलग मात्रा में पानी क्‍यों मिलता है? दो कारण बताएँ। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 08]

उत्तर:

हाँ, चेन्नई में पानी का संकट है, लेकिन यह संकट सभी के लिए समान नहीं है। कुछ इलाकों और लोगों को दूसरों की तुलना में अधिक पानी मिलता है। इस असमानता के दो प्रमुख कारण हैं:

  1. आर्थिक असमानता: जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं, वे बाजार से महँगा पानी (टैंकर या बोतलबंद पानी) खरीदकर अपनी कमी पूरी कर सकते हैं। जबकि गरीब परिवार पूरी तरह से नगरपालिका की अनियमित सप्लाई या सार्वजनिक नलों/बोरवेल पर निर्भर रहते हैं, जहाँ पानी कम मिलता है।
  2. सरकारी नीतियों और प्रबंधन में कमी: पानी के समान और कुशल वितरण के लिए राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त योजनाबद्ध प्रयास नहीं किए गए हैं। संसाधनों का आवंटन और बुनियादी ढाँचा अक्सर समृद्ध इलाकों के पक्ष में होता है, जबकि झुग्गी बस्तियाँ और गरीब क्षेत्र उपेक्षित रह जाते हैं।

प्रश्न 7.

जनसुविधाएँ क्या होती हैं? जनसुविधाएँ मुहैया कराने की जिम्मेदारी सरकार पर क्यों होनी चाहिए? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-112]

उत्तर:

जनसुविधाएँ: जनसुविधाएँ वे मूलभूत सेवाएँ और सुविधाएँ हैं जो समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सामान्य, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक हैं। इनमें पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छता (शौचालय), बिजली, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल और कॉलेज आदि शामिल हैं।

सरकारी जिम्मेदारी के कारण: जनसुविधाएँ उपलब्ध कराने की मुख्य जिम्मेदारी सरकार पर इसलिए है क्योंकि:

  1. हमारे संविधान में दिए गए जीवन के अधिकार का वास्तविक अर्थ तभी निकलता है जब हर नागरिक को रहने, पीने, स्वस्थ रहने और शिक्षा पाने की बुनियादी सुविधाएँ मिलें।
  2. निजी कंपनियाँ मुनाफा कमाने के उद्देश्य से काम करती हैं और वे गरीब व दूरदराज के इलाकों में इन सुविधाओं को सस्ते दाम पर उपलब्ध नहीं करा पातीं। केवल सरकार ही सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांत पर चलते हुए सभी नागरिकों तक इन सेवाओं को पहुँचा सकती है।


प्रश्न 8.

सरकार कुछ जनसुविधाओं के लिए निजी कंपनियों का भी सहारा ले सकती है। उदाहरण के लिए सड़कें बनाने के लिए ठेके निजी कंपनियों या ठेकेदारों को भी दिए जाते हैं। दिल्‍ली में बिजली के वितरण का काम दो निजी कंपनियों के हाथ में है। लेकिन सरकार को इन कंपनियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इन सुविधाओं को सस्ती कीमत पर सभी लोगों तक पहुँचाने के लक्ष्य को पूरा करने में कोई कसर न छोड़ें। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 12]

उत्तर:

सरकार द्वारा निजी कंपनियों पर कड़ी नजर रखना आवश्यक है, इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

  1. कीमतों पर नियंत्रण: निजी कंपनियों का मुख्य लक्ष्य मुनाफा कमाना होता है। यदि उन पर नियंत्रण न रखा जाए, तो वे बिजली, पानी जैसी आवश्यक जनसुविधाओं की कीमतें इतनी अधिक बढ़ा सकती हैं कि वे आम आदमी, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्ग की पहुँच से बाहर हो जाएँ।
  2. सामाजिक दायित्व सुनिश्चित करना: जनसुविधाएँ केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन का आधार हैं। सरकार का यह दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि निजी कंपनियाँ भी सभी नागरिकों को, चाहे वे किसी भी आर्थिक स्तर के हों, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करें। इसके बिना लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त नहीं हो पाएगा।

प्रश्न 9.

अपने घर के पानी के बिल को देखें और पता लगाएँ कि आपके इलाके में नगरपालिका जल की न्यूनतम कीमत क्या है? अगर आप ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते हैं तो क्या उसकी दर भी बढ़ जाती है? पानी के ज्यादा इस्तेमाल पर बढ़ी हुई दर से बिल वसूल करने के पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है? [एनसीईआरटी पाव्यपुस्तक पेज-1 12]

उत्तर:

  1. विद्यार्थियों को अपने घर के पानी के बिल की जाँच करके न्यूनतम दर और विभिन्न स्लैब (उपभोग के अनुसार अलग-अलग दरें) के बारे में पता लगाना चाहिए।
  2. हाँ, आमतौर पर एक निश्चित सीमा से अधिक पानी के उपयोग पर प्रति यूनिट दर बढ़ जाती है। इसे 'स्लैब सिस्टम' कहते हैं।

    सरकार का उद्देश्य: इस 'बढ़ी हुई दर' की नीति का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। जब लोगों को अधिक पानी खर्च करने पर अधिक पैसे चुकाने पड़ेंगे, तो वे पानी का उपयोग सोच-समझकर और बचत के साथ करेंगे। इससे पानी की अनावश्यक बर्बादी रुकेगी और यह संसाधन सभी के लिए लंबे समय तक उपलब्ध रह सकेगा।

प्रश्न 10.

किसी वेतनभोगी कर्मचारी, अपना व्यवसाय/फैक्टरी चलाने वाले व्यक्ति और एक दुकानदार से बात करके पता लगाएँ कि लोग किस-किस तरह के कर सरकार को चुकाते हैं। अपने नतीजों को कक्षा में शिक्षक को दिखाएँ और चर्चा करें। [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 12]

उत्तर:

विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग सरकार को निम्नलिखित प्रकार के कर चुकाते हैं:

  1. आयकर: वेतनभोगी कर्मचारी और व्यवसायियों द्वारा अपनी आय पर चुकाया जाने वाला कर।
  2. जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर): दुकानदार और व्यवसायी वस्तुओं की बिक्री और सेवाओं पर यह कर वसूलते हैं और सरकार को जमा करते हैं।
  3. संपत्ति कर: जिनके पास घर, दुकान या जमीन है, वे नगर निगम को यह कर देते हैं।
  4. विद्युत कर/बिजली बिल: बिजली के उपभोग पर लगने वाला शुल्क।
  5. जल कर/पानी बिल: नगरपालिका द्वारा पानी की आपूर्ति के बदले लिया जाने वाला शुल्क।

प्रश्न 11.

अगर सरकार जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींच ले तो क्या होगा? क्या आपको लगता है कि यह सही कदम होगा? (एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक॑ पेज-1 14]

उत्तर:

यदि सरकार जलापूर्ति की जिम्मेदारी से हाथ खींच ले और इसे पूरी तरह निजी कंपनियों पर छोड़ दे, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे:

  1. कीमतों में भारी वृद्धि: निजी कंपनियाँ मुनाफे के लिए काम करेंगी और पानी की कीमतें आसमान छू सकती हैं। पानी, जो एक मूलभूत आवश्यकता है, एक महँगी वस्तु बन जाएगा।
  2. सामाजिक अशांति और असमानता: गरीब और मध्यम वर्ग के लोग महँगा पानी नहीं खरीद पाएँगे, जिससे स्वास्थ्य संकट पैदा होगा। यह स्थिति समाज में गहरा असंतोष और अशांति फैला सकती है।

    निष्कर्ष: यह बिल्कुल भी सही कदम नहीं होगा। पानी जैसी आवश्यक जनसुविधा पर सरकार का नियंत्रण और दायित्व बना रहना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, सुरक्षित और सस्ता पेयजल प्राप्त कर सके।

प्रश्न 12.

ऊपर के भाग में आए मुख्य विचारों पर चर्चा करें। जलापूर्ति में सुधार के लिए आपकी राय में क्या किया जा सकता है? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 15]

उत्तर:

पोर्तो एलेग्रे के उदाहरण से हमें जलापूर्ति में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं, जैसे कम कीमत, गरीबों के लिए रियायत, पारदर्शिता और जनभागीदारी। इनसे प्रेरणा लेते हुए जलापूर्ति में सुधार के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. पाइपलाइनों के रिसाव को रोकना: पुरानी और टूटी-फूटी पाइपलाइनों से होने वाले पानी के रिसाव को तुरंत ठीक करना चाहिए। इससे बहुत बड़ी मात्रा में पानी की बचत होगी।
  2. जल संरक्षण के प्रति जागरूकता: लोगों को पानी की कीमत समझाने और उसे बचाने के तरीके (जैसे- ब्रश करते समय नल बंद रखना, फ्लश टैंक में कम पानी की टंकी लगाना) सिखाने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए।
  3. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा: स्कूलों, सार्वजनिक भवनों और घरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य करनी चाहिए ताकि भूजल स्तर को रिचार्ज किया जा सके।
  4. सामुदायिक भागीदारी: पोर्तो एलेग्रे की तरह, स्थानीय स्तर पर जनसभाएँ करके लोगों से जलापूर्ति की योजनाओं और प्राथमिकताओं पर चर्चा करनी चाहिए।

प्रश्न 13.

क्या आपको ऐसा लगता है पानी और बिजली जैसे संसाधनों को बचाना और सार्वजनिक परिवहन साधनों का ज्यादा इस्तेमाल करना बेहतर है? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 1 5)

उत्तर:

हाँ, बिल्कुल। पानी, बिजली जैसे संसाधनों को बचाना और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना न केवल बेहतर है, बल्कि आज की जरूरत है। इसके पीछे निम्नलिखित कारण हैं:

  1. भविष्य की सुरक्षा: ये संसाधन सीमित हैं। इन्हें बचाकर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ये उपलब्ध रहें और उन्हें अभाव का सामना न करना पड़े।
  2. ईंधन की बचत और आत्मनिर्भरता: सार्वजनिक परिवहन (बस, मेट्रो, ट्रेन) का उपयोग करने से निजी वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन की बचत होगी और देश को आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
  3. पर्यावरण संरक्षण: निजी वाहनों के कम उपयोग से वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही, बिजली और पानी की बचत से इन्हें उत्पन्न करने वाले संसाधनों (कोयला, पानी) पर दबाव कम होगा, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा।

प्रश्न 14.

क्या आपको लगता है कि समुचित स्वच्छता सुविधाओं के अभाव से लोगों का जीवन प्रभावित होता है? कैसे? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-116)

उत्तर:

हाँ, समुचित स्वच्छता सुविधाओं (जैसे शौचालय, नालियों का ठीक प्रबंधन, कूड़ा निपटान) के अभाव से लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके प्रमुख प्रभाव हैं:

  1. बीमारियों का प्रसार: खुले में शौच और गंदगी से मक्खियाँ और मच्छर पनपते हैं, जो हैजा, टाइफाइड, डायरिया, मलेरिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियाँ फैलाते हैं।
  2. प्रदूषित वातावरण: गंदे पानी के जमाव और कचरे के ढेर से आस-पास का वातावरण दूषित हो जाता है, जिससे हवा और पानी दोनों प्रदूषित होते हैं।
  3. स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव: लगातार अस्वच्छ वातावरण में रहने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे बार-बार बीमार पड़ते हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता और आय पर भी बुरा असर पड़ता है।

प्रश्न 15.

आपको ऐसा क्‍यों लगता है कि इससे औरतों और लड़कियों पर ज्यादा गहरा असर पड़ेगा? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 16]

उत्तर:

स्वच्छता सुविधाओं के अभाव का प्रभाव महिलाओं और लड़कियों पर विशेष रूप से अधिक पड़ता है, क्योंकि:

  1. घरेलू जिम्मेदारियाँ: परिवार की स्वच्छता और पानी से जुड़े अधिकांश काम (जैसे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल, खाना बनाना, सफाई) महिलाओं और लड़कियों के जिम्मे होते हैं। अस्वच्छ वातावरण में ये काम करने से उनके बीमार पड़ने की आशंका सबसे अधिक होती है।
  2. अधिक समय तक जोखिम: पुरुष दिन के अधिकांश समय काम पर बाहर रहते हैं, जबकि महिलाएँ और लड़कियाँ घर और उसके आस-पास के वातावरण में अधिक समय बिताती हैं। इसलिए वे प्रदूषण और बीमारियों के संपर्क में भी अधिक आती हैं।
  3. सुरक्षा और गोपनीयता का संकट: घर में शौचालय न होने पर महिलाओं और लड़कियों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए एक बड़ा खतरा है और उन्हें शारीरिक व मानसिक तनाव देता है।

वार्तालाप अध्ययन प्रश्न

प्रश्न 1.

आप किसकी राय से सहमत हैं? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-1 11]

उत्तर:

मैं अमू की राय से सहमत हूँ। उसका कहना है कि जनसुविधाएँ सरकार की जिम्मेदारी हैं और इन्हें निजी कंपनियों पर नहीं छोड़ा जा सकता। इसके पीछे दो मजबूत कारण हैं:

  1. संवैधानिक दायित्व: हमारे संविधान ने जीवन के अधिकार को मौलिक अधिकार ब

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Other Chapters of Class 8 Social Studies
1. भारतीय संविधान
2. धर्मनिरपेक्षता की समझ
3. हमें संसद क्यों चाहिए ?
4. कानूनों की समझ
5. न्यायपालिका
6. हमारी अपराधिक न्याय प्रणाली
7. हाशियाकरण की समझ
8. हाशियाकरण से निपटना
9. जनसुविधाएँ
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