UP Board class 11 Hindi 2. मीरा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
कवयित्री परिचय: मीराबाई मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्री थीं। उनकी कृष्णभक्ति इतनी गहन थी कि उन्होंने सभी सामाजिक बंधनों को तोड़ दिया। उनके पदों में आत्म-समर्पण, प्रेम और विरह की गहन अनुभूति व्यक्त हुई है।
उत्तर: मीरा श्रीकृष्ण को अपना सब कुछ मानती हैं। वे स्वयं को उनकी दासी के साथ-साथ एक समर्पित पत्नी के रूप में भी देखती हैं। इस प्रकार वह कृष्ण की उपासना एक प्रेमिका और भक्त के दोहरे रूप में करती हैं।
मीरा के प्रभु का रूप अत्यंत मनोहर है। वे सिर पर मोरमुकुट धारण करते हैं और उनका सौंदर्य देखकर मन मोहित हो जाता है।
भाव-सौंदर्य: ये पंक्तियाँ कृष्णभक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित हैं। इनमें मीरा की भक्ति अपने चरम पर है। उन्होंने अपने आँसुओं के जल से सींच-सींचकर कृष्ण-प्रेम रूपी बेल बोई है। अब वह बेल फैल गई है और उसमें आनंद रूपी फल लगने लगे हैं। यहाँ भक्ति के कठिन साधना-काल के बाद मिलने वाली आनंदमयी सिद्धि का वर्णन है।
शिल्प-सौंदर्य: भाषा मधुर, संगीतमय और राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है। 'सींचि-सींचि' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। 'प्रेम-बेलि', 'आणंद-फल', 'अंसुवन जल' आदि में सांगरूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।
भाव-सौंदर्य: इस पद में मीरा ने भक्ति के सार तत्व को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। वे कहती हैं कि उन्होंने दूध (जीवन) की मथनियों को प्रेमपूर्वक मथा है। दही (साधना) को मथकर घी (ईश्वरीय प्रेम व आनंद) निकाल लिया है और छाछ (सांसारिक मोह-माया) को फेंक दिया है। अर्थात, सच्ची भक्ति से जीवन का सार प्राप्त होता है और व्यर्थ की वस्तुओं का त्याग हो जाता है।
शिल्प-सौंदर्य: भाषा सरल और लयबद्ध है। पद भक्ति रस से ओत-प्रोत है। 'घी' और 'छाछ' शब्द प्रतीकात्मक रूप से प्रयुक्त हुए हैं। 'दूध की मथनियाँ... छोयी' में अन्योक्ति अलंकार है।
उत्तर: लोग मीरा को इसलिए 'बावरी' कहते थे क्योंकि वे कृष्ण भक्ति में इतनी डूब चुकी थीं कि उन्होंने सांसारिक सुध-बुध खो दी थी। उन्होंने कृष्ण की भक्ति के लिए राजसी ऐश्वासन और परिवार की मर्यादा तक का त्याग कर दिया था। समाज के नियमों के विपरीत चलना, साधु-संगति करना और सार्वजनिक रूप से भजन गाना—ये सब बातें उस समय के लोगों की समझ से परे थीं। इसी अतिशय प्रेम और समर्पण को लोग उनका 'बावलापन' मानते थे।
उत्तर: इस पंक्ति में मीरा के विरोधियों, विशेषकर उनके पति राणा पर करारा व्यंग्य छिपा है। मीरा की कृष्णभक्ति से क्षुब्ध होकर राणा ने उन्हें जहर का प्याला भेजा, जिसे मीरा ने हँसते-हँसते पी लिया। किंतु, उनकी अटूट भक्ति के कारण जहर का कोई असर नहीं हुआ। इस घटना के माध्यम से यह व्यंग्य किया गया है कि ईश्वर पर श्रद्धा रखने वाले सच्चे भक्त का बाल भी बाँका नहीं कर सकते। दुष्ट शक्तियाँ चाहे कितनी भी बड़ी योजना क्यों न बनाएँ, वे भक्त की रक्षा नहीं कर सकतीं।
उत्तर: मीरा संसार को देखकर इसलिए रोती हैं क्योंकि वे लोगों को मोह-माया के जाल में फँसा हुआ पाती हैं। उनके अनुसार संसार के सुख-दुःख मिथ्या और क्षणभंगुर हैं। मीरा को दुःख इस बात का होता है कि लोग इस असार संसार के पीछे भागकर अपना कीमती जीवन व्यर्थ गँवा रहे हैं और सच्चे सुख (ईश्वर-प्राप्ति) से वंचित रह जाते हैं।
उत्तर: प्रेम-प्राप्ति का मार्ग कभी सरल नहीं होता। मीरा को अपने दिव्य प्रेम (कृष्ण-भक्ति) के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा होगा:
उत्तर: 'लोक-लाज खोने' का अर्थ है समाज और परिवार की परंपरागत मर्यादाओं व रीति-रिवाजों का उल्लंघन करना। मीरा एक राजपूत राजपरिवार की बहू थीं, जहाँ महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा, सार्वजनिक स्थानों पर जाने की पाबंदी आदि नियम थे। मीरा ने इन बंधनों को नहीं माना और खुलेआम मंदिरों में जाकर नाचना-गाना, साधुओं का सत्संग करना जारी रखा। परिवार की दृष्टि में यह 'लोक-लाज' या 'कुल-मर्यादा' को खोने जैसा था, जबकि मीरा के लिए यही सच्ची भक्ति का मार्ग था।
उत्तर: मीरा ने प्रभु को 'अविनाशी' कहा है, क्योंकि ईश्वर नित्य और शाश्वत है। उनका कहना है कि इस अविनाशी प्रभु को पाने के लिए जटिल कर्मकांड या दिखावटी साधना की नहीं, बल्कि 'सहज' भक्ति की आवश्यकता है। 'सहज' का अर्थ है सरल, निश्छल और स्वाभाविक प्रेम। मीरा मानती हैं कि जब भक्त का हृदय शुद्ध और प्रेम से भरा होता है, तो वह अविनाशी ईश्वर को सहज ही प्राप्त कर लेता है।
उत्तर:
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