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UP Board class 12 History (7. एक साम्राज्य की राजधनी - विजयनगर) solution PDF

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UP Board class 12 History (7. एक साम्राज्य की राजधनी - विजयनगर) solution

UP Board class 12 History 7. एक साम्राज्य की राजधनी - विजयनगर Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 12 History

भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I - II - III

पाठ - 7: एक साम्राज्य की राजधानी - विजयनगर


लघु उत्तरात्मक प्रश्न

1. पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के खंडहरों का अध्ययन करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विधियाँ क्या हैं? किस तरह से आपको लगता है कि उन्होंने विरुपाक्ष मंदिर द्वारा प्रदान की गई जानकारी को पूरक किया होगा?

उत्तर: हम्पी के खंडहरों का अध्ययन करने के लिए पिछली दो शताब्दियों में कई विधियों का प्रयोग किया गया है। सबसे पहले, वर्ष 1800 में इंजीनियर एवं पुरातत्वविद् कर्नल कॉलिन मैकेंजी ने इस स्थल का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। उनकी प्रारंभिक जानकारी विरुपाक्ष मंदिर के पुजारी और पम्पादेवी मंदिर की स्मृतियों पर आधारित थी। वर्ष 1836 से, फोटोग्राफरों ने स्मारकों का चित्रण शुरू किया, जिससे विद्वानों को उनका अध्ययन करने में सहायता मिली। शिलालेख विशेषज्ञों (एपिग्राफिस्टों) ने हम्पी और अन्य मंदिरों से शिलालेख एकत्र किए। इतिहासकारों ने विदेशी यात्रियों के विवरणों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल तथा संस्कृत में लिखे साहित्य से जानकारी एकत्र की। ये सभी विधियाँ विरुपाक्ष मंदिर से मिलने वाली सीमित जानकारी को पूरा करती हैं। मंदिर से प्राप्त धार्मिक एवं स्थानीय जानकारी के साथ-साथ इन विधियों से प्राप्त ऐतिहासिक, स्थापत्यिक, प्रशासनिक और सामाजिक आँकड़े मिलकर विजयनगर साम्राज्य की एक समग्र तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

2. विजयनगर की पानी की जरूरतें कैसे पूरी हुईं?

उत्तर: विजयनगर एक शुष्क क्षेत्र में स्थित था, अतः वहाँ जल प्रबंधन की उत्कृष्ट व्यवस्था थी। तुंगभद्रा नदी द्वारा बने प्राकृतिक बेसिन ने शहर की मूल जल आवश्यकता पूरी की। नदी उत्तर-पूर्व दिशा में बहती थी और चट्टानी भूभाग से निकलने वाली कई धाराएँ इसमें मिलती थीं। इन धाराओं पर तटबंध बनाकर विभिन्न आकारों के जलाशय (टैंक) बनाए गए थे। वर्षा के जल को एकत्र करने और शहर तक पहुँचाने की विस्तृत व्यवस्था थी। पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभ में निर्मित कमलापुरम टैंक सबसे महत्वपूर्ण था। इस टैंक का पानी न केवल आस-पास के खेतों की सिंचाई करता था, बल्कि एक नहर के माध्यम से 'शाही केंद्र' तक भी पहुँचाया जाता था।

3. आपको क्या लगता है कि शहर के किलेबंद क्षेत्र के भीतर कृषि भूमि को रखने के क्या फायदे और नुकसान थे?

उत्तर:

फायदे:

  • यह व्यवस्था कृषि योग्य भूमि को सुरक्षित घेरे में ले आती थी।
  • मध्यकाल में युद्ध के दौरान घेराबंदी की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी, जो कई महीनों या वर्षों तक चल सकती थी। ऐसे में किले के भीतर कृषि भूमि और अन्न भंडार होने से शहर के लोगों को दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा मिलती थी।

नुकसान:

  • शहर के भीतर इस तरह की कृषि भूमि बनाए रखना एक बहुत ही खर्चीला उपाय था।
  • यह कृषि भूमि अक्सर उन स्थानों से दूर होती थी जहाँ किसान रहते थे, जिससे खेती करने और उत्पादन के परिवहन में कठिनाई होती थी।

4. आपको क्या लगता है कि महानवमी डिब्बा से जुड़े अनुष्ठानों का क्या महत्व था?

उत्तर: महानवमी डिब्बा एक विशाल मंच था जो लगभग 11,000 वर्ग फुट के आधार से 40 फुट की ऊँचाई तक बना था। इससे जुड़े अनुष्ठानों का बहुत महत्व था। ये अनुष्ठान सितंबर-अक्टूबर में मनाए जाने वाले दस दिवसीय हिंदू त्योहार महानवमी (जिसे दशहरा, दुर्गा पूजा या नवरात्रि भी कहते हैं) के साथ जुड़े थे। इस अवसर पर विजयनगर के राजा अपनी शक्ति, प्रतिष्ठा और वैभव का प्रदर्शन करते थे। समारोहों में देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा, राजकीय घोड़े की पूजा, भैंस आदि जानवरों का बलिदान शामिल था। साथ ही नृत्य, कुश्ती, हाथियों, घोड़ों और रथों के जुलूस तथा सैनिक परेड होती थी। राजा अपने अधीनस्थ शासकों और दरबारियों के सामने इन अनुष्ठानों में भाग लेकर अपनी सत्ता की पुष्टि करता था। ये समारोह गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखते थे और राजशक्ति के प्रदर्शन का माध्यम थे।

5. चित्र 7.33 विरुपाक्ष मंदिर के एक अन्य स्तंभ का चित्रण है। क्या आप किसी भी पुष्प आकृति को देखते हैं? किन जानवरों को दिखाया गया है? आपको क्यों लगता है कि उन्हें चित्रित किया गया है? मानव आकृतियों का वर्णन करें।

उत्तर: हाँ, स्तंभ पर सुंदर पुष्प आकृतियाँ (फ्लोरल डिज़ाइन) उकेरी गई हैं। दिखाए गए जानवरों में घोड़ा, हाथी और मोर शामिल हैं। इन जानवरों को शायद इसलिए चित्रित किया गया होगा क्योंकि ये राजसी शक्ति, समृद्धि और सौंदर्य के प्रतीक थे। घोड़ा और हाथी सेना की शक्ति दर्शाते हैं, जबकि मोर प्राकृतिक सौंदर्य और दिव्यता का प्रतीक है। मानव आकृतियों में एक नर्तक की मूर्ति है, जो संभवतः मंदिर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दर्शाती है। एक अन्य आकृति में एक व्यक्ति को किसी प्राणी के साथ क्रिया करते हुए दिखाया गया है, जो शायद किसी पौराणिक कथा या दैनिक जीवन के दृश्य को दर्शाता है। स्तंभ पर एक देवता की आकृति भी है, जो इसके धार्मिक महत्व को बताती है। इन सभी आकृतियों से मंदिर की कला में निहित भक्ति, संस्कृति और राजसी जीवन की झलक मिलती है।


दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

6. चर्चा करें कि क्या "शाही केंद्र" शब्द उस शहर के हिस्से के लिए एक उपयुक्त विवरण है जिसके लिए इसका उपयोग किया जाता है।

उत्तर: हाँ, "शाही केंद्र" शब्द विजयनगर शहर के उस विशिष्ट भाग के लिए पूर्णतः उपयुक्त विवरण है। यह क्षेत्र बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था और राजा, उसका परिवार, दरबारी तथा प्रशासनिक इमारतों का केंद्र था। इसमें 60 से अधिक मंदिर थे और लगभग 30 भवन परिसरों की पहचान महलों के रूप में की गई है। कमल महल (संभवतः एक राजसभा भवन) और हजारा राम मंदिर जैसी भव्य इमारतें इसी क्षेत्र में स्थित थीं। हजारा राम मंदिर विशेष रूप से राजपरिवार के लिए था और इसकी दीवारों पर रामायण के दृश्य उकेरे गए हैं। यहाँ स्थित मंदिरों की वास्तुकला भी राजसी वैभव को प्रदर्शित करती है। इस प्रकार, यह क्षेत्र निश्चित रूप से प्रशासनिक गतिविधियों, राजसी निवास और शाही प्रदर्शन का केंद्र था, अतः "शाही केंद्र" शब्द इसके लिए सटीक है।

7. कमल महल और हाथी अस्तबल जैसी इमारतों की वास्तुकला हमें उन शासकों के बारे में क्या बताती है जिन्होंने उन्हें बनाया है?

उत्तर: कमल महल और हाथी अस्तबल जैसी इमारतों की वास्तुकला विजयनगर के शासकों की शक्ति, संसाधनों और रुचियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

कमल महल: इसकी वास्तुकला अत्यंत भव्य और सुंदर है, जिसमें एक उच्च केंद्रीय मीनार और आठ छोटी मीनारें हैं। इससे पता चलता है कि शासक न केवल शक्तिशाली थे बल्कि कलात्मक सौंदर्यबोध से भी परिपूर्ण थे। माना जाता है कि यह एक परिषद कक्ष था, जहाँ राजा अपने सलाहकारों से मिलते थे। इससे शासन में परामर्श और चर्चा के महत्व का पता चलता है।

हाथी अस्तबल: यह एक विशाल और मजबूत संरचना थी, जो हाथियों को रखने के लिए बनाई गई थी। इसका निर्माण इस बात का प्रमाण है कि विजयनगर के शासक एक विशाल और शक्तिशाली सेना रखते थे, जिसमें हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। यह इमारत उनकी सैन्य ताकत और सामरिक तैयारी को दर्शाती है।

संक्षेप में, ये इमारतें बताती हैं कि विजयनगर के शासक धन-संपदा से परिपूर्ण, कला-प्रेमी, दूरदर्शी प्रशासक और एक शक्तिशाली सैन्य बल के स्वामी थे।

8. विजयनगर के वास्तुकारों को प्रेरित करने वाली स्थापत्य परम्पराएँ क्या हैं? उन्होंने इन परंपराओं को कैसे बदला?

उत्तर: विजयनगर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य की परंपराओं से गहराई से प्रेरित थी, लेकिन उसमें कई नवीन और राजसी तत्व जोड़े गए।

प्रेरक परंपराएँ: वास्तुकारों ने पहले से चली आ रही द्रविड़ शैली की मंदिर वास्तुकला को आधार बनाया, जिसमें गोपुरम (प्रवेश द्वार), विमान (गर्भगृह के ऊपर का शिखर), स्तंभों वाले मंडप और परिसर के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ जैसे तत्व शामिल थे।

परिवर्तन एवं नवाचार:

  • राया गोपुरम: विजयनगर के वास्तुकारों ने पारंपरिक गोपुरमों के आकार को बहुत विशाल और भव्य बना दिया। ये 'राया गोपुरम' इतने ऊँचे और विशाल होते थे कि मंदिर के मुख्य शिखर को भी छोटा दिखाते थे। ये राजा की शक्ति और संसाधनों का प्रतीक बन गए।
  • स्तंभों वाले मंडप: मंदिर परिसरों में बड़े-बड़े स्तंभों वाले मंडपों (कल्याण मंडप) का निर्माण किया गया, जो सामाजिक और धार्मिक समागमों के लिए उपयोग होते थे। इन स्तंभों पर अत्यंत सुंदर और जटिल नक्काशी की जाती थी।
  • विशिष्ट मंदिर: विरुपाक्ष मंदिर का विस्तार किया गया और उसमें नाजुक नक्काशीदार स्तंभों वाला एक नया मंडप जोड़ा गया। विठ्ठल मंदिर में पत्थर के रथ के आकार का एक अनूठा मंडिरिका बनाया गया, जो एक सृजनात्मक नवाचार था।
इस प्रकार, विजयनगर के वास्तुकारों ने पारंपरिक तत्वों को बनाए रखते हुए भी उनमें राजसी भव्यता, सामरिक सूझबूझ और कलात्मक नवीनता का सम्मिश्रण किया।

9. विजयनगर के सामान्य लोगों के जीवन की क्या छवि आप अध्याय में विभिन्न विवरणों से पाते हैं?

उत्तर: अध्याय में दिए गए विवरणों से विजयनगर के सामान्य लोगों के जीवन की निम्नलिखित छवि उभरती है:

  • सहिष्णु एवं विविधतापूर्ण समाज: साम्राज्य में विभिन्न भाषाएँ (तेलुगु, कन्नड़, तमिल आदि) बोलने और विभिन्न धार्मिक परंपराओं (हिंदू धर्म के विभिन्न संप्रदाय) का पालन करने वाले लोग रहते थे। शासकों की सहिष्णु नीति के कारण सामान्य जन का जीवन शांतिपूर्ण रहा होगा।
  • आर्थिक गतिविधियाँ: लोगों के मुख्य व्यवसाय कृषि, शिल्पकारी और व्यापार थे। व्यापारी वर्ग मसालों, सोने और अन्य वस्तुओं का व्यापार करता था। कुदिराई चेट्टी नामक व्यापारी समुदाय घोड़ों के आयात में लगा हुआ था, जो सेना के लिए महत्वपूर्ण था।
  • आवास एवं जीवनशैली: पुर्तगाली यात्री बारबोसा के अनुसार, सामान्य लोगों के घर लकड़ी के बने होते थे, जिनमें बड़े आँगन और गलियारे होते थे। ये घर व्यवस्थित और कार्य के अनुसार बने होते थे।
  • जल प्रबंधन: शहर के निवासी अपनी पानी की जरूरतों के लिए कुओं, मंदिरों के टैंकों और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था पर निर्भर थे। कमलापुरम टैंक जैसी सार्वजनिक व्यवस्थाएँ उनके जीवन का हिस्सा थीं।
संक्षेप में, विजयनगर का सामान्य नागरिक एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आर्थिक रूप से सक्रिय शहर में रहता था, जहाँ धार्मिक सहिष्णुता और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध थीं।


मानचित्र कार्य

10. दुनिया के रूपरेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस को चिह्नित करें। उन मार्गों की पहचान करें, जिन्हें यात्रियों ने विजयनगर पहुँचने के लिए काम में लिया था।

उत्तर: विजयनगर आने वाले प्रमुख यात्री और उनके मार्ग इस प्रकार थे:

  • इटली से निकोलो डे कोंटी और पुर्तगाल से डुआर्टे बारबोसा, डोमिंगो पारा और फर्नाओ मुनोज जैसे यात्रियों ने समुद्री मार्ग अपनाया होगा। वे लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर को पार करके भारत के पश्चिमी तट पर पहुँचे होंगे और फिर दक्षिण की ओर विजयनगर गए होंगे।
  • रूस से अफानसी निकितिन ने भूमि मार्ग लिया होगा। उन्होंने रूस से होते हुए ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किया और फिर दक्षिण भारत की ओर बढ़े।
इस प्रकार, यात्रियों ने विजयनगर पहुँचने के लिए प्रायद्वीपीय भारत तक की लंबी और चुनौतीपूर्ण समुद्री एवं भूमि यात्राएँ कीं।

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Other Chapters of class 12 History
1. ईंटें मनके तथा अस्थियाँ
2. राजा किसान और नगर आरंभिक राज्य और अर्थव्यवस्थाएँ
3. बंधुत्व जाति तथा वर्ग आरंभिक समाज
4. विचारक विश्वास और इमारतें सांस्वृफतिक विकास
5. यात्रियों के नजरिये समाज के बारे में उनकी समझ
6. भक्ति सूफी परम्पराएँ धार्मिक विश्वासों में बदलाव और श्रद्धा ग्रंथ
7. एक साम्राज्य की राजधनी - विजयनगर
8. किसान ज़मींदार और राज्य कृषि समाज और मुग़ल साम्राज्य
9. शासक और इतिवृत्त मुगल दरबार ( लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियाँ
10. उपनिवेशवाद और देहात (सरकारी अभिलेखों का अध्ययन)
11. विद्रोही और राज 1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान
12. औपनिवेशिक शहर नगरीकरण नगर योजना स्थापत्य
13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन सविनय अवज्ञा और उससे आगे
14. विभाजन को समझना (राजनीति स्मृति अनुभव)
15. संविधान का निर्माण एक नए युग की शुरुआत
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