UP Board class 6 Hindi 15. नौकर is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 6 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
गाँधी जी ने आश्रम में आए कॉलेज के छात्रों से गेहूँ बीनने का काम करवाया। छात्रों को लगता था कि गाँधी जी उन्हें पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम देंगे, लेकिन गाँधी जी ने उनकी इस सोच को समझ लिया। उन्होंने छात्रों को यह सिखाना चाहा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता और शारीरिक श्रम का अपना एक अलग महत्व होता है। इस काम के द्वारा वे छात्रों में विनम्रता और सभी प्रकार के कार्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना चाहते थे।
पाठ में गाँधी जी के ऐसे कई प्रसंग हैं जो दिखाते हैं कि वे नौकरों वाले काम भी स्वयं करते थे। इनमें से तीन मुख्य प्रसंग इस प्रकार हैं:
लंदन में भारतीय छात्रों ने गाँधी जी को एक शाकाहारी भोज के लिए आमंत्रित किया। छात्र स्वयं ही भोजन बना रहे थे। गाँधी जी निर्धारित समय से पहले ही पहुँच गए और बिना अपना परिचय दिए, छात्रों के साथ मिलकर काम करने लगे। वे तश्तरियाँ धोने, सब्ज़ियाँ साफ़ करने और अन्य छोटे-मोटे कामों में उनकी मदद करते रहे। जब छात्र नेता आया, तब उसे पता चला कि यह साधारण सहायक के रूप में काम करने वाले व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि महात्मा गाँधी स्वयं हैं। इस तरह गाँधी जी ने बिना किसी झिझक के सबके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
दक्षिण अफ्रीका में, गाँधी जी के मित्र श्री पोलक की पत्नी बहुत कमजोर हो गई थीं क्योंकि उनका बच्चा उनका दूध छोड़ता नहीं था और रातभर रोकर उन्हें परेशान करता रहता था। गाँधी जी ने इस समस्या का हल निकाला। उन्होंने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं ले ली। वे रात में बच्चे को अपने पास सुलाते और उसकी चारपाई के पास पानी का बरतन रख देते। जब बच्चा प्यास से रोता, तो वे उसे पानी पिला देते। लगभग पंद्रह दिनों तक बच्चे को माँ से अलग रखने के बाद, बच्चे ने धीरे-धीरे माँ का दूध पीना छोड़ दिया और श्रीमती पोलक की सेहत में सुधार होने लगा।
गाँधी जी काम करवाने के लिए आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करने की विधि अपनाते थे। वे दूसरों से काम लेने में सख्त थे, लेकिन वे खुद अपना काम करना पसंद करते थे और किसी से अपने लिए काम नहीं करवाते थे। जब लोग गाँधी जी को स्वयं काम करते हुए देखते, तो वे प्रेरित होकर खुद भी काम में जुट जाते। इस तरह, गाँधी जी किसी को जबरदस्ती काम करने के लिए नहीं कहते थे, बल्कि अपने व्यवहार और कर्म से उन्हें काम करने की प्रेरणा देते थे।
गाँधी जी अक्सर पैदल चलते थे क्योंकि वे पैदल चलने के शारीरिक और मानसिक लाभों से अच्छी तरह वाकिफ थे। पैदल चलने से उनकी शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति बनी रहती थी, जो उनकी व्यस्त और सक्रिय जीवनशैली के लिए जरूरी थी। साथ ही, पैदल यात्राएँ करके वे आम लोगों के और करीब आ पाते थे और उनसे सीधा संवाद कर पाते थे।
पैदल चलने के लाभ:
गाँधी जी स्वावलंबन में विश्वास रखते थे। वे चाहते थे कि हर व्यक्ति अपना काम खुद करने में सक्षम बने। अगर वे खुद अपना काम दूसरों से करवाते, तो यह उनके सिद्धांतों के खिलाफ होता। दूसरों के लिए काम करके वे सेवा और समानता का उदाहरण प्रस्तुत करते थे, लेकिन अपना काम खुद करके वे आत्मनिर्भरता का संदेश देते थे। इससे उनके साथी भी प्रेरित होते थे और आलस्य छोड़कर काम करने लगते थे।
गाँधी जी का यह कथन मानवीय समानता और प्रेम पर आधारित है। वे कहना चाहते हैं कि नौकर केवल पैसे के बदले काम करने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह भी हमारे समाज और परिवार का एक अंग है। अगर हम उसे अपनापन और सम्मान देंगे, तो वह भी ईमानदारी और लगन से काम करेगा। शुरू में यह मुश्किल लग सकता है क्योंकि नौकर इस रिश्ते का दुरुपयोग भी कर सकता है, लेकिन निरंतर प्रयास और सच्ची मानवीय भावना से एक दिन वह समझ जाएगा कि यह घर उसका अपना है और उसकी भी यहाँ जिम्मेदारी बनती है।
गाँधी जी अत्यधिक अनुशासित और समय के पाबंद व्यक्ति थे। मेरी कल्पना के अनुसार, उनका दिन बहुत सुबह, लगभग चार बजे शुरू होता होगा। वे प्रार्थना, व्यायाम और सैर के बाद दिन का कार्यक्रम बना लेते होंगे। वे हर काम को निश्चित समय सारणी के अनुसार करते होंगे। शायद वे रात के शांत समय या दिन में कामों के बीच के छोटे-छोटे अंतराल का उपयोग लिखने के लिए करते होंगे। उनकी लेखन की इच्छा शक्ति इतनी प्रबल थी कि वे व्यस्तता के बीच भी समय निकाल ही लेते थे। उनका पूरा दिन सेवा, कार्य, विचार-विमर्श और लेखन में व्यतीत होता होगा।
गाँधी जी का आश्रम एक साधारण घर या छात्रावास से कई मायनों में अलग था:
हम रोजाना निम्नलिखित काम स्वयं कर सकते हैं:
| संज्ञा | क्रिया |
|---|---|
| बुआई | बोना |
| कटाई | काटना |
| सिंचाई | सींचना |
| रोपाई | रोपना |
| कताई | कातना |
| रंगाई | रंगना |
उपर्युक्त शब्दों का संबंध मुख्य रूप से दो क्षेत्रों से है:
| पुल्लिंग शब्द | स्त्रीलिंग शब्द |
|---|---|
| पतीला | कालिख, भराई, चक्की, रोशनी, जेल, सेवा |
UP Board class 6 Hindi 15. नौकर Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 6 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board class 6 Hindi 15. नौकर textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 6 Hindi 15. नौकर :
There are various features of UP Board class 6 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.