UP Board class 6 Hindi 5. अक्षरों का महत्व is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 6 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- अक्षरों की खोज को एक नए युग की शुरुआत इसलिए कहा गया है क्योंकि इससे पहले मानव जाति का कोई लिखित इतिहास नहीं था। अक्षरों के आविष्कार के बाद ही मनुष्य अपने विचार, अनुभव और ज्ञान को लिखित रूप में सुरक्षित रख पाया। इससे एक पीढ़ी का ज्ञान अगली पीढ़ी तक आसानी से पहुँचने लगा, जिसने सीखने की प्रक्रिया को तेज कर दिया और मानव सभ्यता को प्रगति के एक नए मार्ग पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तर:- अक्षरों की खोज का सफर बहुत धीरे-धीरे और लंबे समय में हुआ। प्राचीन मानव ने सबसे पहले चित्रों के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए, जैसे पशुओं, पक्षियों या मानव आकृतियों के चित्र बनाना। धीरे-धीरे ये चित्र भाव-संकेतों में बदलने लगे। उदाहरण के लिए, एक वृत्त के चारों ओर रेखाएँ खींचकर 'सूरज' का भाव व्यक्त किया गया, जो बाद में 'गर्मी' या 'धूप' के लिए भी प्रयोग होने लगा। इन भाव-संकेतों के विकास के बहुत बाद में, इन्हीं से विकसित होकर अक्षरों का आविष्कार हुआ।
उत्तर:- अक्षरों के ज्ञान से पहले, मनुष्य दूर-दराज़ के स्थानों तक अपनी बात पहुँचाने के लिए मुख्य रूप से चित्रों और भाव-संकेतों का सहारा लेता था। वह पत्थरों या गुफाओं की दीवारों पर विभिन्न प्रकार के चित्र बनाता था, जिन्हें देखकर दूसरे लोग उसका संदेश समझ सकते थे। इसके अलावा, धुएँ के संकेत, ड्रम (ढोल) की आवाज़, या दूत भेजना भी संचार के अन्य तरीके थे।
उत्तर:- अक्षर और ध्वनि दोनों ही भाषा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ध्वनि भाषा की सबसे छोटी और मूल इकाई है। इन्हीं ध्वनियों के संयोजन से अक्षर बनते हैं। जहाँ अक्षरों से हम लिखकर अपने भाव व्यक्त करते हैं, वहीं ध्वनियों के माध्यम से हम बोलकर संवाद करते हैं। बिना ध्वनि के बोली जाने वाली भाषा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ध्वनियों के सही उच्चारण से ही हमारा संदेश स्पष्ट और प्रभावी ढंग से दूसरों तक पहुँच पाता है। इस प्रकार, अक्षरों की ही तरह ध्वनि का भी अपना विशेष महत्व है।
उत्तर:- प्राचीन समय में लोगों के पास अक्षरों और भाषा के विकास का कोई ऐतिहासिक ज्ञान नहीं था। वे इस जटिल और अद्भुत खोज की प्रक्रिया को समझ नहीं पाते थे। ऐसे में, उन्होंने इसे एक चमत्कार मान लिया और मानवीय क्षमता से परे की इस उपलब्धि का श्रेय सर्वशक्तिमान ईश्वर को दे दिया। उस दौर में जिन चीजों का रहस्य नहीं समझ आता था, उन्हें अक्सर दैवीय शक्ति का करिश्मा मान लिया जाता था।
उत्तर:- यदि अक्षरों का ज्ञान न होता, तो हमारी दुनिया बिल्कुल अलग होती:
• हम अपने पूर्वजों का इतिहास, उनकी सीख और उपलब्धियों के बारे में नहीं जान पाते।
• ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सही ढंग से नहीं पहुँच पाता, जिससे हर पीढ़ी को शुरुआत से सीखना पड़ता।
• विज्ञान, गणित, दर्शन जैसे जटिल विषयों का विकास लगभग असंभव हो जाता।
• दूर बैठे लोगों से लिखित संवाद न होने के कारण सूचना का आदान-प्रदान बहुत सीमित और धीमा होता।
• मानव सभ्यता का विकास बहुत धीमी गति से होता और हम आज की तरह उन्नत नहीं हो पाते।
(क) अब बताओ कि ये उपसर्ग जिन शब्दों के साथ जुड़ रहे हैं ,क्या उनमें कोई अंतर है?
| उपसर्गयुक्त शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द |
|---|---|---|
| असफल | अ | सफल |
| अदृश्य | अ | दृश्य |
| अनुचित | अन् | उचित |
| अनावश्यक | अन् | आवश्यक |
| अपरिचित | अप | परिचित |
| अनिच्छा | अन् | इच्छा |
उत्तर:- हाँ, इनमें एक महत्वपूर्ण अंतर है। उपसर्ग ('अ', 'अन्', 'अप' आदि) जुड़ने से मूल शब्द का अर्थ उसके विपरीत या नकारात्मक हो जाता है। जैसे 'सफल' का अर्थ कामयाब होना है, लेकिन 'असफल' का अर्थ है कामयाब न होना।
(ख) उपर्युक्त शब्दों से वाक्य बनाओ और समझो कि ये संज्ञा हैं या विशेषण।
उत्तर:- वाक्य निर्माण और शब्द-भेद:
निष्कर्ष: 'असफल', 'अदृश्य', 'अनुचित', 'अनावश्यक' विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, जबकि 'अपरिचित' और 'अनिच्छा' संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुए हैं।
उत्तर:-
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