UP Board Solutions for Class 8 Social Science (सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन 2)
धर्मनिरपेक्षता की समझ
प्रश्न 1. इस अध्याय को एक बार फिर पढ़िए। आपको ऐसा क्यों लगता है कि बदले की भावना इस समस्या से निपटने का सही रास्ता नहीं हो सकती? अगर सारे समूह बदले के रास्ते पर चल पड़े तो क्या होगा? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-19]
उत्तर:
बदले की भावना किसी भी सामाजिक या राजनीतिक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। यह भावना एक दुष्चक्र पैदा करती है जहाँ एक समूह का बदला दूसरे समूह को और बदला लेने के लिए प्रेरित करता है। इससे हिंसा और अराजकता का अंतहीन सिलसिला शुरू हो जाता है। इतिहास में हिटलर द्वारा यहूदियों पर अत्याचार और बाद में इजरायल द्वारा मुसलमानों के साथ कठोर व्यवहार इसी बदले की भावना के उदाहरण हैं। यदि सभी समूह बदले के रास्ते पर चल पड़ें, तो समाज में शांति, सहयोग और विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय संबंध बिगड़ेंगे, और दुनिया में अफरा-तफरी और संघर्ष का माहौल बन जाएगा। इसलिए, समस्याओं का समाधान संवाद, सहिष्णुता और न्याय के माध्यम से ही संभव है।
प्रश्न 2. कक्षा में चर्चा करें-क्या एक ही धर्म के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण हो सकते हैं? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक -20]
उत्तर:
हाँ, बिल्कुल। एक ही धर्म के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण, मान्यताएँ और पंथ हो सकते हैं। यह विविधता कई कारणों से उत्पन्न होती है, जैसे कि धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या में अंतर, ऐतिहासिक विकास, सांस्कृतिक प्रभाव और सामाजिक परिस्थितियाँ। उदाहरण के लिए, इस्लाम धर्म में शिया और सुन्नी, हिंदू धर्म में विभिन्न सम्प्रदाय, और ईसाई धर्म में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट जैसे अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं। यह विविधता दर्शाती है कि धर्म एक स्थिर या एकरूप विचार नहीं है, बल्कि यह समय और समाज के साथ बदलता और विकसित होता रहता है।
प्रश्न 3. क्या आप भारत के किसी भी भाग से हाल की कोई ऐसी घटना बता सकते हैं जहाँ संविधान के धर्मनिरपेक्ष आदर्शों का उल्लंघन किया गया हो और लोगों को उनके धर्म की वजह से प्रताड़ित किया गया हो या मारा गया हो? [एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक पेज-25]
उत्तर:
दुर्भाग्य से, भारत में कई बार ऐसी घटनाएँ देखने को मिलती हैं जहाँ संविधान के धर्मनिरपेक्ष आदर्शों का उल्लंघन होता है। उदाहरण के लिए, कुछ क्षेत्रों में सांप्रदायिक दंगे होते हैं, जहाँ एक धर्म विशेष के लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया जाता है, उनकी संपत्ति नष्ट की जाती है या उन्हें शारीरिक नुकसान पहुँचाया जाता है। कभी-कभी, धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को उनके धर्म के कारण नौकरी या रहने के स्थान से वंचित कर दिया जाता है या उन पर हमले किए जाते हैं। ये सभी घटनाएँ हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन हैं। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कानून का सख्ती से पालन कराना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना बहुत जरूरी है।
चित्र आधारित प्रश्न प्रश्न 1. इस चित्रकथा-पट्ट में शिक्षक ने जो उत्तर दिया है उस पर चर्चा करें। [एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक -22]
उत्तर:
चित्रकथा में, शिक्षक का उत्तर भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्पष्ट करता है। शिक्षक के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है: इसका अर्थ है कि देश किसी एक धर्म को आधिकारिक धर्म नहीं मानता और सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहता है।
- सरकारी स्कूल किसी एक धर्म को महत्त्व नहीं दे सकते: सरकारी संस्थान सभी नागरिकों के लिए हैं, इसलिए उन्हें सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए और किसी एक धर्म के अनुष्ठान या प्रतीकों को विशेष महत्त्व नहीं देना चाहिए।
- सरकारी स्कूल के लिए सभी धर्म समान हैं: यहाँ सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए स्कूल का वातावरण सभी के लिए समावेशी और सम्मानजनक होना चाहिए।
- अधिकतर धार्मिक त्योहारों पर सरकारी छुट्टी होती है: यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य विभिन्न धर्मों के प्रति सम्मान दर्शाता है। बच्चे इन छुट्टियों के दौरान अपने-अपने घरों और समुदायों में त्योहार मना सकते हैं।
शिक्षक का यह उत्तर बताता है कि सार्वजनिक संस्थानों में धर्मनिरपेक्षता का पालन करना क्यों आवश्यक है ताकि किसी भी बच्चे को अलग-थलग या कम महसूस न हो।
प्रश्न 2. सरकारी स्कूलों में अकसर कई धर्मों के बच्चे आते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए धर्मनिरपेक्ष राज्य के तीन उद्देश्यों को दोबारा पढ़िए। आप इस बारे में दो वाक्य लिखिए कि सरकारी स्कूलों को किसी एक धर्म को बढ़ावा क्यों नहीं देना चाहिए। [एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक पेज-23]
उत्तर:
दो वाक्य:
- सरकारी स्कूल सभी नागरिकों के करों से चलते हैं और सभी धर्मों के बच्चों के लिए खुले होते हैं, इसलिए यदि वे किसी एक धर्म को बढ़ावा देंगे तो यह अन्य धर्मों के बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ अन्याय और भेदभाव होगा।
- किसी एक धर्म को बढ़ावा देने से स्कूल के वातावरण में असमानता और तनाव पैदा हो सकता है, जो बच्चों की शिक्षा और उनके बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के विकास में बाधा डालेगा।
प्रश्न-अभ्यास ( पाठ्यपुस्तक से) प्रश्न 1. अपने आस-पड़ोस में प्रचलित धार्मिक क्रियाकलापों की सूची बनाइए। आप विभिन प्रकार की प्रार्थनाओं, विभिन्न देवताओं की पूजा, विभिन्न पवित्र स्थानों, विभिन्न प्रकार के धार्मिक संगीत और गायन आदि को देख सकते हैं। क्या इससे धार्मिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता का पता चलता है?
उत्तर:
धार्मिक क्रियाकलापों की सूची:
- हिन्दू: मंदिर में आरती, भजन-कीर्तन, हवन, विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्ति पूजा, त्योहारों पर घरों को सजाना, रामायण पाठ।
- मुस्लिम: मस्जिद में नमाज अदा करना, रोज़ा रखना, ईद पर सामूहिक प्रार्थना (नमाज), कुरान पढ़ना।
- सिख: गुरुद्वारे में कीर्तन (शबद गायन), लंगर में भोजन करना, नगर कीर्तन (शोभायात्रा), अरदास (प्रार्थना)।
- ईसाई: चर्च में प्रार्थना सभा, बाइबल पाठ, कैरोल गाना (क्रिसमस पर), गुड फ्राइडे की प्रार्थना।
- जैन: मंदिर में दर्शन, प्रतिक्रमण (प्रायश्चित), त्योहारों पर उपवास।
- बौद्ध: विहार में ध्यान (मेडिटेशन), प्रार्थना झंडे लगाना, बुद्ध पूजा।
हाँ, इससे धार्मिक क्रियाकलापों की स्वतंत्रता का स्पष्ट पता चलता है। हम देखते हैं कि विभिन्न धर्मों के लोग बिना किसी डर या रोक-टोक के अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों, पूजा-पद्धतियों और त्योहारों को मनाने के लिए स्वतंत्र हैं। यह स्वतंत्रता भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त
धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
प्रश्न 2. अगर किसी धर्म के लोग यह कहते हैं कि उनका धर्म नवजात शिशुओं को मारने की छूट देता है। तो क्या सरकार किसी तरह का दखल देगी या नहीं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताइए।
उत्तर:
हाँ, सरकार ऐसी स्थिति में अवश्य हस्तक्षेप करेगी। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- कानून का शासन: भारत का कानून किसी भी व्यक्ति की हत्या को गंभीर अपराध मानता है। कोई भी धार्मिक प्रथा या आस्था देश के सर्वोच्च कानून (संविधान) और दंड संहिता से ऊपर नहीं हो सकती।
- मानवाधिकारों की रक्षा: प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह नवजात शिशु ही क्यों न हो, जीने का मौलिक अधिकार रखता है। किसी धर्म के नाम पर इस अधिकार का हनन मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
- सामाजिक नैतिकता एवं लोक कल्याण: राज्य का कर्तव्य है कि वह समाज के कल्याण और नैतिक मूल्यों की रक्षा करे। निर्दोष शिशुओं की हत्या की अनुमति देना सभ्य समाज के सिद्धांतों के विपरीत है।
- धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ राज्य धर्म के मामलों में तब हस्तक्षेप करता है जब कोई धार्मिक प्रथा सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो।
प्रश्न 3. इस तालिका को पूरा कीजिए-
| उद्देश्य |
यह महत्त्वपूर्ण क्यों है? |
इस उद्देश्य के उल्लंघन का एक उदाहरण |
| एक धार्मिक समुदाय दूसरे समुदाय पर वर्चस्व नहीं रखता |
सभी धार्मिक समुदायों को समान अवसर और सम्मान मिले, इससे सामाजिक न्याय और शांति स्थापित होती है। |
श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय द्वारा तमिल अल्पसंख्यकों पर वर्चस्व रखना और उनके साथ भेदभाव करना। |
| राज्य न तो किसी धर्म को थोपता है और न लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनता है। |
यह नागरिकों को अपनी पसंद का धर्म मानने, आस्था रखने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, जो लोकतंत्र का मूल आधार है। |
पाकिस्तान जैसे कुछ देशों में गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों (जैसे हिंदू, ईसाई) के साथ भेदभाव और उन पर इस्लाम धर्म लादने का प्रयास। |
| एक ही धर्म के कुछ लोग अपने ही धर्म के दूसरे लोगों को न दबाएँ |
धर्म के भीतर भी समानता और स्वतंत्रता बनी रहे। यह आंतरिक सहिष्णुता और एकता को बढ़ावा देता है। |
हिंदू धर्म के भीतर कुछ जातियों द्वारा दलितों के साथ 'छुआछूत' का व्यवहार करना और उन्हें मंदिरों में प्रवेश से रोकना। |
प्रश्न 4. अपने स्कूल की छुट्टियों के वार्षिक कैलेंडर को देखिए। उसमें से कितनी छुट्टियाँ विभिन्न धर्मों से संबंधित हैं। इससे क्या संकेत मिलता है?
उत्तर:
विभिन्न धर्मों से संबंधित छुट्टियाँ (उदाहरण के रूप में):
- हिन्दू धर्म: मकर संक्रांति, महा शिवरात्रि, होली, रामनवमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, दशहरा, दीपावली।
- इस्लाम धर्म: ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा (बकरीद), मुहर्रम, मिलाद-उन-नबी।
- सिख धर्म: गुरु नानक जयंती, गुरु गोबिंद सिंह जयंती, बैसाखी।
- ईसाई धर्म: क्रिसमस डे, गुड फ्राइडे।
- जैन धर्म: महावीर जयंती।
- बौद्ध धर्म: बुद्ध पूर्णिमा।
इससे निम्नलिखित संकेत मिलते हैं:
- धार्मिक विविधता का सम्मान: भारत में अनेक धर्मों के लोग साथ-साथ रहते हैं। स्कूल कैलेंडर में विभिन्न धर्मों की छुट्टियाँ शामिल करना इस विविधता को मान्यता और सम्मान देता है।
- धर्मनिरपेक्षता की भावना: यह दर्शाता है कि भारतीय राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ और समान रवैया रखता है। कोई भी धर्म राज्य द्वारा विशेष रूप से पसंदीदा नहीं है।
- धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक: ये छुट्टियाँ इस बात का प्रतीक हैं कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार त्योहार मनाने और धार्मिक कार्य करने की स्वतंत्रता है।
- सामाजिक एकता को बढ़ावा: जब सभी धर्मों के त्योहारों को मान्यता मिलती है, तो इससे सभी समुदायों में समानता की भावना पैदा होती है और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
प्रश्न 5. एक ही धर्म के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोणों के कुछ उदाहरण दें।
| धर्म |
अलग-अलग दृष्टिकोण / सम्प्रदाय |
| हिन्दू धर्म |
सनातन परंपरा (मूर्ति पूजा), आर्य समाज (मूर्ति पूजा के विरोधी), शैव, वैष्णव, शाक्त आदि। |
| इस्लाम धर्म |
सुन्नी और शिया (उत्तराधिकार के मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण)। |
| सिख धर्म |
केशधारी (पांच ककारों का पालन करने वाले), नामधारी, निरंकारी आदि। |
| बौद्ध धर्म |
हीनयान (व्यक्तिगत मुक्ति पर जोर) और महायान (सभी प्राणियों की मुक्ति पर जोर)। |
| ईसाई धर्म |
रोमन कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, ऑर्थोडॉक्स (आचार-विचार और प्रथाओं में अंतर)। |
| जैन धर्म |
दिगंबर (वस्त्रहीन) और श्वेतांबर (सफेद वस्त्र धारण करने वाले)। |
प्रश्न 6. भारतीय राज्य धर्म से फ़ासला भी रखता है और उसमें हस्तक्षेप भी करता है। यह उलझाने वाला विचार लग सकता है। इस पर कक्षा में एक बार फिर चर्चा कीजिए। चर्चा के लिए इस अध्याय में दिए गए उदाहरणों के अलावा आप अपनी जानकारी के अन्य उदाहरणों का भी सहारा ले सकते हैं।
उत्तर:
भारतीय राज्य का धर्म के साथ संबंध दोहरा है, जो पहली नज़र में उलझाने वाला लग सकता है, लेकिन यह हमारे संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
1. धर्म से फ़ासला (दूरी) रखना:
- अर्थ: राज्य किसी एक धर्म को आधिकारिक धर्म नहीं मानता और सार्वजनिक संस्थानों में किसी भी धर्म का पक्ष नहीं लेता।
- उदाहरण:
- सरकारी स्कूलों में कोई एक धार्मिक प्रार्थना अनिवार्य नहीं है।
- सरकारी कार्यालयों, अदालतों या पुलिस स्टेशनों में किसी विशेष धर्म के प्रतीक या चित्र नहीं लगाए जाते।
- राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है; यह सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहता है।
2. धर्म में हस्तक्षेप करना:
- अर्थ: जब कोई धार्मिक प्रथा या रिवाज सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार या सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध हो, तो राज्य उसमें हस्तक्षेप कर सकता है।
- उदाहरण:
- छुआछूत पर प्रतिबंध: हिंदू धर्म के भीतर प्रचलित छुआछूत की प्रथा संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत गैरकानूनी है। यहाँ राज्य ने धर्म की एक प्रथा में हस्तक्षेप करके सामाजिक समानता स्थापित की है।
- सती प्रथा पर प्रतिबंध: राजा राममोहन राय के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने सती प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया, जो धर्म में राज्य के हस्तक्षेप का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
- धार्मिक स्थलों में प्रवेश: कानून बनाकर सभी हिंदुओं को सभी मंदिरों में प्रवेश का अधिकार दिया गया, चाहे वे किसी भी जाति के हों।
- समान नागरिक संहिता (बहस): विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार के कानून) में सुधार लाने की बात भी धर्म में राज्य के संभावित हस्तक्षेप का उदाहरण है, ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
निष्कर्ष: भारत की धर्मनिरपेक्षता 'सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता' है। यह केवल धर्म से दूरी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका भी निभाती है कि धर्म का इस्तेमाल अन्याय, भेदभाव और असमानता फैलाने के लिए न हो।
प्रश्न 7. साथ में दिया गया यह पोस्टर 'शांति' के महत्त्व को रेखांकित करता है। इस पोस्टर में कहा गया है “शांति कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है...यह हमारी आपसी भिन्नताओं और साझा हितों को नजरअंदाज करके नहीं चल सकती।” ये वाक्य क्या बताते हैं? अपने शब्दों में लिखिए। धार्मिक सहिष्णुता से इसका क्या संबंध है?
उत्तर:
पोस्टर के ये वाक्य शांति की गहरी और व्यावहारिक समझ प्रस्तुत करते हैं।
इन वाक्यों का अर्थ:
- "शांति कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है": इसका मतलब है कि शांति कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे एक बार हासिल करके हम भूल जाएँ। यह एक निरंतर चलने वाला प्रयास है। समाज में नए विवाद, नई चुनौतियाँ आती रहती हैं, इसलिए शांति बनाए रखने के लिए लगातार काम करते रहना पड़ता है। इसे बनाए रखना हम सभी की निरंतर जिम्मेदारी है।
- "यह हमारी आपसी भिन्नताओं और साझा हितों को नजरअंदाज करके नहीं चल सकती": असली शांति तभी संभव है जब हम यह स्वीकार करें कि हम सब अलग-अलग हैं (भाषा, धर्म, संस्कृति में) और साथ ही यह भी पहचानें कि हमारे कई साझा हित भी हैं (जैसे सुरक्षा, विकास, अच्छा जीवन)। शांति का मतलब भिन्नताओं को मिटाना नहीं, बल्कि