UP Board class 9 Political Science 4. चुनावी राजनीति is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: हमें चुनाव की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि यह लोकतंत्र का मूल आधार है। चुनाव के माध्यम से आम नागरिकों को यह अधिकार मिलता है कि वे अपने शासकों का चयन स्वयं कर सकें। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो नियमित अंतराल पर होती है, जिससे लोग अपने प्रतिनिधियों का मूल्यांकन कर सकते हैं और यदि वे संतुष्ट न हों तो उन्हें बदल भी सकते हैं। इस प्रकार, चुनाव सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाते हैं और शासन में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
उत्तर: चुनाव एक औपचारिक और संगठित प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ मतदाता विभिन्न उम्मीदवारों या दलों में से अपनी पसंद का चयन करते हैं। चुनाव का उद्देश्य एक निष्पक्ष तरीके से सरकार या संस्था के सदस्यों का चयन करना है। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक देशों में निश्चित समय अंतराल पर दोहराई जाती है, जिससे लोगों को अपने फैसले बदलने का मौका मिलता रहे।
उत्तर: चुनाव में मतदाता निम्नलिखित प्रकार से अपना निर्णय लेते हैं:
(1) सरकार बनाने वाले का चुनाव: वे उस व्यक्ति या दल का चयन करते हैं जो सरकार बनाएगा और देश या राज्य के लिए बड़े नीतिगत फैसले करेगा।
(2) कानून बनाने वाले का चुनाव: वे अपने क्षेत्र से विधायक (विधानसभा के लिए) या सांसद (लोकसभा के लिए) चुनते हैं, जो कानून निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
(3) दिशा-निर्देश देने वाली पार्टी का चुनाव: वे किसी राजनीतिक दल को वोट देकर यह तय करते हैं कि सरकार किस नीति और कार्यक्रम के अनुसार चलेगी। मतदाता अक्सर दलों के घोषणा-पत्र (मेनिफेस्टो) और उनके वादों के आधार पर अपना विकल्प चुनते हैं।
उत्तर: किसी भी चुनाव को लोकतांत्रिक और निष्पक्ष माने जाने के लिए निम्नलिखित न्यूनतम शर्तों का पूरा होना आवश्यक है:
(1) सार्वभौमिक मताधिकार: देश का प्रत्येक वयस्क नागरिक, बिना किसी भेदभाव के, मतदान का अधिकार रखता हो। प्रत्येक मतदाता के वोट का मूल्य समान होना चाहिए।
(2) विकल्प की उपलब्धता: मतदाताओं के पास चुनने के लिए वास्तविक विकल्प होने चाहिए। विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।
(3) नियमित अंतराल पर चुनाव: चुनाव एक निश्चित और नियमित अंतराल पर होने चाहिए, ताकि जनता को अपने प्रतिनिधियों का आकलन करने और यदि आवश्यक हो तो उन्हें बदलने का नियमित अवसर मिलता रहे।
(4) जन इच्छा की अभिव्यक्ति: चुनाव का परिणाम वास्तव में लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करना चाहिए। जिसे जनता चुने, वही सत्ता में आए।
(5) स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव: चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए। मतदाता बिना किसी डर, दबाव या प्रलोभन के स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद का प्रयोग कर सकें।
उत्तर: भारत में, लोकसभा (राष्ट्रीय संसद) और विधानसभाओं (राज्य विधानमंडल) के चुनाव प्रत्येक पाँच वर्ष के बाद होते हैं, बशर्ते कि सदन का कार्यकाल पहले ही भंग न हो जाए।
उत्तर: जब देश की सभी लोकसभा सीटों के लिए, या किसी राज्य की सभी विधानसभा सीटों के लिए, एक साथ या कुछ दिनों के छोटे अंतराल में चुनाव कराए जाते हैं, तो उसे आम चुनाव कहते हैं। यह एक सामान्य और व्यापक चुनावी प्रक्रिया है।
उत्तर: यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए सदस्य की मृत्यु हो जाती है, वह इस्तीफा दे देता है या उसकी सदस्यता किसी कारणवश समाप्त हो जाती है, तो उस खाली हुई एकल सीट के लिए जो चुनाव कराया जाता है, उसे उपचुनाव कहा जाता है। यह आम चुनाव के बीच में होता है।
उत्तर: चुनाव को व्यवस्थित करने के लिए पूरे देश या राज्य को कई भौगोलिक क्षेत्रों में बाँटा जाता है। प्रत्येक ऐसे क्षेत्र से एक प्रतिनिधि चुना जाता है। इन क्षेत्रों को ही निर्वाचन क्षेत्र कहते हैं। लोकसभा के लिए बने क्षेत्रों को संसदीय क्षेत्र और विधानसभा के लिए बने क्षेत्रों को विधानसभा क्षेत्र कहा जाता है।
उत्तर: वर्तमान में, लोकसभा चुनाव के लिए भारत को कुल 543 निर्वाचन क्षेत्रों (संसदीय क्षेत्रों) में बाँटा गया है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र से एक सांसद चुना जाता है।
उत्तर: लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य संसद-सदस्य या सांसद कहलाता है। विशेष रूप से, लोकसभा के सदस्यों को सीधे जनता द्वारा अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र से चुना जाता है। ये सदस्य कानून बनाने, सरकार के कार्यों पर नज़र रखने और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस करने का काम करते हैं।
उत्तर: लोकतांत्रिक चुनाव की एक बहुत ही महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें 'एक व्यक्ति, एक वोट' का सिद्धांत लागू होता है, अर्थात प्रत्येक मतदाता के वोट का मूल्य बराबर होता है। चाहे वह व्यक्ति अमीर हो या गरीब, शिक्षित हो या अशिक्षित, उसके एक वोट का वजन किसी दूसरे के एक वोट के बराबर ही होता है।
उत्तर: किसी राज्य की विधानसभा के लिए चुने गए प्रतिनिधि को विधायक कहते हैं। विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और राज्य स्तर पर कानून बनाने तथा राज्य सरकार के कार्यों की निगरानी का कार्य करते हैं।
प्रश्न 13: निर्वाचन क्षत्रो को सीट क्यों कहा जाता है ?
उत्तर: निर्वाचन क्षेत्रों को प्रतीकात्मक रूप से 'सीट' कहा जाता है क्योंकि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र संसद (लोकसभा) या विधानसभा में एक स्थान या आसन (सीट) का प्रतिनिधित्व करता है। जब कोई उम्मीदवार चुनाव जीतता है, तो कहा जाता है कि उसने 'अमुक सीट' जीती है, यानी वह उस क्षेत्र के लिए संसद या विधानसभा में बैठने (प्रतिनिधित्व करने) का अधिकारी हो गया है। उत्तर: भारतीय संविधान के अनुसार, लोकसभा की सीटों में समाज के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। वर्तमान में, लोकसभा की 543 सीटों में से 84 सीटें आरक्षित हैं। इनमें से अनुसूचित जातियों (SC) के लिए 79 सीटें और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए 41 सीटें आरक्षित हैं। (नोट: कुल 79+41=120 होता है, लेकिन वास्तविक आरक्षण जनसंख्या के अनुपात और क्षेत्रीय सीमांकन पर आधारित है। मूल पाठ के अनुसार, यहाँ 79 और 41 बताया गया है।) उत्तर: मतदाता सूची (जिसे आम बोलचाल में वोटर लिस्ट कहते हैं) एक आधिकारिक दस्तावेज है जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के उन सभी व्यक्तियों के नाम, पते और अन्य विवरण शामिल होते हैं, जो मतदान की योग्यता (18 वर्ष या उससे अधिक आयु) रखते हैं। यह सूची चुनाव आयोग द्वारा तैयार की जाती है और हर चुनाव से पहले इसे अपडेट (संशोधित) किया जाता है ताकि नए मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें और जो लोग अब उस क्षेत्र में नहीं रहते या उनकी मृत्यु हो गई है, उनके नाम हटाए जा सकें। उत्तर: हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को सुधारने (अपडेट करने) के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
उत्तर: भारत में, वोट डालने का अधिकारी (मतदाता) होने के लिए व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही उसे भारत का नागरिक होना चाहिए और किसी भी तरह के पागलपन या दिवालियेपन के आधार पर अयोग्य न घोषित किया गया हो। उत्तर: भारत में चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार बनने की न्यूनतम आयु अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग है:
उत्तर: राजनीतिक दल द्वारा किसी व्यक्ति को चुनाव में अपने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में नामांकित करने की कार्रवाई को, आम बोलचाल की भाषा में, 'टिकट देना' कहा जाता है। जिस उम्मीदवार को यह मनोनयन मिलता है, उसे 'पार्टी का टिकट' मिला हुआ कहा जाता है। यह शब्द इस बात का प्रतीक है कि उम्मीदवार को पार्टी का समर्थन और चुनाव चिह्न प्राप्त है। उत्तर: चुनाव में खड़े होने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को एक शपथ-पत्र (अफिडेविट) भरकर देना होता है, जिसमें निम्नलिखित जानकारियों का विवरण देना अनिवार्य है:
उत्तर: हमारे देश में, उम्मीदवारों की अंतिम सूची की घोषणा (नामांकन की अंतिम तिथि के बाद) और मतदान की वास्तविक तारीख के बीच लगभग दो सप्ताह (14 दिन) का समय चुनाव प्रचार के लिए दिया जाता है। इस अवधि में सभी उम्मीदवार और राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यक्रमों और नारों के माध्यम से मतदाताओं को समझाने का प्रयास करते हैं। उत्तर: 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान, श्रीमती इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने "गरीबी हटाओ" का बहुत प्रसिद्ध नारा दिया था। यह नारा सामाजिक-आर्थिक न्याय और गरीबी उन्मूलन पर केंद्रित था और इसने पार्टी को जबरदस्त जनसमर्थन दिलाया। उत्तर: 1977 में हुए लोकसभा चुनावों में, आपातकाल (1975-77) के बाद बनी जनता पार्टी ने "लोकतंत्र बचाओ" का नारा दिया था। यह नारा आपातकाल के दौरान हुई नागरिक स्वतंत्रताओं की कटौती के खिलाफ था और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का आह्वान करता था। उत्तर: 1977 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में, वामपंथी दलों (मुख्यतः मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी - CPI(M)) ने "जमीन जोतने वाले को" का नारा दिया था। यह नारा भूमि सुधारों और किसानों के अधिकारों पर जोर देता था, जिसका उद्देश्य खेतिहर मजदूरों और छोटे किसानों का समर्थन हासिल करना था। उत्तर: 1983 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक नेता एन.टी. रामाराव ने "तेलुगु स्वाभिमान" (तेलुगु गौरव) का नारा दिया था। यह नारा तेलुगु भाषा, संस्कृति और लोगों के स्वाभिमान को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करने पर केंद्रित था। उत्तर: चुनाव आचार संहिता और कानूनों के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार या पार्टी निम्नलिखित काम नहीं कर सकती:
उत्तर: आदर्श आचार संहिता के अनुसार, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निम्नलिखित कार्य करने से मना है:
प्रश्न 14: लोकसभा की अनुसूचित जातियो तथा अनुसूचित जनजातियो के लिए कितनी सीटे आरक्षित की है
प्रश्न 15: मतदाता सूची या वोटर लिस्ट किसे कहते है ?
प्रश्न 16: क्या कारण है हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को सुधारा जाता है ?
(1) नए मतदाताओं को जोड़ना: हर साल बड़ी संख्या में युवा 18 वर्ष की आयु प्राप्त करके मतदाता बनने की योग्यता हासिल करते हैं। उन सभी का नाम सूची में शामिल करना आवश्यक है।
(2) परिवर्तनों को दर्ज करना: लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होते रहते हैं। नए निवासियों के नाम जोड़ने और पुराने निवासियों के नाम हटाने के लिए सूची को सुधारा जाता है।
(3) त्रुटियाँ दूर करना: पुरानी सूची में किसी का नाम गलत लिखा होना, एक ही नाम का दो बार दर्ज होना, या किसी मृत व्यक्ति का नाम शामिल होना जैसी त्रुटियों को ठीक किया जाता है।
इस प्रकार, सुधारी गई सूची यह सुनिश्चित करती है कि केवल वास्तविक और योग्य मतदाता ही मतदान कर सकें और चुनाव निष्पक्ष रहे।प्रश्न 17: वोट डालने का अधिकारी होने के लिए व्यक्ति की उम्र कितनी होनी चाहिए ?
प्रश्न 18: उम्मीदवार बनने की न्यूनतम उम्र कितनी होनी चाहिए ?
• लोकसभा या विधानसभा का उम्मीदवार: न्यूनतम 25 वर्ष।
• राज्यसभा का उम्मीदवार: न्यूनतम 30 वर्ष।
• राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार: न्यूनतम 35 वर्ष।
(प्रश्न के संदर्भ में, सामान्यतः विधानसभा/लोकसभा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष ही मानी जाती है।)प्रश्न 19: टिकट किसे कहते है ?
प्रश्न 20: प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव में खड़े होने के लिए किन चीजों का विवरण देना पड़ता है ?
(1) आपराधिक रिकॉर्ड: उम्मीदवार के खिलाफ चल रहे गंभीर आपराधिक मामलों और पिछले दोषसिद्धि का ब्यौरा।
(2) शैक्षिक योग्यता: उम्मीदवार द्वारा प्राप्त की गई शैक्षणिक डिग्रियों और योग्यताओं का विवरण।
(3) आर्थिक स्थिति: उम्मीदवार की अपनी, उसके जीवनसाथी और आश्रित बच्चों की संपत्ति (जैसे जमीन, मकान, वाहन, नकदी) और देनदारियों (कर्ज) का पूरा ब्यौरा।
इसका उद्देश्य मतदाताओं को उम्मीदवार की पृष्ठभूमि के बारे में पारदर्शिता प्रदान करना है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।प्रश्न 21: हमारे देश में उम्मीवारो की अंतिम सूची की घोषणा होने तथा मतदान की तारीख के बीच कितना समय चुनाव प्रचार के लिए दिया जाता है ?
प्रश्न 22: इंदिरा गाँधी के नेतृत्व करने वाली कॉँग्रेस पार्टी के 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान कौन - सा नारा दिया था ?
प्रश्न 23: 1977 में हुए अगले लोकसभा चुनावो में जनता पार्टी ने कौन - सा नारा दिया था ?
प्रश्न 24: वामपंथी दलों ने 1977 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में किसको नारा दिया था ?
प्रश्न 25:1983 के आंध्रप्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान तेलुगु देशम पार्टी के नेता एन.टी.रामाराव ने किसका का नारा दिया था ?
प्रश्न 26: चुनाव के कानूनों के अनुसार कोई भी उम्मीदवार अथवा पार्टी कौन - से काम नहीं कर सकता है ?
(1) मतदाताओं को प्रभावित करना: मतदाताओं को पैसे, शराब, उपहार आदि देकर प्रलोभन देना, धमकी देना या घूस देना मना है।
(2) सांप्रदायिक अपील: जाति, धर्म, भाषा या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर वोट माँगना गैर-कानूनी है।
(3) सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग: चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहनों, भवनों, अधिकारियों या अन्य साधनों का उपयोग करना वर्जित है।
(4) व्यय सीमा का उल्लंघन: चुनाव अभियान पर खर्च की गई राशि निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। (लोकसभा चुनाव में प्रति उम्मीदवार लगभग 95 लाख रुपये और विधानसभा चुनाव में अलग-अलग राज्यों के अनुसार अलग-अलग सीमा निर्धारित है। पुराने आँकड़े अलग हो सकते हैं।)प्रश्न 27: हमारे देश के सभी आदर्श आचार संहिता के अनुसार पार्टी को किन चीजो को करने की मनाही है ?
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| Other Chapters of class 9 Political Science | |
| 1. समकालिक विश्व में लोकतंत्र | |
| 2. लोकतंत्र क्या लोकतंत्र क्यों | |
| 3. संविधान निर्माण | |
| 4. चुनावी राजनीति | |
| 5. संस्थाओं का कामकाज | |
| 6. लोकतांत्रिक अधिकार |