UP Board Class 10 Social Science 3. लोकतंत्र और विविधता is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: सामाजिक विभाजनों की राजनीति के परिणाम मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करते हैं:
1. लोगों की पहचान की धारणा: यदि लोग अपनी सामाजिक पहचान (जैसे जाति, धर्म, भाषा) को राष्ट्रीय पहचान से ऊपर रखते हैं, तो सामाजिक विभाजन गहरा सकता है। इसके विपरीत, यदि वे स्वयं को पहले भारतीय और बाद में किसी अन्य समूह का सदस्य मानते हैं, तो विभाजन को सुलझाना आसान होता है।
2. राजनीतिक दलों और नेताओं की भूमिका: राजनीतिक नेता किसी समुदाय की माँगों को कैसे उठाते हैं, यह महत्वपूर्ण है। यदि वे संवैधानिक सीमाओं में रहकर और दूसरे समुदायों के हितों का ध्यान रखते हुए न्यायसंगत माँगें उठाते हैं, तो स्थिति शांतिपूर्ण रहती है। लेकिन यदि वे एक समुदाय की अनुचित माँगों का समर्थन करते हैं जो दूसरों के अधिकारों का हनन करती हैं, तो संघर्ष पैदा हो सकता है।
3. सरकार की नीतियाँ और रवैया: सरकार का दृष्टिकोण भी परिणाम तय करता है। यदि सरकार राष्ट्रीय एकता के नाम पर किसी समुदाय की उचित माँगों को अनसुना कर देती है या दबाने की कोशिश करती है, तो असंतोष और हिंसा फैल सकती है। दूसरी ओर, समावेशी और न्यायपूर्ण नीतियाँ सामाजिक विभाजनों को कम करने में मदद करती हैं।
उत्तर: सामाजिक अंतर तब सामाजिक विभाजनों का रूप ले लेते हैं जब एक विशेष प्रकार का अंतर (जैसे धर्म, जाति या भाषा) इतना प्रबल हो जाता है कि लोग स्वयं को दूसरे समूह से पूरी तरह अलग और विरोधी मानने लगते हैं। यह प्रक्रिया निम्नलिखित तरीकों से होती है:
• प्रमुख अंतर का उभार: जब एक ही प्रकार की सामाजिक असमानता (जैसे आर्थिक शोषण और सामाजिक भेदभाव) किसी एक बड़े समूह के साथ लगातार जुड़ जाती है, तो वह समूह अपनी अलग पहचान बनाने लगता है। उदाहरण के लिए, भारत में दलित समुदाय गरीबी और ऐतिहासिक भेदभाव के कारण एक स्पष्ट सामाजिक विभाजन रेखा के रूप में उभरा है।
• राजनीतिक शोषण: जब राजनीतिक दल इन अंतरों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं और लोगों को 'हम' और 'वे' के आधार पर बाँटने लगते हैं, तो साधारण अंतर गहरे विभाजन में बदल जाते हैं।
• सामूहिक पहचान का निर्माण: जब लोग अपनी एक पहचान (जैसे धर्म विशेष) को इतना महत्व देने लगें कि वह उनकी अन्य सभी पहचानों (जैसे राष्ट्रीय नागरिक) पर हावी हो जाए, तो सामाजिक विभाजन पैदा होता है।
उत्तर: सामाजिक विभाजन राजनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यदि वे इस प्रतिस्पर्धा में मौजूदा सामाजिक विभाजनों (जैसे जाति, धर्म, भाषा) का इस्तेमाल वोट बैंक बनाने के लिए करने लगें, तो ये सामाजिक विभाजन राजनीतिक विभाजन में बदल सकते हैं। इससे समाज में तनाव, संघर्ष, हिंसा और यहाँ तक कि देश के टूटने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
उदाहरण 1: यूगोस्लाविया: यूगोस्लाविया में विभिन्न जातीय समूह (जैसे सर्ब, क्रोएट, बोस्नियाई) के बीच गहरे सामाजिक विभाजन थे। राजनीतिक नेताओं ने इन विभाजनों को भड़काकर अपनी सत्ता मजबूत करने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप भयंकर गृहयुद्ध हुआ और अंततः यूगोस्लाविया कई स्वतंत्र देशों (जैसे सर्बिया, क्रोएशिया, बोस्निया) में बँट गया।
उदाहरण 2: उत्तरी आयरलैंड: यहाँ कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट ईसाइयों के बीच सामाजिक-धार्मिक विभाजन था। इस विभाजन के आधार पर राजनीतिक दल बने और दशकों तक हिंसक संघर्ष चला, जिसे 'द ट्रबल्स' कहा जाता है। यह सामाजिक विभाजन के राजनीतिकरण का स्पष्ट उदाहरण है।
उत्तर: एक तरह के सामाजिक अंतर गहरे सामाजिक विभाजन और तनावों की स्थिति पैदा करते हैं। विभिन्न प्रकार के सामाजिक अंतर सामान्य तौर पर टकराव की स्थिति तक नहीं जाते।
स्पष्टीकरण: जब सभी लोगों में एक ही प्रकार का अंतर पाया जाता है (जैसे सभी काले लोग गरीब हैं और सभी गोरे लोग अमीर हैं), तो यह विभाजन बहुत गहरा और खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह समाज को स्पष्ट रूप से दो विरोधी समूहों में बाँट देता है। दूसरी ओर, जब समाज में विभिन्न प्रकार के अंतर मौजूद होते हैं (जैसे कोई गरीब हो सकता है लेकिन उच्च जाति का, तो कोई अमीर हो सकता है लेकिन निम्न जाति का), तो ये अंतर एक-दूसरे को काटते हैं और कोई एक स्पष्ट विभाजन रेखा नहीं खींच पाते, जिससे टकराव की संभावना कम हो जाती है।
उत्तर: (घ) लोकतंत्र सामाजिक विभाजनों के आधार पर समाज को विखंडन की ओर ले जाता है।
कारण: यह कथन लोकतंत्र की प्रकृति के विपरीत है। लोकतंत्र वार्ता, चर्चा और शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों को सुलझाने का अवसर देता है। यह विभिन्न समूहों को संवैधानिक ढाँचे में रहकर अपनी बात रखने की आजादी देता है, जिससे विखंडन (टूटन) की संभावना कम होती है, बढ़ती नहीं है। अन्य विकल्प लोकतंत्र की वास्तविक प्रक्रियाओं को सही ढंग से दर्शाते हैं।
उत्तर: (ख) अ और ब
स्पष्टीकरण:
• कथन (अ) सही है क्योंकि जब एक प्रकार का सामाजिक अंतर (जैसे जाति) दूसरे अंतर (जैसे आर्थिक स्थिति) के साथ मेल खाने लगता है, तो यह गहरा विभाजन पैदा करता है।
• कथन (ब) भी सही है। एक व्यक्ति एक साथ किसी देश का नागरिक, किसी धर्म का अनुयायी, किसी भाषा-भाषी और किसी पेशे से जुड़ा हो सकता है।
• कथन (स) गलत है क्योंकि सामाजिक विभाजन छोटे-बड़े सभी देशों में पाए जाते हैं, जैसे बेल्जियम (भाषाई), श्रीलंका (जातीय) आदि।
उत्तर: (क) द, ब, स, अ
तार्किक क्रम इस प्रकार है:
1. (द) सबसे पहले, कुछ सामाजिक अंतर विभाजन का रूप ले लेते हैं।
2. (ब) चूँकि सामाजिक अंतर हर समाज में होते हैं, इसलिए हर देश में किसी न किसी प्रकार के सामाजिक विभाजन मौजूद होते हैं।
3. (स) इन मौजूदा विभाजनों का फायदा उठाते हुए, राजनीतिक दल उनके आधार पर समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं।
4. (अ) अंत में, यह समझना जरूरी है कि विभाजनों की राजनीतिक अभिव्यक्ति हमेशा खतरनाक नहीं होती; शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से भी माँगें उठाई जा सकती हैं।
उत्तर: (ग) यूगोस्लाविया
स्पष्टीकरण: यूगोस्लाविया एक ऐसा देश था जहाँ विभिन्न जातीय और धार्मिक समूह (जैसे सर्ब (ऑर्थोडॉक्स ईसाई), क्रोएट (रोमन कैथोलिक), बोस्नियाई (मुस्लिम)) एक साथ रहते थे। 1990 के दशक में राष्ट्रवादी भावनाओं और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण इन समूहों के बीच भयंकर संघर्ष हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश का पूर्ण विखंडन (टूटन) हो गया और कई नए देश बने। बेल्जियम और भारत ने लोकतांत्रिक तरीकों से विविधता को सँभाला है, जबकि नीदरलैंड में ऐसा गहरा विखंडन नहीं हुआ।
उत्तर:
1. सामाजिक विभाजन: मार्टिन लूथर किंग जूनियर नस्ल (चमड़ी के रंग) के आधार पर पैदा हुए सामाजिक विभाजन और भेदभाव की बात कर रहे हैं। उस समय अमेरिका में अश्वेत (अफ्रीकी-अमेरिकन) लोगों के साथ गोरे लोगों की तुलना में कानूनी और सामाजिक रूप से भेदभाव किया जाता था।
2. उनकी उम्मीदें और आशंकाएँ:
• उम्मीदें: उनकी सबसे बड़ी उम्मीद थी कि एक दिन अमेरिका एक ऐसा समाज बनेगा जहाँ नस्ल के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी लोगों को उनके चरित्र और क्षमता के आधार पर आँका जाएगा। वह चाहते थे कि सभी नस्लों और धर्मों के लोग समानता और भाईचारे के साथ एक साथ रह सकें।
• आशंकाएँ: उन्हें आशंका थी कि यदि नस्लीय भेदभाव और अन्याय जारी रहा, तो देश की एकता और नैतिक आधार टूट जाएगा। वे चाहते थे कि देश अपने संस्थापक सिद्धांत "सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं" को वास्तविकता में बदले।
3. मैक्सिको ओलंपिक (1968) की घटना से संबंध: हाँ, उनके भाषण और मैक्सिको ओलंपिक की घटना में सीधा संबंध है। 1968 के ओलंपिक में, अमेरिकी अश्वेत एथलीट टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस ने मेडल समारोह के दौरान मार्टिन लूथर किंग के आदर्शों को याद दिलाया। उन्होंने काली मोजे और नंगे पैर खड़े होकर अश्वेतों की गरीबी का प्रतीक दिखाया और मुट्ठी बंद कर काले दस्ताने पहनकर 'ब्लैक पावर' का प्रतीक दिया। यह उनका मार्टिन लूथर किंग के सपने को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध था। दोनों ही घटनाएँ नस्लीय समानता और न्याय के लिए संघर्ष का हिस्सा थीं।
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