UP Board Class 8 Hindi 10. कामचोर - इस्मत चुगताई is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 8 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- कहानी में 'मोटे-मोटे किस काम के हैं' यह वाक्य घर के बच्चों के लिए कहा गया है। उनके बारे में ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि वे दिन भर केवल खाते-पीते और शरारतें करते रहते थे। घर के किसी भी काम में वे माता-पिता या नौकरों की कोई मदद नहीं करते थे। उनका सारा काम दूसरों पर निर्भर था। इस आलसी जीवनशैली के कारण वे शारीरिक रूप से तो मोटे हो रहे थे, लेकिन कोई उपयोगी काम नहीं कर रहे थे।
उत्तर:- बच्चों ने तनख्वाह पाने के लालच में काम शुरू तो किया, लेकिन उनके ऊधम से पूरा घर तबाह हो गया। उन्होंने काम को सही ढंग से करने की बजाय इतनी अव्यवस्था फैला दी कि घर में तूफ़ान जैसा माहौल बन गया। मटके-सुराहियाँ लुढ़क गए, बर्तन और तसले इधर-उधर बिखर गए। पशु-पक्षी घर के अंदर भागने लगे। मटर की सब्जी बनने से पहले ही भेड़ें खा गईं। मुर्गियों के कारण सारे कपड़े गंदे हो गए। पूरे घर में धूल, मिट्टी और कीचड़ का ढेर लग गया। इस अराजकता से परेशान होकर अम्मा ने घर छोड़ने तक का मन बना लिया और घर की शांति पूरी तरह भंग हो गई।
उत्तर:- अम्मा ने यह बात तब कही जब बच्चों ने पिताजी के कहने पर घर का काम करने की बजाय पूरे घर को अस्त-व्यस्त कर दिया। बच्चों के इस तरह के व्यवहार से अम्मा बहुत दुखी और नाराज़ हो गई थीं। इसका परिणाम यह हुआ कि पिताजी ने बच्चों को सख्त हिदायत दी कि अब से कोई भी बच्चा घर के किसी भी काम में हाथ नहीं लगाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी ने काम किया तो उसे रात का खाना नहीं दिया जाएगा। इस तरह बच्चों की 'कामचोरी' को बढ़ावा मिल गया।
उत्तर:- 'कामचोर' एक मनोरंजक हास्य कहानी है जो एक गंभीर संदेश देती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि बच्चों को बचपन से ही छोटे-छोटे घरेलू काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उनकी उम्र और क्षमता के अनुसार काम सिखाने और देना चाहिए। ऐसा करने से उनमें आत्मनिर्भरता, जिम्मेदारी की भावना और काम के प्रति लगन पैदा होती है। अगर बच्चों को किसी काम से दूर रखा जाएगा, तो वे 'कामचोर' बन जाएँगे और बड़े होकर भी काम को सही ढंग से करना नहीं सीख पाएँगे।
उत्तर:- बच्चों द्वारा लिया गया यह निर्णय बिल्कुल भी उचित नहीं था। 'हिलकर पानी न पीने' का मतलब था कि वे अपने लिए पानी तक नहीं उठाएँगे, यानी पूरी तरह आलसी बन जाएँगे। ऐसा करने से वे और भी ज्यादा कामचोर बन जाएँगे और जीवन में कभी भी कोई कौशल नहीं सीख पाएँगे। बच्चों को काम करना चाहिए, लेकिन बुद्धिमानी और सीखते हुए। बड़ों का यह कर्तव्य है कि वे बच्चों को सही तरीके से काम सिखाएँ और उनका मार्गदर्शन करें, न कि उन्हें काम करने से पूरी तरह रोक दें।
उत्तर:- अपनी क्षमता के अनुरूप काम करना हर व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी है। ऐसा करने से काम सही ढंग से, आसानी से और अच्छे परिणाम के साथ पूरा होता है। अगर हम अपने छोटे-छोटे काम खुद नहीं करेंगे, तो हम दूसरों पर निर्भर और कामचोर बन जाएँगे। आत्मनिर्भर बनने से न सिर्फ हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है और घर का माहौल खुशनुमा बना रहता है।
उत्तर:- भरा-पूरा परिवार तभी सुखद बन सकता है जब परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर, एक-दूसरे की मदद से काम करें। अगर हर कोई स्वार्थी बन जाए और अपनी जिम्मेदारी न निभाए, तो परिवार दुखद स्थिति में पहुँच जाता है, जैसा कि 'कामचोर' कहानी में हुआ। कामों को सबकी क्षमता के हिसाब से बाँट देने से कोई भी व्यक्ति अधिक बोझ महसूस नहीं करता और न ही किसी को दूसरे पर काम के लिए दबाव डालना पड़ता है। इससे पारिवारिक तनाव खत्म होता है और प्रेम बना रहता है।
उत्तर:- बड़े होते बच्चे माता-पिता के सहयोगी तब बन सकते हैं जब वे छोटी उम्र से ही अपने छोटे-छोटे काम खुद करना सीखें, जैसे अपना सामान संभालना, स्कूल के लिए तैयार होना, अपने खाने के बर्तन उठाना आदि। इससे वे जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनेंगे। दूसरी ओर, अगर बच्चों को कुछ भी करने न दिया जाए और उन्हें सब कुछ परोसा जाए, तो वे काम करना ही नहीं सीखेंगे। ऐसे में, जब बड़े होकर उनसे कोई काम करवाया जाएगा, तो वे कहानी के बच्चों की तरह सब कुछ बिगाड़ देंगे और माता-पिता के लिए भार बन जाएँगे। इसलिए, बच्चों को उनकी रुचि और उम्र के अनुसार काम सिखाना चाहिए।
उत्तर:- 'कामचोर' कहानी एक संयुक्त परिवार की कहानी है, क्योंकि इसमें माता-पिता, बच्चे, चाचा-चाची, दादा-दादी आदि सब एक साथ रहते हैं।
एकल परिवार और संयुक्त परिवार में अंतर:
एकल परिवार: इसमें सदस्यों की संख्या कम (माता-पिता और बच्चे) होती है। सारा काम और जिम्मेदारी कुछ लोगों पर ही होती है। सुख-दुख का सामना अक्सर अकेले ही करना पड़ता है।
संयुक्त परिवार: इसमें सदस्यों की संख्या अधिक होती है। काम और जिम्मेदारियाँ सबमें बँट जाती हैं। सुख-दुख में सभी एक-दूसरे का साथ देते हैं और सहारा बनते हैं।
उत्तर:-
1. प्र - प्रसन्न, प्रकाश, प्रदर्शन, प्रयास, प्रबंध
2. आ - आगमन, आदेश, आकर्षण, आशीर्वाद, आविष्कार
3. भर - भरमार, भरपूर, भरसक, भरपेट
4. बद - बदलाव, बदनाम, बदसूरत, बदमाश, बदकिस्मत
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