UP Board Solutions for Class 8 History (हमारे अतीत - III) Chapter 12
प्रश्न 1. नवस्वाघीन भारत के सामने कौन सी तीन समस्याएँ थीं?
उत्तर: स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नवजात भारत राष्ट्र के सामने निम्नलिखित तीन प्रमुख समस्याएँ थीं:
- शरणार्थियों की समस्या: देश के विभाजन के कारण लगभग 80 लाख शरणार्थी पाकिस्तान से भारत आ गए थे। इन लोगों के लिए रहने की जगह, भोजन और रोजगार का प्रबंध करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी।
- रियासतों का एकीकरण: उस समय लगभग 500 देशी रियासतें (राज्य) थीं, जो अलग-अलग राजाओं या नवाबों के शासन में थीं। इन सभी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना और एक राष्ट्र बनाना एक कठिन और जटिल कार्य था।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना: आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों ने जो आशाएँ और सपने देखे थे, उन्हें पूरा करने के लिए एक ऐसी स्थिर और न्यायसंगत राजनीतिक व्यवस्था बनाना जरूरी था, जो सभी नागरिकों के हितों का ध्यान रखे।
प्रश्न 2. योजना आयोग की क्या भूमिका थी?
उत्तर: स्वतंत्र भारत में आर्थिक विकास की योजनाएँ बनाने और उन्हें लागू करने के लिए 1950 में योजना आयोग का गठन किया गया था। इसकी प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित थीं:
- देश के आर्थिक विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना और उन पर नजर रखना।
- यह तय करना कि कौन-से उद्योग सरकारी क्षेत्र में लगाए जाएँगे (जैसे लोहा, इस्पात) और कौन-से उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुले रहेंगे।
- देश के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि और उद्योग) तथा राज्यों के बीच विकास का संतुलन बनाए रखने की नीतियाँ बनाना।
- देश के सीमित संसाधनों का उपयोग किस तरह से किया जाए, इसकी रूपरेखा तैयार करना।
प्रश्न 3. रिक्त स्थान भरें :
(क) केंद्रीय सूची में कराधान, रक्षा और विदेशी मामले विषय रखे गए थे।
(ख) समवर्ती सूची में वन और कृषि विषय रखे गए थे।
(ग) वह आर्थिक योजना जिसमें सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों को विकास में भूमिका दी गई थी, उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था मॉडल कहा जाता था।
(घ) पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु से इतना ज़बरदस्त आंदोलन पैदा हुआ कि सरकार को आंध्र भाषी राज्य के गठन की माँग को मानना पड़ा।
प्रश्न 4. सही या गलत बताएँ :
(क) आज़ादी के समय ज्यादातर भारतीय गाँवों में रहते थे।
उत्तर: सही
(ख) संविधान सभा कांग्रेस पार्टी के सदस्यों से मिलकर बनी थी।
उत्तर: गलत (संविधान सभा में विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और राजनीतिक पृष्ठभूमि के सदस्य शामिल थे।)
(ग) पहले राष्ट्रीय चुनावों में केवल पुरुषों को ही वोट डालने का अधिकार दिया गया था।
उत्तर: गलत (भारत में शुरू से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू था, जिसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों को वोट डालने का अधिकार था।)
(घ) दूसरी पंचवर्षीय योजना में भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया था।
उत्तर: सही
प्रश्न 5. “राजनीति में हमारे पास समानता होगी और सामाजिक व आर्थिक जीवन में हम असमानता की राह पर चलेंगे” कहने के पीछे डॉ. अंबेडकर का क्या आशय था?
उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह कथन एक गहरी चेतावनी और आलोचना थी। उनका आशय था:
- हमारा संविधान सभी नागरिकों को राजनीतिक समानता (एक व्यक्ति, एक वोट) का अधिकार तो देता है, लेकिन केवल यही काफी नहीं है।
- अगर समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानता (जैसे जातिगत भेदभाव, गरीबी, शिक्षा का अभाव) बनी रही, तो राजनीतिक समानता का कोई वास्तविक मूल्य नहीं रह जाएगा। एक गरीब या दलित व्यक्ति के पास वोट तो होगा, लेकिन जीवन में उन्नति के समान अवसर नहीं होंगे।
- इसलिए, सच्चे लोकतंत्र के लिए केवल राजनीतिक लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी जरूरी है। उन्होंने इस असमानता को दूर करने पर जोर दिया।
प्रश्न 6. स्वतंत्रता के बाद देश को भाषा के आधार पर राज्यों में बाँटने के प्रति हिचकिचाहट क्यों थी?
उत्तर: भाषा के आधार पर राज्यों के गठन के प्रति हिचकिचाहट के पीछे निम्नलिखित कारण थे:
- विभाजन का नया घाव: देश अभी-अभी धर्म के आधार पर विभाजन के दर्दनाक अनुभव से गुजरा था, जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा और विस्थापन हुआ था। नेताओं को डर था कि भाषा के आधार पर राज्य बनाने से देश में फिर से विभाजनकारी ताकतें मजबूत हो सकती हैं।
- राष्ट्रीय एकता को खतरा: यह चिंता थी कि भाषायी पहचान राष्ट्रीय पहचान से ऊपर न हो जाए और इससे क्षेत्रीयता बढ़ेगी, जो नए राष्ट्र की एकता के लिए खतरा हो सकता है।
- नेताओं की चिंता: प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उप-प्रधानमंत्री सरदार पटेल जैसे नेता शुरू में इस विचार के पक्ष में नहीं थे। वे चाहते थे कि प्रशासनिक सुविधा के आधार पर राज्य बनें, ताकि देश की ऊर्जा विकास के काम में लग सके।
प्रश्न 7. एक कारण बताइए कि आज़ादी के बाद भी भारत में अंग्रेज़ी क्यों जारी रही?
उत्तर: आजादी के बाद भी अंग्रेजी को जारी रखने का एक प्रमुख कारण गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों, विशेषकर दक्षिण भारत की चिंताओं को दूर करना था।
- हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन दक्षिण के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश) में चिंता थी कि इससे हिंदी भाषी क्षेत्रों का दबदबा बढ़ जाएगा और उनकी भाषा व संस्कृति पिछड़ जाएगी।
- इन क्षेत्रों के लोगों को लगा कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जिससे उनमें अलगाव की भावना पैदा हो सकती है।
- इस विवाद को सुलझाने और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए एक समझौते के तहत हिंदी को राजभाषा बनाया गया, लेकिन अंग्रेजी को भी सरकारी कामकाज और अंतर-राज्यीय संचार की भाषा के रूप में जारी रखा गया। इससे सभी क्षेत्रों को न्याय मिला।
प्रश्न 8. आज़ादी के बाद प्रारंभिक दशकों में भारत के आर्थिक विकास की कल्पना किस तरह की गई थी?
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों में भारत के आर्थिक विकास की कल्पना निम्नलिखित लक्ष्यों के साथ की गई थी:
- गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता: सबसे बड़ा लक्ष्य था गरीबी को दूर करना और देश को खाद्यान्न तथा आवश्यक वस्तुओं के मामले में आत्मनिर्भर बनाना, ताकि विदेशी मदद पर निर्भरता कम हो।
- भारी उद्योगों का विकास: यह माना गया कि देश की ताकत के लिए लोहा, इस्पात, बिजली, मशीनरी जैसे भारी उद्योगों का विकास जरूरी है। इसीलिए दूसरी पंचवर्षीय योजना इसी पर केंद्रित थी।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल: विकास की जिम्मेदारी सरकार और निजी क्षेत्र दोनों पर छोड़ी गई। बुनियादी और रणनीतिक उद्योग सरकार चलाएगी, जबकि अन्य उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुले रहेंगे।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास: योजना बनाते समय यह ध्यान रखा गया कि देश के सभी राज्यों और क्षेत्रों का समान रूप से विकास हो, ताकि कहीं पिछड़ापन न रहे।
प्रश्न 9. मीरा बहन कौन थीं? उनके जीवन और आदर्शों के बारे में पता लगाएँ।
उत्तर: मीरा बहन (1892-1982) महात्मा गांधी की आध्यात्मिक सहयोगी और अनुयायी थीं। उनके जीवन और आदर्शों की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- परिचय: उनका वास्तविक नाम मेडलिन स्लेड था। वह एक ब्रिटिश नौसेना अधिकारी की पुत्री थीं, जिन्होंने अपना आरामदायक जीवन छोड़कर गांधीजी के सिद्धांतों और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को अपना जीवन समर्पित कर दिया।
- गांधीजी के साथ जुड़ाव: गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर वह 1925 में भारत आईं और गांधीजी द्वारा ही उन्हें 'मीरा बहन' नाम दिया गया। वह गांधीजी के साबरमती और सेवाग्राम आश्रम में रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीने लगीं।
- आदर्श और योगदान: उन्होंने सादा जीवन, सत्य, अहिंसा और स्वदेशी जैसे गांधीवादी सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने ग्रामीण विकास, महिला शिक्षा और हस्तकरघा को बढ़ावा देने का काम किया। भारत सरकार ने उनके सेवाभावी जीवन के लिए 1982 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
प्रश्न 10. पाकिस्तान में भाषा के आधार पर हुए उन विवादों के बारे में और पता लगाएँ जिनकी वजह से बांगलादेश का जन्म हुआ। बांगलादेश को पाकिस्तान से आज़ादी कैसे मिली?
उत्तर: बांगलादेश का जन्म पाकिस्तान में भाषा और सांस्कृतिक पहचान के विवाद का सीधा परिणाम था।
- भाषायी विवाद: 1947 में बना पाकिस्तान दो भागों- पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांगलादेश) में बंटा था। 1948 में पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया, जबकि पूर्वी पाकिस्तान की अधिकांश जनता बंगाली बोलती थी। इस फैसले का पूर्वी पाकिस्तान में व्यापक विरोध हुआ और भाषा आंदोलन शुरू हो गया।
- राजनीतिक और आर्थिक उपेक्षा: भाषा के अलावा, पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को लगता था कि सत्ता और संसाधनों पर पश्चिमी पाकिस्तान का ही नियंत्रण है और उनकी उपेक्षा की जा रही है।
- मुक्ति संग्राम और युद्ध: इन्हीं असंतोषों के कारण 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति संग्राम शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना के दमन के बाद, भारत ने शरणार्थियों की समस्या और सीमा पर हमलों के कारण इस संघर्ष में हस्तक्षेप किया।
- स्वतंत्रता की प्राप्ति: भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971) के बाद, पाकिस्तानी सेना ने 16 दिसंबर 1971 को आत्मसमर्पण कर दिया। इसी दिन बांगलादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। बाद में, 1974 में पाकिस्तान ने भी बांगलादेश को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे दी।