UP Board class 7 Hindi 18. संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिजाज हो गयाःधनराज साक्षात्कार is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया: धनराज (साक्षात्कार)
उत्तर:- इस साक्षात्कार को पढ़ने के बाद धनराज पिल्लै जी की जो छवि हमारे मन में बनती है, वह एक ऐसे व्यक्ति की है जो अपनी मेहनत और लगन से ऊपर उठे हैं। वे बहुत ही सीधे-सादे और भावुक स्वभाव के हैं और अपनी बात को बिना लाग-लपेट के स्पष्ट कह देते हैं। उनका अपने परिवार से गहरा लगाव है और वे अपने स्वाभिमान को बहुत महत्व देते हैं। जीवन में आए आर्थिक संकट और संघर्षों ने उन्हें थोड़ा सतर्क और सुरक्षा के प्रति सजग बना दिया, जिसे कुछ लोग तुनकमिज़ाजी समझ लेते हैं। लेकिन असल में, प्रसिद्धि पाने के बाद भी उनमें अहंकार बिल्कुल नहीं आया। वे आज भी साधारण जीवन जीते हैं और लोकल ट्रेन में सफर करने से परहेज नहीं करते।
उत्तर:- धनराज पिल्लै का सफर एक सच्ची प्रेरणा की कहानी है। एक साधारण परिवार में जन्मे धनराज के लिए हॉकी का शौक पूरा करना भी आसान नहीं था। उनके पास अपनी हॉकी स्टिक खरीदने तक के पैसे नहीं थे। वे दोस्तों से स्टिक उधार लेकर अभ्यास करते थे। लेकिन उनकी लगन और जुनून ने हार नहीं मानी। एक पुरानी स्टिक के सहारे ही उन्होंने दिन-रात मेहनत की। उनकी इस मेहनत का फल तब मिला जब उनका चयन ऑलविन एशिया कैंप में हुआ। यहीं से उनकी असली यात्रा शुरू हुई। इसके बाद वे लगातार सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते गए और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान बने, अंतरराष्ट्रीय मैच जीते और देश का नाम रोशन किया। यह सफर ज़मीन से उठकर आसमान छूने जैसा ही था।
उत्तर:- धनराज पिल्लै के इस कथन का अर्थ बहुत गहरा है। वे कहना चाहते हैं कि उनकी माँ ने उन्हें यह महत्वपूर्ण सीख दी कि सफलता और प्रसिद्धि मिलने पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। यह प्रसिद्धि और मुकाम उन्हें बहुत संघर्ष के बाद मिला है, इसलिए इसे विनम्रता के साथ संभालकर रखना ज़रूरी है। मानव जीवन में ऊँचाइयाँ मिलना अच्छी बात है, लेकिन अगर उसके साथ अहंकार आ जाए, तो वही व्यक्ति के पतन का कारण बन सकता है। विनम्र बने रहने से न सिर्फ लोगों का प्यार मिलता रहता है, बल्कि और भी बड़ी सफलताएँ हासिल करने का मार्ग भी खुला रहता है।
उत्तर:- मेजर ध्यानचंद सिंह को हॉकी का जादूगर इसलिए कहा जाता है क्योंकि मैदान में उनकी हॉकी स्टिक से ऐसा जादू बरसता था कि सब हैरान रह जाते थे। उनकी स्टिक से गेंद इतनी अच्छी तरह चिपकी रहती थी कि लगता था मानो स्टिक में कोई चुंबक लगा हो। एक बार हॉलैंड में तो शक के आधार पर उनकी स्टिक तोड़कर भी देखी गई थी! जापान में लोगों ने उन पर गोंद लगाने का आरोप लगाया। उनकी अद्भुत कलाकारी देखकर प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी भी मैच भूलकर तालियाँ बजाने लगते थे। उन्होंने भारत को 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में लगातार तीन स्वर्ण पदक दिलवाए। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर जर्मन तानाशाह हिटलर ने भी उन्हें जर्मनी की तरफ से खेलने का प्रस्ताव दिया था। इसी अद्वितीय कौशल के कारण दुनिया उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहती है।
उत्तर:- हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल मुख्य रूप से निम्नलिखित विशेषताओं के कारण माना जाता है:
1. ऐतिहासिक सफलता: भारत ने हॉकी में 1928 से 1956 तक लगातार छह ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते थे, जो एक अद्भुत उपलब्धि है।
2. देशव्यापी लोकप्रियता: यह खेल भारत के कोने-कोने में, गाँव-शहर सभी जगह, खेला जाता है और लोगों द्वारा पसंद किया जाता है।
3. वैश्विक पहचान: हॉकी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सम्मान और पहचान दिलाई है। दुनिया भारत को एक हॉकी महाशक्ति के रूप में जानती है।
इन्हीं गौरवशाली कारणों से हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।
उत्तर:- हाँ, हम धनराज पिल्लै जी की इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। शोहरत और पैसा हमेशा साथ-साथ नहीं चलते। हमारे आस-पास और इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएँगे। कई महान कलाकार, साहित्यकार, संगीतकार और खिलाड़ी ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में बहुत नाम कमाया, लोग उन्हें जानते और सम्मान देते थे, लेकिन उनका पूरा जीवन आर्थिक तंगी में बीता। उन्हें उनकी मेहनत का उचित पैसा या सुविधाएँ नहीं मिल पाईं। बड़े भी अक्सर कहते हैं कि पहले ज़माने में लोग सम्मान को पैसे से ज़्यादा महत्व देते थे। इसलिए यह बात बिल्कुल सही है कि शोहरत अक्सर अमीरी की गारंटी नहीं होती।
उत्तर:-
1. प्रेरणा, प्रेरक, प्रेरित
• प्रेरणा (संज्ञा): महात्मा गांधी के आदर्श हमें प्रेरणा देते हैं।
• प्रेरक (विशेषण): हमारे शिक्षक ने एक प्रेरक कहानी सुनाई।
• प्रेरित (क्रिया): स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियाँ सुनकर हम प्रेरित होते हैं।
2. संभव, संभावित, संभवतः
• संभव (विशेषण): आपकी मदद से यह काम संभव हो सकेगा।
• संभावित (विशेषण): आज शाम संभावित बारिश के कारण कार्यक्रम स्थगित है।
• संभवतः (क्रिया विशेषण): वह संभवतः कल ही वापस आएगा।
3. उत्साह, उत्साहित, उत्साहवर्धक
• उत्साह (संज्ञा): स्कूल पिकनिक पर जाने का सभी बच्चों में उत्साह था।
• उत्साहित (विशेषण): नए सत्र की शुरुआत में सभी विद्यार्थी उत्साहित दिख रहे थे।
• उत्साहवर्धक (विशेषण): मैच के दौरान दर्शकों की तालियाँ उत्साहवर्धक होती हैं।
उत्तर:-
1. सूर्य: रवि, दिनकर, भानु, सूरज
2. पानी: जल, नीर, सलिल, तोय, अंबु
3. फूल: पुष्प, कुसुम, सुमन, प्रसून
4. रात: निशा, रात्रि, यामिनी, त्रियामा
5. साँप: सर्प, भुजंग, अहि, उरग, पन्नग
उत्तर:-
खेल: बैडमिंटन
शटलकॉक, रैकेट, सर्विस, स्मैश, ड्रॉप, नेट, सिंगल्स, डबल्स, लॉब, रैली, साइड लाइन, बेस लाइन।
खेल: कबड्डी
रैडर, डिफेंडर, कोर्ट, बॉनस लाइन, बाउंड्री लाइन, लोना, टच, पंचायत, कैंट, रेड।
खेल: टेबल टेनिस
पैडल, बॉल, नेट, टॉपस्पिन, बैकस्पिन, सर्व, रैली, फोरहैंड, बैकहैंड, ड्यूस।
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