UP Board class 7 Hindi 3. हिमालय की बेटियाँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 7 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- भारतीय संस्कृति में नदियों को माँ का दर्जा देने की प्राचीन परंपरा रही है, क्योंकि वे अपने जल से हमारा पालन-पोषण करती हैं। लेकिन लेखक नागार्जुन ने नदियों को केवल माँ के रूप में ही नहीं, बल्कि और भी निकटतम रिश्तों में देखा है। वे उन्हें बेटी के रूप में देखते हैं, जो हिमालय रूपी पिता की गोद में खेलती हैं। साथ ही, वे उन्हें प्रेयसी (प्रेमिका) और बहन के कोमल व स्नेहिल रूप में भी देखते हैं। यह दृष्टि नदियों के प्रति हमारे भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा बनाती है।
उत्तर:- सिंधु और ब्रह्मपुत्र हिमालय की दो सबसे विशाल और महत्वपूर्ण नदियाँ हैं। इनकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. इन्हें पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व के कारण अक्सर 'नद' (पुल्लिंग रूप) कहा जाता है, जबकि अधिकतर नदियों को स्त्रीलिंग माना जाता है।
2. ये दोनों हिमालय के पिघले हुए हृदय (बर्फ) की बूँदों से जन्मी हैं, इसलिए इनमें एक पवित्रता और विशालता है।
3. इनका स्वरूप इतना विराट और मनोहर है कि समुद्र को भी इनका वरण करने पर गर्व होता है, मानो वह पर्वतराज हिमालय की इन बेटियों का हाथ थाम रहा हो।
4. ये नदियाँ अपने आप में अनेक छोटी-बड़ी नदियों के जल को समेटे हुए हैं, जो इनकी समृद्धि को दर्शाता है।
उत्तर:- काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' (संसार की माता) इसलिए कहा है क्योंकि नदियाँ एक सच्ची माँ की तरह सदियों से मानव जाति और समस्त प्राणियों का पालन-पोषण करती आई हैं। वे अपने जल से खेतों को सींचती हैं, जिससे अन्न पैदा होता है। प्यास बुझाती हैं और सभ्यताओं को जन्म देती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मानव उन्हें प्रदूषित करके भी दूषित कर देता है, फिर भी नदियाँ एक माँ की तरह सब कुछ सहकर भी हमारा कल्याण करती रहती हैं। यही निस्वार्थ सेवा और सहनशीलता उन्हें सच्ची 'लोकमाता' का दर्जा दिलाती है।
उत्तर:- हिमालय की यात्रा के दौरान लेखक ने प्रकृति की अनेक अद्भुत छटाओं और तत्वों की प्रशंसा की है। उन्होंने हिमालय की अनुपम सुंदरता, नदियों की मनमोहक अठखेलियों, बर्फ़ से ढँकी चमकती पहाड़ियों और हरे-भरे पेड़-पौधों से भरी घाटियों की तारीफ़ की है। साथ ही, उन्होंने देवदार, चीड़, सरो, चिनार, सफ़ैदा और कैल जैसे विभिन्न वृक्षों से घने जंगलों के दृश्यों की भी प्रशंसा की है, जो हिमालय की शोभा को बढ़ाते हैं।
उत्तर:- 1947 के बाद से हिमालय से निकलने वाली नदियों में दुखद परिवर्तन आए हैं। तब ये नदियाँ अत्यंत निर्मल, स्वच्छ और पवित्र हुआ करती थीं। लेकिन आज:
1. प्रदूषण इनकी सबसे बड़ी समस्या बन गया है। शहरों और कारखानों का कचरा, रसायन और गंदा पानी सीधे इनमें बहा दिया जाता है।
2. गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियाँ भी मैदानी इलाकों में आते-आते गंदे नाले का रूप ले चुकी हैं।
3. बाँधों और अत्यधिक जल दोहन के कारण इनका प्रवाह भी कम हुआ है।
4. इससे नदियों का मूल स्वरूप, पारिस्थितिकी तंत्र और उनकी पवित्रता सभी खतरे में पड़ गए हैं।
उत्तर:- संस्कृत के महाकवि कालिदास ने अपने ग्रंथ 'कुमारसंभवम्' में हिमालय को 'देवात्मा' कहा है। इसका अर्थ है - 'देवताओं की आत्मा वाला' या 'दैवीय स्वभाव वाला'। हिमालय को देवात्मा कहने के पीछे मुख्य कारण यह है कि हिमालय को देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। भगवान शिव का कैलाश पर्वत हिमालय में ही है। मान्यता है कि अनेक देवी-देवता, ऋषि-मुनि यहाँ निवास करते हैं। इस प्रकार हिमालय केवल एक पहाड़ न होकर एक पवित्र और दिव्य स्थान है, इसीलिए उसे 'देवात्मा' की संज्ञा दी गई है।
उत्तर:- अन्य पाठों से तुलनात्मक प्रयोग (उपमा अलंकार के उदाहरण):
1. सचमुच दादी माँ शापभ्रष्ट देवी-सी लगी। (दादी माँ की तुलना देवी से)
2. बच्चे ऐसे सुंदर जैसे सोने के सजीव खिलौने। (बच्चों की तुलना सोने के खिलौनों से)
3. हरी लकीर वाले सफ़ेद गोल कंचे, बड़े आँवले जैसे। (कंचों की तुलना आँवले से)
4. बड़े मियाँ के भाषण की तूफ़ान मेल के लिए कोई निश्चित स्टेशन नहीं है सुनने वाला थककर जहाँ रोक दे वही स्टेशन मान लिया जाता है। (भाषण की तुलना बिना स्टेशन वाली रेलगाड़ी से)
5. संध्या को स्वप्न की भाँति गुजार देते थे। (संध्या बिताने की तुलना स्वप्न देखने से)
उत्तर:- पाठ से मानवीकरण के उदाहरण (निर्जीव को सजीव बनाना):
1. नदियाँ संभ्रांत महिला की भाँति प्रतीत होती थी। (नदी को महिला बताया)
2. जितना कि हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं। (नदियों को बच्चियाँ और हिमालय को गोद वाला बताया)
3. हिमालय को ससुर और समुद्र को दामाद कहने में कुछ झिझक नहीं होती थी। (पहाड़ और समुद्र को रिश्तेदार बनाया)
4. बूढ़ा हिमालय अपनी इन बेटियों के लिए कितना सिर धुनता होगा। (हिमालय को बूढ़ा पिता और चिंतित बताया)
| विशेषण | विशेष्य (संज्ञा) |
|---|---|
| संभ्रांत | महिला |
| चंचल | नदियाँ |
| समतल | आँगन |
| घना | जंगल |
| मूसलधार | वर्षा |
उत्तर:- पाठ से द्वंद्व समास के उदाहरण (वर्णमाला क्रम में):
1. भाव-भंगी (भाव और भंगी)
2. छोटी-बड़ी (छोटी और बड़ी)
3. दुबली-पतली (दुबली और पतली)
4. माँ-बाप (माँ और बाप)
| शब्द | उल्टा लिखने पर | संज्ञा का भेद |
|---|---|---|
| नव | वन | जातिवाचक संज्ञा |
| राम | मरा | भाववाचक संज्ञा |
| राही | हीरा | जातिवाचक संज्ञा (द्रव्यवाचक भी) |
| धारा | राधा | व्यक्तिवाचक संज्ञा |
| नामी | मीना | व्यक्तिवाचक संज्ञा |
| आधुनिक/सामान्य नाम | प्राचीन/दूसरा रूप |
|---|---|
| सतलुज | शतद्रु |
| झेलम | वितस्ता |
| रोपड़ | रूपपुर |
| अजमेर | अजयमेरु |
| बनारस | वाराणसी |
नोट: विपाशा (व्यास) और चिनाब (चंद्रभागा) भी प्राचीन नाम हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हैं।
उत्तर:-
'ही' के प्रयोग वाले नकारात्मक वाक्य (अर्थ: नहीं के बराबर):
1. वह शायद ही आज स्कूल आए। (अर्थ: वह आज स्कूल नहीं आएगा।)
2. मुझे कभी-कभार ही मिठाई खाने का मौका मिलता है। (अर्थ: मुझे मिठाई खाने का मौका बहुत कम मिलता है।)
3. उसके पास मुश्किल से ही पाँच मिनट का समय है। (अर्थ: उसके पास पाँच मिनट का समय भी नहीं है।)
नकारात्मक प्रश्नवाचक वाक्य (अर्थ: सकारात्मक, सभी जानते हैं):
1. भगवान राम की कहानी कौन नहीं जानता? (अर्थ: भगवान राम की कहानी सब जानते हैं।)
2. मेहनत करने वाले का साथ कौन नहीं देता? (अर्थ: मेहनत करने वाले का सब साथ देते हैं।)
3. देश की सेवा करने वाले का सम्मान कौन नहीं करता? (अर्थ: देश की सेवा करने वाले का सब सम्मान करते हैं।)
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