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UP Board Class 10 History (1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय) solution PDF

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UP Board Class 10 History (1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय) solution

UP Board Class 10 History 1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 10 History

भारत और समकालीन विश्व - 2

पाठ - 1: यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

51. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें - (क) ज्युसेपे मेत्सिनी

ज्युसेपे मेत्सिनी इटली के एक प्रमुख क्रांतिकारी, दार्शनिक और राष्ट्रवादी थे। उनका जन्म 1805 में जेनोआ में हुआ था। उनका मानना था कि इटली के विभिन्न टुकड़ों को एकजुट होकर एक गणराज्य बनाना चाहिए। इस उद्देश्य से उन्होंने 1831 में 'यंग इटली' नामक एक गुप्त संगठन की स्थापना की, जिसका लक्ष्य युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जगाना था। बाद में उन्होंने 'यंग यूरोप' नामक एक और संगठन बनाया। मेत्सिनी का विश्वास था कि राष्ट्र ईश्वर की इच्छा से बनते हैं और इटली का एकीकरण एक पवित्र लक्ष्य है। उनके विचारों और प्रयासों ने इटली के एकीकरण आंदोलन को एक जन आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(ख) काउंट कैमिलो दे कावूर

काउंट कैमिलो दे कावूर इटली के एकीकरण के प्रमुख वास्तुकार और सार्डिनिया-पीडमॉन्ट राज्य के प्रधानमंत्री थे। वे एक कुशल राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे। उनका मानना था कि इटली का एकीकरण सैन्य ताकत और कूटनीतिक गठजोड़ के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने 1859 में फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय के साथ एक गुप्त समझौता किया, जिसके तहत फ्रांस ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ सार्डिनिया-पीडमॉन्ट की सैन्य सहायता की। इस सहायता से लोम्बार्डी क्षेत्र ऑस्ट्रिया से मुक्त हो गया। कावूर ने जनमत को प्रभावित करने के लिए अखबारों का भी प्रभावी उपयोग किया। उनकी नीतियों और प्रयासों के कारण ही 1861 में इटली का एकीकरण संभव हो सका।

(ग) यूनानी स्वतंत्रता युद्ध

यूनानी स्वतंत्रता युद्ध (1821-1829) यूनानी लोगों द्वारा ओटोमन साम्राज्य के विरुद्ध लड़ा गया एक सफल स्वतंत्रता संग्राम था। इस युद्ध की शुरुआत 1821 में यूनानी क्रांतिकारियों द्वारा ओटोमन शासन के खिलाफ विद्रोह से हुई। यूरोप के कई देशों के लोगों ने यूनान के प्रति सहानुभूति रखी, क्योंकि यूनान को प्राचीन यूरोपीय सभ्यता का पालना माना जाता था। कवियों और कलाकारों ने भी यूनानी संघर्ष का समर्थन किया। अंततः, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस जैसी महाशक्तियों ने हस्तक्षेप किया। 1827 में नवारिनो की नौसैनिक लड़ाई में ओटोमन बेड़े की हार हुई। अंत में, 1832 की कुस्तुन्तुनिया की संधि के द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिल गई।

(घ) फ्रैंकफ़र्ट संसद

फ्रैंकफर्ट संसद (18 मई, 1848 - 31 मई, 1849) जर्मन राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण लेकिन असफल प्रयास थी। यह एक राष्ट्रीय सभा थी जिसमें जर्मनी के विभिन्न राज्यों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें मुख्य रूप से वकील, शिक्षक, प्रोफेसर और व्यापारी जैसे मध्यम वर्ग के लोग थे। इस सभा का आयोजन फ्रैंकफर्ट के सेंट पॉल चर्च में किया गया था। इस संसद ने एक संविधान का मसौदा तैयार किया जिसमें जर्मनी को एक संवैधानिक राजतंत्र बनाने का प्रस्ताव था और प्रशिया के राजा फ्रेडरिक विल्हेम चतुर्थ को जर्मन सम्राट चुना गया। हालाँकि, राजा ने इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सेना और रूढ़िवादी अभिजात वर्ग के विरोध, तथा मजदूरों और किसानों के बीच इसके समर्थन की कमी के कारण यह संसद असफल रही और 1849 में इसे भंग कर दिया गया।

(ड) राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका

यूरोप में राष्ट्रवादी आंदोलनों में महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया, लेकिन उन्हें राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। फ्रांसीसी क्रांति के दौरान स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों ने महिलाओं को भी प्रेरित किया। उन्होंने राजनीतिक क्लब बनाए, अखबार निकाले और सार्वजनिक बहसों में हिस्सा लिया। हालाँकि, जैकोबिन सरकार ने बाद में महिलाओं के राजनीतिक क्लबों पर प्रतिबंध लगा दिया। 1848 की फ्रैंकफर्ट संसद में महिलाओं को केवल प्रेक्षक के रूप में गैलरी में बैठने की अनुमति थी; वे मतदान या चुनाव नहीं लड़ सकती थीं। इस प्रकार, राष्ट्रवादी संघर्षों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी के बावजूद, महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय राष्ट्रवादी आंदोलन भी पुरुष-प्रधान ही थे।

62. फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने क्या कदम उठाए ?

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने फ्रांस के लोगों में एक सामूहिक राष्ट्रीय पहचान विकसित करने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए:

  1. नए प्रतीकों का सृजन: शाही झंडे के स्थान पर नए त्रिरंगा झंडे को अपनाया गया। राष्ट्रीय गान 'ला मार्सेइयेज़' गाया जाने लगा।
  2. नागरिक की नई अवधारणा: 'ला पेत्री' (पितृभूमि) और 'ले सिटोयेन' (नागरिक) जैसे शब्दों ने समान अधिकारों वाले एक समुदाय के विचार को बढ़ावा दिया।
  3. केंद्रीकृत प्रशासन: पूरे देश के लिए एक समान कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई, जिससे पुराने प्रांतीय विशेषाधिकार समाप्त हो गए।
  4. राष्ट्रीय भाषा: पेरिस की फ्रेंच भाषा को राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाया गया। क्षेत्रीय बोलियों और भाषाओं को हतोत्साहित किया गया ताकि सभी नागरिक एक ही भाषा बोलें और समझें।
  5. सार्वजनिक समारोह और शपथ: नागरिकों से राष्ट्र के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए सार्वजनिक समारोह आयोजित किए गए।
  6. एस्टेट्स जनरल से नेशनल असेंबली: एस्टेट्स जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया गया, जो सभी सक्रिय नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती थी।

इन सभी उपायों का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के लोगों को एक सामूहिक फ्रांसीसी राष्ट्र की भावना के साथ जोड़ना था।

63. मारीआन और जर्मेनिया कौन थे ? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया उसका क्या महत्व था?

मारीआन और जर्मेनिया क्रमशः फ्रांस और जर्मनी के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में प्रयुक्त महिला व्यक्तित्व (अलंकारिक चित्र) थीं।

  • मारीआन: यह फ्रांसीसी गणराज्य का प्रतीक है, जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों का प्रतिनिधित्व करती है। उसे अक्सर लाल टोपी (स्वतंत्रता की टोपी), तिरंगा और भाला पकड़े हुए दिखाया जाता था। उसकी मूर्तियों को सार्वजनिक चौकों में स्थापित किया गया और उसकी छवि सिक्कों और डाक टिकटों पर अंकित की गई ताकि लोगों के मन में राष्ट्र की एक मूर्त छवि बन सके।
  • जर्मेनिया: यह जर्मन राष्ट्र का प्रतीक थी। उसे चित्रों में अक्सर ओक के पत्तों का मुकुट (वीरता का प्रतीक) पहने, तलवार और जर्मन झंडा थामे हुए दर्शाया जाता था।

महत्व: इन महिला रूपकों के माध्यम से राष्ट्र को एक ठोस और मानवीय रूप दिया गया। यह जनसाधारण के लिए राष्ट्र की अमूर्त अवधारणा को समझने और उससे जुड़ाव महसूस करने का एक सशक्त माध्यम बना। इन प्रतीकों ने लोगों में राष्ट्रीय एकता, वीरता और त्याग की भावना को प्रेरित किया।

64. जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षेप में पता लगाएँ |

जर्मन एकीकरण एक जटिल प्रक्रिया थी जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से प्रशिया के मुख्यमंत्री ओटो वॉन बिस्मार्क ने किया। बिस्मार्क ने "रक्त और लौह" की नीति अपनाई, यानी सैन्य शक्ति और युद्ध के माध्यम से एकीकरण को पूरा किया। इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:

  1. डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध (1864): प्रशिया और ऑस्ट्रिया ने संयुक्त रूप से डेनमार्क के खिलाफ युद्ध किया और श्लेस्विग और होल्स्टीन क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया।
  2. ऑस्ट्रो-प्रशियाई युद्ध (1866): प्रशिया ने ऑस्ट्रिया को हराकर उत्तरी जर्मनी में अपना प्रभुत्व स्थापित किया। ऑस्ट्रिया को जर्मन मामलों से बाहर कर दिया गया।
  3. उत्तरी जर्मन परिसंघ (1867): प्रशिया के नेतृत्व में उत्तरी जर्मन राज्यों का एक संघ बनाया गया।
  4. फ्रांस-प्रशिया युद्ध (1870-71): बिस्मार्क की कूटनीति के कारण फ्रांस ने प्रशिया पर युद्ध की घोषणा कर दी। प्रशिया की जीत हुई। दक्षिणी जर्मन राज्य (बवेरिया, वुर्टेमबर्ग आदि) भी प्रशिया के साथ मिल गए।
  5. जर्मन साम्राज्य की घोषणा (18 जनवरी, 1871): फ्रांस के वर्साय के शीशमहल में प्रशिया के राजा विल्हेम प्रथम को जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया। इस प्रकार जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ।

65. अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने क्या बदलाव किए ?

नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस और उसके अधीनस्थ यूरोपीय क्षेत्रों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और क्रांतिकारी सिद्धांतों को फैलाने के लिए निम्नलिखित सुधार किए:

  1. नेपोलियन कोड (1804): यह सबसे महत्वपूर्ण सुधार था। इस नागरिक संहिता ने जन्म के आधार पर सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया। इसने कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार की स्थापना की। हालाँकि, इसमें कुछ पिछड़े प्रावधान भी थे, जैसे पुरुषों को महिलाओं पर अधिक अधिकार और श्रमिक संघों पर प्रतिबंध।
  2. प्रशासनिक पुनर्गठन: प्रशासन को अधिक तर्कसंगत और केंद्रीकृत बनाया गया। सामंती व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया।
  3. आर्थिक सुधार: किसानों को जमींदारों के शोषण और सामंती करों से मुक्ति मिली। एक नया बैंक ऑफ फ्रांस स्थापित किया गया और एक स्थिर मुद्रा प्रणाली लागू की गई।
  4. यातायात और संचार में सुधार: सड़कों और नहरों के एक नेटवर्क का निर्माण किया गया। यह सेना की गतिशीलता बढ़ाने और व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए था।
  5. शिक्षा और कानून व्यवस्था: शिक्षा प्रणाली पर राज्य का नियंत्रण स्थापित किया गया। एक कुशल और निष्पक्ष पुलिस तंत्र विकसित किया गया।

इन सुधारों ने प्रशासन को कुशल बनाया और कई देशों में आधुनिक कानूनी प्रणाली की नींव रखी, लेकिन साथ ही ये नेपोलियन की सैन्य तानाशाही को मजबूत करने के साधन भी थे।

61. उदारवादियों की 1848 की क्रांति का कया अर्थ लगाया जाता है उदारवादियों ने किन राजनीतिक सामाजिक एवं आर्थिक विचारों को बढ़ावा दिया?

1848 की क्रांति का अर्थ: 1848 की क्रांति यूरोप के इतिहास में एक जनव्यापी विद्रोह था। यह केवल उदारवादियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें राष्ट्रवादी, लोकतंत्रवादी, सामाजिक सुधारक, किसान और मजदूर भी शामिल थे। इस क्रांति का मुख्य कारण था - आर्थिक संकट (अकाल और बेरोजगारी), राजनीतिक दमन और राष्ट्रीय एकता की इच्छा। फ्रांस, ऑस्ट्रिया, हंगरी, जर्मनी और इटली आदि देशों में विद्रोह हुए। हालाँकि ये क्रांतियाँ अंततः दबा दी गईं, लेकिन इन्होंने पुराने सामंती और रूढ़िवादी ताकतों को हिलाकर रख दिया और भविष्य में होने वाले परिवर्तनों का मार्ग प्रशस्त किया।

उदारवादियों द्वारा प्रचारित विचार:

  • राजनीतिक विचार:
    • संवैधानिक राजतंत्र या गणतंत्र की स्थापना।
    • लिखित संविधान और संसदीय शासन प्रणाली।
    • नागरिक स्वतंत्रता (भाषण, अभिव्यक्ति, विश्वास की स्वतंत्रता)।
    • कानून के समक्ष सभी की समानता।
    • राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र-राज्य का निर्माण।
  • सामाजिक विचार:
    • जन्म के आधार पर विशेषाधिकारों का अंत।
    • सामंती व्यवस्था और बंधुआ मजदूरी का उन्मूलन।
    • एक ऐसे समाज का निर्माण जहाँ वर्ग भेद न हों।
  • आर्थिक विचार:
    • व्यक्तिगत संपत्ति का अधिकार।
    • मुक्त व्यापार और बाजार अर्थव्यवस्था।
    • सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त आर्थिक गतिविधियाँ।

62. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति के योगदान को दर्शाने के लिए तीन उदाहरण दें

यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति ने एक मौलिक भूमिका निभाई। इसके तीन प्रमुख उदाहरण हैं:

  1. रोमांटिकवाद का प्रभाव: रोमांटिक कलाकारों, कवियों और लेखकों ने राष्ट्रीय भावनाओं को जगाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने राष्ट्र को एक सजीव सामूहिक व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया। उदाहरण के लिए, फिलॉसफर जोहान गॉटफ्रीड हर्डर ने जर्मन लोक संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान का आधार बताया। यूनान के स्वतंत्रता संग्राम के समर्थन में यूरोप भर के कवियों (जैसे लॉर्ड बायरन) ने कविताएँ लिखीं, जिससे जनमत बना।
  2. लोक संस्कृति का संग्रहण और प्रचार: राष्ट्रवादियों ने लोकगीतों, लोकनृत्यों, किंवदंतियों और परंपराओं को एकत्र करके उन्हें राष्ट्रीय विरासत का हिस्सा बनाया। पोलैंड में, रूसी दमन के दौरान पोलिश लोकनृत्य माजुरका और पोलोनेज राष्ट्रीय प्रतिरोध के प्रतीक बन गए। इन्हें संगीतकारों ने अपनी रचनाओं में शामिल किया।
  3. भाषा की भूमिका: भाषा राष्ट्रीय पहचान का एक शक्तिशाली साधन बनी। पोलैंड में, रूसी शासन द्वारा पोलिश भाषा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद, भाषा ही राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध का केंद्र बन गई। पादरियों ने गुप्त रूप से चर्चों में पोलिश भाषा में धार्मिक शिक्षा देना जारी रखा। इसी प्रकार, जर्मनी में भी विभिन्न बोलियों के स्थान पर एक मानक जर्मन भाषा के विकास ने राष्ट्रीय एकीकरण में मदद की।

63. किन्हीं दो देशों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बताएं कि 19वीं सदी में राष्ट किस प्रकार विकसित हुआ।

19वीं सदी में यूरोप में राष्ट्र का विकास अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से हुआ। यहाँ दो विपरीत उदाहरण प्रस्तुत हैं:

1. ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) में राष्ट्र का विकास:
ब्रिटेन में राष्ट्र का निर्माण एक लंबी और शीर्ष से नीचे की ओर (top-down) की प्रक्रिया थी, जिसमें अंग्रेजी राज्य ने अन्य जातीय समूहों पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया।

  • 1707 के यूनियन एक्ट के द्वारा इंग्लैंड और स्कॉटलंड का विलय हुआ और 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' बना।
  • 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक इस यूनियन में शामिल कर लिया गया।
  • इस प्रक्रिया में अंग्रेजी संस्कृति को प्रमुखता दी गई। अंग्रेजी भाषा, यूनियन जैक झंडा और 'गॉड सेव द किंग' राष्ट्रगान को बढ़ावा दिया गया।
  • स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचानों को दबाया गया।
  • इस प्रकार, ब्रिटिश राष्ट्र का निर्माण एक राजनीतिक और प्रशासनिक एकीकरण का परिणाम था, न कि जनता के एक सामान्य इच्छा से उपजा आंदोलन।

2. इटली में राष्ट्र का विकास:
इटली में राष्ट्र का निर्माण एक नीचे से ऊपर की ओर (bottom-up) की प्रक्रिया थी, जो जन आंदोलन, क्रांतिकारी विचारधारा और अंततः राजनयिक व सैन्य कार्रवाई से पूरी हुई।

  • इटली लंबे समय तक छोटे-छोटे राज्यों में बंटा रहा और विदेशी शक्तियों (ऑस्ट्रिया, स्पेन) के नियंत्रण में था।
  • ज्युसेपे मेत्सिनी जैसे क्रांतिकारियों ने 'यंग इटली' जैसे संगठनों के माध्यम से जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाई।
  • अंततः, काउंट कैवूर (सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री) की कूटनीति और ज्युसेपे गैरीबाल्डी के नेतृत्व में 'रैड शर्ट्स' सेना के सैन्य अभियानों ने विभिन्न इतालवी राज्यों को एकजुट किया।
  • 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को इटली का राजा घोषित किया गया और 1870 में रोम की विजय के साथ एकीकरण पूरा हुआ।
  • इटली का एकीकरण एक राष्ट्रीय आंदोलन का परिणाम था जिसमें जनता की भावनाएँ और बलिदान शामिल थे।

64. ब्रिटेन में राष्रवाद का इतिहास शेष यूरोप की तुलना में किस प्रकार भिन्न है

ब्रिटेन में राष्ट्रवाद का इतिहास यूरोप के अधिकांश देशों से निम्नलिखित प्रमुख बातों में भिन्न है:

  1. विकास की प्रकृति: यूरोप के देशों (जैसे जर्मनी, इटली) में राष्ट्रवाद एक जन-आंदोलन था जो नीचे से ऊपर की ओर विकसित हुआ और इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों को एकजुट करना था। वहीं, ब्रिटेन में राष्ट्रवाद ऊपर से नीचे की ओर लादा गया। यह शासक वर्ग द्वारा प्रशासनिक एकीकरण और सांस्कृतिक प्रभुत्व स्थापित करने की प्र

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Other Chapters of Class 10 History
1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय
2. भारत में राष्ट्रवाद
3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना
4. औद्योगीकरण का युग
5. मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया
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