UP Board Class 10 History 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर-
एशिया से उदाहरण: सोलहवीं सदी में, एशिया और यूरोप के बीच जीवंत व्यापार होता था। यूरोप से आने वाले व्यापारी चाँदी और सोना लाते थे, जिसके बदले में वे भारत से बारीक सूती और रेशमी कपड़े, चीन से रेशम और चीनी मिट्टी के बर्तन, तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से लौंग, जायफल जैसे मसाले प्राप्त करते थे।
अमेरिका से उदाहरण: अमेरिका महाद्वीप की खोज के बाद, वहाँ से कई नई चीजें दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुँचीं। सोना और चाँदी के अलावा, खाद्य पदार्थ जैसे आलू, टमाटर, मक्का, मिर्च, मूंगफली और शकरकंद यूरोप और एशिया में लाए गए। इन फसलों ने बाद में दुनिया भर के लोगों के खान-पान को बदल दिया।
उत्तर-
पूर्व-आधुनिक काल में यूरोपीय लोग जब अमेरिका पहुँचे, तो वे अपने साथ कई नई बीमारियाँ भी ले आए, जैसे चेचक (स्मॉलपॉक्स)। अमेरिका के मूल निवासी हज़ारों वर्षों तक दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग रहने के कारण इन बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) विकसित नहीं कर पाए थे। जब ये बीमारियाँ फैलीं, तो पूरे-पूरे गाँव और समुदाय नष्ट हो गए। इससे मूल निवासियों की आबादी बहुत कम हो गई और उनकी सामाजिक व सैन्य ताकत टूट गई। यूरोपीय लोगों के लिए हथियारों से लड़ना तो संभव था, लेकिन इन अदृश्य बीमारियों से नहीं। इस प्रकार, बीमारियों के प्रसार ने अमेरिका पर यूरोपीय उपनिवेशवाद को स्थापित करने का रास्ता आसान बना दिया।
(क) कॉर्न लॉ को समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला |
उत्तर- कॉर्न लॉ वह कानून था जो ब्रिटेन में विदेश से आने वाले अनाज पर आयात शुल्क (टैरिफ) लगाता था, ताकि स्थानीय किसानों को फायदा हो। 1846 में इसे समाप्त करने का फैसला हुआ। इसके परिणामस्वरूप बाहर से सस्ता अनाज ब्रिटेन आने लगा। इससे शहरी क्षेत्रों के मजदूरों और कारखाना मालिकों को तो फायदा हुआ क्योंकि खाने की चीजें सस्ती हुईं, लेकिन ब्रिटेन के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। हजारों कृषि मजदूर बेरोजगार हो गए और उन्हें रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करना पड़ा, जिससे औद्योगिक क्षेत्र को सस्ता श्रम मिल गया।
(ख) अफ्रीका में रिंडरपेस्ट आना |
उत्तर- 1880 के दशक के अंत में, पशुओं में फैलने वाली एक भयंकर बीमारी 'रिंडरपेस्ट' अफ्रीका पहुँची। इसने महाद्वीप के विशाल भागों में मवेशियों की आबादी को लगभग खत्म कर दिया। अफ्रीका के कई समुदायों के लिए पशुधन धन और आजीविका का मुख्य स्रोत था। इस आपदा ने उनकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने इस कमजोरी का फायदा उठाया। उन्होंने भूमि पर कब्जा कर लिया और आजीविका खो चुके लोगों को बागानों व खानों में काम करने के लिए मजबूर कर दिया, इस प्रकार अफ्रीका के श्रम बाजार पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।
(ग) विश्व युद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत |
उत्तर- प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में लाखों युवा पुरुष मारे गए या अपंग हो गए। इससे यूरोप में कामकाजी आबादी (वर्कफोर्स) में भारी कमी आई। परिवारों के मुख्य कमाने वाले खो गए, जिससे घर की आय पर गहरा असर पड़ा। महिलाओं को घर से बाहर निकलकर काम करना पड़ा। युद्ध के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने में भी श्रम की कमी एक बड़ी चुनौती बनी रही।
(घ) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी का प्रभाव |
उत्तर- 1930 के दशक की महामंदी (The Great Depression) का भारत पर गंभीर प्रभाव पड़ा। विश्व बाजार में मांग गिरने से भारत के कृषि निर्यात (जैसे गेहूँ, कपास, जूट) बुरी तरह प्रभावित हुए। 1928 से 1934 के बीच, भारत के आयात-निर्यात का मूल्य लगभग आधा रह गया। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बहुत कम कीमत मिली, जबकि उन पर लगान (टैक्स) का बोझ वही रहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और कर्ज बढ़ गया। शहरी क्षेत्रों में भी उद्योग धीमे पड़ गए, जिससे बेरोजगारी फैली।
(ड) बहु राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित करने का फैसला |
उत्तर- 1970 और 1980 के दशक में, कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (Multinational Companies - MNCs) ने अपने उत्पादन के केंद्र यूरोप और अमेरिका से हटाकर एशियाई देशों जैसे चीन, भारत, इंडोनेशिया आदि में स्थापित करने शुरू किए। इसका मुख्य कारण था इन देशों में सस्ता श्रम, कम लागत और नए बाजारों की उपलब्धता। इस निर्णय ने एशियाई देशों के औद्योगीकरण को गति दी, रोजगार के नए अवसर पैदा किए और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को तेजी से बढ़ने में मदद की। इस प्रकार, यह भूमंडलीकरण की एक महत्वपूर्ण घटना थी।
उत्तर-
उदाहरण 1: रेलवे का विकास
उन्नीसवीं सदी में रेलवे के तेजी से विस्तार ने खाद्य पदार्थों के परिवहन में क्रांति ला दी। अब अनाज, फल और सब्जियाँ उत्पादन क्षेत्रों से दूर-दराज के शहरों तक जल्दी और सस्ते में पहुँचाए जा सकते थे। इससे शहरी केंद्रों में भोजन की उपलब्धता बढ़ी और कीमतें कम हुईं।
उदाहरण 2: रेफ्रिजरेशन तकनीक (प्रशीतन)
जहाजों में रेफ्रिजरेशन (प्रशीतन) तकनीक के आविष्कार ने लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान खराब होने वाले खाद्य पदार्थों जैसे मांस, मक्खन और अंडों को सुरक्षित रखना संभव बना दिया। इससे अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया से ताजा मांस यूरोप के बाजारों में पहुँचने लगा, जिसने लोगों के आहार में विविधता लाई और खाद्य सुरक्षा बढ़ाई।
उत्तर-
ब्रेटन वुड्स समझौता (Bretton Woods Agreement) जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर हुई एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का परिणाम था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की दुनिया में आर्थिक स्थिरता लाना और फिर से महामंदी जैसी स्थिति को रोकना था। इसके तहत दो महत्वपूर्ण संस्थाएँ बनाई गईं:
1. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund - IMF): जो देशों को अल्पकालिक आर्थिक संकटों से उबरने में मदद करने के लिए ऋण देता है।
2. विश्व बैंक (World Bank): जो युद्ध में तबाह हुए देशों के पुनर्निर्माण और विकासशील देशों में विकास परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक ऋण देता है।
इस प्रकार, इस समझौते ने आधुनिक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की नींव रखी।
उत्तर-
उत्तर-
वैश्विक आर्थिक आदान-प्रदान में मुख्य रूप से तीन प्रकार की गतियाँ होती हैं:
1. वस्तुओं का प्रवाह (व्यापार):
इसके अंतर्गत देश आपस में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार करते हैं।
भारत से उदाहरण: 18वीं सदी में भारत से मलमल, रेशम, काली मिर्च, इलायची आदि मसालों का यूरोप को निर्यात होता था, जिसके बदले में भारत को चाँदी और सोना प्राप्त होता था।
2. श्रम का प्रवाह (लोगों का पलायन):
इसमें लोग रोजगार या बेहतर जीवन की तलाश में एक देश से दूसरे देश जाते हैं।
भारत से उदाहरण: उन्नीसवीं सदी में, अंग्रेजों द्वारा लाखों भारतीयों को 'गिरमिटिया मजदूर' के रूप में कैरिबियाई देशों, मॉरिशस, फिजी और अफ्रीका के बागानों में काम करने के लिए भेजा गया।
3. पूँजी का प्रवाह (निवेश):
इसमें धन या निवेश का एक देश से दूसरे देश में आना-जाना शामिल है।
भारत से उदाहरण: ब्रिटिश शासन काल में, भारत से कच्चा माल सस्ते दामों पर ब्रिटेन भेजा जाता था और तैयार माल महँगे दामों पर भारत में बेचा जाता था। इस प्रकार भारत की धन-संपदा (पूँजी) ब्रिटेन की ओर प्रवाहित होती थी, जो औपनिवेशिक शोषण का एक रूप था।
उत्तर-
1929 में शुरू हुई महामंदी (The Great Depression) के निम्नलिखित प्रमुख कारण थे:
1. प्रथम विश्व युद्ध के बाद की कमजोर अर्थव्यवस्था: युद्ध के बाद यूरोप की अर्थव्यवस्था बहुत कमजोर हो चुकी थी। अमेरिका ही एकमात्र मजबूत अर्थव्यवस्था बचा था, जिस पर सब निर्भर थे।
2. कृषि उत्पादन में अधिकता: युद्ध के दौरान खाद्यान्न की माँग बढ़ने पर किसानों ने उत्पादन बढ़ा दिया था। युद्ध के बाद माँग कम हो गई, लेकिन उत्पादन कम नहीं हुआ। इससे अनाज की कीमतें गिरने लगीं और किसानों की आमदनी घट गई।
3. शेयर बाजार में सट्टेबाजी और क्रैश: अमेरिका में लोग बिना पूँजी के केवल उधार लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाने लगे (सट्टेबाजी)। अक्टूबर 1929 में शेयर बाजार अचानक गिर गया (वॉल स्ट्रीट क्रैश), जिससे लाखों लोगों की जमा पूँजी डूब गई और बैंक दिवालिया हो गए।
4. अमेरिका द्वारा ऋण रोकना: अमेरिका ने यूरोपीय देशों को दिया जाने वाला ऋण बंद कर दिया, जिससे यूरोप की अर्थव्यवस्था और भी ज्यादा डगमगा गई।
5. संरक्षणवादी नीतियाँ: हर देश ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगा दिए। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार लगभग ठप्प हो गया और समस्या और गहरी होती चली गई।
इन सभी कारणों ने मिलकर एक ऐसा आर्थिक तूफान खड़ा किया, जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया।
उत्तर-
जी-77 (Group of 77) विकासशील देशों का एक समूह है, जिसकी स्थापना 1964 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों के आर्थिक हितों को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में उनकी बात रखना था। ये देश 'नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था' (New International Economic Order - NIEO) की माँग करते थे, जो उनके प्राकृतिक संसाधनों पर उनका नियंत्रण सुनिश्चित करे और व्यापार में निष्पक्षता लाए।
जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संस्थाओं (IMF और विश्व बैंक) की प्रतिक्रिया क्यों कहा जाता है?
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन के बाद बनी दोनों संस्थाएँ (IMF और विश्व बैंक) विकसित देशों, खासकर अमेरिका के प्रभाव में काम करती थीं। इनकी नीतियाँ अक्सर विकासशील देशों के हितों के विपरीत होती थीं। जी-77 का गठन इन्हीं संस्थाओं के वर्चस्व और उन नीतियों के विरोध में हुआ, जो विकासशील देशों को नुकसान पहुँचाती थीं। इसलिए जी-77 को ब्रेटन वुड्स जुड़वाँ संस्थाओं की गतिविधियों की एक सामूहिक प्रतिक्रिया या जवाब के रूप में देखा जाता है।
उत्तर-
नोट: यह एक परियोजना कार्य है। छात्र निम्नलिखित बिंदुओं पर शोध करके अपना उत्तर तैयार कर सकते हैं:
मुख्य बिंदु:
- 1867 में हीरे की और 1886 में सोने की खोज ने दक्षिण अफ्रीका के इतिहास को बदल दिया।
- खनन कंपनियों (जैसे डी बीयर्स कंपनी) पर यूरोपीय पूँजीपतियों का पूरा नियंत्रण था।
- खनिक मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय अफ्रीकी लोग और कुछ एशियाई (भारतीय) मजदूर थे। बाद में चीन से भी मजदूर लाए गए।
- खनिकों का जीवन बहुत कठिन था। वे गहरी और खतरनाक खानों में काम करते थे, जहाँ दुर्घटनाएँ आम थीं। उन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती थी और उनके रहने की स्थिति बहुत खराब थी। उन पर रंगभेद (Apartheid) की नीतियों के कारण भी कई प्रतिबंध लगे हुए थे।
छात्र इंटरनेट, पुस्तकालय की पुस्तकों या अपने शिक्षक की सहायता से इस विषय पर विस्तृत जानकारी एकत्र कर सकते हैं।
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| Other Chapters of Class 10 History | |
| 1. यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय | |
| 2. भारत में राष्ट्रवाद | |
| 3. भूमंडलीकृत विश्व का बनना | |
| 4. औद्योगीकरण का युग | |
| 5. मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया |