UP Board Class 12 Maths 11. त्रि-विमीय ज्यामिति is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
एक बिन्दु a से जाने वाली सदिश b के समान्तर रेखा का समीकरण:
दो बिन्दुओं a तथा b से होकर जाने वाली रेखा का समीकरण:
एक बिन्दु a से जाने वाले तथा दो असमान्तर सदिशों b व c के समान्तर समतल का समीकरण:
तीन बिन्दुओं a, b, c से जाने वाले समतल का समीकरण:
चार बिन्दुओं के एक समतलीय होने का प्रतिबन्ध:
यदि a, b, c तथा d चार बिन्दुओं के स्थिति सदिश हैं, तो
यदि एक रेखा x, y और z अक्षों के साथ क्रमशः 90°, 135°, 45° के कोण बनाती है तो इसकी दिक्-कोसाइन ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए रेखा की दिक्-कोसाइन l, m तथा n हैं।
अतः l = cos 90° = 0
m = cos 135° = cos (180° – 45°) = – cos 45° = – 1/√2
n = cos 45° = 1/√2
अतः दिक्-कोसाइन हैं: 0, –1/√2, 1/√2
एक रेखा की दिक्-कोसाइन ज्ञात कीजिए जो निर्देशांक्षों के साथ समान कोण बनाती है।
हल:
मान लीजिए एक रेखा निर्देशांक्षों के साथ कोण α बनाती है।
अतः रेखा के दिक्-कोसाइन cos α, cos α, cos α हैं।
परन्तु हम जानते हैं कि l² + m² + n² = 1
या cos² α + cos² α + cos² α = 1
या 3 cos² α = 1
या cos α = ± 1/√3
अतः रेखा के दिक्-कोसाइन ± 1/√3, ± 1/√3, ± 1/√3 हैं।
यदि एक रेखा के दिक्-अनुपात –18, 12, –4 हैं तो इसकी दिक्-कोसाइन क्या हैं?
हल:
मान लीजिए a, b, c रेखा के दिक्-अनुपात हों तो यहाँ a = –18, b = 12, c = –4
√(a² + b² + c²) = √[(–18)² + 12² + (–4)²] = √(324 + 144 + 16) = √484 = 22
अतः दिक्-कोसाइन:
cos α = a/√(a²+b²+c²) = –18/22 = –9/11
cos β = b/√(a²+b²+c²) = 12/22 = 6/11
cos γ = c/√(a²+b²+c²) = –4/22 = –2/11
अतः दिक्-कोसाइन हैं: –9/11, 6/11, –2/11
दर्शाइए कि बिन्दु (2, 3, 4), (–1, –2, 1), (5, 8, 7) संरेख हैं।
हल:
मान लीजिए दिए गए बिन्दु A(2, 3, 4), B(–1, –2, 1), C(5, 8, 7) हैं।
AB = √[(–1 – 2)² + (–2 – 3)² + (1 – 4)²] = √[(–3)² + (–5)² + (–3)²] = √(9 + 25 + 9) = √43
BC = √[(5 + 1)² + (8 + 2)² + (7 – 1)²] = √[6² + 10² + 6²] = √(36 + 100 + 36) = √172 = 2√43
CA = √[(2 – 5)² + (3 – 8)² + (4 – 7)²] = √[(–3)² + (–5)² + (–3)²] = √(9 + 25 + 9) = √43
अब CA + AB = √43 + √43 = 2√43 = BC
अतः A, B, C संरेख हैं।
एक त्रिभुज की भुजाओं की दिक्-कोसाइन ज्ञात कीजिए यदि त्रिभुज के शीर्ष बिन्दु (3, 5, –4), (–1, 1, 2) और (–5, –5, –2) हैं।
हल:
मान लीजिए त्रिभुज ABC के शीर्ष A(3, 5, –4), B(–1, 1, 2) और C(–5, –5, –2) हैं।
(i) भुजा AB के दिक्-अनुपात: –1 – 3, 1 – 5, 2 + 4 = –4, –4, 6 या 2, 2, –3
AB के बीच की दूरी = √[(–4)² + (–4)² + 6²] = √(16 + 16 + 36) = √68 = 2√17
अतः AB की दिक्-कोसाइन: 2/(2√17) = 1/√17, 2/(2√17) = 1/√17, –3/(2√17)
(ii) BC के दिक्-अनुपात: –5 + 1, –5 – 1, –2 – 2 = –4, –6, –4 या 2, 3, 2
BC के बीच की दूरी = √[(–4)² + (–6)² + (–4)²] = √(16 + 36 + 16) = √68 = 2√17
अतः BC के दिक्-कोसाइन: –4/(2√17) = –2/√17, –6/(2√17) = –3/√17, –4/(2√17) = –2/√17
(iii) CA के दिक्-अनुपात: 3 + 5, 5 + 5, –4 + 2 = 8, 10, –2 या 4, 5, –1
CA के बीच की दूरी = √[8² + 10² + (–2)²] = √(64 + 100 + 4) = √168 = 2√42
अतः CA की दिक्-कोसाइन: 8/(2√42) = 4/√42, 10/(2√42) = 5/√42, –2/(2√42) = –1/√42
दर्शाइए कि दिक्-कोसाइन 12/13, –3/13, –4/13; 4/13, 12/13, 3/13; 3/13, –4/13, 12/13 वाली तीन रेखाएँ परस्पर लम्बवत् हैं।
हल:
यदि दो रेखाएँ लम्बवत् हों, तो l₁l₂ + m₁m₂ + n₁n₂ = 0
मान लीजिए दिए गए दिक्-कोसाइनों से क्रमशः AB, CD, EF अभीष्ट रेखाएँ हों, तब परस्पर लम्बवत् हेतु
AB ⊥ CD = 0, CD ⊥ EF = 0 और AB ⊥ EF = 0
दिया है:
l₁ = 12/13, m₁ = –3/13, n₁ = –4/13
l₂ = 4/13, m₂ = 12/13, n₂ = 3/13
l₃ = 3/13, m₃ = –4/13, n₃ = 12/13
(i) AB और CD हेतु:
l₁l₂ + m₁m₂ + n₁n₂ = (12/13)(4/13) + (–3/13)(12/13) + (–4/13)(3/13)
= (48 – 36 – 12)/169 = 0/169 = 0
अतः प्रथम दो दिक्-कोसाइनों से रेखाएँ लम्बवत् हैं।
(ii) CD और EF हेतु:
l₂l₃ + m₂m₃ + n₂n₃ = (4/13)(3/13) + (12/13)(–4/13) + (3/13)(12/13)
= (12 – 48 + 36)/169 = 0/169 = 0
(iii) AB और EF हेतु:
l₁l₃ + m₁m₃ + n₁n₃ = (12/13)(3/13) + (–3/13)(–4/13) + (–4/13)(12/13)
= (36 + 12 – 48)/169 = 0/169 = 0
अतः AB, CD और EF तीनों ही रेखाएँ परस्पर लम्बवत् हैं।
दर्शाइए कि बिन्दुओं (1, –1, 2), (3, 4, –2) से होकर जाने वाली रेखा बिन्दुओं (0, 3, 2) और (3, 5, 6) से जाने वाली रेखा पर लम्ब है।
हल:
मान लीजिए बिन्दु A(1, –1, 2) एवं B(3, 4, –2) हैं।
अतः बिन्दु A(1, –1, 2) एवं B(3, 4, –2) से होकर जाने वाली रेखा के दिक्-अनुपात 3 – 1, 4 + 1, –2 – 2 या 2, 5, –4 होंगे।
इसी प्रकार माना कि C(0, 3, 2) एवं D(3, 5, 6) हैं।
अतः बिन्दु C(0, 3, 2) और D(3, 5, 6) से होकर जाने वाली रेखा के दिक्-अनुपात 3 – 0, 5 – 3, 6 – 2 या 3, 2, 4 होंगे।
अब यदि AB ⊥ CD तो a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂ = 0
अतः 2×3 + 5×2 + (–4)×4 = 6 + 10 – 16 = 0
अतः प्रश्नानुसार दिए बिन्दुओं से होकर जाने वाली रेखाएँ अर्थात् AB रेखा CD पर लम्ब हैं।
दर्शाइए कि बिन्दुओं (4, 7, 8), (2, 3, 4) से होकर जाने वाली रेखा बिन्दुओं (–1, –2, 1) और (1, 2, 5) से जाने वाली रेखा के समान्तर है।
हल:
मान लीजिए दिए गए बिन्दु A(4, 7, 8) तथा B(2, 3, 4) हैं।
अतः बिन्दु A(4, 7, 8) और B(2, 3, 4) से होकर जाने वाली रेखा AB के दिक्-अनुपात 2 – 4, 3 – 7, 4 – 8 अर्थात् –2, –4, –4 या 1, 2, 2 होंगे।
इसी प्रकार मान लीजिए दिए गए बिन्दु C(–1, –2, 1) तथा D(1, 2, 5) हैं।
अतः बिन्दु C(–1, –2, 1) और D(1, 2, 5) से होकर जाने वाली रेखा CD के दिक्-अनुपात 1 – (–1), 2 – (–2), 5 – 1 या 2, 4, 4 या 1, 2, 2 होंगे।
हम जानते हैं कि दो रेखाएँ समान्तर होंगी यदि a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂
यहाँ AB और CD दोनों के दिक्-अनुपात 1, 2, 2 हैं।
अतः AB तथा CD आपस में समान्तर हैं।
बिन्दु (1, 2, 3) से गुजरने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो सदिश 3i + 2j – 2k के समान्तर है।
हल:
माना a = i + 2j + 3k और b = 3i + 2j – 2k
अभीष्ट रेखा AB का समीकरण r = a + λb
r = (i + 2j + 3k) + λ(3i + 2j – 2k)
जहाँ λ एक वास्तविक संख्या है।
बिन्दु जिसकी स्थिति सदिश 2i – j + 4k है से गुजरने व सदिश i + 2j – k की दिशा में जाने वाली रेखा का सदिश व कार्तीय रूपों में समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना a = 2i – j + 4k और b = i + 2j – k
अभीष्ट रेखा का सदिश समीकरण r = a + λb
r = (2i – j + 4k) + λ(i + 2j – k)
यही रेखा का सदिश समीकरण है।
कार्तीय रूप:
माना रेखा पर कोई बिन्दु P(x, y, z) है तो
xi + yj + zk = (2i – j + 4k) + λ(i + 2j – k) = (2 + λ)i + (–1 + 2λ)j + (4 – λ)k
तुलना करने पर,
x = 2 + λ, y = –1 + 2λ, z = 4 – λ
λ का विलोपन करने पर,
(x – 2)/1 = (y + 1)/2 = (z – 4)/(–1)
यही अभीष्ट रेखा का कार्तीय रूप है।
उस रेखा का कार्तीय समीकरण ज्ञात कीजिए जो बिन्दु (–2, 4, –5) से जाती है और (x + 8)/3 = (y – 4)/5 = (z + 1)/6 के समान्तर है।
हल:
यहाँ पर रेखा (–2, 4, –5) से गुजरती है तथा (x + 8)/3 = (y – 4)/5 = (z + 1)/6 के समान्तर है।
अतः रेखा के दिक्-अनुपात 3, 5, 6 हैं।
अतः अभीष्ट रेखा का कार्तीय समीकरण
(x + 2)/3 = (y – 4)/5 = (z + 5)/6
एक रेखा का कार्तीय समीकरण (x – 5)/3 = (y + 4)/7 = (z – 6)/2 है। इसका सदिश समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है रेखा का कार्तीय समीकरण (x – 5)/3 = (y + 4)/7 = (z – 6)/2 जो बिन्दु (5, –4, 6) से होकर जाती है।
अतः a = 5i – 4j + 6k
दी हुई रेखा के दिक्-अनुपात 3, 7, 2 हैं।
अतः b = 3i + 7j + 2k
अभीष्ट रेखा का सदिश समीकरण
r = 5i – 4j + 6k + λ(3i + 7j + 2k)
मूल बिन्दु और (5, –2, 3) से जाने वाली रेखा का सदिश तथा कार्तीय रूपों में समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
रेखा मूल बिन्दु (0, 0, 0) व (5, –2, 3) से गुजरती है।
अतः a = 0i + 0j + 0k
रेखा के दिक्-अनुपात 5 – 0, –2 – 0, 3 – 0 या 5, –2, 3 हैं।
अतः b = 5i – 2j + 3k
रेखा का सदिश समीकरण r = a + λb
r = 0 + λ(5i – 2j + 3k) = λ(5i – 2j + 3k)
रेखा बिन्दु O(0, 0, 0) से गुजरती है तथा इसके दिक्-अनुपात 5, –2, 3 हैं।
अतः रेखा का कार्तीय समीकरण
(x – 0)/5 = (y – 0)/(–2) = (z – 0)/3
या x/5 = y/(–2) = z/3
बिन्दुओं (3, –2, –5) और (3, –2, 6) से गुजरने वाली रेखा का सदिश तथा कार्तीय रूपों में समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना रेखा बिन्दु A(3, –2, –5) और B(3, –2, 6) से गुजरती है।
a = 3i – 2j – 5k
AB के दिक्-अनुपात 3 – 3, –2 + 2, 6 + 5 या 0, 0, 11 हैं।
b = 0i + 0j + 11k = 11k
AB का सदिश समीकरण r = a + λb
r = 3i – 2j – 5k + λ(11k)
रेखा बिन्दु (3, –2, –5) तथा (3, –2, 6) से गुजरती है।
इसके दिक्-अनुपात 0, 0, 11
अतः रेखा AB का कार्तीय समीकरण
(x – 3)/0 = (y + 2)/0 = (z + 5)/11
निम्नलिखित रेखा युग्मों के बीच का कोण ज्ञात कीजिए:
(i) r = 2i – 5j + k + λ(3i + 2j + 6k) और r = 7i – 6k + μ(i + 2j + 2k)
(ii) r = 3i + j – 2k + λ(i – j – 2k) और r = 2i – j – 56k + μ(3i – 5j – 4k)
हल:
(i) पहली रेखा: r = 2i – 5j + k + λ(3i + 2j + 6k)
दूसरी रेखा: r = 7i – 6k + μ(i + 2j + 2k)
माना b₁ = 3i + 2j + 6k तथा b₂ = i + 2j + 2k
जब दोनों रेखाओं के बीच कोण θ हो, तब
cos θ = |(b₁ . b₂)|/(|b₁| |b₂|)
= |(3×1 + 2×2 + 6×2)| / (√(3²+2²+6²) √(1²+2²+2²))
= |(3 + 4 + 12)| / (√(9+4+36) √(1+4+4))
= 19 / (√49 √9) = 19/(7×3) = 19/21
अतः θ = cos⁻¹(19/21)
(ii) पहली रेखा: r = 3i + j – 2k + λ(i – j – 2k)
दूसरी रेखा: r = 2i – j – 56k + μ(3i – 5j – 4k)
माना b₁ = i – j – 2k तथा b₂ = 3i – 5j – 4k
cos θ = |(b₁ . b₂)|/(|b₁| |b₂|)
= |(1×3 + (–1)×(–5) + (–2)×(–4))| / (√(1²+(–1)²+(–2)²) √(3²+(–5)²+(–4)²))
= |(3 + 5 + 8)| / (√(1+1+4) √(9+25+16))
= 16 / (√6 √50) = 16/(√6 × 5√2) = 16/(5√12) = 16/(10√3) = 8/(5√3)
अतः θ = cos⁻¹(8/(5√3))
निम्नलिखित रेखा युग्मों के बीच का कोण ज्ञात कीजिए:
(i) (x – 2)/2 = (y – 1)/5 = (z + 3)/(–3) और (x + 2)/(–1) = (y – 4)/8 = (z – 5)/4
(ii) x/2 = y/2 = z/1 और (x – 5)/4 = (y – 2)/1 = (z – 3)/8
हल:
(i) पहली रेखा के लिए दिक्-अनुपात 2, 5, –3
दूसरी रेखा के दिक्-अनुपात –1, 8, 4
माना θ दी गयी रेखाओं के मध्य का कोण हो, तब
cos θ = |(a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂)| / (√(a₁²+b₁²+c₁²) √(a₂²+b₂²+c₂²))
माना a₁ = 2, b₁ = 5, c₁ = –3 तथा a₂ = –1, b₂ = 8, c₂ = 4
cos θ = |(2×(–1) + 5×8 + (–3)×4)| / (√(2²+5²+(–3)²) √((–1)²+8²+4²))
= |(–2 + 40 – 12)| / (√(4+25+9) √(1+64+16))
= |26| / (√38 √81) = 26/(√38 × 9)
अतः θ = cos⁻¹(26/(9√38))
(ii) पहली रेखा x/2 = y/2 = z/1 के दिक्-अनुपात 2, 2, 1
दूसरी रेखा (x – 5)/4 = (y – 2)/1 = (z – 3)/8 के दिक्-अनुपात 4, 1, 8
माना a₁ = 2, b₁ = 2, c₁ = 1 तथा a₂ = 4, b₂ = 1, c₂ = 8
माना दी हुई रेखाओं के बीच कोण θ हो, तो
cos θ = |(a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂)| / (√(a₁²+b₁²+c₁²) √(a₂²+b₂²+c₂²))
= |(2×4 + 2×1 + 1×8)| / (√(2²+2²+1²) √(4²+1²+8²))
= |(8 + 2 + 8)| / (√(4+4+1) √(16+1+64))
= 18 / (√9 √81) = 18/(3×9) = 18/27 = 2/3
अतः θ = cos⁻¹(2/3)
p का मान ज्ञात कीजिए ताकि रेखाएँ (1 – x)/3 = (7y – 14)/2p = (z – 3)/2 और (7 – 7x)/3p = (y – 5)/1 = (6 – z)/5 परस्पर लम्ब हों।
हल:
दी हुई रेखाओं को मानक रूप में रखने पर
(x – 1)/(–3) = (y – 2)/(2p/7) = (z – 3)/2
(x – 1)/(–3p/7) = (y – 5)/1 = (z – 6)/(–5)
अब पहली रेखा के दिक्-अनुपात –3, 2p/7, 2
तथा दूसरी रेखा के दिक्-अनुपात –3p/7, 1, –5
अर्थात् मान लीजिए a₁ = –3, b₁ = 2p/7, c₁ = 2 तथा a₂ = –3p/7, b₂ = 1, c₂ = –5
चूँकि रेखाएँ परस्पर लम्ब होंगी यदि a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂ = 0
(–3)×(–3p/7) + (2p/7)×1 + 2×(–5) = 0
9p/7 + 2p/7 – 10 = 0
11p/7 = 10
p = 70/11
दिखाइए कि रेखाएँ (x – 5)/7 = (y + 2)/(–5) = z/1 और x/1 = y/2 = z/3 परस्पर लम्ब हैं।
हल:
दी गयी पहली रेखा (x – 5)/7 = (y + 2)/(–5) = z/1 के दिक्-अनुपात 7, –5, 1
तथा दी गयी दूसरी रेखा x/1 = y/2 = z/3 के दिक्-अनुपात 1, 2, 3
अब मान लीजिए a₁ = 7, b₁ = –5, c₁ = 1 तथा a₂ = 1, b₂ = 2, c₂ = 3
दोनों रेखाओं के परस्पर लम्ब होने के लिए, a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂ = 0
बायाँ पक्ष: a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂ = 7×1 + (–5)×2 + 1×3 = 7 – 10 + 3 = 0 = दायाँ पक्ष
अतः दी हुई दोनों रेखाएँ परस्पर लम्ब हैं।
रेखाओं r = (i + 2j + k) + λ(i – j + k) और r = (2i – j – k) + μ(2
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