UP Board Class 12 Political Science 1. राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) भारत-विभाजन “द्वि-राष्ट्र सिद्धांत” का परिणाम था। (✓)
(ख) धर्म के आधार पर दो प्रांतों-पंजाब और बंगाल-का बँटवारा हुआ। (✓)
(ग) पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान में संगति नहीं थी। (✓)
(घ) विभाजन की योजना में यह बात भी शामिल थी कि दोनों देशों के बीच आबादी की अदला-बदली होगी। (✗)
(क) जूनागढ़ (ख) मणिपुर (ग) मैसूर (घ) ग्वालियर
उत्तर: छात्र अध्यापक की सहायता से स्वयं करें।
उत्तर:
(i) विस्मय की राय: मैं इस राय से सहमत हूँ। देशी रियासतों का विलय प्रायः लोकतांत्रिक तरीके से हुआ क्योंकि सिर्फ चार-पाँच रजवाड़ों को छोड़कर सभी स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ही भारतीय संघ में शामिल हो चुके थे। जो रजवाड़े बचे थे, उनमें से भी शासक जनमत और जनता की भावनाओं (जिनकी संख्या 90 प्रतिशत से भी ज्यादा थी) की अनदेखी कर रहे थे। सभी रियासतों ने केंद्रीय सरकार द्वारा भेजे गए सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। विलय से पूर्व अधिकतर रजवाड़ों में शासन अलोकतांत्रिक रीति से चलाया जाता था और रजवाड़ों के शासक अपनी प्रजा को लोकतांत्रिक अधिकार देने के लिए तैयार नहीं थे।
(ii) इंद्रप्रीत की राय: मैं इस राय से भी कुछ हद तक सहमत हूँ। यह राय ठीक है कि भारत में रजवाड़ों के विलय को लेकर बल-प्रयोग किया गया। लेकिन यह चंद रजवाड़ों—हैदराबाद और जूनागढ़—के मामले में हुआ। वह भी इसलिए क्योंकि दोनों रजवाड़ों के शासक मुसलमान थे लेकिन वहाँ की जनसंख्या का लगभग 80 से 90 प्रतिशत भाग हिंदू थी। वहाँ की आम जनता भारत में विलय चाहती थी। इन दोनों रजवाड़ों में आम जनता द्वारा आंदोलन भी चलाया गया। इसके अतिरिक्त भौगोलिक दृष्टि से दोनों रजवाड़े भारतीय सीमा के अधिक नजदीक थे। कश्मीर पर हमला पाकिस्तान के उकसाने पर कबालियों ने किया था। नव-स्वतंत्र जम्मू-कश्मीर का संरक्षण करना भारत का दायित्व भी था और भारत ने वहाँ के शासक और जनप्रतिनिधियों की माँग पर ही सेना भेजी थी। वहाँ के शासक तथा आम जनता की इच्छानुसार कश्मीर का विलय भारत में हुआ। भारत में विलय के बाद से वहाँ अनेक विधान सभा और लोकसभा चुनाव हो चुके हैं।
मोहनदास करमचंद गाँधी: "आपने अपने सर पर काँटों का ताज पहना है। सत्ता का आसन एक बुरी चीज़ है। इस आसन पर आपको बड़ा सचेत रहना होगा... आपको और ज़्यादा विनम्र और धैर्यवान बनना होगा... अब लगातार आपकी परीक्षा ली जाएगी।"
जवाहरलाल नेहरू: "भारत आज़ादी की जिंदगी के लिए जागेगा... हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाएँगे... आज दुर्भाग्य के एक दौर का खात्मा होगा और हिंदुस्तान अपने को फिर से पा लेगा... आज हम जो जश्न मना रहे हैं वह एक कदम भर है, संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।"
उत्तर:
(i) गाँधी जी का एजेंडा: गाँधी जी का कथन बिल्कुल ठीक है कि सत्ता का ताज काँटों से भरा होता है। क्योंकि प्रायः सत्ता पाने के बाद सत्तासीन लोगों में घमंड आ जाता है। वे प्रायः अपने दायित्व का निर्वाह नहीं करते। भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना लोकतांत्रिक तरीकों से—अहिंसा, प्रेम, सत्य, सहयोग, समानता, भाईचारा, सांप्रदायिक सद्भाव आदि के साथ की जाए। सत्ता पर आसीन लोगों को चाहिए कि वे ज्यादा विनम्र और धैर्यवान होकर निरंतर अपने दायित्व निर्वाह की परीक्षा देते रहें यानि न सिर्फ लोकतांत्रिक राजनीति की स्थापना, बल्कि समाज में सामाजिक और आर्थिक न्याय भी मिले, इसका सदैव प्रयत्न करना चाहिए।
(ii) नेहरू जी का एजेंडा: नेहरू द्वारा व्यक्त कथन विकास के उस एजेंडे की ओर इशारा कर रहा है जो भारत आजादी के बाद की दिशा तय करेगा। यहाँ राजनीतिक स्वतंत्रता, समानता और किसी सीमा तक न्याय की स्थापना हुई है और हमें पुरानी बातों को छोड़कर नए जोश के साथ आगे बढ़ना है। निःसंदेह 14 अगस्त की मध्य रात्रि को उपनिवेशवाद का अंत हो गया और हमारा देश स्वतंत्र हो गया। परन्तु आजादी मनाने का यह उत्सव क्षणिक था क्योंकि इसके आगे देश के समक्ष बड़ी भारी समस्याएँ थीं। इन समस्याओं में उजड़े हुए लोगों को फिर से बसाना, देश की गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन की समस्याओं को समाप्त करना आदि सम्मिलित हैं। हमें इन समस्याओं को समाप्त करके नई संभावनाओं के द्वार खोलना है जिसमें गरीब-से-गरीब भारतीय भी यह महसूस कर सके कि आजाद हिन्दुस्तान भी उसका मुल्क है। यहाँ लैंगिक आधार पर समानता होनी चाहिए। देश उदारवाद और वैश्वीकरण के साथ-साथ सभी को सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाए। समान नागरिक संहिता लागू हो।
निष्कर्ष: नेहरू जी का एजेंडा ज्यादा जँच रहा है क्योंकि नेहरू जी ने भारत के भविष्य का खाका खींचने की तस्वीर पेश की। आजादी के साथ-साथ अनेक प्रकार की समस्याएँ भी आई हैं। गरीब के आँसू पोछने के साथ-साथ विकास के पहिए की गति को भी तेज करना था।
उत्तर: पं. जवाहर लाल नेहरू ने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किए जाने का समर्थन किया और इसके पक्ष में कई तर्क दिए जो निम्नलिखित हैं—
नेहरू के ये तर्क केवल नैतिक ही नहीं बल्कि पूर्ण रूप से युक्तिपरक और व्यावहारिक भी हैं। ये तर्क भारत की बहुलतावादी सामाजिक संरचना, लोकतांत्रिक आदर्शों और राष्ट्रीय एकता की दीर्घकालिक आवश्यकताओं पर आधारित हैं।
उत्तर: विभाजन के समय देश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में राष्ट्र-निर्माण की चुनौती के लिहाज से दो मुख्य अंतर निम्न थे—
उत्तर: राज्य पुनर्गठन आयोग का काम राज्यों के सीमांकन के मामले पर गौर करना था। स्वतंत्रता के बाद भाषाई आधार पर नए राज्यों की माँग तेज हो गई थी। इस आयोग का गठन 1953 में किया गया था।
प्रमुख सिफारिश: इसकी प्रमुख सिफारिश यह थी कि राज्यों की सीमाओं का निर्धारण वहाँ बोली जाने वाली भाषा के आधार पर होना चाहिए। इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पास हुआ। इस अधिनियम के आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्र-शासित प्रदेश बनाए गए। इसने भाषाई एकता के आधार पर राज्यों के गठन की नींव रखी, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ी और क्षेत्रीय अस्मिता को मान्यता मिली।
उत्तर: भारत एक राष्ट्र के रूप में निम्नलिखित विशेषताओं के आधार पर पहचाना जाता है—
इस प्रकार, भारत एक 'कल्पित समुदाय' के रूप में इन साझा विश्वासों, इतिहास, राजनीतिक आकांक्षाओं और कल्पनाओं से एकसूत्र में बँधा हुआ है।
"राष्ट्र-निर्माण के इतिहास के लिहाज से सिर्फ सोवियत संघ में हुए प्रयोगों की तुलना भारत से की जा सकती है। सोवियत संघ में भी विभिन्न और परस्पर अलग-अलग जातीय समूह, धर्म, भाषाई समुदाय और सामाजिक वर्गों के बीच एकता का भाव कायम करना पड़ा। जिस पैमाने पर यह काम हुआ, चाहे भौगोलिक पैमाने के लिहाज़ से देखें या जनसंख्यागत लिहाज़ से, वह अपनेआप में बहुत व्यापक कहा जाएगा। दोनों ही जगह राज्य को जिस कच्ची सामग्री से निर्माण की शुरुआत करनी थी वह समान रूप से दुष्कर थी। लोग धर्म के आधार पर बँटे हुए और कर्ज़ तथा गरीबी से दबे हुए थे।" — रामचंद्र गुहा
(क) यहाँ लेखक ने भारत और सोवियत संघ के बीच जिन समानताओं का उल्लेख किया है, उनकी एक सूची बनाइए। इनमें से प्रत्येक के लिए भारत से एक उदाहरण दीजिए।
(ख) लेखक ने यहाँ भारत और सोवियत संघ में चली राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रियाओं के बीच की असमानता का उल्लेख नहीं किया है। आप दो असमानताएँ बता सकते हैं?
(ग) अगर पीछे मुड़कर देखें तो आप क्या पाते हैं? राष्ट्र-निर्माण के इन दो प्रयोगों में किसने बेहतर काम किया और क्यों?
उत्तर:
(क) समानताएँ और भारतीय उदाहरण:
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