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UP Board Class 12 Political Science (6. अंतर्राष्टीय संगठन) solution PDF

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UP Board Class 12 Political Science (6. अंतर्राष्टीय संगठन) solution

UP Board Class 12 Political Science 6. अंतर्राष्टीय संगठन Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions: समकालीन विश्व में सुरक्षा

प्रश्न 1. निम्नलिखित पदों को उनके अर्थ से मिलाएँ

(1) विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स)

(2) अस्त्र-नियंत्रण

(3) गठबंधन

(4) निरस्त्रीकरण

(क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज

(ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा-मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया

(ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अपरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना।

(घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश

उत्तर:

(1) विश्वास बहाली के उपाय - (ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा-मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया।

(2) अस्त्र-नियंत्रण - (घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश।

(3) गठबंधन - (ग) सैन्य हमले की स्थिति से निपटने अथवा उसके अपरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में तालमेल करना।

(4) निरस्त्रीकरण - (क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज।


प्रश्न 2. निम्नलिखित में से आप किसे पारंपरिक सुरक्षा चिंता / गैर-पारंपरिक सुरक्षा चिंता / खतरे की स्थिति नहीं का दर्जा देंगे?

(अ) चिकनगुनिया, डेंगू बुखार का प्रसार

(ब) पड़ोसी राष्ट्र के श्रमिकों की आमद

(स) अपने क्षेत्र के लिए राष्ट्रीयता की मांग करने वाले समूह का उदय

(द) अपने क्षेत्र के लिए स्वायत्तता की मांग करने वाले समूह का उदय

(य) एक अखबार जो देश में सशस्त्र बलों को आलोचनात्मक नज़र से देखता है

उत्तर:

(अ) गैर-पारंपरिक सुरक्षा चिंता

(ब) गैर-पारंपरिक सुरक्षा चिंता

(स) पारंपरिक सुरक्षा चिंता

(द) खतरे की स्थिति नहीं (यह आंतरिक राजनीतिक मांग है, जो सीधे सुरक्षा खतरा नहीं है।)

(य) खतरे की स्थिति नहीं (यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का हिस्सा है।)


प्रश्न 3. परंपरागत और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है? गठबंधनों का निर्माण करना और उनको बनाये रखना इनमें से किस कोटि में आता है?

उत्तर:

पारंपरिक सुरक्षा:

  • इसमें मुख्य रूप से सैन्य खतरों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जो दूसरे देशों की सेनाओं से उत्पन्न होते हैं।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना है।
  • इसमें बाहरी आक्रमण से निपटने के लिए राष्ट्र के पास तीन विकल्प होते हैं: आत्मसमर्पण, समझौता या युद्ध द्वारा प्रतिरोध।
  • उदाहरण: पड़ोसी देशों के साथ सीमा संघर्ष, परमाणु हथियारों का प्रसार।

अपारंपरिक सुरक्षा:

  • इसमें सैन्य खतरों के अलावा अन्य प्रकार के खतरे शामिल हैं जो मानव सुरक्षा और राष्ट्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
  • यह खतरे अक्सर गैर-राज्य कारकों (जैसे आतंकवादी समूह) या वैश्विक समस्याओं (जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारी) से उत्पन्न होते हैं।
  • इसमें आर्थिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
  • उदाहरण: आतंकवाद, साइबर हमले, प्राकृतिक आपदाएँ, ग्लोबल वार्मिंग।

गठबंधनों का निर्माण और उन्हें बनाए रखना पारंपरिक सुरक्षा की कोटि में आता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से सैन्य खतरों का मुकाबला करने और सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है (जैसे नाटो)।


प्रश्न 4. तीसरी दुनिया के लोगों और विकसित देशों में रहने वाले लोगों के सामने आने वाले खतरों में क्या अंतर है?

उत्तर:

तीसरी दुनिया/विकासशील देशों के सामने खतरे:

  • पारंपरिक खतरे: पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद और सैन्य संघर्ष (जैसे भारत-पाकिस्तान)।
  • आंतरिक खतरे: अलगाववादी आंदोलन, जातीय संघर्ष, गृहयुद्ध, और राजनीतिक अस्थिरता।
  • अपारंपरिक खतरे: गरीबी, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, खाद्य असुरक्षा, और बुनियादी ढांचे का अभाव।

विकसित देशों के सामने खतरे:

  • पारंपरिक खतरे: अन्य महाशक्तियों से भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सैन्य खतरे (हालांकि युद्ध की संभावना कम है)।
  • अपारंपरिक खतरे: आतंकवाद, साइबर हमले, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, बड़े पैमाने पर अवैध आप्रवासन, और आर्थिक मंदी।

मुख्य अंतर यह है कि विकासशील देश अक्सर अस्तित्व के मूलभूत खतरों (जैसे गरीबी, अकाल) और राज्य के निर्माण की चुनौतियों से जूझते हैं, जबकि विकसित देश जीवन की गुणवत्ता और वैश्विक स्थिरता से जुड़े जटिल खतरों का सामना करते हैं।


प्रश्न 5. क्या आतंकवाद सुरक्षा के लिए एक पारंपरिक या गैर-पारंपरिक खतरा है?

उत्तर:

आतंकवाद सुरक्षा के लिए एक गैर-पारंपरिक खतरा है।

कारण:

  • गैर-राज्य कारक: आतंकवादी समूह आमतौर पर किसी एक राष्ट्र-राज्य की सेना नहीं होते, बल्कि गैर-राज्य सक्रियकर्ता होते हैं।
  • लक्ष्य: इनका लक्ष्य आम नागरिकों को आतंकित करके राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना होता है, न कि पारंपरिक युद्ध की तरह सेना बनाम सेना का टकराव।
  • तरीका: यह बम विस्फोट, अपहरण, साइबर हमले जैसे अंधाधुंध तरीकों से होता है, जो पारंपरिक युद्ध के नियमों से बाहर है।
  • प्रभाव: इससे न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव, आर्थिक स्थिरता और लोगों की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

11 सितंबर 2001 के हमले इस बात का प्रमुख उदाहरण हैं कि कैसे आतंकवाद एक वैश्विक गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरा बन गया है।


प्रश्न 6. पारंपरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण के अनुसार, किसी देश के पास उसकी सुरक्षा को खतरा होने पर क्या विकल्प उपलब्ध हैं?

उत्तर:

पारंपरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण के अनुसार, किसी देश के पास मुख्य रूप से तीन विकल्प होते हैं:

  1. प्रतिरोध (Deterrence): अपनी सैन्य शक्ति को इतना मजबूत बनाना कि हमलावर देश को हमले की लागत अस्वीकार्य लगे और वह हमला करने से हिचकिचाए। परमाणु हथियार इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
  2. रक्षा (Defence): यदि हमला हो जाए, तो अपने क्षेत्र और लोगों की रक्षा करके हमलावर को उसके उद्देश्यों से वंचित करना। इसमें सीमा की रक्षा, वायु रक्षा प्रणाली आदि शामिल हैं।
  3. प्रतिकार (Balance of Power): हमलावर को पूरी तरह से हराने के लिए जवाबी हमला करना। इसका उद्देश्य युद्ध को जीतकर खतरे को समाप्त करना है।

इन विकल्पों का उद्देश्य युद्ध को रोकना, सीमित करना या समाप्त करना है, क्योंकि युद्ध किसी भी राष्ट्र के लिए आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विनाश लाता है।


प्रश्न 7. शक्ति संतुलन क्या है? कोई देश इसे कैसे प्राप्त कर सकता है?

उत्तर:

शक्ति संतुलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक ऐसी स्थिति है जहां कोई एक राष्ट्र या राष्ट्रों का समूह इतना शक्तिशाली नहीं होता कि वह दूसरों पर अपनी इच्छा थोप सके। यह स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।

एक देश शक्ति संतुलन प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपना सकता है:

  • गठबंधन बनाना: अन्य देशों के साथ सैन्य या राजनीतिक गठजोड़ बनाकर एक शक्तिशाली विरोधी का मुकाबला करना।
  • सैन्य शक्ति बढ़ाना: अपनी सेना, हथियार और रक्षा प्रौद्योगिकी को मजबूत करना।
  • कूटनीतिक प्रयास: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाकर और संधियाँ करके अपनी स्थिति मजबूत करना।
  • आर्थिक विकास: एक मजबूत अर्थव्यवस्था सैन्य शक्ति का आधार होती है, इसलिए आर्थिक विकास पर ध्यान देना।

प्रश्न 8. सैन्य गठबंधन के उद्देश्य क्या हैं? अपने विशिष्ट उद्देश्यों के साथ एक कामकाजी सैन्य गठबंधन का उदाहरण दें।

उत्तर:

सैन्य गठबंधन के उद्देश्य:

  • सामूहिक रूप से किसी साझे सैन्य खतरे (वास्तविक या संभावित) का मुकाबला करना।
  • सदस्य देशों की सुरक्षा की गारंटी देना ("एक पर हमला सभी पर हमला" जैसा सिद्धांत)।
  • शक्ति संतुलन बनाए रखना और किसी विरोधी गुट को हावी होने से रोकना।
  • राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाना।

उदाहरण: नाटो (NATO - North Atlantic Treaty Organization)

  • उद्देश्य: शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के विस्तारवाद को रोकना और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा प्रदान करना।
  • वर्तमान भूमिका: शीत युद्ध के बाद, नाटो ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, संकट प्रबंधन और साझेदार देशों के साथ सहयोग जैसे नए उद्देश्य भी अपनाए हैं।

प्रश्न 9. तेजी से पर्यावरण में गिरावट सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रही है। क्या आप कथन से सहमत हैं? अपनी दलीलें दें।

उत्तर:

हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि पर्यावरणीय गिरावट सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।

दलीलें:

  • जलवायु परिवर्तन: ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ता समुद्र स्तर छोटे द्वीपीय देशों (जैसे मालदीव) और तटीय क्षेत्रों (जैसे बांग्लादेश) के अस्तित्व के लिए खतरा है, जिससे "पर्यावरणीय शरणार्थियों" का संकट पैदा हो सकता है।
  • संसाधनों पर संघर्ष: पानी की कमी, उपजाऊ भूमि का क्षरण और ऊर्जा संसाधनों की कमी से देशों के बीच तनाव और संघर्ष बढ़ सकते हैं।
  • आपदाएँ: बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं, जो जान-माल के नुकसान के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा को भी नष्ट करती हैं।
  • खाद्य सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन और मिट्टी के क्षरण से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे खाद्य संकट और सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है।

इसलिए, पर्यावरणीय सुरक्षा अब मानव सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता का एक अभिन्न अंग बन गई है।


प्रश्न 10. देशों के लिए सुरक्षा के रूप में परमाणु हथियारों का, समकालीन सुरक्षा खतरों के खिलाफ सीमित उपयोग है। कथन की व्याख्या करें।

उत्तर:

यह कथन सही है कि समकालीन दुनिया में परमाणु हथियारों की उपयोगिता सीमित है।

व्याख्या:

  • गैर-पारंपरिक खतरे: आज के प्रमुख सुरक्षा खतरे जैसे आतंकवाद, साइबर हमले, या जलवायु परिवर्तन के खिलाफ परमाणु हथियार बेअसर हैं। आप आतंकवादी समूह पर परमाणु बम नहीं गिरा सकते।
  • अप्रसार संधियाँ: परमाणु अप्रसार संधि (NPT-1968) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों ने परमाणु हथियारों के प्रसार पर अंकुश लगाया है। इसने परमाणु हथियार रखने वाले और न रखने वाले देशों के बीच एक व्यवस्था बनाई है।
  • प्रतिरोध की रणनीति: परमाणु हथियारों का मुख्य उपयोग अब केवल एक प्रतिरोधक (Deterrent) के रूप में है – यानी दूसरे देश को बड़े पैमाने के हमले से रोकना। वास्तविक युद्ध में इनके इस्तेमाल की संभावना बहुत कम है क्योंकि इसके विनाशकारी परिणाम होंगे।
  • नैतिक दबाव: वैश्विक जनमत और नैतिकता परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ है।

इस प्रकार, परमाणु हथियार एक 'शक्ति का प्रतीक' बनकर रह गए हैं, लेकिन आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान नहीं हैं।


प्रश्न 11. भारतीय परिदृश्य को देखते हुए, भारत में किस प्रकार की सुरक्षा - पारंपरिक या गैर-पारंपरिक, को प्राथमिकता दी गई है? तर्कों को प्रमाणित करने के लिए आप कौनसे उदाहरण दे सकते हैं?

उत्तर:

भारत ने ऐतिहासिक रूप से पारंपरिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, लेकिन धीरे-धीरे गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर भी ध्यान बढ़ रहा है।

पारंपरिक सुरक्षा को प्राथमिकता के उदाहरण:

  • युद्ध: 1947-48, 1965, 1971 और 1999 में पाकिस्तान के साथ, और 1962 में चीन के साथ युद्ध।
  • परमाणु परीक्षण: 1974 (पोखरण-I) और 1998 (पोखरण-II) में परमाणु परीक्षण करके एक मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना, क्योंकि भारत परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों (चीन, पाकिस्तान) से घिरा है।
  • सैन्य मजबूती: सेना का आधुनिकीकरण, मिसाइल प्रौद्योगिकी (अग्नि, पृथ्वी) का विकास।

गैर-पारंपरिक सुरक्षा पर बढ़ता ध्यान:

  • आतंकवाद: 26/11 मुंबई हमले जैसी घटनाओं के बाद आतंकवाद से निपटने के लिए विशेष कानून और सुरक्षा ढाँचा मजबूत किया गया।
  • पर्यावरण: 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करके जलवायु परिवर्तन की चुनौती को स्वीकार करना।
  • आंतरिक सुरक्षा: विभिन्न क्षेत्रों में अलगाववादी और उग्रवादी आंदोलनों से निपटना।
  • मानव सुरक्षा: खाद्य सुरक्षा कानून, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसे कदम।

निष्कर्ष: भारत की सुरक्षा नीति दोहरी चुनौती का सामना करती है। एक ओर पारंपरिक सैन्य खतरों से निपटना जारी है, तो दूसरी ओर आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक सुरक्षा जैसी गैर-पारंपरिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना अनिवार्य हो गया है।

--- UP Board Solutions का यह अध्याय समाप्त हुआ ---

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Other Chapters of Class 12 Political Science
1. शीत युद्ध का दौर
2. दो ध्रुवीयता का अंत
3. समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व
4. सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
5. समकालीन दक्षिण एशिया
6. अंतर्राष्टीय संगठन
7. समकालीन विश्व सुरक्षा
8. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
9. वैश्वीकरण
1. राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
2. एक दल की प्रधानता का युग
3. नियोजित विकास की राजनीति
4. भारत के विदेश सम्बन्ध
5. कांग्रेस प्रणाली - चुनौतियां और पुनर्स्थापना
6. लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
7. जन-आंदोलनों का उदय
8. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ
9. भारतीय राजनीति - नये बदलाव
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