UP Board Class 12 Political Science 3. नियोजित विकास की राजनीति is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) यह भारत के आर्थिक भविष्य का एक ब्लू-प्रिंट था।
(ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।
(ग) इसकी रचना कुछ अग्रणी उद्योगपतियों ने की थी।
(घ) इसमें नियोजन के विचार का पुरज़ोर समर्थन किया गया था।
उत्तर: (ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।
(क) नियोजन (ख) उदारीकरण (ग) सहकारी खेती (घ) आत्मनिर्भरता
उत्तर: (ख) उदारीकरण।
(क) बॉम्बे प्लान से
(ख) सोवियत खेमे के देशों के अनुभवों से
(ग) समाज के बारे में गांधीवादी विचार से
(घ) किसान संगठनों की माँगों से
उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी।
(क) चौधरी चरण सिंह - (ii) किसान
(ख) पी.सी. महालनोबिस - (i) औद्योगीकरण
(ग) बिहार का अकाल - (iii) जोनिंग
(घ) वर्गीज कूरियन - (iv) सहकारी डेयरी
उत्तर: आजादी के समय विकास के प्रश्न पर प्रमुख मतभेद निम्नलिखित थे:
इनमें से कुछ प्रश्नों को आंशिक तौर पर सुलझा लिया गया, परंतु कुछ प्रश्न ऐसे हैं जिन्हें अभी भी सुलझाना बाकी है। कुछ सुलझे हुए मतभेद निम्न प्रकार से हैं:
उत्तर: पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से लागू होकर 31 मार्च 1956 को समाप्त हुई। इस योजना में लोगों को गरीबी के जाल से मुक्त करने का लक्ष्य था। इस योजना में ज्यादा जोर कृषि क्षेत्र पर दिया गया। इस योजना में भूमि सुधार पर जोर दिया गया और उसे देश के विकास की बुनियादी चीज माना गया। इस योजना के अन्तर्गत अनेक बाँध बनाए गए और सिंचाई के क्षेत्र में काफी निवेश किया गया।
दूसरी पंचवर्षीय योजना पहली पंचवर्षीय योजना से विभिन्न अर्थों में अलग थी। अंतर यह था कि दूसरी पंचवर्षीय योजना में भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया। सरकार ने देसी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगाया। संरक्षण की इस नीति से निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को आगे बढ़ने में काफी मदद मिली।
दोनों योजनाओं में दूसरा अंतर यह था कि पहली योजना में विकास की गति को धीमा रखा गया था। यह समझा गया था कि एक दशक तक विकास की रफ्तार धीमी रखी जाए नहीं तो वह अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालेगी। परन्तु दूसरी योजना में विकास की गति को तेज रखा गया और यह कोशिश की गई थी कि तेज गति से संरचनात्मक बदलाव किया जाए।
पहली योजना में कुल 2378 करोड़ रुपए के व्यय की व्यवस्था की गई थी जबकि दूसरी योजना के अंतर्गत 4500 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई थी।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत राष्ट्रीयकरण की प्रक्रिया धीमी थी और अधिक क्षेत्रों में इसे लागू नहीं किया गया था। परन्तु दूसरी पंचवर्षीय योजना में बिजली, रेलवे, इस्पात, मशीनरी, संचार आदि उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया और आर्थिक क्षेत्र में राज्य का नियंत्रण बढ़ा।
उत्तर: सरकार ने खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कृषि की एक नई रणनीति अपनाई। नई रणनीति के अंतर्गत सरकार ने उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जो पहले से कृषि योग्य थे, सिंचाई की सुविधाएँ थीं, जहाँ खेती पहले से ही उपज देती थी। वहाँ खेती की उपज में वृद्धि करने वाले संसाधन जैसे कि अच्छे बीज, रसायनिक खाद (फर्टीलाइजर) आदि वस्तुओं को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया गया। ट्रैक्टर आदि खरीदने के लिए रियायती दरों पर ऋण की व्यवस्था की गई। सिंचाई की सुविधाओं में बढ़ोतरी के कदम उठाए गए, किसानों को नलकूप लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। रियायती दरों पर बिजली की आपूर्ति की गई। ये रियायतें केवल छोटे किसानों को ही नहीं बल्कि बड़े किसानों तथा भूपतियों को भी दी गईं। इतना ही नहीं, सरकार ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाए जाने का भी आश्वासन दिया और खाद्यान्नों के न्यूनतम मूल्य निर्धारित किए। किसानों को न्यूनतम मूल्यों के बाद बोनस दिए जाने की नीति अपनाई गई और उपज का विशेषकर गेहूँ और चावल की सरकारी खरीद (अथवा सरकार द्वारा खरीद किए जाने और उन्हें सरकारी गोदामों में स्टॉक किए जाने) का कदम भी उठाया। इन बातों ने छोटे-बड़े सभी किसानों को अधिक से अधिक उपज उगाने और अनाज की मात्रा में वृद्धि के लिए प्रेरित किया। इसी को 'हरित क्रांति' का नाम दिया गया।
हरित क्रांति के सकारात्मक परिणाम:
हरित क्रांति के नकारात्मक परिणाम:
उत्तर: दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान औद्योगिक विकास और कृषि विकास के बीच चले विवाद में निम्नलिखित तर्क दिए गए:
पक्ष में तर्क:
विपक्ष में तर्क:
आजादी के बाद के आरंभिक वर्षों में कांग्रेस पार्टी के भीतर दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियाँ पनपीं। एक तरफ राष्ट्रीय सरकार ने राज्य के स्वामित्व का समाजवादी सिद्धांत अपनाया, उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण को रोकने के लिए अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों का नियंत्रण और नियमन किया। दूसरी तरफ राष्ट्रीय सरकार ने निजी निवेश के लिए उदार आर्थिक नीतियाँ अपनाईं और उसके बढ़ावे के लिए विशेष प्रयास किए। इसे उत्पादन में अधिकतम वृद्धि की आर्थिक कसौटी पर ज़ायज़ ठहराया गया।
- फ्रैंकिन फ्रैंकल
(क) लेखक किस अंतर्विरोध की चर्चा कर रहा है? ऐसे अंतर्विरोध के राजनीतिक परिणाम क्या होंगे?
उत्तर: लेखक द्वारा कांग्रेस में उन दो समूहों की चर्चा की गई है जो क्रमशः वामपंथी विचारधारा से और दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। इस प्रकार के अंतर्विरोध के राजनीतिक परिणाम देश में टकराव, वामपंथी दलों का गठन, उनके द्वारा हिंसात्मक आंदोलनों को बढ़ावा देना या उन संगठनों को बढ़ावा मिलना जो लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते, हो सकते हैं। पश्चिमी देश विशेषकर पूँजीवादी देश जो उदारवाद, वैश्वीकरण के पक्षधर हैं तथा समाजवाद और कम्युनिस्ट नीतियों के घोर विरोधी हैं, वे भारत में विरोधी राजनीति अपनाएँगे।
(ख) लेखक की बात सही है तो फिर बताएँ कि कांग्रेस इस नीति पर क्यों चल रही थी? क्या इसका संबंध विपक्षी दलों की प्रकृति से था?
उत्तर: लेखक की बात सही है कि कांग्रेस एक ओर पूँजीवादी विरोधी दलों की नीति अपनाकर निजी क्षेत्र को और दूसरी ओर वामपंथी विरोधी दलों की साम्यवादी या समाजवादी नीतियों के अंतर्गत नियोजन, सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा देना और राज्य की भूमिका पर बल देने जैसी नीतियाँ नहीं अपना रही थी। इसे कांग्रेस द्वारा मिश्रित आर्थिक नीति का नाम दिया गया। बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया परन्तु सार्वजनिक क्षेत्र के परिणाम बहुत अच्छे नहीं रहे।
(ग) कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और इसके प्रांतीय नेताओं के बीच भी कोई अंतर्विरोध था?
उत्तर: कांग्रेस पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व और इसके प्रांतीय नेताओं के बीच खुलकर कोई अंतर्विरोध नहीं था परन्तु यह स्पष्ट था कि दबी जुबान में अनेक प्रांतों ने सरकारीकरण का विरोध किया। कई प्रांतों में कांग्रेस के कई नेताओं ने अपनी पार्टी छोड़कर अलग से अपनी नई पार्टी बना ली। चरणसिंह ने भारतीय क्रांति दल और फिर लोकदल बनाया। मोरारजी देसाई पूँजीवादी नीतियों का खुलेआम समर्थन करते थे। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने समाजवादी पार्टी का गठन किया। उड़ीसा में बीजू पटनायक ने उत्कल कांग्रेस का गठन किया।
उत्तर: वामपंथ से उन लोगों की ओर संकेत किया जाता है जो गरीब और पिछड़े सामाजिक समूह की पैरवी करते हैं और इन वर्गों को लाभ पहुँचाने वाली सरकारी नीतियों का समर्थन करते हैं।
उत्तर: दक्षिणपंथ से उन लोगों को संकेत किया जाता है जो यह विश्वास करते हैं कि खुली प्रतिस्पर्धा और बाजारमूलक अर्थव्यवस्था के जरिए ही प्रगति हो सकती है-यानि सरकार को अर्थव्यवस्था में जरूरी होने पर ही हस्तक्षेप करना चाहिए।
उत्तर:
उत्तर: मार्च 1950 में।
उत्तर: 1944 में उद्योगपतियों का एक समूह एकजुट हुआ। इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त मसौदा तैयार किया। इसे “बॉम्बे प्लान” कहा जाता है।
उत्तर: गरीबी को किस प्रकार से कम या समाप्त किया जाए।
उत्तर: भारी उद्योगों के विकास पर।
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