UP Board Class 4 Hindi 12. सुनिता कि पहिया कुर्सी is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: सभी लोग सुनीता को इसलिए ध्यान से देख रहे थे क्योंकि वह एक पहिया कुर्सी पर बैठी हुई थी। उसके पैर चलने-फिरने में सहायता नहीं कर पाते थे, इसलिए वह कुर्सी के पहियों की मदद से आगे बढ़ रही थी। यह दृश्य आमतौर पर देखने को नहीं मिलता था, इसलिए लोगों का ध्यान उसकी ओर खिंच गया।
उत्तर: सुनीता ने जैसे ही सामान लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, दुकानदार ने वह थैला सीधे उसकी गोद में रख दिया। दुकानदार ने यह सोचकर ऐसा किया कि शायद सुनीता अपने हाथ से सामान नहीं उठा सकती। सुनीता को यह व्यवहार इसलिए बुरा लगा क्योंकि दुकानदार ने उसकी मदद करने के बजाय उसकी असमर्थता को दर्शाते हुए दया दिखाई, जबकि सुनीता खुद से सामान ले सकती थी।
उत्तर: मेरे विचार में, सुनीता को सड़क पर होने वाली गतिविधियाँ देखना इसलिए अच्छा लगता होगा क्योंकि वह अक्सर घर के अंदर ही रहती होगी। पहिया कुर्सी पर होने के कारण बाहर आना-जाना आसान नहीं होता। सड़क पर लोगों को आते-जाते, बातें करते, खेलते-कूदते देखकर उसे दुनिया की जिंदगी का अहसास होता होगा और उसका मन भी बहल जाता होगा।
उत्तर:
दिखने वाली चीजें: सड़क पर मुझे विभिन्न प्रकार के वाहन जैसे साइकिल, रिक्शा, मोटरसाइकिल, कार, बस और ट्रक दिखाई देते हैं। सड़क के किनारे पेड़-पौधे, बिजली के खंभे, दुकानें, सड़क की लाइटें और कभी-कभी जानवर भी नजर आते हैं।
लोगों की गतिविधियाँ: लोग सड़क पर चलते-फिरते, सामान खरीदते, एक-दूसरे से बातें करते, स्कूल जाते, दुकानों पर काम करते और कभी-कभी चाय की दुकान पर बैठे हुए नजर आते हैं।
उत्तर: फरीदा की माँ ने सोचा होगा कि सुनीता से सीधे उसकी पहिया कुर्सी के बारे में पूछने से सुनीता को बुरा लग सकता है। हो सकता है माँ को डर था कि इस सवाल से सुनीता को यह अहसास होगा कि वह दूसरे बच्चों से अलग है और इससे उसके मन को ठेस पहुँचेगी। इसलिए माँ ने फरीदा को तुरंत रोक दिया।
उत्तर: मेरे विचार में, फरीदा का पूछना गलत नहीं था। बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं और नई चीजें देखकर उसके बारे में जानना चाहते हैं। फरीदा के मन में सुनीता को दुख पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। हाँ, अगर वह पूछने का तरीका थोड़ा और संवेदनशील होता, जैसे पहले सुनीता से दोस्ती करके फिर बातचीत में पूछती, तो शायद बेहतर होता।
उत्तर: हाँ, मुझे भी कई बार मना किया जाता है। जब मैं टीवी देखते हुए खाना खाता हूँ तो मेरी माँ मना करती हैं। वे कहती हैं कि इससे पाचन ठीक नहीं होता और ध्यान भी भटकता है। इसके अलावा, जब मैं देर रात तक जागकर मोबाइल फोन देखने लगता हूँ, तब भी पापा मना करते हैं और कहते हैं कि इससे नींद पूरी नहीं होती और आँखों पर भी बुरा असर पड़ता है।
उत्तर: यदि सुनीता मेरी पाठशाला में आए, तो उसे निम्नलिखित कामों में परेशानी हो सकती है:
1. सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने में: अगर कक्षाएँ ऊपरी मंजिल पर हैं तो सीढ़ियाँ एक बड़ी चुनौती होंगी।
2. शौचालय का उपयोग: सामान्य शौचालय उसकी पहिया कुर्सी के लिए उपयुक्त नहीं होंगे।
3. खेलकूद में भाग लेने में: दौड़ने, कूदने वाले अधिकतर खेलों में वह सीधे तौर पर भाग नहीं ले पाएगी।
4. जल्दी एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में: जब घंटी बजने के बाद सभी बच्चे दौड़कर जाते हैं, तो उसके लिए भीड़ में से निकलना मुश्किल हो सकता है।
उत्तर: सुनीता जैसे विद्यार्थियों की परेशानी दूर करने के लिए पाठशाला में ये बदलाव किए जा सकते हैं:
1. रैंप (ढलान) बनवाना: सभी मुख्य दरवाजों और सीढ़ियों के पास रैंप बनाए जाएँ ताकि पहिया कुर्सी आसानी से आ-जा सके।
2. विशेष शौचालय: चौड़े दरवाजे और हत्थे वाले विशेष शौचालय बनाए जाएँ।
3. समावेशी खेल: ऐसे खेलों को शामिल किया जाए जिनमें सभी बच्चे एक साथ खेल सकें, जैसे बैठकर खेले जाने वाले खेल, बॉल थ्रो आदि।
4. सहयोगी माहौल: सभी शिक्षक और विद्यार्थी ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशील बनें और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता दें।
उत्तर:
15 मार्च, 2024
मेरा पता
शहर - 201001
प्रिय सुनीता,
नमस्ते!
मैंने तुम्हारी कहानी पढ़ी और मैं तुम्हारी हिम्मत और खुशमिजाजी देखकर बहुत प्रभावित हुआ हूँ। तुम्हारे अंदर की मजबूती सचमुच सीखने लायक है। मेरे मन में तुमसे पूछने के लिए एक सवाल है - जब कभी तुम्हें कोई काम करने में मुश्किल आती है, तो तुम हार न मानते हुए उसे करने का हौसला कहाँ से पाती हो?
मैं चाहता हूँ कि तुम हमेशा खुश रहो और अपने सपनों को पूरा करो। आशा है जल्द ही तुम्हारा जवाब मिलेगा।
तुम्हारा मित्र,
अर्जुन
कक्षा-4
उत्तर: रवि भैया ब्रेल लिपि में लिखी हुई किताबें पढ़ते हैं। ब्रेल लिपि में अक्षर और संख्याएँ कागज पर उभरे हुए बिंदुओं के समूह के रूप में होते हैं। नेत्रहीन लोग अपनी उंगलियों के स्पर्श से इन उभरे हुए बिंदुओं को पहचानकर पढ़ पाते हैं।
उत्तर: ब्रेल लिपि में किताबों के बारे में सबसे पहले लुई ब्रेल नामक एक फ्रांसीसी व्यक्ति ने सोचा। लुई ब्रेल खुद भी बचपन में एक दुर्घटना में अपनी आँखों की रोशनी खो बैठे थे। उन्होंने ही दुनिया को ब्रेल लिपि का तोहफा दिया, जिससे आज लाखों नेत्रहीन लोग पढ़-लिख सकते हैं।
उत्तर: हाँ, मेरे पड़ोस में एक बच्चा है जो बोल नहीं सकता। वह सुन सकता है लेकिन अपनी बात को शब्दों में नहीं कह पाता।
उत्तर: मैं उसे अपनी बात समझाने के लिए मुख्य रूप से इशारों और चेहरे के हाव-भाव का इस्तेमाल करता हूँ। कभी-कभी मैं चीजों के चित्र बनाकर या लिखकर भी बात समझाता हूँ। धैर्य से उसकी बात सुनने और उसके इशारों को समझने की कोशिश करता हूँ। इससे हम आपस में अच्छी तरह बातचीत कर पाते हैं।
उत्तर: मैं एक ऐसे बच्चे के बारे में सोच रहा हूँ जिसके हाथ नहीं हैं या वे काम नहीं करते। उसकी चुनौती लिखना, खाना खाना, किताब के पन्ने पलटना जैसे काम करना है।
मेरा आविष्कार: "मल्टीटास्किंग हेल्पर हेडबैंड"
* कैसे बनाऊँगा: यह एक हल्का हेडबैंड होगा जिसे सिर पर पहना जा सकेगा। इसके सामने की तरफ एक पतली और लचीली "आर्म" या "पॉइंटर" लगी होगी जिसे मुँह या सिर हिलाकर नियंत्रित किया जा सकेगा।
* जरूरी चीजें: हल्की प्लास्टिक या धातु, इलेक्ट्रॉनिक सेंसर, बैटरी, रबर के पैड और एक लचीली प्लास्टिक की छड़ी।
* काम: यह आविष्कार निम्नलिखित काम करने में मदद करेगा:
1. इसकी पॉइंटर से किताब के पन्ने पलटे जा सकेंगे।
2. इसके साथ जुड़े एक विशेष पेन की मदद से लिखा जा सकेगा।
3. इस पर एक बटन दबाकर कंप्यूटर या मोबाइल को नियंत्रित किया जा सकेगा।
4. इससे जुड़ी एक चम्मच जैसी डिवाइस से खाना खाया जा सकेगा।
चित्र: (विद्यार्थी अपनी कल्पना से एक हेडबैंड पर लगी पतली, लचीली भुजा वाला चित्र बनाएँ जो विभिन्न काम कर रही हो।)
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