UP Board Class 4 Hindi 9. स्वतन्त्रता कि ओर is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:
1. महात्मा गाँधी जी भारत को अंग्रेजों के शासन से आजाद कराने के लिए अहिंसक तरीके से संघर्ष कर रहे थे।
2. वे स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए चरखा चलाकर खादी का सूत स्वयं कातते थे।
3. वे हमेशा सच्चाई और न्याय के रास्ते पर चलते थे और किसी भी तरह के अन्याय का शांतिपूर्ण विरोध करते थे।
धनी की माँ चूल्हा फूँक रही थी |
धनी की माँ खाना पकाने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल करती थी | नीचे कुछ चित्र बने हैं| इनके नाम पता करो और लिखो |
उत्तर:
1. स्टोव (किरोसिन स्टोव)
2. चूल्हा (लकड़ी/कोयले का)
3. गैस-स्टोव
4. कोयले की भट्ठी (अंगीठी)
उत्तर:
ईंधन:
1. स्टोव - मिट्टी का तेल (किरोसिन)
2. चूल्हा - लकड़ी या कोयला
3. गैस-स्टोव - रसोई गैस (LPG)
4. कोयले की भट्ठी - कोयला
मेरे घर में: मेरे घर में खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से गैस-स्टोव का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी बिजली चली जाने पर चूल्हे का भी प्रयोग होता है।
उत्तर:
स्वतंत्रता: किसी भी दूसरे के नियंत्रण या गुलामी में न रहकर अपने फैसले स्वयं लेने की आजादी। भारत 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से स्वतंत्र हुआ।
सत्याग्रह: महात्मा गाँधी जी द्वारा चलाया गया एक अहिंसक आंदोलन। इसका मतलब है सत्य के प्रति आग्रह यानी सच्चाई और न्याय के लिए डटकर खड़े होना, बिना हिंसा किए।
खादी: चरखे पर काते गए सूत से हाथ से बुना हुआ एक मोटा कपड़ा। स्वदेशी आंदोलन में गाँधी जी ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करके खादी पहनने पर जोर दिया था।
चरखा: लकड़ी का बना एक हस्तचालित यंत्र, जिसकी मदद से रूई से सूत काता जाता है। यह गाँधी जी के स्वदेशी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक था।
नोट: विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इन शब्दों के बारे में अपने माता-पिता, दादा-दादी से बात करें, किताबें पढ़ें और कक्षा में अपने समूह के साथ मिलकर इसकी जानकारी साझा करें।
उत्तर:
जब गाँधी जी दांडी यात्रा से विजयी होकर लौटे, तो पूरा आश्रम उनका स्वागत करने के लिए इकट्ठा हुआ। धनी ने हर्षित मन से एक सुंदर फूलों की माला बनाकर गाँधी जी को पहनाई। फिर वह तेजी से दौड़कर बिन्नी के पास गया और उसका ताजा दूध निकालकर एक बर्तन में ले आया। गाँधी जी ने दूध पीते हुए मुस्कुराकर कहा, "धन्यवाद धनी! इतनी लंबी पैदल यात्रा के बाद यह दूध मेरी ऊर्जा वापस लौटाएगा। तुमने बिन्नी की बहुत अच्छी देखभाल की है।" धनी खुशी से फूला नहीं समाया और बोला, "बापू, अब मैं रोज आपके लिए ताजा दूध लाऊँगा।" यह सुनकर सभी आश्रमवासी खिलखिलाकर हँस पड़े और आश्रम में खुशियाँ छा गईं।
उत्तर:
धनी ने गाँधी जी से सुबह के समय बात करना इसलिए ठीक समझा होगा क्योंकि गाँधी जी का दिनचर्या का नियम बहुत सख्त था। वे सुबह-सुबह बहुत जल्दी उठ जाते थे और ताजी हवा में टहलने या आश्रम का काम देखने निकल पड़ते थे। उस समय वे अकेले और शांत होते थे, इसलिए धनी को लगा होगा कि सुबह का समय उनसे मिलने और बात करने के लिए सबसे अच्छा रहेगा।
उत्तर:
धनी बिन्नी (बकरी) की बहुत अच्छी और प्यार से देखभाल करता था। वह उसके लिए ताजी और हरी घास लाता था। उसे समय-समय पर साफ पानी पिलाता था। बिन्नी को आश्रम के हरे-भरे मैदान में घुमाने ले जाता था ताकि वह चल-फिर सके और ताजी हवा ले सके। इस तरह वह बिन्नी को स्वस्थ और खुश रखता था।
उत्तर:
धनी ने देखा होगा कि आश्रम में हलचल बढ़ गई है। गाँधी जी के कमरे में कई नेता और स्वयंसेवक गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। लोग फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे और सबके चेहरे पर एक गंभीरता थी। बार-बार 'नमक', 'कानून' और 'यात्रा' जैसे शब्द सुनाई दे रहे होंगे। इन सब बातों और गतिविधियों को देखकर धनी को समझ आ गया होगा कि आश्रम में कोई बड़ी और गुप्त योजना बनाई जा रही है।
उत्तर:
धनी यात्रा पर जाने के लिए इसलिए उत्सुक था क्योंकि वह जानना चाहता था कि यह कैसी यात्रा है जिसमें इतने सारे लोग शामिल हो रहे हैं। उसे लगा कि यह कोई साधारण सैर-सपाटा नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ महत्वपूर्ण करने का मौका है और वह भी इसमें हिस्सा लेना चाहता था।
अगर मैं धनी की जगह होता: हाँ, अगर मैं धनी की जगह होता तो मैं भी यात्रा पर जाने की जिद करता। क्योंकि महात्मा गाँधी जी जैसे महान नेता के साथ चलकर देश की आजादी की लड़ाई में भाग लेना एक गर्व की बात होती। मैं भी अपने देश के लिए कुछ करना चाहता और इस ऐतिहासिक घटना का हिस्सा बनना चाहता।
उत्तर:
गाँधी जी ने धनी को समझाया कि दांडी यात्रा बहुत कठिन और लंबी है, जो एक छोटे बच्चे के लिए उचित नहीं है। फिर उन्होंने धनी को एक बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर मनाया। उन्होंने कहा कि अगर धनी आश्रम में रहकर उनकी प्यारी बकरी 'बिन्नी' की अच्छी देखभाल करेगा, तो यह भी देश की सेवा ही होगी। इस तरह एक जिम्मेदारी देकर गाँधी जी ने धनी को यात्रा पर न जाने के लिए राजी कर लिया।
उत्तर:
अच्छी सेहत और ताकत के लिए मैं पौष्टिक और संतुलित भोजन खाऊँगा-पियूँगा। जैसे:
• मीठा दूध, दही, पनीर - हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाते हैं।
• कुरकुरी मक्का की रोटी, गर्मागर्म साग, खुशबूदार दाल - ये शरीर को ऊर्जा और प्रोटीन देते हैं।
• चटपटी अंकुरित दाल, रसीला आम, हरी सब्जियाँ - इनमें विटामिन होते हैं जो रोगों से लड़ने की शक्ति देते हैं।
• पानी, नारियल पानी, ताजे फलों का रस - शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते।
मैं ज्यादा तेल-मसाले वाली, बासी चीजें और ठंडी आइसक्रीम, टॉफी आदि कम ही खाऊँगा।
उत्तर:
• मीठा / गरम / नरम हलवा
• ऊँचा / हरा / घना पेड़
• नमकीन / सफेद / महीन नमक
• छोटी / काली / मेहनती चींटी
• ठंडा / कठोर / भारी पत्थर
• साफ / सूती / लम्बा कुर्ता
• चमकीला / गोल / मोटा चश्मा
• लहराता / तिरंगा / लाल झंडा
उत्तर:
• धुआँ
• कुआँ
• फूँक
• कहाँ
• स्वतंत्र
• बाँध
• माँ
• गाँव
• बंदगोभी
• इंतजार
• पसंद
उत्तर:
माँ की जिम्मेदारी: घर और आश्रम के सभी लोगों के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार करना। रसोईघर और बर्तनों की सफाई का ध्यान रखना।
पिता की जिम्मेदारी: चरखा चलाकर रूई से मोटा और मजबूत सूत कातना, ताकि उससे खादी का कपड़ा बुना जा सके। यह स्वदेशी आंदोलन में एक महत्वपूर्ण काम था।
बिंदा की जिम्मेदारी: आश्रम के खेत या बगीचे में हरी सब्जियाँ जैसे टमाटर, बैंगन, पालक आदि उगाना, ताकि आश्रमवासियों को ताजी और शुद्ध सब्जियाँ मिल सकें।
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