UP Board Class 4 Hindi 5. दोस्त कि पोशाक - नसीरुद्दीन क निशाना is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर- नसीरुद्दीन अपने पुराने दोस्त जमाल साहब से मिलकर बहुत खुश हुए। उन्हें अपने दोस्त को देखकर बहुत अच्छा लगा।
उत्तर- नसीरुद्दीन ने हुसैन साहब से कहा कि "जमाल साहब मेरे पुराने दोस्त हैं और इन्होंने जो अचकन पहनी है, वह इनकी अपनी ही है।" वे यह बताकर यह स्पष्ट करना चाहते थे कि जमाल साहब ने कोई उधार की पोशाक नहीं पहनी है।
उत्तर- नसीरुद्दीन ने अपने पड़ोसी से कहा कि "उन्होंने जो अचकन पहन रखी है, वह मेरी है।" इस बार उन्होंने सच्चाई बता दी और जमाल साहब को शर्मिंदा कर दिया।
उत्तर- जमाल साहब ने नसीरुद्दीन को यह समझाया कि पोशाक के बारे में बिल्कुल भी नहीं बताना चाहिए। उनका मानना था कि ऐसी बातें करने से कोई फायदा नहीं होता, बल्कि मुश्किलें ही बढ़ती हैं।
उत्तर- जमाल साहब ने घूमने जाने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उनके पहनावे में वह अचकन नहीं थी जो उन्होंने पहले पहनी थी। उनके पास साधारण कपड़े थे और वे लोगों के सामने साधारण कपड़ों में जाना नहीं चाहते थे।
नसीरुद्दीन और जमाल साहब बनठन कर घूमने के लिए निकले |
उत्तर- मैं बन-ठन कर विशेष अवसरों पर जाता हूँ, जैसे कि स्कूल के कार्यक्रम, शादी समारोह, त्योहारों पर रिश्तेदारों के घर, या किसी दोस्त की जन्मदिन पार्टी में।
उत्तर- बनने-ठनने के लिए मैं ये काम करता हूँ: नहा-धोकर साफ-सुथरे होना, नए या सबसे अच्छे कपड़े पहनना, बालों को कंघी से सही करना, और चमकदार जूते पहनना। कभी-कभी अच्छी खुशबू भी लगाता हूँ।
उत्तर- जमाल साहब नाराज होकर नसीरुद्दीन से कहा होगा: "मैंने तुमसे कहा था कि अचकन के बारे में कुछ मत बोलो! फिर तुमने पड़ोसी के सामने सच्चाई क्यों बता दी? अब मैं बहुत शर्मिंदा हूँ।"
उत्तर- जमाल साहब शायद इसलिए नहीं जाना चाहते होंगे क्योंकि उन्हें डर था कि लोग उनके साधारण कपड़ों को देखकर उनके बारे में गलत राय बना लेंगे या उनका मजाक उड़ाएँगे। वे चाहते थे कि लोग उन्हें अच्छे कपड़ों में ही देखें।
उत्तर- नसीरुद्दीन एक मजाकिया और चंचल स्वभाव के व्यक्ति थे। वे शायद लोगों की प्रतिक्रिया देखने के लिए या मजाक-मस्ती करने के लिए हमेशा अपनी अचकन के बारे में बताते होंगे। उन्हें ऐसा करने में मजा आता होगा।
जब जमाल साहब और नसरुद्दीन हुसैन साहब के घर से बाहर निकले तो उन्होंने अपनी बेगम को नसरुद्दीन और जमाल साहब से मुलाकात का किस्सा सुनाया | उन दोनों के बीच में क्या बातचीत हुई होगी? लिखकर बताओ
बेगम: कौन आया था?
हुसैन साहब: नसीरुद्दीन अपने एक दोस्त के साथ आया था।
बेगम: कौन दोस्त? पहचान तो होगी?
हुसैन साहब: जमाल साहब नाम के, उनका पुराना दोस्त बताया। पर एक मजेदार बात हुई!
बेगम: (उत्सुकता से) क्या बात?
हुसैन साहब: पहले तो नसीरुद्दीन ने कहा कि जमाल साहब की अचकन उनकी अपनी है। फिर बाद में पता चला कि वह अचकन तो नसीरुद्दीन की ही है! जमाल साहब तो उधार की पोशाक पहने हुए थे!
बेगम: (हँसते हुए) अरे वाह! यह तो बड़ा मजाकिया किस्सा है! फिर क्या हुआ?
हुसैन साहब: फिर जमाल साहब बहुत शर्मिंदा हो गए और बिना घूमे ही चले गए।
जब नसरुद्दीन दिन अपने दोस्त से मिले, वे उसे अपना मोहल्ला दिखाने ले गए | जब तुम अपने दोस्तों से मिलते हो, तब क्या क्या करते हो?
उत्तर- जब मैं अपने दोस्तों से मिलता हूँ तो हम साथ मिलकर बहुत सारी मस्ती करते हैं। हम एक-दूसरे से बातें करते हैं, खेलते हैं, कभी साइकिल पर घूमने जाते हैं, कभी पार्क में झूला झूलते हैं, और कभी कोई नया खेल भी सीखते हैं। कभी-कभी हम मिलकर पढ़ाई भी कर लेते हैं।
नीचे कुछ वाक्य लिखे हैं | तुम्हें इनका अभिनय करना है | तुम चाहो तो कहानी में देख सकते हो कि इन कामों का जिक्र कहाँ आया है|
उत्तर- इन सभी क्रियाओं का अभिनय करने के लिए तुम अपने घर में अभ्यास कर सकते हो। नीचे दिए गए संकेत तुम्हारी मदद करेंगे:
1. बनठन कर घूमने के लिए निकलना: अच्छे कपड़े पहनने और शीशे में देखने का अभिनय करो।
2. घड़ों पानी पड़ना: शर्म से सिर झुकाकर और मुँह छुपाने का अभिनय करो।
3. मुँह बनाकर शिकायत करना: होंठ निकालकर नाराजगी दिखाओ।
4. गर्मजोशी से स्वागत करना: मुस्कुराकर गले लगाने या हाथ मिलाने का अभिनय करो।
5. नाराज होना: भौहें चढ़ाकर और गुस्से में मुँह फुलाने का अभिनय करो।
6. देखते ही रह जाना: आश्चर्य से मुँह खोलकर एकटक देखने का अभिनय करो।
उत्तर- "घड़ों पानी पड़ना" एक मुहावरा है जिसका अर्थ है "अचानक बहुत ज्यादा शर्मिंदा या लज्जित हो जाना।" ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी गलती या शर्मनाक स्थिति के कारण खुद को बहुत छोटा महसूस करने लगता है।
उत्तर-
1. सिर मुंडाते ही ओले पड़ना: इस मुहावरे का अर्थ है - कोई काम शुरू करते ही मुसीबत आ जाना। चित्र में एक व्यक्ति बाल कटवा रहा है और अचानक आकाश से बर्फ के ओले गिरने लगे हैं।
2. ऊँट के मुँह में जीरा: इसका अर्थ है - बहुत कम मात्रा में देना जो किसी काम न आए। चित्र में एक विशाल ऊँट है और कोई उसके मुँह में एक छोटा सा जीरा डाल रहा है।
कहानी में से ऐसे ही और शब्द छाँटों जो किसी के बारे में कुछ बत्ताते हो | उन्हें छाँटकर नीचे दी गई दी गई जगह में लिखो |
उत्तर- कहानी में पाए गए कुछ विशेषण (किसी के बारे में विशेष बताने वाले शब्द) ये हैं:
1. पुराना दोस्त
2. भड़कीली अचकन
3. मामूली सी पोशाक
4. खास दोस्त
5. अन्य पड़ोसी
6. अपनी अचकन
तुम अपने पड़ोसी बच्चों के साथ बहुत-से खेल खेलते हो | पर कया तुम उनके परिवार के बारे में जानते हो? चलो, दोस्तों के बारे में और जानकारी इकट्ठा करते है |
उत्तर- अपने पड़ोसी दोस्तों और उनके परिवार के बारे में जानने के लिए तुम ये प्रश्न पूछ सकते हो:
1. आपके घर में कुल कितने सदस्य हैं?
2. उन सबके नाम क्या हैं?
3. वे क्या-क्या काम करते हैं? (जैसे- पढ़ाई, नौकरी, व्यवसाय)
4. उनकी रुचियाँ या शौक क्या हैं?
5. आपका पसंदीदा त्योहार कौन सा है और आप इसे कैसे मनाते हैं?
इस तरह पूछकर तुम न सिर्फ उन्हें बेहतर जान पाओगे, बल्कि एक अच्छी दोस्ती भी बना पाओगे।
नीचे इसी तरह के कुछ शब्दों के जोड़ दिए गए हैं | इन सबके अर्थ अलग-अलग हैं| इन शब्दों का प्रयोग करो |
उत्तर-
घड़ा: पानी भरने के लिए मिट्टी का घड़ा इस्तेमाल होता है।
गढ़ा: बारिश में सड़क पर एक गहरा गढ़ा बन गया है।
घूम: हम रविवार को पूरे शहर में घूमने गए।
झूम: तेज हवा में पेड़ की डालियाँ झूम रही थीं।
राज: प्राचीन काल में यहाँ कई वीर राजाओं का राज था।
राज़: यह बात हमारे बीच एक राज़ ही रहेगी।
फ़न: वह अपने फ़न (गायन की कला) में एकदम माहिर है।
फन: डर के मारे कोबरा ने अपना फन फैला लिया।
सजा: दीवाली पर हमने अपना घर रोशनी से सजा दिया।
सज़ा: नियम तोड़ने पर उसे कड़ी सज़ा मिली।
खोल: कृपया इस डिब्बे का ढक्कन खोल दो।
खौल: चाय बनाने के लिए पानी को अच्छी तरह खौलने दो।
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