UP Board Class 4 Hindi 7. दान का हिसाब is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 4 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
राजा अपने आराम और शौक पर तो बहुत पैसा खर्च करता था, लेकिन वह दूसरों की मदद करने में बहुत कंजूस था। उसे लगता था कि दान देने से उसका खजाना खाली हो जाएगा, इसलिए वह किसी को भी कुछ देना नहीं चाहता था।
दरबार के लोग राजा के स्वार्थी व्यवहार से दुखी थे, पर वे उसका खुलकर विरोध नहीं कर पाते थे। उन्हें डर था कि अगर उन्होंने राजा के खिलाफ कुछ कहा, तो राजा उन्हें सजा दे देगा या दरबार से निकाल देगा। इस डर के कारण वे चुप रहते थे।
राजसभा में सज्जन और विद्वान लोग इसलिए नहीं जाते थे क्योंकि वहाँ उनका सम्मान नहीं होता था। राजा केवल अपनी तारीफ सुनना चाहता था, जबकि विद्वान लोग सही सलाह देना चाहते थे। ऐसे में, उन्हें लगता था कि वहाँ जाने का कोई फायदा नहीं है।
संन्यासी जानता था कि अगर वह सीधे तौर पर बड़ी रकम माँगता, तो कंजूस राजा तुरंत मना कर देता। इसलिए उसने चतुराई से एक ऐसा तरीका अपनाया जिससे राजा को लगा कि वह बहुत छोटी भिक्षा माँग रहा है। उसने कहा कि वह केवल उतने अनाज के दाने चाहता है जितने एक चेस बोर्ड के खानों में गिने जा सकें, जो वास्तव में बहुत बड़ी रकम बन जाती।
जब मंत्री ने हिसाब लगाकर बताया कि चेस बोर्ड के हिसाब से दान देने पर पूरा राजकोष खाली हो जाएगा, तो राजा घबरा गया। अपना खजाना बचाने और दिवालिया होने से बचने के लिए उसे संन्यासी के सामने विनती करने और गिड़गिड़ाने की जरूरत पड़ी।
इसका मतलब है कि दान देने का समय आने पर वह बहुत कंजूसी दिखाते थे और कुछ भी देने को तैयार नहीं होते थे।
हिसाब सुनाकर मंत्री का चेहरा डर और चिंता से पीला पड़ गया, क्योंकि उसे पता चल गया था कि राजा का वचन पूरा करने से सारा खजाना खत्म हो जाएगा।
संन्यासी के यह कहने पर कि वह असली भिक्षा तो राजा का दिल बदलना चाहता था, सभी दरबारियों को बहुत राहत मिली और उनकी चिंता दूर हो गई।
इसका अर्थ है कि राजकोष में इतना अधिक धन भरा हुआ है जैसे पैसे का समुद्र हो।
अकाल में लोगों की मदद करने के लिए मैं अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर काम करूँगा। हम सब मिलकर पैसे, कपड़े और अनाज इकट्ठा करेंगे। स्कूल में एक अभियान चलाकर हम और भी सहायता जुटा सकते हैं। सबसे जरूरी बात, हम बड़ों से अनुरोध करेंगे कि वे सरकारी अधिकारियों तक इन लोगों की परेशानी पहुँचाएँ, ताकि उन्हें तुरंत राहत मिल सके।
मंत्री: मंत्री राजा का सबसे महत्वपूर्ण सलाहकार होता है। उसका काम पूरे राज्य के प्रशासन पर नजर रखना, न्याय की व्यवस्था सुचारू रखना और प्रजा की समस्याओं का हल ढूँढना होता है। वह राजा को हर बड़े फैसले में सही राय देता है।
भंडारी: भंडारी राजकोष यानी खजाने का रखवाला होता है। उसका काम खजाने में आने-जाने वाले हर पैसे का सही हिसाब रखना है। राजा के आदेश के बिना वह खजाने से एक पैसा भी नहीं निकाल सकता। वह धन का लेखा-जोखा भी तैयार करता है।
कर्ण महाभारत के एक महान योद्धा और दानवीर थे। वह कुंती के बड़े पुत्र और पांडवों के बड़े भाई थे। उनकी दानशीलता के किस्से बहुत प्रसिद्ध हैं।
'कर्ण जैसे दानी' का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो दान देने में कभी पीछे न हटे। जो माँगने वाले को कभी खाली हाथ न लौटाए, चाहे उसे अपनी जरूरत की चीज भी क्यों न देनी पड़े।
दान वह कार्य है जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के, अपनी इच्छा से किसी जरूरतमंद को पैसा, अनाज, कपड़ा या कोई अन्य सहायता देता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूसरे का भला करना होता है।
लोग अलग-अलग कारणों से दान करते हैं:
राजा राजकोष के धन को केवल अपने महल की शान बढ़ाने, महँगे कपड़े और इत्र खरीदने तथा अपने मनोरंजन पर खर्च करता था।
मेरे घर में पैसा निम्नलिखित जगहों पर खर्च होता है:
अकाल से पीड़ित लोग चाहते थे कि राजा उन्हें राजकोष से दस हजार रुपए दे ताकि वे दूसरे इलाकों से अनाज खरीदकर अपना और अपने परिवार का पेट भर सकें।
मैं अपने स्कूल और इलाके में यह काम करवाना चाहूँगा:
मेरे विचार से राजा बिल्कुल गलत था। एक राजा का सबसे पहला कर्तव्य अपनी प्रजा की रक्षा करना और उनकी भलाई के लिए काम करना होता है। राजकोष का पैसा प्रजा की सेवा और राज्य के विकास के लिए होता है, न कि केवल राजा के आराम के लिए। दान और सहायता करना एक अच्छे शासक की पहचान है।
राजा दान के अलावा भी कई तरीकों से लोगों की मदद कर सकता था:
जल:
1. नदी का स्वच्छ जल पीने योग्य होता है।
2. गर्म पतीले को हाथ से छूने पर मेरी उँगली जल गई।
मन:
1. परीक्षा में अच्छे अंक आने से मेरा मन खुशी से भर गया।
2. किराने की दुकान से हमने आज दो मन चावल खरीदे।
मगर:
1. तालाब में एक बड़ा मगर रहता था।
2. रोहन ने पूरी कोशिश की मगर वह दौड़ में जीत नहीं पाया।
| दिशा | घर के पास | स्कूल के पास |
|---|---|---|
| पूर्व | एक बड़ा पार्क | सरकारी अस्पताल |
| पश्चिम | मुख्य सड़क | बस स्टैंड |
| उत्तर | हनुमान मंदिर | खेल का मैदान |
| दक्षिण | सब्जी मंडी | पुस्तकालय |
(छात्र अपने घर और स्कूल के हिसाब से इस तालिका को भर सकते हैं।)
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