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उत्तर : भारत में आर्थिक सुधार निम्नलिखित प्रमुख कारणों से आरंभ किए गए:
इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने 1991 में नई आर्थिक नीति (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) की घोषणा की।
उत्तर : आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि:
उत्तर : 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका में एक बड़ा बदलाव आया। पहले यह एक नियंत्रक के रूप में काम करता था, जो ब्याज दरें तय करता था और बैंकों के प्रबंधन पर सीधा नियंत्रण रखता था। सुधारों के बाद, इसने सुविधाप्रदाता की भूमिका अपनाई। इसके तहत:
इस परिवर्तन का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और बैंकों को अधिक कुशल तथा ग्राहक-हितैषी बनाना था।
उत्तर : रिज़र्व बैंक व्यावसायिक बैंकों पर मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण उपकरणों के माध्यम से नियंत्रण रखता है:
उत्तर : अवमूल्यन एक सरकारी निर्णय है, जिसके तहत केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा देश की मुद्रा (रुपया) का मूल्य विदेशी मुद्राओं (जैसे डॉलर) की तुलना में जानबूझकर कम कर दिया जाता है।
प्रभाव:
इस प्रकार, अवमूल्यन का उद्देश्य देश के व्यापार संतुलन (आयात-निर्यात के अंतर) को सुधारना होता है।
(क) युक्तियुक्त और अल्पांश विक्रय
| युक्तियुक्त विक्रय | अल्पांश विक्रय |
|---|---|
| इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की किसी इकाई की 51% या अधिक हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची जाती है। | इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की किसी इकाई की 49% से कम हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची जाती है। |
| इससे सार्वजनिक उपक्रम का स्वामित्व और नियंत्रण निजी क्षेत्र के हाथों में चला जाता है। | इसमें स्वामित्व और नियंत्रण अधिकांश हिस्सेदारी (51%) सरकार के पास ही रहता है। |
(ख) द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार
| द्विपक्षीय व्यापार | बहुपक्षीय व्यापार |
|---|---|
| यह केवल दो देशों के बीच होने वाला व्यापारिक समझौता है। | यह दो से अधिक देशों के बीच होने वाला व्यापारिक समझौता है। |
| इसके नियम केवल उन्हीं दो देशों पर लागू होते हैं। | इसके नियम सभी सदस्य देशों पर समान रूप से लागू होते हैं, जैसे WTO के नियम। |
(ग) प्रशुल्क एवं अप्रशुल्क अवरोधक
| प्रशुल्क अवरोधक | अप्रशुल्क अवरोधक |
|---|---|
| यह आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर (Tax) है। | यह कर के अलावा अन्य प्रतिबंध हैं जो आयात पर लगाए जाते हैं। |
| उदाहरण: सीमा शुल्क, आयात शुल्क। | उदाहरण: आयात कोटा, लाइसेंस प्रणाली, गुणवत्ता मानक। |
| इसका उद्देश्य आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ाकर घरेलू उद्योगों की रक्षा करना है। | इसका उद्देश्य आयात की मात्रा या गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण रखना है। |
उत्तर : प्रशुल्क (आयात शुल्क) लगाने के प्रमुख कारण हैं:
उत्तर : परिमाणात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions - QRs) का अर्थ है आयात पर मात्रा या मूल्य के आधार पर लगाई गई सीमा। यह एक प्रकार का अप्रशुल्क अवरोधक है।
उदाहरण के लिए, सरकार यह निर्णय ले सकती है कि एक वर्ष में केवल 10,000 कारें ही विदेश से आयात की जा सकती हैं। इसका उद्देश्य भुगतान संतुलन के घाटे को कम करना और घरेलू उद्योगों को अत्यधिक आयात से बचाना है।
उत्तर : नहीं, मैं इस कथन से सहमत नहीं हूँ। लाभ कमा रहे सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करना उचित नहीं है, क्योंकि:
उत्तर : भारत के लिए बाह्य प्रापण (Outsourcing) के लाभ:
विकसित देशों में विरोध के कारण:
उत्तर : भारत को एक प्रमुख बाह्य प्रापण केंद्र बनाने वाली अनुकूल परिस्थितियाँ हैं:
उत्तर : हाँ, नवरत्न नीति सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन को सुधारने में सहायक रही है। 1996 में शुरू की गई इस नीति के तहत:
सुधार के तरीके:
इस प्रकार, यह नीति सार्वजनिक क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभदायक बनाने के प्रयास का एक सफल हिस्सा रही है।
उत्तर : सुधार काल में सेवा क्षेत्र (जैसे- आईटी, बैंकिंग, दूरसंचार, पर्यटन) के तेजी से विकास के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी रहे:
उत्तर : हाँ, आर्थिक सुधारों का कृषि क्षेत्र पर कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके प्रमुख कारण हैं:
उत्तर : सुधार काल में औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन में निराशा के प्रमुख कारण थे:
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