UP Board Solutions for Class 11 Economics
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
पाठ - 8: आधारिक संरचना
प्रश्न 1. आधारिक संरचना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : आधारिक संरचना से तात्पर्य उन सभी बुनियादी सहायक सेवाओं और सुविधाओं से है जो किसी देश के आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को संभव बनाती हैं। इनमें शामिल हैं: परिवहन (सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे), ऊर्जा (बिजली घर, तेल व गैस पाइपलाइन), संचार (दूरसंचार), सामाजिक सेवाएँ (स्कूल, कॉलेज, अस्पताल), बुनियादी सुविधाएँ (पेयजल, सफाई, आवास) और वित्तीय प्रणाली (बैंक, बीमा, मुद्रा)। ये सभी मिलकर उत्पादन और जीवन स्तर को बेहतर बनाने का आधार तैयार करते हैं।
प्रश्न 2. आधारिक संरचना को विभाजित करने वाले दो वर्गों की व्याख्या कीजिए। दोनों एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं?
उत्तर : आधारिक संरचना को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जाता है:
- आर्थिक आधारिक संरचना: इसमें ऊर्जा, परिवहन और संचार जैसी सुविधाएँ आती हैं जो सीधे उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को सहयोग देती हैं।
- सामाजिक आधारिक संरचना: इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी सेवाएँ आती हैं जो मानव पूँजी के विकास और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित हैं।
परस्पर निर्भरता: ये दोनों संरचनाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं।
- सामाजिक संरचना की आर्थिक संरचना पर निर्भरता: शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्रों को चलाने के लिए बिजली (ऊर्जा), आपूर्ति के लिए परिवहन और समन्वय के लिए संचार की आवश्यकता होती है।
- आर्थिक संरचना की सामाजिक संरचना पर निर्भरता: स्वस्थ और शिक्षित लोग ही परिवहन प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन और संचार नेटवर्क को कुशलतापूर्वक संचालित कर सकते हैं। एक मजबूत आर्थिक संरचना के लिए स्वस्थ और कुशल मानव पूँजी आवश्यक है।
प्रश्न 3. आधारिक संरचना उत्पादन का संवर्द्धन कैसे करती है?
उत्तर : आधारिक संरचना उत्पादकता और उत्पादन में वृद्धि करने में निम्नलिखित तरीकों से सहायक है:
- यह उद्योगों और कृषि को आवश्यक आदान (जैसे कच्चा माल, ऊर्जा) की नियमित आपूर्ति और तैयार माल के परिवहन की सुविधा प्रदान करती है।
- बैंकिंग और बीमा सेवाएँ पूँजी की उपलब्धता और जोखिम प्रबंधन को सुनिश्चित करती हैं।
- शिक्षा प्रणाली कुशल और ज्ञानी कार्यबल तैयार करती है, जिसकी उत्पादकता अशिक्षित लोगों से अधिक होती है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ एक स्वस्थ कार्यबल प्रदान करती हैं, जो कम बीमार पड़ता है और अधिक कुशलता से कार्य करता है।
- संचार सुविधाएँ सूचना के त्वरित आदान-प्रदान और बाजार संपर्क को आसान बनाती हैं।
संक्षेप में, आधारिक संरचना उत्पादन की लागत कम करती है, दक्षता बढ़ाती है और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है।
प्रश्न 4. किसी देश के आर्थिक विकास में आधारिक संरचना योगदान देती है। क्या आप सहमत हैं? कारण बताइए।
उत्तर : हाँ, मैं पूर्णतः सहमत हूँ कि आधारिक संरचना किसी देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसके दो प्रमुख कारण हैं:
- वास्तविक उत्पादन में वृद्धि: मजबूत आधारिक संरचना उद्योग और कृषि की उत्पादकता बढ़ाती है। यह कच्चे माल, मशीनरी और तैयार माल के आवागमन को सुगम बनाती है, ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करती है और वित्तीय लेनदेन को सरल बनाती है।
- जीवन की गुणवत्ता में सुधार: स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, आवास और स्वच्छता जैसी सामाजिक आधारिक संरचना स्वस्थ और शिक्षित नागरिक तैयार करती है। यह मानव पूँजी का विकास करती है, जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास की आधारशिला है। बेहतर जीवन स्तर से श्रमिकों की कार्यक्षमता और रचनात्मकता भी बढ़ती है।
इस प्रकार, आधारिक संरचना आर्थिक विकास के दोनों पहलुओं—उत्पादन वृद्धि और मानव कल्याण—को सीधे प्रभावित करती है।
प्रश्न 5. भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की क्या स्थिति है?
उत्तर : भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की स्थिति चिंताजनक और शहरी क्षेत्रों की तुलना में बहुत पिछड़ी हुई है। मुख्य समस्याएँ इस प्रकार हैं:
- ऊर्जा: बहुत से ग्रामीण परिवारों (लगभग 44%) के पास अभी भी बिजली कनेक्शन नहीं है। खाना पकाने के लिए अधिकांश लोग जैव ईंधन (लकड़ी, गोबर के उपले) पर निर्भर हैं।
- पेयजल: केवल एक चौथाई ग्रामीण परिवारों को नल के पानी की सुविधा उपलब्ध है। बाकी लोग कुएँ, तालाब, नदी जैसे खुले और अक्सर असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर हैं।
- स्वच्छता: ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय जैसी मूल स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है, जिससे बीमारियाँ फैलती हैं।
- स्वास्थ्य सेवाएँ: देश की 70% आबादी गाँवों में रहती है, लेकिन अस्पतालों और डॉक्टरों का बड़ा हिस्सा शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है। ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच बहुत सीमित है।
- शिक्षा व परिवहन: गुणवत्तापूर्ण स्कूलों और पक्की सड़कों की कमी भी ग्रामीण विकास में बाधक है।
प्रश्न 6. ऊर्जा का महत्त्व क्या है? ऊर्जा के व्यावसायिक और गैर-व्यावसायिक स्रोतों में अंतर कीजिए।
उत्तर : ऊर्जा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ है। इसका महत्व निम्नलिखित है:
- उद्योगों में मशीनों को चलाने, उत्पादन प्रक्रिया के लिए ऊर्जा अनिवार्य है।
- कृषि में सिंचाई, ट्रैक्टर, उर्वरक व कीटनाशकों के निर्माण व परिवहन के लिए ऊर्जा चाहिए।
- घरेलू कार्यों जैसे खाना पकाने, प्रकाश करने, ठंडा या गर्म करने के लिए ऊर्जा आवश्यक है।
- परिवहन और संचार के हर रूप के लिए ऊर्जा जरूरी है।
| व्यावसायिक स्रोत |
गैर-व्यावसायिक स्रोत |
| ये वे स्रोत हैं जो बाजार में कीमत चुकाकर खरीदे जाते हैं। |
ये वे स्रोत हैं जो प्रकृति से प्रायः मुफ्त या बहुत कम लागत पर प्राप्त होते हैं। |
| इनका उपयोग मुख्यतः व्यावसायिक व औद्योगिक कार्यों में होता है। |
इनका उपयोग मुख्यतः घरेलू कार्यों (जैसे खाना पकाना) में होता है। |
| उदाहरण: कोयला, पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस, बिजली। |
उदाहरण: जलाऊ लकड़ी, गोबर के उपले, कृषि अवशेष। |
प्रश्न 7. विद्युत के उत्पादन के तीन बुनियादी स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर : विद्युत उत्पादन के तीन प्रमुख स्रोत हैं:
- जल विद्युत (पनबिजली): बाँधों द्वारा पानी के प्रवाह से टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है। यह एक नवीकरणीय स्रोत है।
- ताप विद्युत: कोयला, तेल या प्राकृतिक गैस जलाकर भाप बनाई जाती है, जो टरबाइन चलाती है। भारत में अधिकांश बिजली इसी स्रोत से आती है।
- परमाणु विद्युत: यूरेनियम, थोरियम जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के नाभिकीय विखंडन से उत्पन्न ऊष्मा से बिजली बनाई जाती है।
नोट: वर्तमान में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा भी तेजी से महत्वपूर्ण स्रोत बन रहे हैं।
प्रश्न 8. संचारण और वितरण हानि से आप क्या समझते हैं? उन्हें कैसे कम किया जा सकता है?
उत्तर : बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ता तक पहुँचाने की प्रक्रिया में तारों के प्रतिरोध, चोरी, तकनीकी खराबी आदि के कारण जो बिजली बर्बाद हो जाती है, उसे संचारण और वितरण हानि (Transmission and Distribution Losses) कहते हैं। भारत में यह हानि लगभग 20-25% है, जो एक गंभीर समस्या है।
इन हानियों को कम करने के उपाय:
- पुराने और पतले तारों को मोटे व उच्च गुणवत्ता वाले तारों से बदलना।
- स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली चोरी पर नियंत्रण करना।
- वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
- लोड प्रबंधन द्वारा बिजली की माँग को संतुलित करना।
- नियमित ऊर्जा अंकेक्षण (Energy Audit) करवाना।
प्रश्न 9. ऊर्जा के विभिन्न गैर-व्यावसायिक स्रोत क्या हैं?
उत्तर : ऊर्जा के प्रमुख गैर-व्यावसायिक स्रोत हैं:
- जलाऊ लकड़ी
- गोबर के उपले (कंडे)
- कृषि अवशेष (पराली, भूसा आदि)
ये स्रोत ग्रामीण भारत में घरेलू ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 10. इस कथन को सही सिद्ध कीजिए कि ऊर्जा के पुनर्नवीनीकृत स्रोतों के इस्तेमाल से ऊर्जा संकट दूर किया जा सकता है।
उत्तर : यह कथन पूर्णतः सही है। पुनर्नवीनीकरणीय (नवीकरणीय) ऊर्जा स्रोत, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, बायोगैस आदि, ऊर्जा संकट को दूर करने में निम्नलिखित कारणों से सहायक हैं:
- ये स्रोत अक्षय हैं, यानी इनका भंडार समाप्त नहीं होगा, जबकि कोयला, पेट्रोल जैसे स्रोत सीमित हैं।
- ये पर्यावरण के अनुकूल हैं और प्रदूषण कम करते हैं।
- भारत में सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। इनका दोहन करके हम आयातित तेल पर निर्भरता घटा सकते हैं।
- ये स्रोत देश के दूरदराज के इलाकों में भी स्थापित किए जा सकते हैं, जहाँ मुख्य ग्रिड तक पहुँच नहीं है।
इस प्रकार, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास और व्यापक उपयोग से ऊर्जा की माँग पूरी करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिल सकती है।
प्रश्न 11. पिछले वर्षों के दौरान ऊर्जा के उपभोग प्रतिमानों में कैसे परिवर्तन आया है?
उत्तर : स्वतंत्रता के बाद से भारत में ऊर्जा उपभोग के प्रतिमानों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं:
- व्यावसायिक स्रोतों का बढ़ता उपयोग: कुल ऊर्जा उपभोग में कोयला, पेट्रोल, बिजली जैसे व्यावसायिक स्रोतों का हिस्सा लगातार बढ़ा है, जबकि लकड़ी, गोबर जैसे गैर-व्यावसायिक स्रोतों का सापेक्षिक महत्व घटा है।
- क्षेत्रकवार बदलाव:
- परिवहन क्षेत्र पहले सबसे बड़ा उपभोक्ता था, लेकिन अब इसका हिस्सा कम हुआ है।
- औद्योगिक क्षेत्र अब व्यावसायिक ऊर्जा का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है।
- कृषि क्षेत्र में ट्यूबवेल, ट्रैक्टरों के बढ़ने से ऊर्जा उपभोग बढ़ा है।
- घरेलू क्षेत्र में बिजली उपकरणों की बढ़ती संख्या के कारण उपभोग बढ़ा है।
- ऊर्जा मिश्रण में बदलाव: कोयले के बाद अब प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय स्रोतों का हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
ये बदलाव औद्योगीकरण, शहरीकरण, आधुनिक कृषि और बढ़ती आय के कारण हुए हैं।
प्रश्न 12. ऊर्जा के उपभोग और आर्थिक संवृद्धि की दरें कैसे परस्पर संबंधित हैं?
उत्तर : ऊर्जा उपभोग और आर्थिक संवृद्धि (विकास दर) के बीच सीधा और धनात्मक संबंध है।
- जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, उद्योगों का विस्तार होता है, नई फैक्ट्रियाँ लगती हैं, परिवहन बढ़ता है और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है। इन सभी गतिविधियों के लिए अधिक ऊर्जा (बिजली, ईंधन) की आवश्यकता होती है, जिससे ऊर्जा उपभोग बढ़ जाता है।
- इसके विपरीत, पर्याप्त और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने, निवेश को आकर्षित करने और नई तकनीक अपनाने में मदद करती है, जिससे आर्थिक विकास दर तेज होती है।
अतः, उच्च आर्थिक विकास दर ऊर्जा उपभोग बढ़ाती है और पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति उच्च विकास दर को संभव बनाती है।
प्रश्न 13. भारत में विद्युत क्षेत्रक किन समस्याओं का सामना कर रहा है?
उत्तर : भारत का विद्युत क्षेत्रक निम्नलिखित गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है:
- आपूर्ति और माँग का अंतर: बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ती माँग के अनुरूप नहीं बढ़ पा रही है, जिससे कई क्षेत्रों में लोडशेडिंग और बिजली कटौती की समस्या बनी रहती है।
- उच्च संचारण एवं वितरण हानियाँ (T&D Losses): तकनीकी कमियों और बिजली चोरी के कारण लगभग एक चौथाई बिजली बर्बाद हो जाती है, जिससे बिजली कंपनियों (DISCOMs) को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
- वित्तीय दुर्बलता: अधिकांश राज्य विद्युत बोर्ड घाटे में चल रहे हैं क्योंकि उन्हें किसानों और गरीबों को सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि बिजली दरें वसूली में कमी रहती है।
- कोयले जैसे ईंधन की कमी: ताप बिजली घरों को अक्सर कोयले की कमी का सामना करना पड़ता है।
- निजी और विदेशी निवेश की कमी: जटिल नियमों और वित्तीय समस्याओं के कारण इस क्षेत्र में निजी निवेश अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ा है।
प्रश्न 14. भारत में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए किए गए उपायों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर : भारत सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
- विद्युत क्षेत्र का सुधार: विद्युत अधिनियम 2003 लाकर निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और प्रतिस्पर्धा लाने का प्रयास किया गया। कई राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण भी हुआ।
- नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा: सौर ऊर्जा (सोलर मिशन), पवन ऊर्जा और बायोमास परियोजनाओं के लिए विशेष मिशन शुरू किए गए।
- दक्षता बढ़ाने के उपाय: LED बल्ब वितरण, स्टार रेटिंग वाले उपकरणों को प्रोत्साहन, और ऊर्जा बचत के उपायों पर जोर दिया गया।
- UDAY (उज्ज्वल डिस्कॉम अश्योरेंस योजना): राज्य विद्युत वितरण कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने के लिए यह योजना लाई गई।
- स्मार्ट ग्रिड विकास: बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक और कुशल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालाँकि, इन उपायों के बावजूद चुनौतियाँ बनी हुई हैं और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
प्रश्न 15. हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर : भारत में जन स्वास्थ्य की स्थिति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं, जो चिंता और आशा दोनों का संकेत देती हैं:
- मिश्रित प्रगति: हैजा, प्लेग जैसी संक्रामक बीमारियों पर काबू पा लिया गया है और जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, लेकिन मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियाँ (Lifestyle Diseases) तेजी से बढ़ रही हैं।
- उच्च शिशु एवं मातृ मृत्यु दर: अन्य विकसित देशों की तुलना में शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) अभी भी काफी ऊँची है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- लैंगिक असमानता: महिलाओं के स्वास्थ्य पर कम ध्यान दिया जाता है, जिसके कारण उनमें रक्ताल्पता (एनीमिया) जैसी बीमारियाँ अधिक पाई जाती हैं।
- ग्रामीण-शहरी असमानता: अस्पताल, डॉक्टर और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ शहरी क्षेत्रों में केंद्रित हैं, जबकि ग्रामीण आबादी को पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल पातीं।
- निजी क्षेत्र का वर्चस्व: अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ मुख्यतः महँगे निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, जो गरीबों की पहुँच से बाहर हैं।
- स्वास्थ्य पर कम सार्वजनिक व्यय: सरकार का स्वास्थ्य पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का