UP Board class 11 Physics 15. तरंगें is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
2.50 kg द्रव्यमान की 20 m लम्बी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा?
हल: अनुप्रस्थ तरंग की चाल का सूत्र है:
जहाँ, T = डोरी में तनाव, μ = डोरी की प्रति इकाई लम्बाई का द्रव्यमान (रैखिक द्रव्यमान घनत्व)।
दिया है: T = 200 N, डोरी की लम्बाई l = 20 m, द्रव्यमान m = 2.50 kg
μ = m/l = 2.50 kg / 20 m = 0.125 kg/m
तरंग की चाल v = √(T/μ) = √(200 / 0.125) = √1600 = 40 m/s
डोरी की लम्बाई = 20 m
विक्षोभ को दूसरे सिरे तक पहुँचने में लगा समय t = दूरी/चाल = 20 m / 40 m/s = 0.5 s
300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? (g = 9.8 m/s²)
हल: कुल समय पत्थर के नीचे गिरने में लगे समय और ध्वनि के ऊपर आने में लगे समय का योग है।
मीनार की ऊँचाई h = 300 m, प्रारम्भिक वेग u = 0, g = 9.8 m/s², ध्वनि की चाल = 340 m/s
चरण 1: पत्थर के नीचे पहुँचने का समय (t₁)
गति के समीकरण से: h = ut + (1/2)gt²
300 = 0 + (1/2) × 9.8 × t₁²
t₁² = (300 × 2) / 9.8 = 600 / 9.8 ≈ 61.22
t₁ = √61.22 ≈ 7.82 s
चरण 2: ध्वनि के ऊपर आने का समय (t₂)
t₂ = दूरी / चाल = 300 m / 340 m/s ≈ 0.88 s
चरण 3: कुल समय
t = t₁ + t₂ = 7.82 s + 0.88 s = 8.7 s
अतः ध्वनि पत्थर गिराने के लगभग 8.7 सेकंड बाद सुनाई देगी।
12.0 m लम्बे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 m/s) के बराबर हो?
हल: अनुप्रस्थ तरंग की चाल v = √(T/μ)
दिया है: v = 343 m/s, लम्बाई l = 12.0 m, द्रव्यमान m = 2.10 kg
रैखिक द्रव्यमान घनत्व μ = m/l = 2.10 kg / 12.0 m = 0.175 kg/m
सूत्र v = √(T/μ) से, v² = T/μ
T = v² × μ = (343)² × 0.175 = 117649 × 0.175 ≈ 20588.6 N
अतः आवश्यक तनाव T ≈ 2.06 × 10⁴ N
सूत्र v = √(γP/ρ) का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों:
(a) दाब पर निर्भर नहीं करती?
(b) ताप के साथ बढ़ जाती है?
(c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है?
हल: सूत्र v = √(γP/ρ), जहाँ γ = विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात, P = दाब, ρ = घनत्व।
(a) दाब पर निर्भरता: आदर्श गैस समीकरण PV = nRT से, P/ρ = RT/M (जहाँ M आणविक द्रव्यमान है)। इसे ध्वनि के सूत्र में रखने पर v = √(γRT/M)। यह स्पष्ट है कि v, P पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ताप T पर निर्भर करता है।
(b) ताप के साथ: v = √(γRT/M) से, v ∝ √T। अतः ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है।
(c) आर्द्रता के साथ: आर्द्र वायु में जलवाष्प (अणुभार 18) की मात्रा बढ़ती है, जो शुष्क वायु के अणुओं (N₂ अणुभार 28, O₂ अणुभार 32) से हल्के होते हैं। इससे वायु का औसत आणविक द्रव्यमान M घटता है। चूँकि v ∝ 1/√M, अतः M घटने पर v बढ़ जाती है।
नीचे दिए गए y के प्रत्येक फलन का परीक्षण करके बताइए कि वह किसी प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है या नहीं।
(a) (x - vt)²
(b) log [(x + vt)/x]
(c) 1/(x + vt)
हल: किसी प्रगामी तरंग का फलन y = f(x ± vt) के रूप में होना चाहिए और x व t के सभी मानों के लिए परिमित होना चाहिए।
(a) y = (x - vt)²: यह फलन f(x - vt) के रूप में है और x व t के सभी मानों के लिए परिमित है। अतः यह एक प्रगामी तरंग को निरूपित कर सकता है।
(b) y = log [(x + vt)/x]: x = 0 पर यह फलन अनंत हो जाता है (log 0 परिभाषित नहीं)। अतः यह एक प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।
(c) y = 1/(x + vt): जब x + vt = 0, तो यह फलन अनंत हो जाता है। अतः यह एक प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।
कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमश: 340 m/s तथा 1486 m/s है।
हल: आवृत्ति ν = 1000 kHz = 10⁶ Hz। तरंगदैर्ध्य λ = v/ν
(a) परावर्तित ध्वनि: परावर्तन के बाद ध्वनि वायु में ही चलती है। v_वायु = 340 m/s
λ_वायु = v_वायु / ν = 340 / 10⁶ = 3.4 × 10⁻⁴ m = 0.34 mm
(b) पारगमित ध्वनि: पारगमन के बाद ध्वनि जल में चलती है। v_जल = 1486 m/s
λ_जल = v_जल / ν = 1486 / 10⁶ = 1.486 × 10⁻³ m ≈ 1.49 mm
किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूमरों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 km/s है? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।
हल: ध्वनि की चाल v = 1.7 km/s = 1700 m/s
आवृत्ति ν = 4.2 MHz = 4.2 × 10⁶ Hz
तरंगदैर्ध्य λ = v / ν = 1700 / (4.2 × 10⁶) ≈ 4.0476 × 10⁻⁴ m
λ ≈ 4.05 × 10⁻⁴ m या 0.405 mm
किसी डोरी पर कोई अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन y(x, t) = 3.0 sin(36t + 0.018x + π/4) से किया जाता है। यहाँ x तथा y सेंटीमीटर में तथा t सेकंड में है। x की धनात्मक दिशा बाएँ से दाएँ है।
(a) क्या यह प्रगामी तरंग है अथवा अप्रगामी? यदि यह प्रगामी तरंग है तो इसकी चाल तथा संचरण की दिशा क्या है?
(b) इसका आयाम तथा आवृत्ति क्या है?
(c) उद्गम के समय इसकी आरम्भिक कला क्या है?
(d) इस तरंग में दो क्रमागत शिखरों के बीच की न्यूनतम दूरी क्या है?
हल: दी गई समीकरण y(x, t) = 3.0 sin(36t + 0.018x + π/4) को मानक रूप y = A sin(ωt + kx + φ) से तुलना करते हैं।
A = 3.0 cm, ω = 36 rad/s, k = 0.018 rad/cm, φ = π/4 rad
(a) चूँकि समीकरण (ωt + kx) के रूप में है, यह एक प्रगामी तरंग है जो x की ऋणात्मक दिशा (बाएँ से दाएँ) में गतिमान है।
चाल v = ω/k = 36 rad/s / 0.018 rad/cm = 2000 cm/s = 20 m/s
(b) आयाम A = 3.0 cm
आवृत्ति ν = ω/(2π) = 36/(2 × 3.14) ≈ 36/6.28 ≈ 5.73 Hz
(c) आरम्भिक कला φ = π/4 rad
(d) दो क्रमागत शिखरों के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य λ होती है।
λ = 2π/k = 2 × 3.14 / 0.018 ≈ 6.28 / 0.018 ≈ 348.89 cm ≈ 3.49 m
प्रश्न 8 में वर्णित तरंग के लिए x = 0, 2 cm तथा 4 cm के लिए विस्थापन (y) और समय (t) के बीच ग्राफ आलेखित कीजिए। इन ग्राफों की आकृति क्या है? आयाम, आवृत्ति अथवा कला में से किन पहलुओं में प्रगामी तरंग में दोलनी गति एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर भिन्न है?
हल: x के दिए गए मानों के लिए समीकरण:
x = 0: y(0,t) = 3.0 sin(36t + π/4)
x = 2 cm: y(2,t) = 3.0 sin(36t + 0.018×2 + π/4) = 3.0 sin(36t + 0.036 + π/4)
x = 4 cm: y(4,t) = 3.0 sin(36t + 0.018×4 + π/4) = 3.0 sin(36t + 0.072 + π/4)
तीनों ग्राफ ज्यावक्रीय (साइन) तरंग के होंगे। सभी का आयाम (3.0 cm) और आवृत्ति (5.73 Hz) समान है, लेकिन उनकी आरम्भिक कला भिन्न-भिन्न है। अतः तरंग में विभिन्न बिन्दुओं पर दोलनी गति केवल कला में भिन्न है।
प्रगामी गुणावृत्ति तरंग y(x, t) = 2.0 cos 2π(10t – 0.0080x + 0.35) जिसमें x तथा y को cm में तथा t को s में लिया गया है, के लिए उन दो दोलनी बिन्दुओं के बीच कलान्तर कितना है जिनके बीच की दूरी है:
(a) 4 m
(b) 0.5 m
(c) λ/2
(d) 3λ/4
हल: समीकरण को y(x, t) = 2.0 cos(20πt – 0.016πx + 0.7π) के रूप में लिखा जा सकता है।
यहाँ तरंग संख्या k = 0.016π rad/cm।
दो बिन्दुओं के बीच पथान्तर Δx के लिए कलान्तर Δφ = k Δx होता है।
(a) Δx = 4 m = 400 cm
Δφ = k Δx = 0.016π × 400 = 6.4π rad
(b) Δx = 0.5 m = 50 cm
Δφ = 0.016π × 50 = 0.8π rad
(c) Δx = λ/2
कलान्तर Δφ = k(λ/2) = (2π/λ) × (λ/2) = π rad
(d) Δx = 3λ/4
Δφ = k(3λ/4) = (2π/λ) × (3λ/4) = 3π/2 rad
दोनों सिरों पर परिबद्ध किसी तानित डोरी पर अनुप्रस्थ विस्थापन को इस प्रकार व्यक्त किया गया है:
y(x, t) = 0.06 sin(2πx/3) cos(120πt)
जिसमें x तथा y को m तथा t को s में लिया गया है। इसमें डोरी की लम्बाई 1.5 m है जिसकी संहति 3.0 × 10⁻² kg है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) यह फलन प्रगामी तरंग अथवा अप्रगामी तरंग में से किसे निरूपित करता है?
(b) इसकी व्याख्या विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंगों के अध्यारोपण के रूप में करते हुए प्रत्येक तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए।
(c) डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
हल: (a) दिया गया फलन y(x,t) = (0.06 sin(2πx/3)) cos(120πt) है, जो स्थान और समय के पदों के गुणनफल के रूप में है। यह अप्रगामी तरंग का प्रतिनिधित्व करता है।
(b) इस अप्रगामी तरंग को दो विपरीत दिशाओं में चलने वाली प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण के रूप में माना जा सकता है:
y₁(x,t) = 0.03 sin(120πt – 2πx/3) और y₂(x,t) = 0.03 sin(120πt + 2πx/3)
इन प्रगामी तरंगों के लिए:
कोणीय आवृत्ति ω = 120π rad/s → आवृत्ति ν = ω/(2π) = 120π/(2π) = 60 Hz
तरंग संख्या k = 2π/3 rad/m → तरंगदैर्ध्य λ = 2π/k = 2π/(2π/3) = 3 m
चाल v = νλ = 60 Hz × 3 m = 180 m/s
(c) डोरी का रैखिक द्रव्यमान घनत्व μ = द्रव्यमान/लम्बाई = 3.0 × 10⁻² kg / 1.5 m = 2.0 × 10⁻² kg/m
अनुप्रस्थ तरंग की चाल v = √(T/μ) से,
T = v²μ = (180)² × (2.0 × 10⁻²) = 32400 × 0.02 = 648 N
प्रश्न 11 में वर्णित डोरी पर तरंग के लिए बताइए कि क्या डोरी के सभी बिन्दु समान (a) आवृत्ति, (b) कला, (c) आयाम से कम्पन करते हैं? अपने उत्तरों को स्पष्ट कीजिए।
(d) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिन्दु का आयाम कितना है?
हल: अप्रगामी तरंग में:
(a) आवृत्ति: हाँ, डोरी के सभी बिन्दु (निस्पन्दों सहित) समान आवृत्ति (60 Hz) से कम्पन करते हैं।
(b) कला: नहीं, सभी बिन्दुओं की कला समान नहीं होती। दो लगातार प्रस्पन्दों के बीच के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करते हैं, लेकिन एक निस्पन्द के दोनों ओर के बिन्दु विपरीत कला में कम्पन करते हैं।
(c) आयाम: नहीं, आयाम स्थान के साथ बदलता है। निस्पन्दों पर आयाम शून्य होता है और प्रस्पन्दों पर अधिकतम (0.06 m) होता है।
(d) x = 0.375 m पर आयाम A(x) = |0.06 sin(2πx/3)|
A(0.375) = 0.06 × |sin(2π × 0.375 / 3)| = 0.06 × |sin(2π × 0.125)|
= 0.06 × |sin(π/4)| = 0.06 × (1/√2) ≈ 0.06 × 0.7071 ≈ 0.0424 m
नीचे किसी प्रत्यास्थ तरंग के विस्थापन को निरूपित करने वाले y तथा t के फलन दिए गए हैं। यह बताइए कि इनमें से कौन (a) प्रगामी तरंग को, (b) अप्रगामी तरंग को, (c) किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता है?
(a) y = 2 cos(3x) sin(10t)
(b) y = 2√(x – vt)
(c) y = 3 sin(5x – 0.5t) + 4 cos(5x – 0.5t)
(d) y = cos x sin t + cos 2x sin 2t
हल:
(a) y = 2 cos(3x) sin(10t): यह स्थान और समय के पदों के गुणनफल के रूप में है। अतः यह एक अप्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
(b) y = 2√(x – vt): यह फलन (x – vt) के रूप में है, लेकिन √(x – vt) x और t के सभी मानों के लिए परिमित नहीं है (जब x – vt < 0)। अतः यह किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता।
(c) y = 3 sin(5x – 0.5t) + 4 cos(5x – 0.5t): दोनों पद (5x – 0.5t) के रूप में हैं, जो एक प्रगामी तरंग का संकेत है। इसे एक ही परिणामी प्रगामी तरंग के रूप में लिखा जा सकता है। अतः यह एक प्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
(d) y = cos x sin t + cos 2x sin 2t: यह दो अलग-अलग अप्रगामी तरंगों (cos x sin t और cos 2x sin 2t) का योग है। पूरा फलन स्वयं एक जटिल अप्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
दो दृढ़ आधारों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 Hz आवृत्ति से कम्पन करता है। इस तार का द्रव्यमान 3.5 × 10⁻² kg तथा रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0 × 10⁻² kg/m है। (a) तार पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल क्या है, तथा (b) तार में तनाव कितना है?
हल: मूल विधा में, तार की लम्बाई l = λ/2, अतः λ = 2l
आवृत्ति ν = 45 Hz, द्रव्यमान m = 3.5 × 10⁻² kg, μ = 4.0 × 10⁻² kg/m
सबसे पहले तार की लम्बाई ज्ञात करते हैं:
μ = m/l ⇒ l = m/μ = (3.5 × 10⁻²) / (4.0 × 10⁻²) = 3.5/4.0 = 0.875 m
तरंगदैर्ध्य λ = 2l = 2 × 0.875 = 1.75 m
(a) तरंग की चाल v = νλ = 45 Hz × 1.75 m = 78.75 m/s
(b) तनाव T = v²μ = (78.75)² × (4.0 × 10⁻²) = 6201.5625 × 0.04 ≈ 248.06 N
एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1 m लम्बी नलिका, किसी नियत आवृत्ति के स्रोत (340 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज) के साथ, जब नलिका में वायु स्तम्भ 25.5 cm अथवा 79.3 cm होता है, तब अनुनाद दर्शाती है। प्रयोगशाला के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल का आकलन कीजिए। कोर के प्रभाव को नगण्य मान सकते हैं।
हल: एक सिरे पर बन्द नलिका में, अनुनाद तब होता है जब वायु स्तम्भ की लम्बाई विषम गुणजों में हो: l = (2n-1)λ/4, जहाँ n = 1,2,3...
दो क्रमागत अनुनादों के लिए लम्बाइयों का अंतर Δl = λ/2 होता है।
यहाँ पहली अनुनाद लम्बाई l₁ = 25.5 cm, दूसरी l₂ = 79.3 cm
Δl = l₂ – l₁ = 79.3 – 25.5 = 53.8 cm
चूँकि Δl = λ/2, अतः λ = 2 × Δl = 2 × 53.8 = 107.6 cm = 1.076 m
आवृत्ति ν = 340 Hz
ध्वनि की चाल v = νλ = 340 × 1.076 ≈ 365.84 m/s
100 cm लम्बी स्टील-छड़ अपने मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्ध्य कम्पनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
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