UP Board Solutions for Class 9 Social Science
भारत और समकालीन विश्व - I
1. फ्रांसीसी क्रांति
अभ्यास : 01. फ्रांस में क्रांति की शुरुआत किन परिस्थितयों में हुई ?
उत्तर: फ्रांस में क्रांति की शुरुआत निम्नलिखित जटिल परिस्थितियों के मेल से हुई:
- राजकोष की दयनीय स्थिति: लुई सोलहवें के शासनकाल में फ्रांस का राजकोष पूरी तरह खाली था। अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने और कई युद्ध लड़ने के कारण देश भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था। इस कर्ज को चुकाने के लिए राजा को नए कर लगाने की आवश्यकता थी।
- सामाजिक असमानता एवं शोषण: फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट (वर्ग) में बंटा था। प्रथम एस्टेट (पादरी) और द्वितीय एस्टेट (कुलीन) को सभी करों से छूट प्राप्त थी, जबकि तीसरे एस्टेट (किसान, मजदूर, व्यवसायी) पर ही सारा करों का भार था। किसानों से सामंती कर, चर्च को टाइथ (धार्मिक कर) और राज्य को टाइल (प्रत्यक्ष कर) देना पड़ता था।
- प्राकृतिक आपदा एवं महँगाई: 1788-89 में भीषण ठंड (कड़ाके की सर्दी) के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। इससे खाद्य पदार्थों, विशेषकर रोटी की कीमतें आसमान छूने लगीं, जबकि मजदूरी नहीं बढ़ी। आम जनता भूख और गरीबी से त्रस्त थी।
- जनता में बढ़ता असंतोष: दार्शनिकों जैसे रूसो, मॉन्टेस्क्यू और वॉल्टेयर के विचारों ने निरंकुश राजशाही, विशेषाधिकारों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनमत तैयार किया। तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों ने खुद को राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली) घोषित कर एक नए संविधान के निर्माण का काम शुरू कर दिया, जिसने क्रांति का रास्ता साफ किया।
2. फ्रांसिसी समाज के किन तबकों को क्रांति का फायदा मिला? कौन से समूह सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर हो गए ? क्रांति के नतीजों से समाज के किन समूहों को निराशा हुई ?
उत्तर:
- क्रांति से लाभान्वित तबका: फ्रांसीसी समाज के तीसरे एस्टेट के लोगों, विशेष रूप से मध्यम वर्ग के व्यवसायी, वकील, डॉक्टर और शिक्षित लोगों को क्रांति का सबसे अधिक फायदा मिला। उन्हें राजनीतिक अधिकार मिले, सामंती करों से मुक्ति मिली और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई।
- सत्ता छोड़ने वाले समूह: कुलीन वर्ग (द्वितीय एस्टेट) को सत्ता और अपने विशेषाधिकार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनकी जमींदारी समाप्त कर दी गई और किसानों से सामंती कर वसूलने का अधिकार खत्म हो गया।
- निराश हुए समूह: पादरी वर्ग (प्रथम एस्टेट) को क्रांति के परिणामों से गहरी निराशा हुई। चर्च की संपत्ति जब्त कर ली गई, धार्मिक कर (टाइथ) समाप्त कर दिया गया और अंततः चर्चों को बंद करके उन्हें सरकारी कार्यालयों में तब्दील कर दिया गया। इसके अलावा, कुछ उदारवादी कुलीन और निम्न पादरी जो प्रारंभ में क्रांति के समर्थक थे, बाद में हिंसा और आतंक के दौर में निराश हुए।
3. उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की दुनिया के लिए फ्रांसिसी क्रांति कौन सी विरासत छोड़ गई ?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति ने न केवल फ्रांस बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक शक्तिशाली विरासत छोड़ी, जिसने आने वाली शताब्दियों को गहराई से प्रभावित किया:
- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श: ये तीन शब्द क्रांति की सबसे बड़ी विरासत हैं। इन्होंने दुनिया भर के लोगों को निरंकुश शासन, सामंतवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
- लोकतंत्र एवं गणतंत्र की अवधारणा: क्रांति ने राजतंत्र को समाप्त कर गणतंत्र की स्थापना की, जहाँ शासक जनता द्वारा चुने जाते हैं। यह विचार दुनिया भर में लोकतांत्रिक शासन प्रणालियों के लिए आधार बना।
- मानव एवं नागरिक अधिकारों की घोषणा: इस घोषणापत्र ने व्यक्ति के मौलिक अधिकारों जैसे स्वतंत्रता, संपत्ति का अधिकार और दमन के विरुद्ध प्रतिरोध के अधिकार को स्थापित किया। यह आधुनिक मानवाधिकार चार्टर का आधार बना।
- राष्ट्रवाद की भावना: क्रांति ने 'राष्ट्र' की अवधारणा को जन्म दिया, जहाँ समस्त जनता की निष्ठा राजा के प्रति न होकर राष्ट्र के प्रति होती है। इसने यूरोप और लैटिन अमेरिका में राष्ट्रीय एकता के आंदोलनों को बल दिया।
- विश्वव्यापी प्रेरणा: इस क्रांति ने दुनिया के अन्य देशों जैसे रूस, चीन, वियतनाम और अफ्रीकी देशों में होने वाले सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों एवं क्रांतियों के लिए प्रेरणा का काम किया।
04. उन जनवादी अधिकारों की सूची बनाएँ जो आज हमें मिले हुए हैं और जिनका उद्गम फ्रांसिसी क्रांति में है |
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति में प्रतिपादित 'मानव और नागरिक अधिकारों की घोषणा' आधुनिक लोकतांत्रिक अधिकारों की जननी है। आज हमें जो निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं, उनका उद्गम इसी क्रांति में है:
- जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार।
- विचार, अभिव्यक्ति और धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार।
- कानून के समक्ष समानता का अधिकार।
- न्यायपालिका द्वारा उचित सुनवाई एवं निष्पक्ष सार्वजनिक मुकदमे का अधिकार।
- संपत्ति का अधिकार।
- शासन में भागीदारी का अधिकार (मतदान द्वारा)।
- अत्याचार एवं दमन के विरुद्ध प्रतिरोध का अधिकार।
5. क्या आप इस तर्क से सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के सन्देश में नाना अंतर्विरोध थे ?
उत्तर: हाँ, हम इस तर्क से पूर्णतः सहमत हैं कि सार्वभौमिक अधिकारों के संदेश में कई अंतर्विरोध (विरोधाभास) थे। ये अधिकार सिद्धांत रूप में तो सभी के लिए थे, लेकिन व्यवहार में केवल एक विशिष्ट वर्ग तक ही सीमित रहे:
- सार्वभौमिकता और सीमित मताधिकार का अंतर्विरोध: घोषणापत्र में कहा गया कि "कानून सामान्य इच्छा की अभिव्यक्ति है और सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं।" लेकिन 1791 के संविधान ने केवल उन्हीं पुरुषों को 'सक्रिय नागरिक' (मतदान का अधिकार) माना जो एक निश्चित राशि कर चुकाते थे। महिलाओं, गरीब पुरुषों और सेवकों को 'निष्क्रिय नागरिक' घोषित कर उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया।
- स्वतंत्रता और दास प्रथा का अंतर्विरोध: घोषणा में 'स्वतंत्रता' को प्राकृतिक अधिकार बताया गया, लेकिन फ्रांसीसी उपनिवेशों में दास प्रथा को तुरंत समाप्त नहीं किया गया। यह अंतर्विरोध कई वर्षों तक बना रहा।
- समानता और सामाजिक विषमता का अंतर्विरोध: जहाँ कानूनी समानता की बात की गई, वहीं आर्थिक समानता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। समाज में अमीर और गरीब के बीच की खाई बनी रही। नए कानून और संविधान का लाभ मुख्य रूप से धनी मध्यम वर्ग को ही मिला।
इस प्रकार, फ्रांसीसी क्रांति के सार्वभौमिक अधिकारों के आदर्श महत्वपूर्ण थे, लेकिन उनका क्रियान्वयन पूर्णतः विरोधाभासी और सीमित था।
06. नेपोलियन के उदय को कैसे समझा जा सकता है ?
उत्तर: नेपोलियन बोनापार्ट के उदय को फ्रांस की उस समय की अशांत और अनिश्चित परिस्थितियों के संदर्भ में समझा जा सकता है:
- डायरेक्टरी शासन की विफलता: जैकोबिन शासन के पतन के बाद स्थापित डायरेक्टरी (पांच सदस्यीय कार्यपालिका) का शासन अत्यंत दुर्बल और अक्षम सिद्ध हुआ। नेता आपसी झगड़ों में उलझे रहे, भ्रष्टाचार फैला और आर्थिक स्थिति बिगड़ती गई। जनता एक स्थिर और मजबूत शासन की कामना करने लगी।
- सैन्य सफलताएँ एवं लोकप्रियता: नेपोलियन एक कुशल और साहसी सेनापति था। उसने इटली और मिस्र में फ्रांस की सेना को शानदार जीत दिलाकर अपनी प्रतिभा सिद्ध कर दी थी। उसकी सैन्य सफलताओं ने उसे जनता और सेना दोनों का हीरो बना दिया।
- राजनीतिक शून्यता को भरना: जब डायरेक्टरी शासन पूरी तरह अराजकता में डूब गया, तो कई राजनेताओं ने महसूस किया कि देश को बचाने के लिए एक सशक्त सैन्य नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने ही नेपोलियन को सत्ता पर कब्जा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
- ब्रूमेर की सफल सैन्य तख्तापलट: नवंबर 1799 में, नेपोलियन ने ब्रूमेर के तख्तापलट (Coup d'état of Brumaire) के द्वारा डायरेक्टरी को भंग कर दिया और खुद को 'प्रथम कौंसल' घोषित कर दिया। यह एक सैन्य तानाशाही की शुरुआत थी, जिसे थकी हुई जनता ने शांति और स्थिरता की आशा में स्वीकार कर लिया।
इस प्रकार, क्रांति के बाद की अराजकता, कमजोर शासन और जनता की स्थिरता की इच्छा ने नेपोलियन जैसे सक्षम सैन्य नेता के उदय के लिए उपयुक्त माहौल तैयार किया।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न: लूई 16वाँ कब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ ?
उत्तर: लुई सोलहवाँ सन् 1774 में फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ।
प्रश्न: लूई 16वाँ जब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ तब उनकी उम्र क्या थी ?
उत्तर: लुई सोलहवाँ जब फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ, तब उसकी उम्र केवल 20 वर्ष थी। वह अनुभवहीन था और देश की गंभीर समस्याओं से निपटने में असमर्थ साबित हुआ।
प्रश्न: लूई 16वाँ की राजगद्दी पर आसीन होने के समय वित्तीय संसाधन नष्ट होने के क्या कारण थे?
उत्तर: लुई सोलहवें के सिंहासन पर बैठने के समय फ्रांस के वित्तीय संसाधन नष्ट होने के प्रमुख कारण थे:
- अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (1775-83) में फ्रांस की भागीदारी, जिसमें भारी धन खर्च हुआ।
- इससे पहले लंबे समय तक चले युद्धों ने राजकोष को खाली कर दिया था।
- शाही दरबार का फिजूलखर्ची भरा और विलासितापूर्ण जीवन।
- कर व्यवस्था अक्षम थी और राज्य की आय का मुख्य स्रोत केवल तीसरा एस्टेट था।
प्रश्न: लिव्रे क्या है ? इसे कब समाप्त कर दिया गया ?
उत्तर: लिव्रे (Livre) फ्रांसीसी क्रांति से पहले फ्रांस की पारंपरिक मुद्रा (सिक्का) थी। क्रांति के बाद, नए शासन ने माप-तौल की इकाइयों को एकरूप बनाने के प्रयास में इसे समाप्त कर दिया। इसे औपचारिक रूप से 1795 में नए फ़्रैंक (Franc) द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।
प्रश्न: फ्रांस को कब गणतंत्र घोषित किया गया ?
उत्तर: फ्रांस को 21 सितंबर, 1792 को एक गणतंत्र घोषित किया गया। इसी दिन नवनिर्वाचित राष्ट्रीय सम्मेलन (नेशनल कन्वेंशन) ने राजतंत्र को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
प्रश्न: किस पुस्तक में सरकार के अन्दर सत्ता विभाजन की बात कही गई है ?
Que: Which book has proposed a division of power within government?
उत्तर: 'द स्पिरिट ऑफ़ द लॉज़' (The Spirit of the Laws) नामक पुस्तक में सरकार के अंदर सत्ता विभाजन की बात कही गई है। इसके लेखक फ्रांसीसी दार्शनिक मॉन्टेस्क्यू थे, जिन्होंने सरकार की शक्तियों को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में बाँटने का सिद्धांत दिया।
प्रश्न: 18 वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज को कितने एस्टेट में बाँटा हुआ था?
उत्तर: 18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज को तीन एस्टेट (वर्गों) में बाँटा गया था:
- प्रथम एस्टेट: पादरी वर्ग (क्लर्जी)
- दूसरा एस्टेट: कुलीन वर्ग (नोबिलिटी)
- तीसरा एस्टेट: सामान्य जनता (इसमें किसान, मजदूर, व्यवसायी, वकील, डॉक्टर आदि शामिल थे)
प्रश्न: फ्रांसीसी समाज के कौन से एस्टेट के लोग कर (टैक्स) अदा करते थे ? इस वर्ग में कौन कौन से लोग आते थे ?
उत्तर: फ्रांसीसी समाज के तीसरे एस्टेट के लोग ही सभी प्रकार के कर अदा करते थे। इस विशाल वर्ग में निम्नलिखित लोग शामिल थे:
- किसान (जो आबादी का 90% थे)
- शहरी मजदूर और कारीगर
- व्यवसायी, दुकानदार और बैंकर
- वकील, डॉक्टर, शिक्षक, लेखक आदि पेशेवर लोग
प्रश्न: टाइद और टाइल में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
- टाइद (Tithe): यह एक धार्मिक कर था, जो किसानों को चर्च (पादरी वर्ग) को अपनी उपज का लगभग 10% हिस्सा देने के रूप में अदा करना पड़ता था।
- टाइल (Taille): यह राज्य (सरकार) को दिया जाने वाला प्रत्यक्ष कर था। यह मुख्य रूप से भूमि और संपत्ति पर लगाया जाता था और केवल तीसरे एस्टेट के लोग ही इसे भरते थे।
प्रश्न: लूई सोलहवें के कर बढ़ाने के क्या कारण थे ?
उत्तर: लुई सोलहवें को कर बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कारणों से मजबूर होना पड़ा:
- राष्ट्रीय ऋण का भारी बोझ: अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी और पुराने युद्धों के कारण देश पर भारी कर्ज था, जिसके ब्याज चुकाने के लिए धन की आवश्यकता थी।
- राजकोष की रिक्तता: सरकारी खजाना पूरी तरह खाली था और दैनिक प्रशासनिक खर्चे चलाने के लिए भी पैसे नहीं थे।
- शाही खर्चों में वृद्धि: शाही परिवार और दरबार का विलासितापूर्ण जीवन जारी रखने के लिए भी धन चाहिए था।
- जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या बढ़ने से सरकारी सेवाओं और बुनियादी ढाँचे पर खर्च बढ़ गया था।
प्रश्न: एस्टेट्स जेनराल क्या है ? यह क्या कार्य करता था ?
उत्तर: एस्टेट्स जेनराल (Estates-General) फ्रांस में राजा द्वारा बुलाई जाने वाली एक सलाहकारी संसद थी। इसमें तीनों एस्टेट्स (पादरी, कुलीन और सामान्य जन) के प्रतिनिधि शामिल होते थे।
इसका मुख्य कार्य था - राजा को नए कर लगाने की स्वीकृति देना। जब भी राजा को अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती थी, विशेषकर युद्ध के समय, वह एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलाता था ताकि नए कर प्रस्तावों पर मुहर लग सके। 1614 के बाद इसे 175 वर्षों तक नहीं बुलाया गया, जब तक कि लुई सोलहवें ने 1789 में वित्तीय संकट के कारण इसे बुलाने का फैसला नहीं किया। इसी बैठक ने क्रांति की नींव रखी।
प्रश्न: सन 1791 में फ्रांसिसी संविधान ने कानून बनाने का अधिकार किसको सौंप दिया ?
उत्तर: सन 1791 में बने फ्रांसीसी संविधान ने कानून बनाने का अधिकार नेशनल असेंबली (National Assembly) को सौंप दिया। यह असेंबली अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए 'सक्रिय नागरिकों' द्वारा चुनी जाती थी।
प्रश्न: “द सोशल कॉन्ट्रैक्ट' पुस्तक के लेखक कौन है ?
उत्तर: "द सोशल कॉन्ट्रैक्ट" (The Social Contract) पुस्तक के लेखक प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक जीन-जैक्स रूसो हैं। इस पुस्तक में उन्होंने यह विचार दिया कि शासन जनता और उसके प्रतिनिधियों के बीच एक सामाजिक अनुबंध पर आधारित होना चाहिए।
प्रश्न: लुई सोलहवें की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर: लुई सोलहवें को नवनिर्वाचित राष्ट्रीय सम्मेलन (कन्वेंशन) द्वारा एक न्यायालय में सार्वजनिक रूप से मुकदमा चलाया गया। उसे देशद्रोह का दोषी पाया गया और मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। 21 जनवरी, 1793 को पेरिस के रेवोल्यूशन स्क्वायर (अब कॉनकॉर्ड स्क्वायर) पर सार्वजनिक रूप से गिलोटिन द्वारा उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया।
प्रश्न: फ्रांस के इतिहास में किस समय को आतंक का युग कहा जाता है ?