UP Board Solutions for Class 9 Social Science (भारत और समकालीन विश्व - I)
पाठ 6: किसान और काश्तकार
प्रश्न : अमेरिका में आए गेंहूँ की खेती में उछाल और बाद में पर्यावरणीय संकट से हम क्या सबक ले सकते है?
उत्तर : अमेरिका के अनुभव से हमें यह महत्वपूर्ण सबक मिलता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए। बिना सोचे-समझे वनों को काटकर और प्राकृतिक घास के मैदानों को हल चलाकर केवल अधिक से अधिक उत्पादन पाने की होड़ पर्यावरणीय आपदा को निमंत्रण देती है। हमें पारिस्थितिक संतुलन का सम्मान करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनानी चाहिए। मिट्टी के कटाव को रोकने, जल संरक्षण और फसल चक्र जैसे उपायों को अपनाकर ही दीर्घकालिक कृषि विकास संभव है।
प्रश्न : इंग्लैन्ड में औद्योगिक क्रांति ने किस प्रकार कृषि को प्रभावित किया ?
उत्तर : इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति ने कृषि के स्वरूप को मूलभूत रूप से बदल दिया। इसके प्रभाव निम्नलिखित थे:
- कृषि में नए यंत्रों और तकनीकों का प्रवेश हुआ, जैसे लोहे के हल, सीड ड्रिल और थ्रेशिंग मशीनें, जिससे उत्पादकता बढ़ी।
- बढ़ती शहरी आबादी के लिए अधिक अनाज और कच्चे माल की मांग ने कृषि को एक व्यावसायिक गतिविधि में बदल दिया।
- बाड़ाबंदी आंदोलन को बल मिला, जिससे बड़े पैमाने पर एकल खेती संभव हुई और पारंपरिक सामूहिक खेती की प्रथा समाप्त होने लगी।
प्रश्न : इंग्लैण्ड के किसान प्रेशिंग मशीनों का विरोध क्यों कर रहें थे ?
उत्तर : इंग्लैंड के गरीब किसानों और खेतिहर मजदूरों द्वारा थ्रेशिंग मशीनों का विरोध करने के प्रमुख कारण ये थे:
- उन्हें डर था कि ये मशीनें उनके पारंपरिक रोजगार को छीन लेंगी, क्योंकि थ्रेशिंग का काम सर्दियों में मजदूरों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत था।
- वे मानते थे कि ये मशीनें बड़े किसानों और जमींदारों को और अधिक शक्तिशाली बना देंगी, जिससे बाड़ाबंदी और तेजी से होगी और छोटे किसानों तथा सामुदायिक भूमि पर अधिकार और कमजोर पड़ जाएंगे।
- इन मशीनों के कारण गाँवों में पहले से ही बढ़ रही बेरोजगारी और गरीबी और अधिक बढ़ जाएगी।
प्रश्न : कैप्टन स्विंग कौन था ?
उत्तर : कैप्टन स्विंग कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं था, बल्कि एक काल्पनिक नाम था जो उन गरीब किसानों और मजदूरों का प्रतीक था, जो नई कृषि मशीनों, विशेषकर थ्रेशिंग मशीनों के विरोध में थे। इस नाम से जमींदारों और धनी किसानों को धमकी भरे पत्र भेजे जाते थे, जिनमें मशीनों को तोड़ने या उनके खिलाफ विद्रोह करने की चेतावनी दी जाती थी। यह विरोध औद्योगीकरण के कारण हो रहे आर्थिक और सामाजिक बदलावों के प्रति असंतोष का एक रूप था।
प्रश्न : किन कारणों से इंग्लैण्ड में कृषि उत्पादों की मॉग बढ गई ?
उत्तर : इंग्लैंड में कृषि उत्पादों की मांग में तेजी से वृद्धि के निम्नलिखित कारण थे:
- जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई, जिसके कारण खाद्यान्न की आवश्यकता बढ़ गई।
- औद्योगिक क्रांति के कारण शहरीकरण बढ़ा। नए औद्योगिक शहरों में रहने वाले लाखों श्रमिकों को भोजन की आपूर्ति करनी थी।
- फ्रांस के साथ लंबे समय तक चले युद्धों (नेपोलियनिक युद्ध) के दौरान, यूरोप से अनाज के आयात में बाधा पड़ी, जिससे घरेलू उत्पादन पर निर्भरता बढ़ गई।
प्रश्न : इंग्लैण्ड में बाडाबंदी क्यों आवश्यक हो गई ? कोई दो कारण दीजिए।
उत्तर :
- बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण अनाज की कीमतें ऊँची थीं। धनी किसान और जमींदार अधिक लाभ कमाने के लिए अपनी जमीन पर नई तकनीक और निवेश करना चाहते थे, जो खुले खेतों की प्रथा में संभव नहीं था। बाड़ाबंदी से उन्हें अपनी जमीन पर पूरा नियंत्रण मिल गया।
- नई कृषि पद्धतियाँ, जैसे फसल चक्र और पशुपालन में सुधार, केवल व्यक्तिगत रूप से घिरी हुई भूमि पर ही सफलतापूर्वक लागू की जा सकती थीं, सामूहिक खुले खेतों पर नहीं।
प्रश्न : कृषि क्रांति सबसे पहले किस देश में हुई ?
उत्तर : आधुनिक कृषि क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में हुई।
प्रश्न : इंग्लैण्ड में हुए बाडाबंदी आंदोलन को बढावा देने वाले कारक क्या थें ?
उत्तर : इंग्लैंड में बाड़ाबंदी आंदोलन को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित थे:
- बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगिक शहरों के कारण अनाज व कृषि उत्पादों की मांग और कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई थीं।
- सरकार ने बाड़ाबंदी एक्ट पारित किए, जिससे कानूनी रूप से सामुदायिक भूमि को निजी संपत्ति में बदलना आसान हो गया।
- धनी किसान और जमींदार नई कृषि तकनीकों (जैसे बेहतर हल, फसल चक्र) को अपनाकर उत्पादन और मुनाफा बढ़ाना चाहते थे, जो खुले खेतों में संभव नहीं था।
- उन्हें भूमि पर दीर्घकालिक निवेश (जैसे नालियाँ बनाना, भूमि सुधार) करने के लिए जमीन पर पूर्ण स्वामित्व और सुरक्षा चाहिए थी।
प्रश्न : इंग्लैण्ड में हुए बाडाबंदी आंदोलन से क्या हानियाँ हुई ?
उत्तर : बाड़ाबंदी आंदोलन से समाज के एक बड़े वर्ग को गंभीर हानियाँ हुईं:
- सामुदायिक भूमि और 'कॉमन्स' समाप्त हो गई, जिस पर गाँव के गरीब लोग अपनी जीविका (लकड़ी, चारा, छोटी खेती) चलाते थे।
- छोटे किसान, जो बाड़ाबंदी के बाद अपनी जमीन का बचाव नहीं कर पाए, उन्हें अपनी भूमि बड़े किसानों को बेचनी पड़ी और वे भूमिहीन मजदूर बन गए।
- बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में गाँव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने लगे, जहाँ उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था।
- इससे ग्रामीण समाज में आर्थिक असमानता बढ़ी और सामाजिक तनाव पैदा हुआ।
प्रश्न : अमेरिका में आए गेंहूँ की खेती में उछाल और बाद में किस प्रकार पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हुए ?
उत्तर : अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स क्षेत्र में गेहूं की विशाल पैमाने पर खेती ने गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा किया:
- 1930 के दशक में, लगातार सूखे और भूमि की ऊपरी उपजाऊ परत को बचाने वाले प्राकृतिक घास के आवरण के विनाश के कारण भीषण 'डस्ट बाउल' (धूल भरी आँधियाँ) आईं।
- ये आँधियाँ इतनी भयानक थीं कि आकाश काला पड़ जाता था, सूरज की रोशनी ढक जाती थी और काली बर्फ जैसी धूल की मोटी परत जमीन पर बिछ जाती थी।
- इन आँधियों से लोगों को साँस लेने में तकलीफ होती थी, पशु दम घुटने से मर जाते थे, फसलें बर्बाद हो जाती थीं और हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा।
प्रश्न : अंग्रेज अफीम की खेती के लिए भारतीय किसानों पर क्यों दबाव डाल रहे थे ?
उत्तर : अंग्रेज भारतीय किसानों पर अफीम की खेती के लिए इसलिए दबाव डाल रहे थे क्योंकि उन्हें चीन के साथ व्यापार में होने वाले घाटे को पूरा करने का एक तरीका मिल गया था। अंग्रेज चीन से चाय, रेशम आदि खरीदते थे, लेकिन उनके पास चीन को बेचने के लिए पर्याप्त सामान नहीं था, जिससे चाँदी का बहिर्वाह होता था। अफीम को चीन में अवैध रूप से बेचकर वे भारी मुनाफा कमाते थे और चीन से चाय खरीदने के लिए धन प्राप्त करते थे। इसलिए उन्होंने भारत, विशेषकर बंगाल और बिहार में, अफीम के उत्पादन को बढ़ावा दिया और नियंत्रित किया।
प्रश्न : इच्छा न होते हुए भी अफीम की खेती करने के लिए मजबूर क्यों थें ?
उत्तर : भारतीय किसानों की आर्थिक मजबूरी ही उन्हें अफीम की खेती के लिए विवश करती थी:
- अधिकांश गरीब किसानों के पास जीविका चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे।
- उन्हें अंग्रेज सरकार या स्थानीय महाजनों (साहूकारों) द्वारा अग्रिम राशि (करज़ा) दी जाती थी, जिसे लेने के बाद उनके पास अफीम की खेती के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता था।
- इस राशि से उन्हें लगान चुकाना और घर का खर्च चलाना होता था।
- अग्रिम राशि लेने के बाद यदि वे अफीम की खेती से मुकरते, तो उन पर कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता था और उनकी थोड़ी-बहुत जमीन भी छिन सकती थी।
प्रश्न : भारतीय किसानों के अफीम की खेती के प्रति उदासीनता के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : भारतीय किसान अफीम की खेती से खुश नहीं थे, इसके कई कारण थे:
- अफीम की खेती के लिए सबसे उपजाऊ भूमि का उपयोग किया जाता था, जिस पर वे पहले अपने खाने के लिए दालें या अन्य खाद्य फसलें उगाते थे। अब उन्हें ऐसी फसलें कम उपजाऊ जमीन पर उगानी पड़ती थीं।
- अफीम की खेती एक बेहद श्रमसाध्य और जोखिम भरी प्रक्रिया थी, जिसमें बहुत अधिक देखभाल और समय लगता था। इससे अन्य फसलों पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता था।
- कंपनी द्वारा निर्धारित क्रय मूल्य बहुत कम होता था, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता था और वे अक्सर घाटे में रहते थे।
- कई किसानों के पास अपनी जमीन नहीं थी। अफीम उगाने के लिए उन्हें ऊँचे लगान पर अच्छी जमीन किराए पर लेनी पड़ती थी, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती थीं।
प्रश्न : अमेरिका में फसल काटने वाली मशीनों के तीन हानियाँ बताइए।
उत्तर : फसल काटने वाली मशीनों (जैसे मैकॉर्मिक की हार्वेस्टर) से हुई हानियाँ:
- छोटे किसान, जिन्होंने उधार लेकर ये महंगी मशीनें खरीदी थीं, अक्सर कर्ज नहीं चुका पाते थे और दिवालिया होकर अपनी जमीन गँवा बैठते थे।
- मशीनों ने हाथ से काम करने वाले खेतिहर मजदूरों के रोजगार को छीन लिया, जिससे ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और गरीबी बढ़ी।
- इससे बड़े किसानों का फायदा हुआ और छोटे किसानों का नुकसान, जिससे कृषि क्षेत्र में आर्थिक असमानता बढ़ गई। सैकड़ों किसानों को खेती छोड़कर शहरों में नौकरी की तलाश में जाना पड़ा।
प्रश्न : अमेरिका में फसल काटने वाली मशीनों के तीन लाभ बताइए।
उत्तर : फसल काटने वाली मशीनों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित थे:
- इन मशीनों की मदद से गेहूँ के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और अमेरिका दुनिया का प्रमुख गेहूँ निर्यातक बन गया।
- फसल को बहुत कम समय में और कुशलतापूर्वक काटा जा सकता था, जिससे मौसम की मार से बचा जा सका और समय की बचत हुई।
- एक मशीन एक दिन में कई दर्जन श्रमिकों के बराबर काम कर सकती थी, जिससे विशाल खेतों पर खेती करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो गया।
- इससे श्रम की कमी की समस्या का समाधान हुआ, क्योंकि अमेरिका में खेती के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध नहीं थे।