UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board class 9 Social Science (4. भारत में खाद्य सुरक्षा) solution PDF

UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board class 9 Social Science (4. भारत में खाद्य सुरक्षा) solution

UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 1
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 2
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 3
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 4
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 5
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 6
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 7
UP Board Solution class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Image 8

UP Board Solutions for Class 9 Social Science (अर्थशास्त्र)

पाठ - 4: भारत में खाद्य सुरक्षा

प्रश्न: गरीब को खाध सुरक्षा देने के लिए सरकार ने कया उपाय किए है ? सरकार की ओर से शुरू कि गई peer दो योजनाओ को लिखें |

उत्तर:
गरीबों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाएँ शुरू की हैं। इनमें से दो प्रमुख योजनाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस): इस प्रणाली की शुरुआत जून 1997 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों को सीधे गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और अंत्योदय परिवारों तक पहुँचाना था। इसने पहले की संशोधित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (आरपीडीएस) को बदल दिया, जिसका लक्ष्य दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुँचना था। टीपीडीएस ने राशन कार्डों को अलग-अलग श्रेणियों (जैसे अंत्योदय और बीपीएल) में बाँटकर लक्षित वितरण को सुनिश्चित किया।
  2. अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई): यह योजना दिसंबर 2000 में शुरू की गई थी और इसका लक्ष्य समाज के सबसे गरीब वर्ग, जैसे कि भूमिहीन किसान, बुजुर्ग, विधवाएँ आदि, को सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न (गेहूँ और चावल) बहुत ही रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना को मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के नेटवर्क के माध्यम से ही लागू किया जाता है।

प्रश्न: भारत में खाघ सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है ?

उत्तर:
भारत में खाद्य सुरक्षा मुख्य रूप से दो प्रमुख तंत्रों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है:

  1. बफर स्टॉक: भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सरकार की ओर से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूँ और चावल जैसे खाद्यान्नों की खरीद करता है। इस खरीदे गए अनाज को सरकारी गोदामों में भंडारित किया जाता है, जिसे 'बफर स्टॉक' कहते हैं। यह स्टॉक अकाल, बाढ़ या किसी अन्य संकट के समय देश की खाद्य आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है।
  2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस): यह एक विशाल नेटवर्क है जिसके माध्यम से बफर स्टॉक में संग्रहीत अनाज को देश भर में फैली 'उचित दर की दुकानों' (एफपीएस) यानी राशन की दुकानों के जरिए आम जनता तक, विशेषकर गरीब वर्गों तक, बाजार मूल्य से काफी कम कीमत (निर्गम मूल्य) पर पहुँचाया जाता है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति को भोजन की न्यूनतम आवश्यकता पूरी हो सके।

प्रश्न. कौन लोग खाघ असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हो सकते है ?

उत्तर:
खाद्य असुरक्षा से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोग वे हैं जिनकी आय अनियमित और बहुत कम है, जिससे वे पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीदने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे लोगों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • भूमिहीन किसान और खेतिहर मजदूर: जिनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है और वे दूसरों के खेतों में मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं।
  • पारंपरिक दस्तकार (कारीगर): जैसे बुनकर, कुम्हार, लोहार आदि, जिनकी आय बाजार की माँग पर निर्भर करती है और अक्सर अनिश्चित होती है।
  • पारंपरिक सेवा प्रदाता: जैसे नाई, बढ़ई, धोबी आदि, जिनकी आय भी सीमित और अनियमित हो सकती है।
  • अनियमित मजदूर: जो निर्माण स्थलों, फैक्ट्रियों आदि में दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं और बेरोजगारी का सामना करते हैं।
  • भिखारी और बेसहारा लोग: जो पूरी तरह से दूसरों की दया पर निर्भर हैं।

प्रश्न. क्या आप मानते है कि हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्नों में आत्म निर्भर बना दिया है कैसे ?

उत्तर:
हाँ, हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बना दिया है। 1960 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति ने कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए, जिसके निम्नलिखित कारणों से देश आत्मनिर्भर बना:

  • उत्पादन में भारी वृद्धि: उच्च उपज वाले बीज (HYV), रासायनिक उर्वरकों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं के उपयोग से गेहूँ और चावल के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्य 'देश की अनाज की थाली' बन गए।
  • आयात पर निर्भरता समाप्त: हरित क्रांति से पहले, भारत को खाद्यान्नों की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे 'शिप-टू-माउथ' की स्थिति बनी रहती थी। हरित क्रांति के बाद, देश न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने लगा, बल्कि अतिरिक्त अनाज का भंडार भी करने लगा।
  • बफर स्टॉक का निर्माण: बढ़े हुए उत्पादन ने सरकार को बड़े पैमाने पर बफर स्टॉक बनाने में सक्षम बनाया, जो खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है।
इस प्रकार, हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्नों के मामले में एक संकटग्रस्त देश से एक आत्मनिर्भर और निर्यातकर्ता देश बनने की दिशा में अग्रसर किया।

प्रश्न. आपदा खाद्य आपूर्ति को कैसे प्रभावित करती है ? Or
प्रश्न: विपदा में खाद्य सुरक्षा कैसे प्रभावित करती है ?

उत्तर:
प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात या भूकंप खाद्य सुरक्षा को कई गंभीर तरीकों से प्रभावित करती हैं:

  1. खाद्य उत्पादन में कमी: आपदा फसलों को नष्ट कर देती है, जिससे प्रभावित क्षेत्र में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन गिर जाता है।
  2. खाद्य आपूर्ति में कमी: प्रभावित क्षेत्र में अनाज की उपलब्धता तेजी से कम हो जाती है क्योंकि स्थानीय उत्पादन बंद हो जाता है और बाहर से आपूर्ति बाधित हो सकती है।
  3. कीमतों में वृद्धि (मुद्रास्फीति): आपूर्ति कम और माँग बनी रहने (या बढ़ने) के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इससे गरीब लोगों के लिए भोजन खरीदना और भी मुश्किल हो जाता है।
  4. भुखमरी और कुपोषण का खतरा: यदि आपदा लंबे समय तक रहती है या राहत कार्य प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाते, तो लोगों को भोजन न मिलने के कारण भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ पैदा होती हैं।
इन्हीं कारणों से आपदा प्रबंधन में तत्काल खाद्य सहायता पहुँचाना सबसे प्राथमिक कार्य होता है।

प्रश्न: मौसमी भुखमरी तथा दीर्धकालिक भुखमरी में अंतर स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर:

आधार मौसमी भुखमरी दीर्घकालिक भुखमरी
प्रकृति यह अस्थायी और मौसमी होती है। यह स्थायी और लगातार बनी रहने वाली स्थिति है।
कारण यह कृषि में मौसमी बदलावों के कारण होती है, जैसे रबी या खरीफ फसलों के बीच का समय जब काम नहीं मिलता। बाढ़, सूखा जैसी आपदाएँ भी इसका कारण बन सकती हैं। यह लगातार कम आय, गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के कारण होती है। व्यक्ति के पास हमेशा भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।
प्रभावित लोग ग्रामीण क्षेत्रों के कृषि मजदूर और मौसमी कामगार। शहरी झुग्गी-झोपड़ियों और गरीब ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग, जो बहुत ही कम आय वाले काम करते हैं।
परिणाम इससे अस्थायी रूप से कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। इससे लंबे समय तक कुपोषण, शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा तथा गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न. भुखमरी से आप क्‍या समझते है ?

उत्तर:
भुखमरी एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र को लंबे समय तक पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पाता। यह सिर्फ भूख लगने की सामान्य भावना नहीं है, बल्कि एक संकट है जो शरीर को ऊर्जा और पोषक तत्वों से वंचित कर देता है। भुखमरी के कारण लोग कमजोर हो जाते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और अंततः गंभीर बीमारियाँ या मृत्यु भी हो सकती है। यह स्थिति अक्सर खाद्यान्नों की कमी, अकाल, गरीबी या आपदा के कारण उत्पन्न होती है।

UH: TR स्टॉक क्या है ? सरकार इसे क्यों बनाती है ?

उत्तर:
बफर स्टॉक वह अनाज का भंडार है जिसे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सरकार की ओर से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदकर तैयार करता है। इसे देश के विभिन्न गोदामों में संग्रहित किया जाता है।

सरकार बफर स्टॉक निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारणों से बनाती है:

  1. खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए: यह स्टॉक देश में खाद्यान्नों की उपलब्धता बनाए रखने का एक विश्वसनीय स्रोत है, ताकि किसी भी समय खाद्य संकट न उत्पन्न हो।
  2. गरीबों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए: इस स्टॉक के अनाज का उपयोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर वितरित करने के लिए किया जाता है।
  3. आपदा प्रबंधन के लिए: बाढ़, सूखा, अकाल जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल खाद्य सहायता पहुँचाने के लिए बफर स्टॉक से अनाज का उपयोग किया जाता है।
  4. बाजार में कीमत स्थिरता बनाए रखने के लिए: यदि बाजार में अनाज की कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तो सरकार बफर स्टॉक से अनाज बाजार में छोड़कर कीमतों को नियंत्रित कर सकती है।

प्रश्न: न्यूतम समर्थित मूल्य साप कया समझते है ?

उत्तर:
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वह गारंटीशुदा कीमत है जो भारत सरकार हर साल फसल बोने के मौसम से पहले ही घोषित कर देती है। इस मूल्य पर सरकार किसानों से उनकी फसल (जैसे गेहूँ, चावल, दलहन आदि) खरीदने के लिए तैयार रहती है। एमएसपी का मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें नुकसान से बचाना है, ताकि वे निश्चिंत होकर अधिक उत्पादन कर सकें और देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान दे सकें।

प्रश्न: निर्गत कीमत क्या है ? स्पष्ट करे ?

उत्तर:
निर्गम मूल्य (इश्यू प्राइस) वह विशेष कीमत है जिस पर सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत संचालित उचित दर की दुकानों (राशन की दुकानों) के माध्यम से गरीब परिवारों को अनाज उपलब्ध कराती है। यह कीमत बाजार में प्रचलित मूल्य से बहुत कम होती है। उदाहरण के लिए, सरकार गेहूँ को ₹2-3 प्रति किलोग्राम और चावल को ₹3 प्रति किलोग्राम की दर से वितरित कर सकती है, जबकि उनका बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक होता है। निर्गम मूल्य का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक सस्ती दर पर पौष्टिक भोजन की पहुँच सुनिश्चित करना है।

प्रश्न: खाद्य और संबंधित वस्तुओं को उपलब्ध कराने में सहकारी समितियों कि भूमिका वर्णन करे ?

उत्तर:
सहकारी समितियाँ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक पूरक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। इनकी भूमिका निम्नलिखित है:

  1. कम कीमत पर वस्तुएँ उपलब्ध कराना: सहकारी समितियाँ (जैसे उपभोक्ता सहकारी भंडार) सदस्यों और आम जनता को बाजार मूल्य से कम दर पर खाद्यान्न, दालें, तेल, चीनी आदि आवश्यक वस्तुएँ बेचती हैं।
  2. गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना: ये समितियाँ मिलावट रहित और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद बेचने के लिए जानी जाती हैं, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहता है।
  3. दुग्ध उत्पादों का वितरण: दूध और दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में सहकारी समितियों ने क्रांति ला दी है। 'अमूल' (गुजरात) और 'मदर डेयरी' (दिल्ली) जैसे सफल सहकारी मॉडल ने न केवल उत्पादकों (दूध उत्पादक किसानों) को उचित मूल्य दिलाया है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सस्ती और शुद्ध दूध की आपूर्ति सुनिश्चित की है।
  4. सब्जियों और फलों का वितरण: कुछ सहकारी समितियाँ, जैसे दिल्ली में 'सफल' (SAFAL), किसानों से सीधे सब्जियाँ और फल खरीदकर उपभोक्ताओं तक पहुँचाती हैं, जिससे बिचौलियों को हटाकर कीमतें नियंत्रित रहती हैं।
  5. गैर-सरकारी प्रयासों में सहायता: कुछ सहकारी समितियाँ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ मिलकर अनाज बैंकों की स्थापना जैसे कार्यों में मदद करती हैं, जो आपात स्थिति में लोगों की मदद करते हैं।

प्रश्न: राशन कि दुकानों के संचालन में क्या समसस्‍्याएँ है ?

उत्तर:
उचित दर की दुकानों (राशन की दुकानों) के संचालन में दुकानदारों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

  1. विस्तृत लेखा-जोखा रखना: दुकानदार को हर राशन कार्डधारी के लिए अलग-अलग लेन-देन का सटीक हिसाब रखना पड़ता है, जिसमें प्राप्त अनाज की मात्रा, बेची गई मात्रा और शेष स्टॉक शामिल होता है। यह एक जटिल और समय लेने वाला कार्य है।
  2. उपभोक्ताओं की विविध माँगों और शिकायतों का प्रबंधन: दुकानदार को ग्राहकों की हर छोटी-बड़ी समस्या, जैसे राशन कार्ड में गलती, अनाज की गुणवत्ता, वजन आदि का ध्यान रखना पड़ता है, जिसके लिए बहुत धैर्य और कौशल की आवश्यकता होती है।
  3. लाइसेंस रद्द होने का डर: यदि दुकानदार पर कोई गंभर शिकायत, जैसे कम तोलना, कालाबाजारी करना या लेखा-जोखा में गड़बड़ी करना, सिद्ध हो जाती है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, जिससे उसकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
  4. अनियमित आपूर्ति: कई बार उच्च अधिकारियों या एफसीआई से अनाज की आपूर्ति में देरी या कमी हो जाती है, जिससे दुकानदार को ग्राहकों के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ती है और उनकी शिकायतों का सामना करना पड़ता है।

अभ्यास प्रश्न

अभ्यास : प्रश्ष 1: भारत में खाघ सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है ?

उत्तर: (उपरोक्त प्रश्न के उत्तर के समान, लेकिन संक्षिप्त रूप में)
भारत में खाद्य सुरक्षा दो मुख्य स्तंभों पर टिकी है: बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस)। बफर स्टॉक एफसीआई द्वारा किसानों से खरीदे गए अनाज का भंडार है, जो आपात स्थिति के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। पीडीएस इस भंडार के अनाज को देश भर की राशन दुकानों के माध्यम से गरीबों को बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी भोजन की मूलभूत आवश्यकता पूरी हो सके।

प्रश्ष 2? कौन लोग खाघ असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हो सकते है ?

उत्तर:
खाद्य असुरक्षा से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले लोग हैं: भूमिहीन किसान व मजदूर, पारंपरिक दस्तकार (जैसे बुनकर, कुम्हार), पारंपरिक सेवा प्रदाता (जैसे नाई, धोबी), अनियमित दैनिक मजदूर, भिखारी और बेसहारा लोग। इन सभी की आय अनिश्चित और बहुत कम होती है, जिस कारण वे पर्याप्त भोजन खरीदने में असमर्थ रहते हैं।

प्रश्ष 3: भारत में कौन-कौन से राज्य खाध्य असुरक्षा से अधिक ग्रस्त हैं |

उत्तर:
भारत में आर्थिक रूप से पिछड़े और प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त राज्यों में खाद्य असुरक्षा से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे अधिक है। ऐसे राज्यों में शामिल हैं:

  • उत्तर प्रदेश (विशेषकर पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से)
  • बिहार
  • झारखंड
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल
  • छत्तीसगढ़
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र के कुछ पिछड़े हिस्से
इन क्षेत्रों में गरीबी, बेरोजगारी और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता के कारण लोग खाद्य असुरक्षा का श

Get UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Solution in Hindi Medium

UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for class 9 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board class 9 Social Science 4. भारत में खाद्य सुरक्षा :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board class 9 textSolutions

There are various features of UP Board class 9 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board class 9 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of class 9 Social Science
1. पालमपुर गाँव की कहानी
2. संसाधन के रूप में लोग
3. निर्धनता एक चुनौती
4. भारत में खाद्य सुरक्षा
1. फ्रांसिसी क्रांति
2. यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
3. नात्सीवाद और हिटलर का उदय
4. वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद
5. आधुनिक विश्व में चरवाहे
6. किसान और काश्तकार
7. इतिहास और खेलः क्रिकेट की कहानी
1. भारत - आकार और स्थिति
2. भारत - का भौतिक स्वरूप
3. अपवाह
4. जलवायु
5. प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
6. जनसंख्या
;