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UP Board class 9 Social Science (4. जलवायु) solution PDF

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UP Board class 9 Social Science (4. जलवायु) solution

UP Board class 9 Social Science 4. जलवायु Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 9 Social Science (समकालीन भारत - I)

अध्याय 4: जलवायु

01. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें | (i) नीचे दिए गए स्थानों में किस स्थान पर विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है?

(क) सिलचर (ख) चेरापूंजी (ग) मासिनराम (घ) गुवाहाटी

उत्तर: (ग) मासिनराम
व्याख्या: मेघालय राज्य में स्थित मासिनराम (या मौसिनराम) विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 11,871 मिलीमीटर वर्षा होती है, जो इसे विश्व रिकॉर्ड धारक बनाती है।

(ii) ग्रीष्मऋतु में उत्तरी मैदानों में बहने वाली पवन को निम्नलिखित में से क्या कहा जाता है?

(क) काल वैशाखी (ख) व्यापारिक पवनें (ग) लू (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (ग) लू
व्याख्या: गर्मियों के महीनों में उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में चलने वाली गर्म, शुष्क और धूल भरी हवाओं को 'लू' कहा जाता है। ये हवाएँ दिन के समय बहुत तेज और परेशान करने वाली होती हैं, जो शरीर से पसीना सुखा देती हैं और लू लगने का कारण बन सकती हैं।

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा कारण भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में शीतऋतु में होने वाली वर्षा के लिए उत्तरदायी है ?

(क) चक्रवातीय अवदाब (ख) पश्चिमी विक्षोभ (ग) मानसून की वापसी (घ) दक्षिण-पश्चिम मानसून

उत्तर: (ख) पश्चिमी विक्षोभ
व्याख्या: सर्दियों के मौसम में भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों (जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान) में होने वाली हल्की वर्षा का मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' हैं। ये भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले चक्रवातीय तंत्र हैं जो पश्चिमी जेट धाराओं द्वारा भारत तक लाए जाते हैं और यहाँ वर्षा या हिमपात कराते हैं।

(iv) भारत में मानसून का आगमन निम्नलिखित में से कब होता है?

(क) मई के प्रारंभ में (ख) जून के प्रारंभ में (ग) जुलाई के प्रारंभ में (घ) अगस्त के प्रारंभ में

उत्तर: (ख) जून के प्रारंभ में
व्याख्या: दक्षिण-पश्चिम मानसून की धाराएँ भारतीय मुख्य भूमि पर आमतौर पर जून के प्रारंभ में पहुँचती हैं। सबसे पहले यह केरल तट (लगभग 1 जून) से प्रवेश करता है और फिर धीरे-धीरे पूरे देश में फैल जाता है।

(v) निम्नलिखित में से कौन-सी भारत में शीतऋतु की विशेषता है?

(क) गर्म दिन एवं गर्म रातें (ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें (ग) ठंडा दिन एवं ठंडी रातें (घ) ठंडा दिन एवं गर्म रातें

उत्तर: (ख) गर्म दिन एवं ठंडी रातें
व्याख्या: भारत के अधिकांश भागों में शीत ऋतु (नवंबर से फरवरी) की मुख्य विशेषता गर्म दिन और ठंडी रातें होती हैं। दिन के समय सूर्य की रोशनी से तापमान सुहावना रहता है, लेकिन रात में आकाश साफ रहने के कारण विकिरण द्वारा ऊष्मा का ह्रास तेजी से होता है, जिससे तापमान काफी गिर जाता है और रातें ठंडी हो जाती हैं।

2. निम्न प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए। (i) भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं?

उत्तर: भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

  1. अक्षांश: भारत का अधिकांश भाग उष्ण कटिबंध में स्थित है, जिससे यहाँ गर्म जलवायु मिलती है। कर्क रेखा देश को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है।
  2. ऊँचाई: हिमालय पर्वत श्रृंखला ठंडी हवाओं को रोककर देश को मध्य एशिया की ठंडी जलवायु से बचाती है। साथ ही, ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है।
  3. वायुदाब एवं पवन तंत्र: विभिन्न ऋतुओं में वायुदाब में परिवर्तन और पवनों की दिशा बदलने से मानसूनी जलवायु बनती है।
  4. समुद्र से दूरी: तटीय क्षेत्रों में सम जलवायु (कम तापान्तर) मिलती है, जबकि समुद्र से दूर के आंतरिक भागों में विषम जलवायु (अधिक तापान्तर) पाई जाती है।
  5. महासागरीय धाराएँ: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की गर्म धाराएँ तटीय क्षेत्रों में आर्द्रता लाती हैं और वर्षा में सहायक होती हैं।
  6. उच्चावच लक्षण: पर्वतों की दिशा और ऊँचाई वर्षा के वितरण को प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, पश्चिमी घाट के पवनविमुख ढाल पर भारी वर्षा होती है।

(ii) भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु क्यों है?

उत्तर: भारत में मानसूनी प्रकार की जलवायु होने के निम्नलिखित कारण हैं:

  1. वायुदाब में मौसमी उलटफेर: गर्मियों में भारतीय उपमहाद्वीप पर निम्न दाब और हिंद महासागर पर उच्च दाब का क्षेत्र बनता है, जिससे समुद्र से स्थल की ओर आर्द्र हवाएँ (दक्षिण-पश्चिम मानसून) चलती हैं। सर्दियों में इसके विपरीत स्थिति बनती है।
  2. हिमालय पर्वतमाला की भूमिका: हिमालय एक विशाल अवरोधक के रूप में कार्य करता है, जो मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं को रोकता है और मानसूनी हवाओं को फँसाकर भारी वर्षा कराता है।
  3. जेट धाराओं का स्थानांतरण: गर्मियों में उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा हिमालय के उत्तर में खिसक जाती है, जिससे भारत में निम्न दाब का विकास होता है और मानसून सक्रिय होता है।
  4. अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ): गर्मियों में ITCZ, जो सूर्य की आभासी गति के साथ खिसकता है, गंगा के मैदान की ओर आ जाता है। यह मानसूनी गर्त को आकर्षित करने में मदद करता है।
  5. महासागरीय तापीय अवस्थाएँ: हिंद महासागर का तापमान और एल नीनो जैसी घटनाएँ भी मानसून की तीव्रता और समय को प्रभावित करती हैं।

(iii) भारत के किस भाग में दैनिक तापमान अधिक होता है एवं क्यों?

उत्तर: भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग (विशेषकर राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र) में दैनिक तापमान अधिक होता है, अर्थात दिन और रात के तापमान में बहुत अंतर (उच्च दैनिक तापांतर) होता है। कारण:

  1. समुद्र से दूरी: यह क्षेत्र समुद्र से बहुत दूर स्थित है। समुद्र का जलवायु पर समकारी प्रभाव यहाँ नहीं पहुँच पाता।
  2. मरुस्थलीय भूमि: रेतीली भूमि दिन में बहुत तेजी से गर्म हो जाती है और रात में उतनी ही तेजी से ठंडी हो जाती है।
  3. साफ आकाश एवं शुष्क हवा: यहाँ आकाश प्रायः साफ रहता है और हवा में नमी की मात्रा बहुत कम होती है। नमी की अनुपस्थिति में धरती द्वारा दिन में प्राप्त सारी ऊष्मा रात में विकिरण द्वारा तेजी से वापस अंतरिक्ष में चली जाती है।
  4. वनस्पति का अभाव: पेड़-पौधों की कमी के कारण यहाँ प्राकृतिक रूप से तापमान नियंत्रित करने वाला कोई कारक नहीं होता।

(iv) किन पवनों के कारण मालाबार तट पर वर्षा होती है?

उत्तर: मालाबार तट (केरल, कर्नाटक और गोवा का तटीय भाग) पर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनों के कारण भारी वर्षा होती है। जून के प्रारंभ में, ये आर्द्र हवाएँ अरब सागर की शाखा के रूप में भारत के पश्चिमी तट से टकराती हैं। पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला इन हवाओं के लिए एक अवरोध का काम करती है, जिसके कारण हवाएँ ऊपर उठती हैं, ठंडी होती हैं और पर्वतन्मुख ढाल पर घनघोर वर्षा कराती हैं।

(v) जेट धाराएँ क्या हैं तथा वे किस प्रकार भारत की जलवायु को प्रभावित करती हैं?

उत्तर: जेट धाराएँ क्षोभमंडल में बहुत अधिक ऊँचाई (लगभग 12,000 मीटर या उससे अधिक) पर एक संकरी पट्टी में चलने वाली तीव्र गति की हवाएँ हैं।

भारत की जलवायु पर प्रभाव:

  1. शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ: सर्दियों में, उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट धाराएँ हिमालय के दक्षिण में प्रवाहित होती हैं। ये भूमध्य सागर से चक्रवातीय विक्षोभ (पश्चिमी विक्षोभ) लाती हैं, जो उत्तर-पश्चिम भारत में हल्की वर्षा या हिमपात कराते हैं। यह वर्षा रबी फसलों के लिए बहुत लाभदायक होती है।
  2. ग्रीष्म ऋतु में मानसून का आगमन: गर्मियों के प्रारंभ में, सूर्य की उत्तरायण गति के साथ ये जेट धाराएँ हिमालय के उत्तर में खिसक जाती हैं। इस खिसकाव से भारतीय उपमहाद्वीप पर निम्न दाब का विकास तेजी से होता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के लिए अनुकूल दशाएँ बनाता है।
  3. उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट धारा: गर्मियों में प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर एक पूर्वी जेट धारा बहने लगती है, जो मानसूनी वर्षा की गतिविधियों को प्रभावित करती है।

(vi) मानसून को परिभाषित करें। मानसून में विराम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मानसून: मानसून एक ऐसी जलवायविक परिघटना है जिसमें वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार पूर्णतः विपरीत परिवर्तन होता है। भारत में, गर्मियों में हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर (दक्षिण-पश्चिम से) चलकर वर्षा लाती हैं और सर्दियों में स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्व से) चलती हैं।

मानसून में विराम: मानसून में विराम वह अवधि है जब मानसूनी वर्षा कुछ दिनों तक लगातार होने के बाद रुक जाती है और फिर कुछ दिनों बाद दोबारा शुरू होती है। इसमें वर्षा के सक्रिय चरण और शुष्क चरण आते-जाते रहते हैं। कारण: यह विराम मानसूनी गर्त (ट्रफ) की स्थिति में बदलाव के कारण होता है। जब यह गर्त गंगा के मैदान के ऊपर स्थित होता है तो वहाँ वर्षा होती है। जब यह गर्त हिमालय की तरफ खिसक जाता है, तो मैदानी इलाकों में वर्षा रुक जाती है और शुष्क मौसम आ जाता है। इस चक्र को ही 'मानसून का विराम' कहते हैं।

(vii) मानसून को एक सूत्र में बाँधने वाला क्यों समझा जाता है?

उत्तर: मानसून को भारत को 'एक सूत्र में बाँधने वाला' माना जाता है, क्योंकि:

  1. सामूहिक प्रतीक्षा एवं अनुभव: देश का हर नागरिक, चाहे वह जम्मू-कश्मीर में रहता हो या तमिलनाडु में, गुजरात में हो या असम में, मानसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार करता है। यह एक साझा राष्ट्रीय अनुभव है।
  2. कृषि एवं अर्थव्यवस्था की रीढ़: भारत की लगभग 50% से अधिक जनसंख्या की आजीविका कृषि पर निर्भर है, जो पूरी तरह से मानसूनी वर्षा पर आधारित है। अच्छा मानसून देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, जबकि खराब मानसून संकट पैदा कर सकता है।
  3. सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन: मानसून हमारे त्योहारों, साहित्य, संगीत और कला से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह जीवन के एक चक्र की शुरुआत का प्रतीक है।
  4. जल संसाधनों का आधार: देश की नदियाँ, झीलें, भूजल स्तर और जलाशय सभी मानसूनी वर्षा से ही रीचार्ज होते हैं, जो पूरे देश के लिए पेयजल और सिंचाई का स्रोत हैं।
इस प्रकार, मानसून सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि भारत की एकता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को जोड़ने वाला एक सशक्त सूत्र है।

03. उत्तर-भारत में पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा क्यों घटती जाती है ?

उत्तर: उत्तर-भारत में पूर्व (जैसे- पश्चिम बंगाल, बिहार) से पश्चिम (जैसे- राजस्थान) की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  1. मानसूनी हवाओं का मार्ग एवं आर्द्रता ह्रास: दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी भारत में प्रवेश करती है। यहाँ यह हवा अपने साथ अधिकतम आर्द्रता (नमी) लेकर आती है और पूर्वी हिमालय तथा पहाड़ियों से टकराकर भारी वर्षा कराती है। जैसे-जैसे यह हवा पश्चिम की ओर आगे बढ़ती है, वह अपनी अधिकांश नमी खो देती है।
  2. समुद्र से बढ़ती दूरी: पश्चिमी भाग समुद्र से बहुत दूर स्थित है, इसलिए हवा में नई नमी मिलने का स्रोत कम हो जाता है।
  3. अरावली पर्वत की दिशा: राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है, जो मानसूनी हवाओं के समानांतर है। चूँकि हवाएँ इन पर्वतों के समांतर बहती हैं, इसलिए ये पर्वत हवाओं को ऊपर उठाने और वर्षा कराने में अप्रभावी रहते हैं।
  4. तापमान की अधिकता: पश्चिमी भागों में तापमान अधिक होने के कारण हवा गर्म होकर और सूखी हो जाती है, जिससे वर्षा की संभावना कम हो जाती है।
इन्हीं कारणों से चेरापूंजी (पूर्व) में बहुत अधिक वर्षा होती है, जबकि जैसलमेर (पश्चिम) में बहुत कम वर्षा होती है।

4. कारण बताएँ। (i) भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन क्यों होता है ?

उत्तर: भारतीय उपमहाद्वीप में वायु की दिशा में मौसमी परिवर्तन का मुख्य कारण विभिन्न ऋतुओं में स्थल और जल के गर्म व ठंडा होने की दर में अंतर के कारण वायुदाब में होने वाला उलटफेर है।

  1. ग्रीष्म ऋतु (दक्षिण-पश्चिम मानसून): गर्मियों में स्थल भाग (भारतीय उपमहाद्वीप) जल्दी गर्म होकर निम्न दाब का केंद्र बन जाता है, जबकि आसपास के समुद्र (हिंद महासागर) पर उच्च दाब रहता है। दाब के इस अंतर के कारण हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर दक्षिण-पश्चिम दिशा से बहने लगती हैं। ये आर्द्र हवाएँ वर्षा लाती हैं।
  2. शीत ऋतु (उत्तर-पूर्व मानसून): सर्दियों में स्थिति विपरीत हो जाती है। स्थल भाग जल्दी ठंडा होकर उच्च दाब का केंद्र बन जाता है, जबकि समुद्र पर अपेक्षाकृत निम्न दाब रहता है। इसलिए हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर उत्तर-पूर्व दिशा से बहने लगती हैं। ये हवाएँ शुष्क होती हैं, लेकिन तमिलनाडु तट पर बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर कुछ वर्षा कराती हैं।
इस प्रकार, स्थल और जल के तापन में अंतर के कारण वायुदाब में बदलाव होता है, जो हवाओं की दिशा बदल देता है।

(ii) भारत में अधिकतर वर्षा कुछ ही महीनों में होती है ?

उत्तर: भारत में लगभग 70-90% वर्षा केवल जून से सितंबर तक के चार महीनों में होती है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. मानसूनी पवनों की अवधि: वर्षा लाने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ केवल इन्हीं चार महीनों में सक्रिय रहती हैं। अक्टूबर के बाद इनकी दिशा बदल जाती है और वे वापस लौटने लगती हैं।
  2. वायुदाब पद्धति का सीमित समय: गर्मियों में बना वह विशेष वायुदाब पैटर्न (स्थल पर निम्न दाब और समुद्र पर उच्च दाब) जो इन हवाओं को खींचता है, केवल इसी अवधि तक बना रहता है।
  3. जेट धाराओं का स्थानांतरण: पश्चिमी जेट धारा का हिमालय के उत्तर में खिसकना और पूर्वी जेट धारा का स्थापित होना भी इसी अवधि में होता है, जो मानसून के सक्रिय होने के लिए जरूरी है।
  4. अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) की स्थिति: यह वर्षा का क्षेत्र गर्मियों में ही उत्तर की ओर खिसककर भारत के ऊपर आता है और मानसूनी गर्त को आकर्षित करता है।
इसलिए, भारत की वर्षा मुख्य रूप से इन्हीं कुछ महीनों में केंद्रित है, जिससे यहाँ 'मानसूनी जलवायु' की विशेषता बनती है।


अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न: जलवायु किसे कहते है ?

उत्तर: किसी विशाल भौगोलिक क्षेत्र में लंबे समय (सामान्यतः 30-35 वर्ष) तक मौसम की दशाओं के औसत योग को जलवायु कहते हैं। यह स्थायी प्रकृति का होता है और क्षेत्र विशेष की पहचान बताता है।

प्रश्न: मानसून किसे कहते है ?

उत्तर: मानसून अरबी भाषा

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