UP Board Class 12 Economics 2. उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धान्त is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर- बजट सेट दो वस्तुओं के उन सभी बंडलों का संग्रह है जिन्हें उपभोक्ता प्रचलित बाज़ार कीमत पर अपनी आय से खरीद सकता है।
उत्तर- बजट रेखा उन सभी बंडलों का प्रतिनिधित्व करती है, जिन पर उपभोक्ता की संपूर्ण आय व्यय हो जाती है।
उत्तर- बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर होती है, क्योंकि बजट रेखा पर स्थित प्रत्येक बिंदु एक ऐसे बंडल को दर्शाता है जिस पर उपभोक्ता की पूरी आय व्यय हो जाती है। ऐसे में यदि उपभोक्ता वस्तु 1 की 1 इकाई अधिक लेना चाहता है, तब वह ऐसा तभी कर सकता है जब वह दूसरी वस्तु की कुछ मात्रा छोड़ दे। वस्तु 1 की मात्रा कम किए बिना वह वस्तु 2 की मात्रा बढ़ा नहीं सकता। वस्तु 1 की एक अतिरिक्त इकाई पाने के लिए उसे वस्तु 2 की कितनी इकाई छोड़नी होगी यह दो वस्तुओं की कीमत पर निर्भर करेगा।
उत्तर-
बजट रेखा का आरेख
वस्तु 2 की मात्रा (Y-अक्ष): 0, 1, 2, 3, 4
वस्तु 1 की मात्रा (X-अक्ष): 5, 4, 3, 2, 0
उत्तर- नई बजट रेखा का समीकरण होगा: 4Q₁ + 5Q₂ = 40। बजट रेखा समान्तर रूप से दाहिनी ओर (बाहर की ओर) खिसक जाएगी, क्योंकि उपभोक्ता अधिक मात्रा में दोनों वस्तुएँ खरीद सकता है।
उत्तर- वस्तु 2 की नई कीमत = ₹4 होगी। नई बजट रेखा का समीकरण होगा: 4Q₁ + 4Q₂ = 20। बजट रेखा की प्रवणता बदलकर -1 ( -4/4 ) हो जाएगी और यह X-अक्ष पर समान बिंदु (Q₁=5) पर काटेगी लेकिन Y-अक्ष पर अधिक बिंदु (Q₂=5) पर काटेगी।
उत्तर- नई कीमतें: वस्तु 1 = ₹8, वस्तु 2 = ₹10। नई आय = ₹40। नया बजट समीकरण: 8Q₁ + 10Q₂ = 40। यदि इस समीकरण के दोनों ओर 2 से भाग दें, तो वही मूल समीकरण (4Q₁ + 5Q₂ = 20) प्राप्त होता है। अतः बजट सेट में कोई परिवर्तन नहीं होगा, उपभोक्ता के विकल्प समान रहेंगे।
उत्तर- बजट रेखा समीकरण: P₁Q₁ + P₂Q₂ = Y
दिया है: P₁=6, Q₁=6, P₂=8, Q₂=8
मान रखने पर: (6 × 6) + (8 × 8) = Y
36 + 64 = Y
Y = ₹100
अतः उपभोक्ता की आय ₹100 है।
उत्तर-
i. बजट रेखा समीकरण: 10Q₁ + 10Q₂ ≤ 40
सभी संभव बंडल (Q₁, Q₂) जहाँ Q₁ और Q₂ पूर्णांक तथा गैर-ऋणात्मक हैं:
(0,0), (0,1), (0,2), (0,3), (0,4)
(1,0), (1,1), (1,2), (1,3)
(2,0), (2,1), (2,2)
(3,0), (3,1)
(4,0)
ii. ऐसे बंडल जिन पर पूरे ₹40 व्यय होंगे (10Q₁ + 10Q₂ = 40):
(0,4), (1,3), (2,2), (3,1), (4,0)
उत्तर- एकदिष्ट अधिमान का अर्थ है कि उपभोक्ता एक वस्तु की कम मात्रा की तुलना में अधिक मात्रा को सदा अधिक पसंद करता है। इसका अर्थ है कि उदासीनता वक्र की प्रवणता नीचे की ओर है। यदि उपभोक्ता के एकदिष्ट अधिमान हैं तो वह संयोजन (4, 5) से अधिक संयोजन (5, 5) या (4, 6) को पसंद करेगा।
उत्तर- नहीं। यदि एक उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो वह बंडल (10, 8) को बंडल (8, 6) से अधिक प्राथमिकता देगा, क्योंकि (10,8) बंडल में दोनों ही वस्तुओं की मात्रा अधिक है। वह दोनों के बीच तटस्थ नहीं हो सकता।
उत्तर- एकदिष्ट अधिमान के कारण, उपभोक्ता अधिक मात्रा वाले बंडल को प्राथमिकता देगा। इसलिए:
(10, 10) > (10, 9) > (9, 9)
अर्थात् वह (10,10) को सबसे अधिक और (9,9) को सबसे कम पसंद करेगा।
उत्तर- नहीं। यदि उसके अधिमान एकदिष्ट होते, तो वह बंडल (6, 6) को बंडल (5, 6) से अधिक प्राथमिकता देता, क्योंकि (6,6) में वस्तु 1 की मात्रा अधिक है जबकि वस्तु 2 की मात्रा समान है। चूँकि वह दोनों के बीच तटस्थ है, इसलिए उसके अधिमान एकदिष्ट नहीं हैं।
उत्तर- बाज़ार माँग फलन D(p) = d₁(p) + d₂(p) होगा।
उत्तर- चूंकि सभी 20 उपभोक्ता समान हैं, बाजार माँग फलन एक उपभोक्ता के माँग फलन का 20 गुना होगा।
| कीमत (₹) | उपभोक्ता 1 की माँग (d₁) | उपभोक्ता 2 की माँग (d₂) | बाजार माँग (d₁ + d₂) |
|---|---|---|---|
| 1 | 9 | 24 | 33 |
| 2 | 8 | 20 | 28 |
| 3 | 7 | 18 | 25 |
| 4 | 6 | 16 | 22 |
| 5 | 5 | 14 | 19 |
| 6 | 4 | 12 | 16 |
उत्तर- जिस वस्तु का आय के साथ धनात्मक संबंध हो अर्थात् उपभोक्ता की आय बढ़ने पर जिस वस्तु की माँग बढ़ती हो तथा उपभोक्ता की आय कम होने पर जिस वस्तु की माँग कम होती हो, वह सामान्य वस्तु कहलाती है। उदाहरण: फल, दूध, कपड़े आदि।
उत्तर- ऐसी वस्तु जिसका आय के साथ ऋणात्मक संबंध होता है अर्थात् उपभोक्ता की आय बढ़ने पर जिस वस्तु की माँग कम होती है तथा उपभोक्ता की आय कम होने पर जिस वस्तु की माँग बढ़ती है, वह निम्नस्तरीय वस्तु कहलाती है। कोई भी वस्तु निम्नस्तरीय है या सामान्य, यह उपभोक्ता की प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। उदाहरण: ज्वार, बाजरा, सस्ते ब्रांड के बिस्कुट, मोटा अनाज, टोन्ड दूध (कुछ उपभोक्ताओं के लिए) आदि।
उत्तर- वे वस्तुएँ जो एक मानव इच्छा की पूर्ति के लिए एक दूसरे के स्थान पर उपयोग में आ सकती हैं, वे प्रतिस्थापन वस्तुएँ कहलाती हैं। उदाहरण: चाय और कॉफी, पेन और पेंसिल, मक्खन और मार्जरीन, कोका-कोला और पेप्सी।
उत्तर- वे वस्तुएँ जो किसी मानव इच्छा की पूर्ति के लिए एक साथ प्रयोग होती हैं, पूरक वस्तुएँ कहलाती हैं। उदाहरण: कार और पेट्रोल, मोबाइल फोन और सिम कार्ड, प्रिंटर और स्याही, चप्पल और जूते का जोड़ा।
उत्तर- किसी वस्तु की कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के कारण उस वस्तु की माँगी गई मात्रा में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात को माँग की कीमत लोच कहा जाता है। यह माँगी गई मात्रा की कीमत के प्रति संवेदनशीलता का माप है।
सूत्र: eD = (माँगी गई मात्रा में % परिवर्तन) / (कीमत में % परिवर्तन)
उत्तर-
प्रारंभिक कीमत (P) = ₹4, नई कीमत (P¹) = ₹5, ∴ ΔP = 1
प्रारंभिक मात्रा (Q) = 25, नई मात्रा (Q¹) = 20, ∴ ΔQ = -5
मध्य बिंदु विधि का प्रयोग करने पर:
औसत कीमत = (4+5)/2 = 4.5
औसत मात्रा = (25+20)/2 = 22.5
कीमत में % परिवर्तन = (ΔP / औसत P) × 100 = (1 / 4.5) × 100 ≈ 22.22%
मात्रा में % परिवर्तन = (ΔQ / औसत Q) × 100 = (-5 / 22.5) × 100 ≈ -22.22%
माँग की कीमत लोच (eD) = (-22.22%) / (22.22%) = -1 (इकाई लोचदार माँग)
उत्तर-
दिया है: D(p) = 10 – 3p, कीमत p = 5/3
इस कीमत पर माँगी गई मात्रा: Q = 10 – 3×(5/3) = 10 – 5 = 5 इकाई
dD/dp = -3 (माँग फलन का अवकलज)
बिंदु लोच सूत्र: eD = (dQ/dP) × (P/Q)
eD = (-3) × ( (5/3) / 5 ) = (-3) × (1/3) = -1
अतः कीमत लोच = -1 (इकाई लोचदार माँग)
उत्तर-
माँग की कीमत लोच (eD) = माँगी गई मात्रा में % परिवर्तन / कीमत में % परिवर्तन
-0.2 = मात्रा में % परिवर्तन / 5%
∴ मात्रा में % परिवर्तन = -0.2 × 5% = -1%
अतः माँग में 1% की कमी आएगी।
उत्तर- माँग की कीमत लोच का निरपेक्ष मान 0.2 है, जो इकाई (1) से कम है। इसका अर्थ है माँग बेलोचदार है। बेलोचदार माँग की स्थिति में, कीमत बढ़ने पर उस वस्तु पर कुल व्यय बढ़ जाता है। अतः यहाँ कीमत 10% बढ़ने पर वस्तु पर कुल व्यय बढ़ेगा।
उत्तर- कुल व्यय विधि के अनुसार:
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