UP Board Solutions for Class 6 History हमारे अतीत - 1: नए साम्राज्य और राज्य
1. यह वर्णन तुम्हें उस राजा के बारे में क्या बताता है? राजा किस प्रकार युद्ध लड़ते थे? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-112)
उत्तर: इस वर्णन से पता चलता है कि राजा बहुत बहादुर और साहसी थे। वे युद्ध के मैदान में सीधे अपने सैनिकों के साथ खड़े होकर लड़ते थे। उनके पास विभिन्न प्रकार के हथियार होते थे जैसे भारी गदा, तेज धार वाली तलवारें, लंबे भाले और धनुष-बाण। राजा इन हथियारों का कुशलता से प्रयोग करते हुए शत्रु सेना का सामना करते थे।
2. आर्यावर्त तथा दक्षिणापथ के राज्यों के साथ समुद्रगुप्त के व्यवहार में क्या अंतर था? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-113)
उत्तर: समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त (उत्तर भारत) और दक्षिणापथ (दक्षिण भारत) के शासकों के साथ अलग-अलग नीति अपनाई।
आर्यावर्त के साथ: उसने उत्तर भारत के नौ शासकों को हराकर उनके राज्यों को सीधे अपने विशाल साम्राज्य में मिला लिया। यह इसलिए किया गया क्योंकि ये राज्य उसकी राजधानी पाटलिपुत्र के नजदीक थे और उन पर सीधा नियंत्रण रखना आसान था।
दक्षिणापथ के साथ: दक्षिण भारत के बारह शासकों को हराने के बाद, समुद्रगुप्त ने उन्हें उनके राज्य वापस दे दिए। उसने उनसे केवल कर (भेंट) लेने और उसकी आज्ञा मानने का वचन लिया। यह नीति दूरी के कारण थी - दक्षिण के राज्यों पर सीधे शासन करना मुश्किल था, इसलिए उसने उन्हें अपने अधीनस्थ मित्र बना लिया।
3. इन उपाधियों को महत्त्व के हिसाब से सजाओ। राजा, महाराज-अधिराज, महा-राजा। (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-114)
उत्तर: महत्त्व के बढ़ते क्रम में उपाधियाँ इस प्रकार हैं:
- राजा: यह सबसे सामान्य उपाधि थी, जो एक छोटे क्षेत्र के शासक के लिए प्रयोग होती थी।
- महा-राजा: यह 'महान राजा' के अर्थ में है और 'राजा' से अधिक शक्तिशाली शासक की उपाधि थी।
- महाराज-अधिराज: यह सबसे ऊँची उपाधि थी, जिसका अर्थ है 'महान राजाओं का राजा' या 'सम्राट'। यह उपाधि बहुत बड़े साम्राज्य के शासक ही धारण करते थे, जैसे समुद्रगुप्त।
4. मानचित्र 8 (पृष्ठ 136) देखो और सूची बनाओ कि जब हर्षवर्धन (क) बंगाल तथा (ख) नर्मदा तक गए होंगे तो आज के किन-किन राज्यों से गुजरे होंगे? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-115)
उत्तर:
(क) बंगाल जाने के लिए: हर्षवर्धन की राजधानी कन्नौज (उत्तर प्रदेश) से बंगाल जाते समय उन्हें आज के निम्नलिखित राज्यों से गुजरना पड़ा होगा:
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
(ख) नर्मदा नदी तक जाने के लिए: कन्नौज से नर्मदा नदी (मध्य भारत) की ओर जाने के लिए उन्हें इन राज्यों से गुजरना पड़ा होगा:
5. वे कौन-से अन्य शासक थे जो तटों पर अपना नियंत्रण करना चाहते थे? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-116)
उत्तर: तटीय क्षेत्रों पर नियंत्रण रखना इसलिए जरूरी था क्योंकि वहाँ से समुद्री व्यापार होता था जिससे राज्य को अधिक धन मिलता था। तटों पर नियंत्रण करने वाले प्रमुख शासक या राजवंश थे:
- चोल (तमिलनाडु का पूर्वी तट)
- चेर (केरल का पश्चिमी तट)
- पांड्य (तमिलनाडु का दक्षिणी तट)
- सातवाहन (पश्चिमी तट, विशेषकर महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्र)
6. सोचकर बताओ कि अफ़सरों का पद आनुवंशिक कर देने में क्या-क्या फायदे और क्या-क्या नुकसान हो सकते थे? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-117)
उत्तर:
फायदे (लाभ):
- पिता का लंबा अनुभव और प्रशासनिक ज्ञान पुत्र को विरासत में मिल जाता था, जिससे काम में निरंतरता बनी रहती थी।
- पुत्र बचपन से ही पिता के साथ रहकर काम के गुर सीख लेता था, इसलिए उसे प्रशिक्षण में अलग से समय नहीं लगता था।
- यदि पिता ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ था, तो वही अच्छे संस्कार पुत्र को भी मिलते थे और पुत्र परिवार की इज्जत बनाए रखने का प्रयास करता था।
नुकसान (हानि):
- समाज के अन्य योग्य और मेहनती लोगों को, चाहे वे किसी भी परिवार से हों, अफसर बनने का मौका नहीं मिल पाता था।
- कई बार पिता के योग्य होने पर भी पुत्र अयोग्य या आलसी हो सकता था, फिर भी वह पद पा जाता था। इससे प्रशासन की कार्यकुशलता घट जाती थी।
- इस प्रथा से एक ही परिवार का एक क्षेत्र या विभाग पर लंबे समय तक नियंत्रण हो जाता था, जिससे भ्रष्टाचार और स्वेच्छाचारिता बढ़ने का खतरा रहता था।
7. आज अगर किसी गरीब आदमी को कुछ मिलता है और वह पुलिस में खबर करता है तो क्या उसके साथ इसी तरह का बर्ताव किया जाएगा? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर: आज के समय में कानून सबके लिए समान है और पुलिस का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक की शिकायत सुनें। हालाँकि, व्यवहार में कई बार गरीब और कमजोर लोगों को उचित सुनवाई नहीं मिल पाती। कभी-कभी पुलिस उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लेती या उन पर ध्यान नहीं देती, खासकर यदि दूसरा पक्ष प्रभावशाली हो। लेकिन यह सही नहीं है। आदर्श रूप से, पुलिस को गरीब-अमीर का भेद किए बिना हर शिकायत की निष्पक्ष जाँच करनी चाहिए।
8. एक प्रसिद्ध व्यक्ति का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में उपदेश दिए और एक राजा का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में अपने अभिलेख लिखवाए। (अध्याय 7 तथा 8 देखो।) (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
उत्तर:
- प्राकृत में उपदेश देने वाले: भगवान महावीर, जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर, ने अपने उपदेश आम लोगों की भाषा अर्धमागधी प्राकृत में दिए ताकि सभी उन्हें आसानी से समझ सकें।
- प्राकृत में अभिलेख लिखवाने वाले राजा: सम्राट अशोक (मौर्य वंश) ने अपने स्तंभ लेख और शिलालेख प्राकृत भाषा में लिखवाए ताकि उनके संदेश उस समय के जनसाधारण तक पहुँच सकें।
9. सेना के साथ ले जाई जाने वाली चीजों की सूची बनाओ। (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-119)
उत्तर: सेना जब यात्रा या युद्ध के लिए जाती थी, तो उसके साथ निम्नलिखित आवश्यक चीजें ले जाई जाती थीं:
- हथियार: तलवारें, भाले, धनुष-बाण, गदा, ढाल आदि।
- रसोई का सामान: खाना पकाने के बर्तन, पीने के लिए पानी के बर्तन।
- खाने-पीने का सामान: अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल, पानी आदि।
- संचार के साधन: नगाड़े और शंख, जिन्हें बजाकर सेना को आदेश दिए जाते थे या हमले का संकेत दिया जाता था।
- अन्य सामान: तंबू (रहने के लिए), औषधियाँ (चोट लगने पर), जानवरों का चारा, और राजा व सेनापतियों के लिए विशेष सामान।
10. ग्रामवासी राजा के लिए क्या-क्या लेकर आते थे? (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-119)
उत्तर: जब राजा अपने दरबार के साथ किसी गाँव से गुजरता था या वहाँ ठहरता था, तो गाँव के लोग उसका स्वागत करने और सम्मान प्रकट करने के लिए निम्नलिखित चीजें भेंट के रूप में लाते थे:
- खाद्य पदार्थ: ताजा दही, गुड़, फल और कभी-कभी अन्य मौसमी पकवान।
- प्राकृतिक उपहार: सुगंधित फूलों के हार या गुलदस्ते।
- जानवरों के लिए: राजा और उसके सैनिकों के घोड़ों, हाथियों आदि के लिए हरा चारा या घास।
ये भेंट ग्रामवासियों की ओर से राजा के प्रति निष्ठा और आदर का प्रतीक होती थीं।
अन्यत्र (UP Board पाठ्यपुस्तक, पेज-120 से संबंधित प्रश्न)
1. भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार बढ़ाने में किसने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी?
उत्तर: अरब के व्यापारियों और नाविकों ने भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार को बढ़ाने में एक पुल का काम किया। वे भारत से मसाले, रत्न, कपड़े आदि ले जाते थे और यूरोप से अन्य वस्तुएँ लाते थे। उनकी समुद्री यात्राओं और व्यापारिक ज्ञान ने इस लंबे मार्ग को सक्रिय बनाए रखा।
2. इस्लाम नामक एक नए धर्म की शुरुआत कब और किसने की थी?
उत्तर: लगभग 1400 वर्ष पहले (सातवीं शताब्दी ईस्वी में), पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने अरब में इस्लाम नामक एक नए धर्म की शुरुआत की। यह धर्म एक ईश्वर (अल्लाह) में विश्वास और सभी मनुष्यों की समानता के सिद्धांत पर आधारित है।
3. इस्लाम धर्म अपने शुरुआत के सौ सालों में किन-किन देशों में फैल गया?
उत्तर: इस्लाम धर्म ने अपनी शुरुआत के पहले सौ वर्षों में तेजी से विस्तार किया और निम्नलिखित बड़े क्षेत्रों में फैल गया:
- उत्तरी अफ्रीका
- स्पेन (यूरोप)
- ईरान (फारस)
- भारत (विशेषकर सिंध प्रांत, जो अब पाकिस्तान में है)
4. मानचित्र 6 में उन रास्तों को ढूंढो जिनसे नाविक तथा सिपाही इस उपमहाद्वीप में आए होंगे?
उत्तर: (छात्र मानचित्र की सहायता से स्वयं करें। सामान्यतः निम्न मार्ग थे:)
- समुद्री मार्ग: अरब सागर के रास्ते, अरब और पश्चिमी एशिया के नाविक भारत के पश्चिमी तट (जैसे गुजरात, केरल) पर आते थे।
- स्थल मार्ग: उत्तर-पश्चिम की ओर से खैबर दर्रे आदि के रास्ते सिपाही और व्यापारी आते थे।
कल्पना करो
हर्षवर्धन की सेना अगले हफ्ते तुम्हारे गाँव आने वाली है। तुम्हारे माता-पिता इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। वर्णन करो कि वे क्या-क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हैं।
उत्तर: मेरे घर में बहुत हलचल है। मेरे माता-पिता राजा हर्षवर्धन और उनकी विशाल सेना के स्वागत की तैयारी में जुटे हुए हैं।
पिताजी माँ से कह रहे हैं, "सुनो, राजा की सेना के हाथियों और घोड़ों के लिए पर्याप्त हरा चारा इकट्ठा कर लो। मैं गाँव के अन्य लोगों के साथ मिलकर कुछ अतिरिक्त घास काटकर लाता हूँ।"
माँ जल्दी-जल्दी काम करते हुए बोल रही हैं, "हाँ, और मैं ताजा दही जमा रही हूँ। कल से ही दूध जमाना शुरू कर दूँगी ताकि राजा और उनके सैनिकों के लिए खट्टी-मीठी लस्सी बना सकूँ। साथ ही गुड़ भी तैयार रखना है। कहते हैं राजा को सादा गुड़ बहुत पसंद है।"
फिर वे दोनों मिलकर सोचते हैं कि फूलों के सुंदर हार कहाँ से लाएँ। पिताजी कहते हैं, "हमारे बगीचे के फूल काफी हैं, और पड़ोस से भी कुछ माँग लेंगे। राजा का स्वागत ताजे फूलों के मालाओं से करेंगे।" वे यह भी चिंता कर रहे हैं कि सेना के लिए पीने का साफ पानी और आराम करने की जगह का प्रबंध कैसे होगा।
प्रश्न-अभ्यास (पाठ्यपुस्तक से)
आओ याद करें
1. सही या गलत बताओ :
उत्तर:
- (क) गलत: हरिषेण ने गौतमीपुत्र श्री सातकर्णी की नहीं, बल्कि समुद्रगुप्त की प्रशंसा में प्रशस्ति लिखी थी।
- (ख) गलत: आर्यावर्त के शासकों को हराकर उनके राज्य मिला लिए गए थे। भेंट (कर) तो दक्षिणापथ के शासक लाते थे।
- (ग) सही: दक्षिणापथ में समुद्रगुप्त ने बारह शासकों को हराया था।
- (घ) गलत: तक्षशिला और मदुरै गुप्त साम्राज्य के अंतर्गत नहीं थे। ये क्रमशः उत्तर-पश्चिम और दक्षिण में स्थित थे।
- (ङ) गलत: ऐहोल (आधुनिक कर्नाटक में) चालुक्य वंश की राजधानी थी, पल्लवों की नहीं। पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम थी।
- (च) सही: दक्षिण भारत में स्थानीय सभाएँ (जैसे उर, सभा, नगरम्) सदियों तक गाँवों के प्रशासन में सक्रिय रहीं।
2. ऐसे तीन लेखकों के नाम बताओ, जिन्होंने हर्षवर्धन के बारे में लिखा।
उत्तर: हर्षवर्धन के बारे में जानकारी देने वाले तीन महत्वपूर्ण लेखक हैं:
- बाणभट्ट: ये हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे। इन्होंने संस्कृत में 'हर्षचरित' नामक ग्रंथ लिखा, जो हर्षवर्धन का जीवनचरित है।
- श्वैन त्सांग (युआन च्वांग): ये एक चीनी यात्री थे जो हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आए। उनकी यात्रा वृत्तांत 'सि-यू-की' में हर्षवर्धन के राज्य और समाज का विस्तृत वर्णन मिलता है।
- रवि कीर्ति: ये भी हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे, जिन्होंने राजा की प्रशंसा में कविताएँ लिखीं।
3. इस युग में सैन्य संगठन में क्या बदलाव आए?
उत्तर: इस युग में सैन्य संगठन में कुछ नए और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले:
- राजा अब स्थायी और सुव्यवस्थित सेना रखने लगे, जिसमें पैदल सैनिक, घुड़सवार, रथ और युद्ध हाथी शामिल होते थे।
- राजा कुछ शक्तिशाली सैन्य नेताओं (सेनापतियों) को भूमि दान में देने लगे। इन्हें सामंत कहा जाता था।
- ये सामंत अपनी दी गई भूमि से कर वसूल करते थे और उस पैसे से अपनी एक छोटी सेना तैयार रखते थे। जरूरत पड़ने पर वे राजा की मदद के लिए यह सेना भेजते थे।
- इस प्रणाली का नुकसान यह था कि जब केंद्रीय सत्ता (राजा) कमजोर पड़ती थी, तो यही सामंत अपने को स्वतंत्र घोषित करने की कोशिश करते थे, जिससे राज्य टुकड़ों में बँट जाता था।
4. इस काल की प्रशासनिक व्यवस्था में तुम्हें क्या-क्या नई चीजें दिखती हैं?
उत्तर: इस काल की प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ नए और दिलचस्प पहलू सामने आए:
- आनुवंशिक पद: कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार में चलने लगे। जैसे, हरिषेण महादंडनायक (मुख्य न्यायाधीश) थे, जैसे उनके पिता थे।
- एक व्यक्ति, कई भूमिकाएँ: एक ही व्यक्ति अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभालता था। उदाहरण के लिए, हरिषेण महादंडनायक होने के साथ-साथ एक मंत्री (कुमारामात्य) और युद्ध-शांति मामलों का मंत्री (संधिविग्रहिक) भी थे।
- स्थानीय नेताओं की भूमिका: शहरों और कस्बों के प्रशासन में वहाँ के प्रमुख लोगों, जैसे धनी व्यापारी (नगरश्रेष्ठी), व्यापारिक काफिलों के मुखिया (सार्थवाह), मुख्य शिल्पकार (प्रथम कुलिक) और लिपिकों के प्रधान (कायस्थ) की महत्वपूर्ण भागीदारी होती थी।
आओ चर्चा करें
5. तुम्हें क्या लगता है कि समुद्रगुप्त की भूमिका अदा करने के लिए अरविन्द को क्या-क्या करना पड़ेगा?
उत्तर: यदि अरविन्द नाटक में समुद्रगुप्त की भूमिका निभा रहा है, तो उसे निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होगा:
- शाही व्यक्तित्व: उसे राजा जैसी गरिमा और आत्मविश्वास के साथ चलना, बोलना और बैठना होगा। शाही पोशाक (मुकुट, आभूषण आदि) पहननी होगी।
- वीर योद्धा का अभिनय: उसे युद्ध के दृश्यों में बहादुरी से लड़ते हुए, तलवार चलाते हुए और विजयी होते हुए दिखाना होगा।
- कला प्रेमी राजा: समुद्रगुप्त 'कविराज' भी कहलाते थे। इसलिए अरविन्द को वीणा बजाते हुए या कविता पाठ करते हुए भी दिखाना होगा।
- भावनाएँ व्यक्त करना: विजय पर गर्व, दान देते समय उदारता और न्याय करते समय गंभीरता जैसी भावनाएँ अभिव्यक्त करनी होंगी।
6. क्या प्रशस्तियों को पढ़कर आम लोग समझ लेते होंगे? अपने उत्तर के कारण बताओ।
उत्तर: नहीं, आम लोग प्रशस्तियों को पढ़कर शायद ही समझ पाते होंगे