UP Board Class 6 History 12. इमारतें: चित्र तथा किताबें is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 6 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर : यह एक क्रियात्मक प्रश्न है। छात्रों को स्वयं पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 91 पर दिए गए चित्र को देखकर मंदिर और स्तूप के निर्माण के विभिन्न चरणों का चित्र बनाना है। इसमें आधार तैयार करना, दीवारें खड़ी करना, गुंबद या शिखर बनाना और अंतिम सजावट जैसे चरण शामिल हो सकते हैं।
उत्तर : हाँ, कालिदास को निश्चित रूप से एक प्रकृतिप्रेमी कहा जा सकता है। उनकी रचनाओं, विशेषकर 'ऋतुसंहार' और 'मेघदूत' में, प्रकृति का बहुत ही सुंदर और जीवंत वर्णन मिलता है। वे ऋतुओं के परिवर्तन, पहाड़ों, नदियों, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों का इतने कलात्मक ढंग से वर्णन करते हैं कि यह स्पष्ट हो जाता है कि उन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था और वे उसके सूक्ष्म निरीक्षक थे।
उत्तर : यह एक शोधपरक प्रश्न है। छात्रों को अपने राज्य या क्षेत्र में प्रचलित रामायण या महाभारत के किसी विशेष रूपांतर, लोकनाट्य (जैसे रामलीला), गायन शैली या नृत्य नाटिका (जैसे यक्षगान, तेरुक्कूट्टु) के बारे में जानकारी एकत्रित करनी है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में रामलीला, तमिलनाडु में कंब रामायण और केरल में कथकली में इन कथाओं का मंचन प्रसिद्ध है।
उत्तर : पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 130 पर दिए गए चित्र में बंदरों के राजा और उसकी प्रजा के साथ मानव राजा को आम खाते हुए दिखाया गया है। यह कहानी का वह हिस्सा है जहाँ दोनों राजाओं के बीच मित्रता हो गई है। इस हिस्से को शायद इसलिए चुना गया होगा क्योंकि यह संदेश देता है कि एक अच्छा शासक केवल शक्ति का प्रयोग नहीं करता, बल्कि दूसरों के साथ मिल-जुलकर, उदारता और मित्रता के साथ रहना भी जानता है। यह शांति और सहअस्तित्व का प्रतीक है।
उत्तर : यह एक स्वयं अध्ययन का प्रश्न है। छात्रों को रोमन संख्याओं (I, V, X, L, C, D, M) के बारे में और जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए। उन्हें पता लगाना चाहिए कि रोमन लोग जोड़-घटाव के नियमों (जैसे IV का मतलब 5-1=4) का उपयोग करके बिना शून्य के बड़ी संख्याएँ कैसे लिखते थे। यह भी देखना चाहिए कि आज भी घड़ियों, पुस्तकों के अध्यायों या महत्वपूर्ण समारोहों (जैसे ओलंपिक) में रोमन अंकों का प्रयोग कहाँ-कहाँ होता है।
कागज़ आज हमारे रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का हिस्सा बन गया है। जो किताबें हम पढ़ते हैं वे कागज़ पर छपी होती हैं, उसी तरह लिखने के लिए भी हम कागज़ का ही उपयोग करते हैं। कागज का आविष्कार करीब 1900 साल पहले कोई लून नाम के व्यक्ति ने चीन में किया। उसने पौधों के रेशों, कपड़ों, रस्सियों और पेड़ की छालों को पीट-पीट कर लुगदी बनाकर उसे पानी में भिगो दिया। फिर उस लुगदी को दबाकर उसका पानी निचोड़ा और तब सुखा कर कागज़ बनाया। आज भी हाथ से कागज़ बनाने के लिए इसी विधि को अपनाया जाता है।
कागज बनाने की तकनीक को सदियों तक गुप्त रखा गया। करीब 1400 साल पहले यह कोरिया तक पहुँची। | इसके तुरंत बाद ही यह जापान तक फैल गई। करीब 1800 साल पहले यह बगदाद में पहुँची। फिर बगदाद से यह यूरोप, अफ्रीका और एशिया के अन्य भागों में फैली। इस उपमहाद्वीप में भी कागज़ की जानकारी बगदाद से ही आई।
उत्तर : कागज का आविष्कार लगभग 1900 वर्ष पहले (ईस्वी सन् 105 के आसपास) चीन में काई लून नामक एक दरबारी अधिकारी ने किया था। हालाँकि उससे पहले भी चीन में कागजनुमा सामग्री बनाई जाती थी, लेकिन काई लून ने इसे एक व्यवस्थित और सुधरी हुई विधि से बनाने का श्रेय प्राप्त है।
उत्तर : काई लून ने कागज बनाने के लिए सरल किंतु प्रभावशाली विधि अपनाई। उन्होंने सन के रेशे, पुराने कपड़े, रस्सियाँ और शहतूत जैसे पेड़ों की छाल ली। इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह पीटकर और फेंटकर एक मुलायम लुगदी बनाई। इस लुगदी को पानी के टैंक में डालकर भिगोया गया। फिर एक बारीक जालीदार सांचे में इस मिश्रण को फैलाकर पानी निचोड़ा गया और सुखाकर कागज की पतली चादर तैयार की गई। हाथ से कागज बनाने की आधुनिक विधि भी इसी मूल सिद्धांत पर आधारित है।
उत्तर : प्राचीन भारत में कागज के आविष्कार से पहले, पांडुलिपियाँ प्राकृतिक सामग्रियों पर तैयार की जाती थीं। मुख्य रूप से दो चीजों का उपयोग होता था:
1. ताड़पत्र (पत्ते): ताड़ के पेड़ के लंबे पत्तों को विशेष प्रक्रिया से तैयार करके उन पर लिखा जाता था।
2. भोजपत्र: हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले भूर्ज (भोज) नामक पेड़ की छाल को पतली परतों में उतारकर चमकदार और टिकाऊ पत्र बनाया जाता था, जिस पर लिखा जाता था।
इन्हीं पर लेखक लिखते थे और फिर इन पन्नों को एक धागे से बाँधकर पुस्तक का रूप दिया जाता था।
उत्तर : यह एक कल्पनात्मक प्रश्न है। छात्र स्वयं अपनी कल्पना से वर्णन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए: "मैं एक विशाल पत्थर के मंदिर के मंडप में बैठा हूँ। मेरे चारों ओर सुंदर नक्काशीदार खंभे हैं जिन पर देवी-देवताओं, फूलों और जानवरों की आकृतियाँ बनी हैं। सामने गर्भगृह का द्वार है जहाँ से दीपक की रोशनी झिलमिला रही है। हवा में घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तों के मंत्रोच्चारण की आवाज़ गूँज रही है। मंडप की छत ऊँची और शांतिपूर्ण है। बाहर प्रांगण में पीपल का एक बड़ा पेड़ है और कुछ लोग वहाँ बैठकर आराम कर रहे हैं।"
उत्तर :
शिखर – गर्भगृह के ऊपर लंबाई में निर्माण
मण्डप – मंदिर में लोगों के इकट्ठा होने की जगह
गर्भगृह – देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित करने की जगह
प्रदक्षिणापथ – स्तूप के चारों तरफ वृत्ताकार पथ
उत्तर :
(क) आर्यभट्ट एक बड़े गणितज्ञ थे।
(ख) पुराणों में देवी-देवताओं की कहानियाँ मिलती हैं।
(ग) वाल्मीकि की संस्कृत रामायण का लेखक माना जाता है।
(घ) शिलप्पदिकारम और मणिमेखलै दो तमिल महाकाव्य हैं।
उत्तर :
| अध्याय | धातुएँ | धातु से बनी वस्तुएँ |
|---|---|---|
| अध्याय 4: आरंभिक नगर | ताँबा, काँसा, सोना, चाँदी, सीसा | आभूषण, बर्तन, औजार, हथियार, मुहरें, खिलौने (जैसे- ताँगे वाले बैल) |
| अध्याय 5: क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें | लोहा, सोना | हथियार (तलवारें, भाले), औजार, हल के फाल, सोने के आभूषण एवं बर्तन। |
| अध्याय 12: इमारतें, चित्र तथा किताबें | लोहा | दिल्ली का लौह स्तंभ (जंगरहित लोहे का बना)। |
उत्तर : पृष्ठ 130 की बंदर राजा की कहानी में दिखाया गया राजा, अध्याय 6 (नए प्रश्न, नए विचार) और 11 (नए साम्राज्य और राज्य) में वर्णित मानव राजाओं के समान ही है।
समानताएँ:
1. प्रजा का हितैषी: जिस तरह अशोक (अध्याय 8/11) अपनी प्रजा के कल्याण की चिंता करता था, उसी तरह बंदर राजा ने अपनी प्रजा को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी।
2. बुद्धिमान और योजनाकार: वह अर्जुन (महाजनपदों के शासक) या चंद्रगुप्त मौर्य जैसा चतुर था, जिसने नदी पार करने की एक बुद्धिमानी भरी योजना बनाई।
3. वीरता: वह एक योद्धा राजा की तरह बहादुर था।
भिन्नता:
एकमात्र बड़ा अंतर यह है कि वह एक बंदरों का राजा था, जबकि अन्य सभी मानव राजा थे। इस कहानी के माध्यम से राजा के आदर्श गुणों को एक पशु चरित्र के जरिए समझाया गया है।
उत्तर : महाभारत से एक शिक्षाप्रद कहानी: एकलव्य की गुरुभक्ति
एकलव्य निषाद (शिकारी) समुदाय का एक वीर और प्रतिभाशाली बालक था। उसकी धनुर्विद्या सीखने की तीव्र इच्छा थी। वह गुरु द्रोणाचार्य के पास गया, जो हस्तिनापुर में कौरव और पांडव राजकुमारों को शिक्षा देते थे। लेकिन द्रोणाचार्य ने एकलव्य को शिष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह राजकुल से नहीं था।
निराश होकर भी एकलव्य ने हार नहीं मानी। उसने जंगल में मिट्टी की द्रोणाचार्य की एक मूर्ति बनाई और उसे ही अपना गुरु मानकर कठोर साधना से धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगा। समर्पण और लगन से वह इतना महान धनुर्धर बन गया कि उसकी प्रतिभा की चर्चा सभी जगह होने लगी।
एक दिन जब द्रोणाचार्य अपने शिष्यों के साथ उस जंगल से गुजर रहे थे, तो एक कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनकर अर्जुन ने देखा कि कुत्ते का मुँह बिना चोट पहुँचाए, बाणों से इस कुशलता से बंद कर दिया गया था कि वह भौंक भी नहीं सकता था। यह देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने एकलव्य को ढूंढ निकाला।
द्रोणाचार्य ने पूछा, "तुम्हारा गुरु कौन है?" एकलव्य ने विनम्रता से मिट्टी की मूर्ति की ओर इशारा करते हुए कहा, "आप ही मेरे गुरु हैं।" द्रोणाचार्य प्रसन्न तो हुए लेकिन उन्हें अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को दिए वचन (तुम्हें संसार का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाऊँगा) की याद आई। उन्होंने एकलव्य से गुरुदक्षिणा में उसका दाएँ हाथ का अँगूठा माँग लिया। निष्ठावान एकलव्य ने बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत अपना अँगूठा काटकर गुरु के चरणों में अर्पित कर दिया।
शिक्षा: यह कहानी अटूट गुरुभक्ति, समर्पण, दृढ़ संकल्प और स्वयं के प्रयास (Self-learning) की महानता सिखाती है। साथ ही, यह उस समय की सामाजिक असमानता (जातिगत भेदभाव) की ओर भी इशारा करती है।
उत्तर : इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों को सभी के लिए, विशेषकर दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य (Accessible) बनाने के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ होनी चाहिए:
1. रैंप (ढलान): सीढ़ियों के साथ-साथ चिकने और चौड़े रैंप का निर्माण, ताकि व्हीलचेयर आसानी से ऊपर-नीचे जा सके।
2. हैंडरिल/रेलिंग: रैंप और सीढ़ियों के किनारे मजबूत रेलिंग लगी होनी चाहिए।
3. विशेष शौचालय: व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए चौड़े दरवाजे और अंदर पर्याप्त जगह वाले शौचालय।
4. ब्रैल लिपि सूचना पट्ट: नेत्रहीनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी ब्रैल लिपि में उपलब्ध हो।
5. ऑडियो गाइड: देखने में असमर्थ लोगों के लिए स्मारक का विवरण सुनने की सुविधा।
6. पार्किंग: प्रवेश द्वार के निकट विशेष रूप से चिह्नित दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पार्किंग स्थल।
7. चिकना फर्श: अंदर फर्श फिसलनरहित और समतल होना चाहिए।
8. सहायक कर्मचारी: जरूरत पड़ने पर मदद करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हों।
उत्तर : कागज हमारे दैनिक जीवन में अनेक रूपों में उपयोग होता है:
1. लेखन एवं मुद्रण: किताबें, अखबार, पत्रिकाएँ, कॉपी, नोटबुक, फॉर्म।
2. पैकेजिंग: दवाई के डिब्बे, खाद्य सामग्री के रैपर, दूध के कार्टन, सामान लपेटने का कागज, थैलियाँ।
3. सफाई: टिशू पेपर, टॉयलेट पेपर, नैपकिन, किचन रोल।
4. सजावट: गिफ्ट रैपिंग पेपर, ग्रीटिंग कार्ड, पोस्टर, क्राफ्ट के सामान (जैसे कागज के फूल)।
5. व्यक्तिगत उपयोग: पैसे (नोट), टिकट, फोटो, मैप (नक्शे)।
6. घरेलू उपयोग: फिल्टर पेपर (कॉफी), बर्तन साफ करने वाले पेपर।
7. विशेष उपयोग: लिटमस पेपर (विज्ञान), सैनिटरी नैपकिन, शौचालय सीट कवर।
उत्तर : मैं महरौली, दिल्ली को देखना चुनूंगा।
कारण:
1. लौह स्तंभ: मैं प्राचीन भारतीय धातुकर्म की अद्भुत कुशलता का प्रत्यक्ष दर्शन करना चाहूंगा। लगभग 1600 साल पुराना यह स्तंभ आज तक जंग से मुक्त है, जो एक आश्चर्य है।
2. कुतुबमीनार: यह विश्व की सबसे ऊँची ईंटों से बनी मीनार है। इसकी ऊँचाई, सुंदर नक्काशी और ऐतिहासिक महत्व मुझे आकर्षित करते हैं।
3. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद: यह दिल्ली में निर्मित पहली मस्जिद है और इसके निर्माण में मंदिरों के भग्नावशेषों का उपयोग किया गया था, जो इतिहास की परतों को दर्शाता है।
4. एक ही परिसर में विविधता: महरौली का कुतुब परिसर एक ही स्थान पर विभिन्न कालखंडों और शैलियों की वास्तुकला का अद्भुत संग्रह प्रस्तुत करता है, जिससे इतिहास को समझने में बहुत मदद मिलेगी।
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