UP Board Class 6 History 5. क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 6 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: महापाषाण कब्रों के निर्माण का सही क्रम इस प्रकार था:
1. सबसे पहले ज़मीन में गड्ढे खोदना पड़ता था।
2. फिर उस गड्ढे में मरे हुए व्यक्ति को दफ़नाना होता था।
3. इसके बाद, दूर से शिलाखंडों को ढोकर लाना पड़ता था।
4. अंत में, उन बड़े पत्थरों को तराशकर कब्र के चारों ओर लगाया जाता था।
उत्तर: नहीं, हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे का प्रयोग नहीं जानते थे। उनके औज़ार और हथियार मुख्य रूप से ताँबे और काँसे के बनते थे। लोहे का प्रयोग भारत में हड़प्पा सभ्यता के बाद के काल में शुरू हुआ।
उत्तर: हाँ, यह शव संभवतः किसी सरदार या प्रमुख व्यक्ति का ही था। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- यह घर बस्ती के बीचों-बीच स्थित था और आम घरों से बड़ा था, जो उच्च सामाजिक दर्जे का संकेत देता है।
- शव को दफ़नाने के लिए चार पैरों वाले एक बड़े मिट्टी के संदूक का प्रयोग किया गया था, जो विशेष सम्मान दर्शाता है।
- साथ ही, शव के साथ अनाज, मवेशियों की हड्डियाँ और बर्तन जैसी वस्तुएँ रखी गई थीं, जो यह बताता है कि यह व्यक्ति समृद्ध था।
उत्तर: प्राचीन चिकित्सक चरक ने शरीर की विस्तृत जानकारी इकट्ठा करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए होंगे:
- वे शवों की चीर-फाड़ (पोस्टमार्टम) करके अंदरूनी अंगों का अध्ययन करते होंगे।
- युद्ध या दुर्घटना में घायल सैनिकों के घावों का निरीक्षण करके हड्डी, मांस और रक्त के बारे में जानकारी प्राप्त की होगी।
- उन्होंने लंबे समय तक रोगियों का निरीक्षण और इलाज करके अनुभव से भी बहुत कुछ सीखा होगा।
ऋग्वेद के राजा और चीन के राजाओं के बीच कोई एक फ़र्क बताइए।
उत्तर: ऋग्वेद काल के राजा अक्सर छोटी-छोटी बस्तियों या कबीलों के प्रमुख होते थे और उनके पास बड़े महल या शहर नहीं होते थे। जबकि लगभग 3500 साल पहले चीन के राजा शहरों में बने विशाल महलों में रहते थे और उनके पास बेशुमार दौलत तथा नक्काशीदार काँसे के बर्तन जैसी कीमती वस्तुएँ होती थीं।
उत्तर: पूरी बस्ती में एक उदासी छाई हुई है। मेरे माता-पिता और अन्य लोग सरदार के घर के आँगन में उसकी कब्र के लिए गहरा गड्ढा खोद रहे हैं। औरतें अंतिम संस्कार के भोजन की तैयारी में जुटी हैं। मिट्टी के चूल्हों पर बड़े-बड़े बर्तन चढ़े हैं। उनमें जौ, चावल और दाल पकाई जा रही है। कुछ लोग बकरे का मांस भी पका रहे हैं क्योंकि सरदार को यह पसंद था। साथ ही, ताज़े फल जैसे बेर और आंवला भी इकट्ठे किए जा रहे हैं। यह सारा भोजन और फल मिट्टी के बर्तनों में रखकर सरदार के शव के साथ दफ़नाया जाएगा, ताकि उसे अगले जीवन में भूख न लगे।
उत्तर:
सुक्त – अच्छी तरह से बोला गया
रथ – युद्ध में प्रयोग किया जाता था
यज्ञ – अनुष्ठान
दास – गुलाम
महापाषाण – सजाए गए पत्थर
उत्तर:
(क) मालिक की सेवा करने के लिए दासों का इस्तेमाल किया जाता था।
(ख) दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व भारत और कश्मीर में महापाषाण पाए जाते हैं।
(ग) जमीन पर गोले में लगाए गए पत्थर या चट्टान कब्र के चिन्ह का काम करते थे।
(घ) पोर्ट-होल (छिद्र) का इस्तेमाल पत्थरों से बने कमरे (चैम्बर) में जाने के लिए होता था।
(ड) इनामगाँव के लोग चावल, जौ, दाल, फल और मांस खाते थे।
उत्तर: आज की किताबें और ऋग्वेद में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
- रचना और संरक्षण: ऋग्वेद की रचना लगभग 3500 साल पहले हुई थी और इसे सैकड़ों वर्षों तक मौखिक रूप से याद करके सुनाया जाता था। बहुत बाद में इसे लिखा गया। जबकि आज की किताबें सीधे लिखी और छापी जाती हैं।
- उपयोग: ऋग्वेद मुख्य रूप से यज्ञों और अनुष्ठानों में पढ़े जाने वाले मंत्रों का संग्रह था। आज की किताबें ज्ञान, मनोरंजन या शिक्षा के लिए पढ़ी जाती हैं।
- प्रसार: ऋग्वेद का प्रसार सीमित था और इसे केवल ब्राह्मण ही पढ़ सकते थे। आज की किताबें हर किसी के लिए सुलभ हैं।
उत्तर: पुरातत्त्वविद् कब्रों से मिली वस्तुओं के प्रकार, गुणवत्ता और मात्रा के आधार पर सामाजिक अंतर का पता लगाते हैं। उदाहरण के लिए:
- समृद्ध या शक्तिशाली व्यक्ति की कब्र में सोने-चाँदी के आभूषण, कीमती पत्थर, ताँबे या काँसे के हथियार और अच्छे बर्तन मिलते हैं।
- साधारण या गरीब व्यक्ति की कब्र में केवल मिट्टी के साधारण बर्तन या बहुत कम वस्तुएँ मिलती हैं।
- कब्र का आकार और स्थान भी महत्वपूर्ण है। बड़ी और बस्ती के केंद्र में बनी कब्र अक्सर महत्वपूर्ण लोगों की होती थी।
उत्तर: राजा और दास के जीवन में जमीन-आसमान का अंतर था:
- राजा: राजा सर्वोच्च शासक होता था। उसके पास अपार धन, सेना और सुख-सुविधाएँ होती थीं। वह यज्ञ करवाता था और युद्ध का नेतृत्व करता था।
- दास/दासी: दास युद्ध में बंदी बनाए गए लोग होते थे। उन्हें मालिक की निजी संपत्ति समझा जाता था। उन्हें बिना मजदूरी के सभी तरह के कठिन काम करने पड़ते थे, जैसे खेत जोतना, पानी भरना या राजा के महल की सफाई करना। उनके पास कोई अधिकार नहीं होते थे।
उत्तर: (छात्र अपने विद्यालय के पुस्तकालय में देखकर स्वयं करें। कुछ उदाहरण इस प्रकार हो सकते हैं):
1. भगवद् गीता
2. रामचरितमानस
3. गुरु ग्रंथ साहिब
4. बाइबिल की कहानियाँ
5. भारत के प्रमुख धर्म
उत्तर: (छात्र स्वयं करें। उदाहरण के लिए):
कविता: "लोकगीत" – सोहन लाल द्विवेदी
"माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय..."
याद करने का तरीका: मैंने यह कविता पहले पुस्तक में पढ़ी, फिर कक्षा में शिक्षक से सुनकर और बार-बार दोहराकर याद की।
उत्तर: (छात्र अपने परिवार और आस-पास के लोगों के आधार पर स्वयं तालिका बनाएँ। एक उदाहरण नीचे दिया गया है):
| नाम | कार्य (पेशा) | भाषा | अन्य (जाति/क्षेत्र) |
|---|---|---|---|
| श्रीमती रेखा शर्मा (महिला) | शिक्षिका | हिंदी, अंग्रेजी | ब्राह्मण, उत्तर भारत |
| श्री अमर सिंह (पुरुष) | किसान | हरियाणवी | जाट, हरियाणा |
| सुश्री प्रिया इलियास (महिला) | डॉक्टर | मलयालम, अंग्रेजी | केरल |
| श्री राजेश कुमार (पुरुष) | दुकानदार | भोजपुरी, हिंदी | बनिया, बिहार |
| सुश्री मरीना कोस्ता (महिला) | वकील | अंग्रेजी, कोंकणी | गोवा |
| श्री दीपक मेहरा (पुरुष) | इंजीनियर | पंजाबी, हिंदी | पंजाब |
जोड़ने योग्य बात: आज के समय में वर्गीकरण केवल कार्य या भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा, आय और रहन-सहन के आधार पर भी होता है, जो ऋग्वेद काल से भिन्न है।
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