UP Board Class 6 Science 5. पदार्थो का पृथक्करण is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 6 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: मिश्रण के अवयवों को अलग करने की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
उदाहरण:
उत्तर: निष्पावन वह विधि है जिसमें हवा के झोंकों की सहायता से मिश्रण के हल्के और भारी घटकों को अलग किया जाता है। हवा के झोंके से हल्का पदार्थ (जैसे भूसा) उड़कर दूर चला जाता है, जबकि भारी पदार्थ (जैसे अनाज के दाने) नीचे गिर जाते हैं।
उपयोग: इसका मुख्य उपयोग कृषि में किया जाता है। किसान अनाज (जैसे गेहूँ, चावल) को भूसे से अलग करने के लिए निष्पावन विधि का प्रयोग करते हैं। वे अनाज-भूसे के मिश्रण को ऊँचाई से गिराते हैं, हवा भूसे को उड़ा ले जाती है और साफ अनाज नीचे एकत्र हो जाता है।
उत्तर: दालों से भूसे और धूल के कणों को अलग करने के लिए मैं निम्नलिखित सरल विधियाँ अपनाऊँगा:
उत्तर: चालन वह प्रक्रिया है जिसमें अलग-अलग आकारों के कणों वाले मिश्रण को एक छलनी से गुजारा जाता है। छलनी के छोटे-छोटे छेदों से होकर बारीक कण नीचे गिर जाते हैं, जबकि बड़े आकार के कण छलनी में ही ऊपर रह जाते हैं। इस तरह मिश्रण के घटकों को उनके आकार के आधार पर अलग किया जाता है।
उपयोग:
उत्तर: रेत और जल के मिश्रण को पृथक करने के लिए मैं इन चरणों का पालन करूँगा:
उत्तर: हाँ, आटे और चीनी के मिश्रण से चीनी को अलग करना संभव है। चूँकि चीनी के क्रिस्टल आटे के कणों से बड़े होते हैं, इसलिए हम चालन विधि का उपयोग कर सकते हैं।
विधि: मिश्रण को एक ऐसी छलनी से गुजारेंगे जिसके छेद चीनी के क्रिस्टलों से छोटे हों, लेकिन आटे के कणों से बड़े हों। जब हम मिश्रण को छलनी में डालकर हिलाएँगे, तो बारीक आटा छलनी से नीचे गिर जाएगा, जबकि चीनी के बड़े क्रिस्टल छलनी में ही ऊपर रह जाएँगे। इस प्रकार चीनी अलग हो जाएगी।
उत्तर: गंदले (पंकिल) पानी से साफ पानी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है:
(क) धान के दानों को डंडियों से प्रथक करने की विधि को थ्रेशिंग कहते हैं।
(ख) यदि एक कपड़े पर दूध को उड़ेलते हैं तो मलाई उस पर रह जाती है। पृथक्करण की यह प्रक्रिया निस्यंदन कहलाती है।
(ग) समुद्र के जल से नमक वाष्पन प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
(घ) जब पंकिल जल को पूरी रात एक बाल्टी में रखा जाता है तो अशुद्धियाँ तली में बैठ जाती हैं। इसके पश्चात् स्वच्छ जल को ऊपर से पृथक कर लेते हैं। इसमें उपयोग होने वाली पृथक्करण की प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं।
(क) दूध और जल के मिश्रण को निस्यंदन द्वारा पृथक किया जा सकता है। (असत्य) (कारण: दूध और पानी दोनों ही तरल हैं और एक-दूसरे में घुलनशील हैं, इसलिए इन्हें निस्यंदन से नहीं अलग किया जा सकता।)
(ख) नमक तथा चीनी के मिश्रण को निष्पावन द्वारा पृथक कर सकते हैं। (असत्य) (कारण: नमक और चीनी दोनों के कण समान रूप से भारी होते हैं, हवा के झोंके से अलग नहीं होंगे।)
(ग) चाय की पत्तियों को चाय से पृथक्करण निस्यंदन द्वारा किया जा सकता है। (सत्य) (कारण: चाय की पत्तियाँ ठोस हैं और चाय तरल है, इसलिए छन्नी या जाली से छानकर आसानी से अलग किया जा सकता है।)
(घ) अनाज और भूसे का पृथक्करण निस्तारण प्रक्रम द्वारा किया जा सकता है। (असत्य) (कारण: अनाज और भूसा दोनों ठोस हैं और पानी में नहीं डूबते। इन्हें अलग करने के लिए निष्पावन विधि का उपयोग किया जाता है, निस्तारण का नहीं।)
उत्तर: हमें बर्फ डालने से पहले ही चीनी को पानी में घोल लेना चाहिए।
कारण: चीनी की घुलनशीलता तापमान पर निर्भर करती है। गर्म या सामान्य तापमान वाले पानी में चीनी अधिक और जल्दी घुलती है। यदि हम पहले बर्फ डाल देंगे, तो पानी का तापमान कम हो जाएगा। ठंडे पानी में चीनी कम मात्रा में और धीरे-धीरे घुलती है।
इसलिए, बर्फ डालने से पहले चीनी घोलने पर हम अधिक मात्रा में चीनी घोल पाएँगे और शिकंजी अधिक मीठी बनेगी। बाद में बर्फ डालने पर शिकंजी ठंडी तो हो जाएगी, लेकिन उसमें कम चीनी ही घुल पाएगी।
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