UP Board class 5 Hindi 10. एक दिन की बादशाहत is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
अब्बा ने यह सोचा कि हर रोज़ बड़े लोग ही इन बच्चों को आदेश देते रहते हैं। एक दिन के लिए यह अधिकार बच्चों को भी मिल जाए, तो क्या हर्ज है? इसलिए उन्होंने आरिफ़ की बात स्वीकार कर ली।
* आरिफ़ ने सोचा होगा – "आज का दिन तो बहुत मज़ेदार था! हमने जो चाहा वही किया। काश ऐसा हर हफ्ते एक दिन होता।"
* अम्मा ने सोचा होगा – "बच्चों की भी अपनी इच्छाएँ होती हैं। उनकी बात कभी-कभी सुन लेनी चाहिए और उन्हें थोड़ी आज़ादी भी देनी चाहिए।"
* दादी ने सोचा होगा – "हम रोज़ बच्चों पर इतनी पाबंदियाँ लगाते हैं, शायद यह ठीक नहीं है। उनका बचपन भी तो खुलकर जीने का हक़ है।"
अगर हमें घर में एक दिन के लिए सारे अधिकार मिल जाएँ, तो हम यह करेंगे – सबसे पहले अपनी पसंद का खाना (जैसे पिज़्ज़ा, नूडल्स) बनवाएँगे। पूरा दिन खेलने और कार्टून देखने का आनंद लेंगे। होमवर्क बिल्कुल नहीं करेंगे और सबको हमारी बात माननी होगी!
बिना शिकायत किए करने चाहिए थे: रात को समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना, अपना सामान समेटकर रखना, धीमी आवाज़ में बात करना और खुद नहा-धो लेना। ये सब अच्छी आदतें हैं।
मना कर देना चाहिए थे: बिल्कुल बेस्वाद या बिना मन का खाना खाने, बहुत पुराने या बदसूरत कपड़े पहनने और बिना वजह बाहर जाने से रोकने के लिए मना कर सकते थे।
मेरे विचार से आरिफ़ और सलीम ऐसी तरकीबें सोचते होंगे –
1. काश हमारे पास एक जादू की छड़ी होती जिससे हम सबको अपना कहना मनवा सकते।
2. क्यों न हम बड़ों से कह दें कि आज हम छोटे हैं और आप बड़े, इसलिए आप हमारी सभी बात मानिए।
3. शायद वे सोचते होंगे कि अगर हम ज़ोर-ज़ोर से रोएँगे तो हमारी मन्नत पूरी हो जाएगी।
उनकी इच्छा उस तरकीब से पूरी हुई जब उन्होंने सीधे अब्बा से कहा कि आज के लिए सारे बड़ों के अधिकार हमें दे दो और आप सब हमारे आदेश मानो। यह सुनकर अब्बा हँस पड़े और उनकी बात मान ली।
हाँ, मैं एक बेहतर तरकीब सुझा सकता हूँ। उन्हें बड़ों से प्यार से बात करके समझाना चाहिए था कि "अम्मी-अब्बा, हम भी कभी-कभी अपनी मर्ज़ी से काम करना चाहते हैं। क्या आप हफ्ते में एक दिन हमारी कुछ इच्छाएँ पूरी कर देंगे?" ऐसा कहने से बड़े ज़रूर समझते।
अम्मी के अधिकार आरिफ़ और सलीम ने छीन लिए थे, क्योंकि उस दिन वे ही घर के 'बादशाह' बने हुए थे।
नहीं, उन्हें अम्मी के अधिकार इस तरह छीनने नहीं चाहिए थे। यह तो सिर्फ एक खेल था। असल ज़िंदगी में माँ-बाप के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। हाँ, बच्चों की बात सुनने और उन्हें समझने का अधिकार अवश्य माँ-बाप को देना चाहिए।
उन्होंने अम्मी से यह अधिकार छीने होंगे – घर के कामों के बारे में आदेश देने का अधिकार, खाना क्या बनेगा यह तय करने का अधिकार, बच्चों को डाँटने-समझाने का अधिकार और टीवी देखने का समय तय करने का अधिकार।
बादशाहत का मतलब है पूरी तरह का शासन या राज करना। जैसे एक बादशाह अपने राज्य में सबसे बड़ा होता है, उसकी हर बात कानून होती है और सबको उसका हुक्म मानना पड़ता है। यानी किसी चीज़ पर पूरा नियंत्रण और अधिकार होना।
इस कहानी का नाम "एक दिन की बादशाहत" इसलिए रखा गया है क्योंकि आरिफ़ और सलीम को पूरे एक दिन के लिए घर पर राज करने यानी 'बादशाह' बनने का मौका मिला था। उनकी चलती थी और सबको उनकी सुननी पड़ती थी।
मेरे दिए हुए शीर्षक: "जब बच्चे बने बादशाह" या "मनचाहा दिन"।
उस दिन बच्चों को बड़ों वाले काम करने पड़े, जैसे आदेश देना, फैसले लेना। इसलिए आरिफ़ और सलीम ही असली बादशाह बन गए थे। हालाँकि, काम करवाने की ज़िम्मेदारी होने के कारण वे थोड़ा परेशान भी हुए, लेकिन फिर भी सारे अधिकार उनके पास थे।
इस कहानी में अंडे और मक्खन को 'तर माल' कहा गया है। यानी ऐसी चीज़ें जो स्वादिष्ट, कीमती और खास मौकों पर खाई जाती हैं।
अंडे-मक्खन के अलावा मिठाइयाँ, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, समोसे, पकौड़े और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीज़ों को भी 'तर माल' कहा जा सकता है। ये सब हम रोज़ नहीं खाते, बल्कि कभी-कभार खाते हैं।
हमें ये चीज़ें 'तर माल' नहीं लगतीं – रोटी, दाल, चावल, सादी सब्ज़ी, दूध और दलिया। ये रोज़ाना खाई जाने वाली सामान्य और ज़रूरी खाने की चीज़ें हैं।
हम इन रोज़मर्रा की चीज़ों को "आम खाना" या "साधारण भोजन" कह सकते हैं। इन्हें "जीवन का आधार" भी कहा जा सकता है क्योंकि ये हमें ताकत देती हैं।
मुझे मेरी नीले रंग की जीन्स और उसके साथ पहनने वाली लाल रंग की टी-शर्ट सबसे अच्छी लगती है। यह मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि इसका रंग बहुत चमकीला है, यह बहुत आरामदायक है और इसे पहनकर मैं खेल भी सकता हूँ और घूमने भी जा सकता हूँ।
(क) पहनने की चीज़ें: टूटी-फटी चप्पल, बहुत टाइट जूते, ऊनी स्वेटर (गर्मी में)।
(ख) खाने-पीने की चीज़ें: कड़वी दवाई, बासी खाना, बहुत ज़्यादा तेल-मसाले वाला खाना।
(ग) करने के काम: बार-बार एक ही चीज़ याद करना, बिना मतलब की सफ़ाई करना, लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करना।
(घ) खेल: ऐसे खेल जिनमें बहुत ज़्यादा नियम हों और मज़ा न आए।
यहाँ "भारी साड़ी" से मतलब है – साड़ी पर बेल-बूटों की कढ़ाई थी। यानी वह साड़ी बहुत महँगी, सजी हुई और खास मौके पर पहनने वाली थी, साधारण साड़ी नहीं थी।
भारी साड़ी: यहाँ 'भारी' का मतलब है 'महँगी और ज़्यादा कढ़ाई वाली'।
भारी अटैची: यहाँ 'भारी' का मतलब है 'वजन में ज़्यादा'।
भारी काम: यहाँ 'भारी' का मतलब है 'मुश्किल या ज़िम्मेदारी भरा'।
भारी बारिश: यहाँ 'भारी' का मतलब है 'तेज़ या ज़ोरदार'।
1. हल्का बुखार – थोड़ा-सा बुखार।
2. हल्का रंग – गहरे रंग का उल्टा, जैसे हल्का पीला।
3. हल्का खाना – आसानी से पचने वाला खाना।
4. हल्का बैग – वजन में कम।
5. हल्का मज़ाक – छोटा-सा मज़ाक।
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